सर?वश?रेष?ठ प?रविष?टी प?रतियोगिता
“उदीयमान चिट?ठाकार 2006? के आयोजन को सफल बनाने के लि? आप सभी का तरकश मण?डल आभार व?यक?त करता है.
हिन?दी चिट?ठाकारीता को प?रोत?साहन देने के लि? इस च?नाव का आयोजन किया गया था, और हमारा यह प?रयास आगे भी जारी रहेगा। इसी कड़ी में अब तरकश लेकर आ रहा है, “सर?वश?रेष?ठ प?रविष?टी? प?रतियोगिता।
इस प?रतियोगिता में हर दो महिने बाद उन दो महिनों के दौरान लिखी गई प?रविष?टीयों में से सर?वश?रेष?ठ प?रविष?टी का चयन किया जा?गा तथा उस प?रविष?टी के लेखक को भेंट स?वरूप प?स?तक दी जा?गी।
इसके नियम इस प?रकार से होंगे:
- सभी तरह की प?रविष?टीयों (काव?य, कथा, सामान?य, व?यंग?य इत?यादि) में से तरकश मंडल द?वारा श?रेष?ठ प?रविष?टियों का संकलन किया जा?गा।
- हर दो महिने बाद उन संकलित ह?ई प?रविष?टीयों में से सर?वश?रेष?ठ प?रविष?टी का चयन तरकश का सम?पादक मण?डल ?वं ?क तटस?थ जज के द?वारा किया जा?गा।
- पहली प?रतियोगिता में वर?तमान माह यानि जनवरी और फरवरी के दौरान लिखी जाने वाली प?रविष?ठियों को ध?यान में लिया जा?गा।
- ?क बार प?रस?कृत हो च?के चिट?ठाकार को द?बारा नहीं च?ना जा?गा (वर?षांत तक), ताकि सबको यथोचित मौका मिल सके।
- विदेश में निवास कर रहे चिट?ठाकार यदि जीतते हैं तो उनका प?रस?कार उनके भारतीय पते पर भेजा जा?गा।
- श?रेष?ठ प?रविष?टीयों की कड़ीया? तरकश की वेबसाइट पर “श?रेष?ठ प?रविष?टी? नामक विभाग में रखी जा?गी।
टिप्पणी करें
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January 11th, 2007 at 9:19 am
बह?त स?न??दर, बधाई, ?क श?रेणी और हो सकती है- फोटो ब??लॉंग
January 11th, 2007 at 10:00 am
aati sundar, bahut achha kaam kar rahi hai tarkash ki team. taarif karne me der nahi karni chahiye isliye roman me hi likh de reha hoon. isse jaroor se achhe lekh parne ko milenge…..tarkas ke teer jyada damdaar, bloggers ko karte rahen yunhin malammal.
January 11th, 2007 at 10:04 am
मेरे ख?याल से सही शब?द अंतर?गत होता है अंतरगत नही
January 11th, 2007 at 11:16 am
स?नहरे विचार ?वं प?रयास के लिये साध?वाद.
January 11th, 2007 at 11:21 am
वाह भाई, चिट?ठाकारों को प?रस?कृत करने का यह अभियान देखकर वाकई ख?शी हो रही है।
January 11th, 2007 at 3:12 pm
भीड़ ब? रही स?पर?धाओं की , ?क घोषणा कल देखी थी
?क आज है और ?क फिर लगता कल से चालू होगी
कौन करे निर?धारण दूजे का जो न अपने को जाना
क?या लगता है होगा कोई कौन कहां किसका सहयोगी ?
January 11th, 2007 at 5:58 pm
इससे उत?साह बढ़ेगा।
January 11th, 2007 at 8:40 pm
आपका प?रयास प?रशंसनीय है, इससे चिठ?ठाकारों का उत?साह ब?ेगा. शैलेश भारतवासी जी भी कवियों को प?रस?कृत करने की घोषणा कर च?के हैं.
