मरूभूमि में ब्लॉगिंग पर हरी-भरी कार्यशाला का आयोजन हुआ
पिछले दिनों बीकानेर जाना हुआ. बीकानेर मेरे जन्मस्थल के निकट का छोटा-सा मगर भुजिया-नमकीन के लिए जग-प्रसिद्ध शहर है. राजस्थान छोड़े एक लम्बा समय हो गया है. अब मैं खुद को एक गुजराती के रूप में पाता हूँ, फिर भी अपनी भूमि का अनजाना लगाव जरूर महसूस हो रहा था. भाषा-लोग-खान-पान-व्यवहार सब कुछ अपना सा लग रहा था.
काफी पहले ही जब पता चला कि सिद्धार्थ जोशी जी बीकानेर के हैं तब मैनें उनसे कहा कि मेरे साले की शादी बीकानेर होनी है अतः मेरा बीकानेर आना होगा. क्या हम मिल सकते है? मेरी आशा से अधिक उत्साह सिद्धार्थजी ने दिखाया और बीकानेर के सभी ब्लॉगरों को सूचित कर एक ब्लॉगर मिलन तय करने की जिम्मेदारी ली.
मगर बाद में जो हुआ वह एक ब्लॉगर मिलन से कहीं-कहीं अधिक था.
मैने सिद्धार्थ जोशी जी को अपने साले की शादी में शामिल होने का निमंत्रण ईमेल से ही दिया जिसे उन्होने स्वीकार कर लिया. शादी में भोज के दौरान ही हम पहली बार मिले. बेहद खुशी हो रही थी. ब्लॉग पर लगी तस्वीर व विषय के आधार पर सिद्धार्थजी की जो छवि मेरे मन में थी यानी कोई 40-45 साल का गम्भीर व पंडित टाइप व्यक्ति की वे उससे बिलकुल उलट एक “जोशीले-हंसमुख” युवा व्यक्ति निकले. (साथीगण, कृपया अपने ब्लॉग पर अपने व्यक्तित्त्व से मेल खाती तस्वीर लगाया करें). अन्दर नाच-गाना व खाना-पीना चल रहा था, इधर हम यानी मैं-पंकज व जोशीजी पान चबाते हुए सड़क पर “ब्लॉगर-मिट” कर रहे थे. वर्षों बाद पान खाया था. जोशीजी के आग्रह को टालना मुश्किल था. पिक थूकना सही नहीं लगा अतः निगलता रहा. दूसरे दिन शहर के जाने माने डूंगर-महाविद्यालय के प्रताप सभागार में ब्लॉगिंग पर कार्यशाला का आयोजन था जिसमें मैं वक्ता था, यह बात और है कि मुझे भाषण करने का अनुभव नहीं है, फिर भी कुछ सीखने का मौका तो था ही. बातचीत का मुख्य मुद्दा इसी कार्यशाला से सम्बन्धित था. अखबारों की नीतियों व सही-गलत क्रिया-कलापों पर भी चर्चा हुई.
मैंने ब्लॉगर मिलन की मनसा व्यक्त की थी. मगर जोशीजी जो कि बीकानेर में ब्लॉगिंग को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहें है उन्होने मौके का उपयोग बड़े स्तर पर करने का मन बनाया. उत्साही युवा पत्रकार है, अपने मित्र व डूंगर कॉलेज के व्याख्याता और पक्षी विज्ञानी डॉ. प्रताप कटारिया के साथ मिल कर ब्लॉगिंग पर कार्यशाला का आयोजन ही कर डाला. स्थानीय अखबारों में इस सम्बन्ध में सूचना छपी थी, इसमें मुझे वरिष्ठता से लाद दिया गया था, जो अपने अनुभव साँझा करने वाला था. साथ ही ब्लॉगिंग के वर्तमान व भविष्य पर प्रकाश डालने के साथ ही ब्लॉग बनाने से लेकर हिन्दी टंकण कैसे करें आदि पर भी बोलने वाला था. मुझ से कहा गया कि आम आदमी को ब्लॉगिंग से जोड़ने के लिए प्रेरित करना है अतः आपको इस हिसाब से बोलना है, अपनी बात रखनी है.
दुसरे दिन यानी कार्यशाला के दिन पूरे उत्साह के साथ कूर्ता धारण कर पंकज के साथ डूंगर महाविद्यालय की ओर प्रस्थान करने वाले थे कि ब्लॉगर खुशी भी साथ हो ली. पूजा यानी पंकज की श्रीमतिजी ने भी चलने की इच्छा व्यक्त की. वे जानना चाहती थी कि आखिर हम यह ब्लॉग-ब्लॉग करते क्या हैं? तो उन्हे भी साथ ले लिया.
