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सर?वश?रेष?ठ प?रविष?टी प?रतियोगिता

January 11th, 2007 | 16 टिप्पणियाँ | श्रेणी में

उदीयमान चिट?ठाकार 2006? के आयोजन को सफल बनाने के लि? आप सभी का तरकश मण?डल आभार व?यक?त करता है.

हिन?दी चिट?ठाकारीता को प?रोत?साहन देने के लि? इस च?नाव का आयोजन किया गया था, और हमारा यह प?रयास आगे भी जारी रहेगा। इसी कड़ी में अब तरकश लेकर आ रहा है, “सर?वश?रेष?ठ प?रविष?टी? प?रतियोगिता।

इस प?रतियोगिता में हर दो महिने बाद उन दो महिनों के दौरान लिखी गई प?रविष?टीयों में से सर?वश?रेष?ठ प?रविष?टी का चयन किया जा?गा तथा उस प?रविष?टी के लेखक को भेंट स?वरूप प?स?तक दी जा?गी।

इसके नियम इस प?रकार से होंगे:

  • सभी तरह की प?रविष?टीयों (काव?य, कथा, सामान?य, व?यंग?य इत?यादि) में से तरकश मंडल द?वारा श?रेष?ठ प?रविष?टियों का संकलन किया जा?गा।
  • हर दो महिने बाद उन संकलित ह?ई प?रविष?टीयों में से सर?वश?रेष?ठ प?रविष?टी का चयन तरकश का सम?पादक मण?डल ?वं ?क तटस?थ जज के द?वारा किया जा?गा।
  • पहली प?रतियोगिता में वर?तमान माह यानि जनवरी और फरवरी के दौरान लिखी जाने वाली प?रविष?ठियों को ध?यान में लिया जा?गा।
  • ?क बार प?रस?कृत हो च?के चिट?ठाकार को द?बारा नहीं च?ना जा?गा (वर?षांत तक), ताकि सबको यथोचित मौका मिल सके।
  • विदेश में निवास कर रहे चिट?ठाकार यदि जीतते हैं तो उनका प?रस?कार उनके भारतीय पते पर भेजा जा?गा।
  • श?रेष?ठ प?रविष?टीयों की कड़ीया? तरकश की वेबसाइट पर “श?रेष?ठ प?रविष?टी? नामक विभाग में रखी जा?गी।
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16 प्रतिक्रियाएं to “सर?वश?रेष?ठ प?रविष?टी प?रतियोगिता”

  1. PRAMENDRA PRATAP SINGH Says:

    बह?त स?न??दर, बधाई, ?क श?रेणी और हो सकती है- फोटो ब??लॉंग

  2. Tarun Says:

    aati sundar, bahut achha kaam kar rahi hai tarkash ki team. taarif karne me der nahi karni chahiye isliye roman me hi likh de reha hoon. isse jaroor se achhe lekh parne ko milenge…..tarkas ke teer jyada damdaar, bloggers ko karte rahen yunhin malammal.

  3. Tarun Says:

    मेरे ख?याल से सही शब?द अंतर?गत होता है अंतरगत नही

  4. समीर लाल Says:

    स?नहरे विचार ?वं प?रयास के लिये साध?वाद.

  5. सृजन शिल?पी Says:

    वाह भाई, चिट?ठाकारों को प?रस?कृत करने का यह अभियान देखकर वाकई ख?शी हो रही है।

  6. राकेश खंडेलवाल Says:

    भीड़ ब? रही स?पर?धाओं की , ?क घोषणा कल देखी थी
    ?क आज है और ?क फिर लगता कल से चालू होगी
    कौन करे निर?धारण दूजे का जो न अपने को जाना
    क?या लगता है होगा कोई कौन कहां किसका सहयोगी ?

  7. उन?म?क?त Says:

    इससे उत?साह बढ़ेगा।

  8. अन?राग श?रीवास?तव Says:

    आपका प?रयास प?रशंसनीय है, इससे चिठ?ठाकारों का उत?साह ब?ेगा. शैलेश भारतवासी जी भी कवियों को प?रस?कृत करने की घोषणा कर च?के हैं.

