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?सा भी क?या डरना

November 11th, 2006 | 3 टिप्पणियाँ | श्रेणी में

पहले यह प? लिजीये यह यहा? लिखा गया है.

वे संजयजी को नाराज नहीं करना चाहते, इसलि? ख?लकर प?रतिक?रिया जाहिर करने से बचते रहे।

अब बताईये, हमारा ?सा रोब है यह हमें पता ही नहीं था. इसे प?रिंट कर श?रीमतिजी को दिखाने वाले हैं. क?छ तो अपनी इज?जत बढेगी. अब क?या कहे अब तक उनकी नजरों में हम क?या थे. शादीस?दा हो तो आपको भी पता होगा ?क पत?नी अपने पति को किसी काम का नहीं सम?ती.
अब उन मित?रों से कहना चाहता हू? जो ख?ल कर कह नहीं पा?, मित?रों मेरे चिट?ठे पर मेरा ई-पता है, आप म??े कभी भी किसी भी विषय पर मेल कर सकते है. कम से कम ?सी बातो पर मैं नाराज बिलक?ल नहीं होता. म??े अच?छा लगता है जब कोई ख?ल कर भले ही मेरी सोच के विरूद?ध हो सीधे-सीधे बात करे.
अपने कोई कोम?य?निस?ट या तानाशाह तो हैं नहीं जो विचारों को कैद करने में विश?वास रखते हैं, हमें तो लोकतंत?र में अथाह आस?था है. विचारों का सम?मान करना आता है हमें. अब अगर भय इस बात का है की नाराज हो कर लिखना छोड़ देंगे या टिप?पणीया? करना छोड देंगे तो भूल जाइये. और अगर यह भय हो की मध?यान?हचर?चा में उल?लेख करना छोड़ देंगे तो इतना सम? लें हम इतने संकीर?ण विचारों वाले भी नहीं है.

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3 प्रतिक्रियाएं to “?सा भी क?या डरना”

  1. Amit Says:

    सही कहा भईये, या तो सीना ठोक के कहो या फ़िर च?प रहो। जो लोग सामने बोलने का जिगरा नहीं रखते, उनको पीठ पीछे भी ख?स?र प?स?र नहीं करनी चाहि?। :)

  2. समीर लाल Says:

    संजय भाई

    हमें भी यह विद?या सिखाओ कि कैसे डरें लोग, सबके सामने बोलने में. पीठ पीछे कोई क?छ भी कहे, उससे क?या!! ;)

Trackbacks

  1. भ?रमित है भ?रम ….. « world from my eyes - द?निया मेरी नज़र से!!  

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