मैं स??ाव देना चाहूंगा कि आप और शैलेश जी आपस में मिल कर ?क संय?क?त प?रस?कार के विषय में सोचिये. जैसे कि, शैलेश जी कवियों को सम?मानित करने का प?रस?ताव रख ही च?के हैं तो इसे देखते ह?ये आप ‘तरकश’ में प?रस?कारों की श?रेणी से चाहें तो ‘काव?य’ की श?रेणी हटा दीजिये – उस श?रेणी के प?रस?कार का दारोमदार शैलेश जी के सक?षम हाथों में सौंप दीजिये.
यह स??ाव महज़ इसलिये दे रहा हूं क?योंकि बह?त अधिक प?रस?कारों के आ जाने से, कदाचित प?रस?कारों की महत?ता में कमी आ जायेगी.
मैं अपनी सोच में गलत भी हो सकता हू?. इसलिये ग?रूमंत?र का पालन करते ह?ये

1. कृपया अन?यथा ना लीजियेगा
2.
3. अरे! मैं तो मजाक कर रहा था.
January 11th, 2007 at 9:00 pm
लीजिये हम फिर आ गये.
ऊपर करी गयी टिप?पणी में मैं ने जो कहा है, क?यों ना इस विषय पर ‘तरकश’ पर ?क ‘पोल’ रखा जाये. इससे यह भी पता चलेगा कि अन?य चिठ?ठाकार इस विषय में किस प?रकार से सोचते हैं.
January 12th, 2007 at 10:14 am
मै अन?राग से सहमत हूं !
January 12th, 2007 at 10:20 am
प?रमेन?द?रजी,
आपका स??ाव अच?छा है, इस पर विचार किया जा रहा है. स??ाव के लि? धन?यवाद.
तरूणजी,
प?रशंसा के लि? आभार. अंतर?गत सही है. शब?द को स?धारा जा रहा है.
लालाजी,
आपको प?रयास पसन?द आया, इस बात की ख?शी है. आशिर?वाद बना? रखे.
सृजन शिल?पीजी,
आपको ख?शी ह?ई जान कर हमे भी प?रसन?नता ह?ई.
राकेशजी
कविता में जवाब नहीं दे पाऊंगा. आप सबका सहयोग बना रहेगा तो हम नई नई मंजिले प?राप?त करते रहेंगे.
अन?रागजी,
अन?यथा लेने का सवाल ही नहीं उठता. हम तो सहयोग लेकर चलने वाले है. आपके स??ाव पर विचार हो रहा है.
January 12th, 2007 at 1:25 pm
वाह जी वाह, ?क के बाद ?क तीर छोड़े जा रिये हो, के बात से??
लगता है कि अब इस प?रतियोगिता को जीतने की होड़ में ?क से ब?कर ?क चीज़ें प?ने को मिलेंगी, हम का भी अपन लेबल ब?ाई का है!!
January 12th, 2007 at 3:17 pm
तरकश की टीम को ?क नेक कार?य श?रू करने का धन?यवाद।
अन?राग जी के विचार से मैं सहमत हू?। यदि ‘तरकश’ की टीम चाहे तो कविता के स?थान पर किसी अन?य श?रेणी की प?रविष?टियों को सम?मिलित कर सकती है।
स??ाव-
क?छ भी प?रकाशित करने से पूर?व, व?याकरण और वर?तनी के श?रेष?ठ ज?ञान का प?रयोग करें।
January 12th, 2007 at 6:50 pm
संजय भाई, बह?त अच?छे! मेरी श?भकामना आपके साथ है.
January 12th, 2007 at 9:55 pm
बह?त अच?छा विचार है, लेकिन आगे से हर प?रतियोगिता में श?रेणिया? हों तो अच?छा है वरना ?सा न हो कि सभी जगह कवि और व?यंग?यकार ही मोर?चा मार ले जा??।