सूरज बन कर जग पर चमका
सूरज बन कर जग पर चमका भारत नाम स?भागा
जय हो जय हो
जय जय जय जय हो
आज नेताजी को याद करते समय ये पंक?तिया? याद हो आयी.
आजाद हिन?द फौज में कर?नल हबीब?र रहमान सहित कई म?स?लिम सैनिक थे, इस लि? नेताजी स?भाषचन?द?र ने सम?भावित टक?कराव को टालने के लि? वन?देमातरम के स?थान पर जन-गण-मन को अपनाया तथा क?छ समय बाद इस का हिन?दी अन?वाद सम स?ख चैन तैयार करवाया जिसे हिन?दी कौमी तराना नाम दिया गया. इस की संगीतमय ध?न कैप?टन रामसिंह ने तैयार की थी. सम?पूर?ण गीत यहा? प? सकते है. (ऑडियो लिंक पता हो तो कृपया बता?ं)
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आजाद भारत में आयोग दर आयोग बैठा कर भी सरकार नेताजी की मृत?य? के सही तथ?य सामने नहीं ला पायी, सम?भवतः लाना भी नहीं चाहती होगी. पहले म??े भी यही लगता था की विमान द?र?घटना में नेताजी की मृत?य? हो च?की है, फिर खा?मखा? क?यों विवाद खड़े किये जा रहे है. पर अब लगता है, दाल में क?छ काला जरूर है. क?या नेताजी ने बाकी का जीवन रूस की कैद में ग?जारा था, या उन?हे रूस द?वारा मार दिया गया था. साम?यवादीयों के नेताजी के लि? कैसे विचार थे इससे तो हम सब परिचित हैं ही. आजादी के बाद शायद हमारे महान नेता रूस से सम?बन?ध खराब नहीं करना चाहते थे.
शक करने के कारणों में नेताजी की अस?थियों का डी.?न.?. परीक?षण न करवाया जाना तथा आजाद हिन?द फौज के दस?तावेजों को अभी भी गोपनीय रखा जाना शामिल है.
आशा कर सकते है, सच?चाई कभी न कभी तो सामने आ?गी ही.
आजाद हिन?द फौज के निर?माता व अण?डमान द?वीप समूह पर भारत की आजाद सरकार की स?थापना करने वाले राष?ट?रनायक को श?रद?धांजलि.
जय हिन?द.













January 23rd, 2007 at 5:33 pm
आपने बह?त अच?छा म?द?दा उठाया है। यह कोई छिपा ह?आ तथ?य तो नहीं है कि नेताजी अंग?रेज़ सरकार की आ?ख की किरकिरी तो थे ही, कांग?रेसी राजनेता भी उनसे जलते थे। हाल में ताइवान सरकार ने भी कहा है कि जिस कथित हादसे में उनकी मृत?य? की बात कही जाती है, उस तरह का विमान हादसा कभी ह?आ ही नहीं था। न जाने सच क?या है और कब वह सामने आ?गा?
January 23rd, 2007 at 7:39 pm
बड़ा प?राना मगर हर वक?त नया म?द?दा आपने उठाया है.
January 23rd, 2007 at 9:39 pm
देश के महान सपूत को हार?दिक नमन और श?रद?धान?जली
जब ताईवान सरकार कह रही है कि ?सा कोई विमान हादसा ह?आ ही नहीं फिर क?यों हमारी सरकार इस बात को नहीं मानती कि नेताजी के साथ क?छ ना क?छ अनहोनी ह?ई थी।
कहीं ?सा तो नहीं कि सत?य सामने आने से क?छ नकाब उघड़ जाते।
January 24th, 2007 at 1:50 am
मैं तो केवल यह कहू?गा कि नेता जी उस समय अपनी लोकप?रियता के कारण कांग?रेस के कई ‘बड़े’ नेताओं की आ?ख की किरकिरी थे। हमारे बड़े-बूडे़ तो कहा करते हैं कि उनकी मृत?य?/ग?मश?दगी सब कांग?रेस की साजिश थी।
?क बात तय है यदि स?भाष आज जीवित होते तो देश की दिशा/दशा ही क?छ और होती। ह?तात?मा वीर स?भाष को शत-शत नमन।
जय हिन?द !
January 24th, 2007 at 8:23 am
जय हिन?द, ये ?क विवाद है जिसके पीछे जरूर कोई साजिस छ?पी होगी अब देखना ये है कि वो कब बेनकाब होती है
January 24th, 2007 at 2:25 pm
अच?छा म?द?दा उठाया आपने…नेता जी भारत के क?छ सपूतों में थे जिन?होंने
अंग?रेजों को सधा जवाब दिया था…