ऑटो-रिक्शा में सवार हो हम प्रताप-सभागार पहुँचे. जहाँ हमारा स्वागत पहले से ही मौजूद
सिद्धार्थजी व कटारियाजी ने किया. अन्दर सभागार में सामने मंच था और उसके सामने इधर कूर्सियाँ लगी हुई थी. लोग अपने अपने आसान ग्रहण कर रहे थे. हमने भी मंच के पीछे लगी अपने नायक महाराणा प्रताप की तस्वीर को सम्मान व गर्व से देखा और कार्यक्रम अध्यक्ष डूंगर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पी. आर् ओझा, मुख्य अतिथि डिफेंस रिसर्च डवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के पूर्व निदेशक डॉ. एच.पी. व्यास के साथ मंच पर विराजमान हो गए.
इस अवसर पर हिन्दी ब्लॉगजगत के पुखराज चोपड़ा, शंकरलाल हर्ष, रजनीश परिहार भी उपस्थित थे.
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शेष विवरण तथा वक्ताओं के भाषण व उनसे मेरी सहमति-असहमति पर अगली पोस्ट में. साथ ही सिद्धार्थजी ने जो प्रयास किया उसकी भूरी-भूरी प्रसंशा करता हूँ, वे बधाई के पात्र है.













December 1st, 2009 at 12:42 pm
क्या बात है.. इंतजार है अगली पोस्ट का.. जोधपुर होकर आये या नहीं?
December 1st, 2009 at 1:11 pm
सिद्धार्थ जोशी जी के ब्लॉग में भी आपके मिलने के बारे में पढा था .. एक ज्योतिषी की छवि के प्रति पूर्वाग्रह से निकल पाने के लिए आपको बधाई .. आप उसके ज्ञान के प्रति पूर्वाग्रह से भी जल्द निकले .. इसके लिए शुभकामनाएं !!
December 1st, 2009 at 1:13 pm
गजब मोड़ पर ब्रेक लिया ! हमें लगा था की चेतक से प्रेरित हो – हवा से पाला लगेगा ! अब इंतज़ार करेंगे – ‘छाना-माना’ होकर |
December 1st, 2009 at 1:56 pm
यह बडी उत्साह और हर्ष की बात है कि आजकाल सभी जगह ये ब्लगार मिलन समारोह आयोजित होरहे हैं. यह आने वाले भविष्य को इंगित कर रहे हैं. शुभकामनाएं और अगली पोस्ट का इंतजार रहेगा.
रामराम.
December 1st, 2009 at 3:06 pm
ये सच में एक बहुत ही अच्छा कार्यक्रम था,पर इसकी तैयारी हेतु कम समय मिला था..फिर भी एक यादगार अनुभव रहा..
December 1st, 2009 at 4:43 pm
अगली कड़ी की प्रतीक्षा है।
December 1st, 2009 at 5:16 pm
अच्छा, कैसा भाषण दिया आपने?
दस बीस से ज्यादा लोगों को देख हमें तो लगता है कि सम्प्रेषण करना बहुत दुरुह काम है! मुझे तो यह जानने की उत्सुकता है कि आप कैसे वक्ता हैं!
December 1st, 2009 at 6:30 pm
बहुत खूब तो साले की शादी में ब्लागर मीट और कार्यशाला हो गई। अब कोई और साला वगैरह शेष हो तो इधर कोटा में लड़की तलाश करते हैं। इस बहाने हमें भी आप का सानिध्य मिल जाए।
December 1st, 2009 at 9:12 pm
ब्लाग के माध्यम से एक परिवार बनता जा रहा है जो निरंतर बढता ही जाएगा। कौन कहता है कि ब्लागरी में क्या धरा है?:)
December 2nd, 2009 at 12:25 am
बधाई हि संजय भाई,ऐसे ही फ़लता फ़ूलता रहे हमारा ब्लागर परिवार्।
December 2nd, 2009 at 5:28 pm
हमें मालूम है अगली कड़ी आ चुकी है, अब वहाँ जा रहे हैं. आपकी फोटो से बड़ी फोटो तो लैपटाप की फोटो दिख रही है.
December 14th, 2009 at 3:10 am
वाह-२, लंबे-२ तीर चला आए बीकानेर में। अब जा रहे हैं अगली कड़ी पढ़ने, पर यह बताईये कि पूजा भौजाई का ब्लॉग कब शुरु करवा रहे हैं?!