    मैं स??ाव देना चाहूंगा कि आप और शैलेश जी आपस में मिल कर ?क संय?क?त प?रस?कार के विषय में सोचिये. जैसे कि, शैलेश जी कवियों को सम?मानित करने का प?रस?ताव रख ही च?के हैं तो इसे देखते ह?ये आप ‘तरकश’ में प?रस?कारों की श?रेणी से चाहें तो ‘काव?य’ की श?रेणी हटा दीजिये – उस श?रेणी के प?रस?कार का दारोमदार शैलेश जी के सक?षम हाथों में सौंप दीजिये.

    यह स??ाव महज़ इसलिये दे रहा हूं क?योंकि बह?त अधिक प?रस?कारों के आ जाने से, कदाचित प?रस?कारों की महत?ता में कमी आ जायेगी.

    मैं अपनी सोच में गलत भी हो सकता हू?. इसलिये ग?रूमंत?र का पालन करते ह?ये
    1. कृपया अन?यथा ना लीजियेगा
    2. :) :) :)
    3. अरे! मैं तो मजाक कर रहा था.

  9. अन?राग श?रीवास?तव Says:

    :)

    लीजिये हम फिर आ गये.

    ऊपर करी गयी टिप?पणी में मैं ने जो कहा है, क?यों ना इस विषय पर ‘तरकश’ पर ?क ‘पोल’ रखा जाये. इससे यह भी पता चलेगा कि अन?य चिठ?ठाकार इस विषय में किस प?रकार से सोचते हैं.

  10. आशीष Says:

    मै अन?राग से सहमत हूं !

  11. संजय बेंगाणी Says:

    प?रमेन?द?रजी,
    आपका स??ाव अच?छा है, इस पर विचार किया जा रहा है. स??ाव के लि? धन?यवाद.

    तरूणजी,
    प?रशंसा के लि? आभार. अंतर?गत सही है. शब?द को स?धारा जा रहा है.

    लालाजी,
    आपको प?रयास पसन?द आया, इस बात की ख?शी है. आशिर?वाद बना? रखे.

    सृजन शिल?पीजी,
    आपको ख?शी ह?ई जान कर हमे भी प?रसन?नता ह?ई.

    राकेशजी
    कविता में जवाब नहीं दे पाऊंगा. आप सबका सहयोग बना रहेगा तो हम नई नई मंजिले प?राप?त करते रहेंगे.

    अन?रागजी,
    अन?यथा लेने का सवाल ही नहीं उठता. हम तो सहयोग लेकर चलने वाले है. आपके स??ाव पर विचार हो रहा है.

  12. Amit Says:

    वाह जी वाह, ?क के बाद ?क तीर छोड़े जा रिये हो, के बात से?? ;) लगता है कि अब इस प?रतियोगिता को जीतने की होड़ में ?क से ब?कर ?क चीज़ें प?ने को मिलेंगी, हम का भी अपन लेबल ब?ाई का है!! ;) :D

  13. शैलेश भारतवासी Says:

    तरकश की टीम को ?क नेक कार?य श?रू करने का धन?यवाद।

    अन?राग जी के विचार से मैं सहमत हू?। यदि ‘तरकश’ की टीम चाहे तो कविता के स?थान पर किसी अन?य श?रेणी की प?रविष?टियों को सम?मिलित कर सकती है।

    स??ाव-

    क?छ भी प?रकाशित करने से पूर?व, व?याकरण और वर?तनी के श?रेष?ठ ज?ञान का प?रयोग करें।

  14. शशि सिंह Says:

    संजय भाई, बह?त अच?छे! मेरी श?भकामना आपके साथ है.

  15. श?रीश शर?मा 'ई-पंडित' Says:

    बह?त अच?छा विचार है, लेकिन आगे से हर प?रतियोगिता में श?रेणिया? हों तो अच?छा है वरना ?सा न हो कि सभी जगह कवि और व?यंग?यकार ही मोर?चा मार ले जा??।

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