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तरकश का पूनर्स्थापन

February 20th, 2007 | 11 टिप्पणियाँ | श्रेणी में

काफी लम्बे अंतराल के बाद लिख रहा हूँ. यह माह व्यवसायिक गतिविधियों में काफी व्यस्त जाने वाला है इसका अनुमान तो था मगर तरकश का स्थानांतरण भी इसी माह करना पड़ेगा इसकी आशा नहीं थी.

घटनाएँ ऐसी बनी की तरकश का स्थानांतरण अनिवार्य हो गया. इससे पूर्व तरकश जब शूरू किया था तब तकनीकी व अन्य समस्याएं सामने आयी थी, और हमारा ज्ञान इस मामले में शून्य के बराबर था. मगर हठ था, अतः तमाम माथापच्ची के बाद भी तरकश को ओन-लाइन कर ही दिया.

ऐसी ही समस्या फिर से सामने आयी जब तरकश का स्थानांतरण अनिवार्य हो गया तथा हमारा इस बारे में तकनीकी ज्ञान न होने या सीमित होने से इसमें काफी माथापच्ची व समय लगाना पड़ा. समस्या यह भी थी की तरकश विण्डोज सर्वर पर था तथा उसे लिनक्स पर ले जाना था. वहीं संजाल को ज्यादा देर बन्द भी नहीं रखना था.

मुख्य संजाल के साथ साथ कई सारे निजी चिट्ठे भी जगह बदलने वाले थे, जिसमें से एक यह जोगलिखी भी है.

खैर अंततः सब कुछ सही-सही हो गया. खुशी की बात यह भी है की तरकश अब स्वनिर्भर हो कर अपने खुद के सर्वर पर है. बस एक चीज जो हम नहीं बचा सके वह है, हिन्दी में लिखा डेटाबेस. सारे संयुक्ताक्षर बिगड़ गए है. अब इन्हे सुधारा जा रहा है. साथ ही नई चीजे भी जोड़ी जा रही है. और कई नए सेक्शन (विभाग) शुरू होने को हैं। समय के साथ हम सीख रहे है, तथा तरकश को बेहतर बनाया जा रहा है.

तरकश का पुराना पता भी www.tarakash.com/new2  से बदल कर अब www.tarakash.com  हो गया है.

नए तरकश पर आपका फिर से स्वागत है.

***

जोगलिखी के भी सारे पुराने लेख बिगड़ गए है जिन्हें फिर से लिखना पड़ेगा.

(वर्तनी सम्बन्धी सुझावों का स्वागत है.)

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11 प्रतिक्रियाएं to “तरकश का पूनर्स्थापन”

  1. Amit Says:

    क्या आपने जो MySQL का बैकअप लिया था वह यूनिकोडित नहीं था?

  2. संजय बेंगाणी Says:

    अमित,
    बैकअप युनिकोड में ही लिया था. आप देखेंगे बाकि सब सही है, मगर संयुक्ताक्षर ही बिगड़े है.

  3. उन्मुक्त Says:

    चलिये लिनेक्स प्रयोग करना ही पड़ गया :-)

  4. समीर लाल Says:

    पुराने लेखों का तो बहुत ज्यादा काम बढ़ गया.
    नये स्थिली की मुबारकबाद. बहुत बधाई.

  5. अभिनव Says:

    इस आशा के साथ कि अपने नए परिवेश में भी हमको तरकश से अनेक अचूक तीर निकलते दिखेंगे।
    बहुत शुभकामनाएँ।

  6. नीरज दीवान Says:

    मेरी ओर से बधाई स्वीकार करें संजय भाई. साइट चलाना बच्चों के खेल नहीं है ये अहसास मुझे होने लगा है. कम से कम आप जिस तरह से तरकश पर नित नए प्रयोग कर रहे हैं उसे देखकर तो यही लगता है बावजूद इसके कि आप बंधुओं को तकनीकी दक्षता हासिल नहीं है. मैं कायल हूं इस बात का.
    मेरी शुभकामनाएं स्वीकार करें.. रहा सवाल वर्तनी संबंधी त्रुटियों का तो मुझे लगता है इस बारे में फुरसत से जल्द ही आपको विस्तार से मेल करूंगा.

  7. मैथिली Says:

    बधाई संजय जी, सर्वर के मामले में लिनक्स विन्डोज से काफ़ी बेहतर है.
    मेरे पास लिनक्स बेस्ड सर्वर पिछले चार साल से है और इसमें मुझे कोई भी कैसी भी दिक्कत नहीं आई.

    आपके बाणों की हम सब को प्रतीक्षा है
    मैथिली

  8. शशि सिंह Says:

    स्वावलंबी होने का सुख ही सबसे बड़ा सुख है. बधाई!

  9. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' Says:

    बहुत बधाई पूर्णरुप से आत्मनिर्भर होने पर।

    हिन्दी में लिखा डेटाबेस. सारे संयुक्ताक्षर बिगड़ गए है. अब इन्हे सुधारा जा रहा है.

    आशा है वर्तनी का ध्यान रखेंगे इस कार्य मे।

    नए सेक्शन शुरु करने का सुझाव अच्छा है।

  10. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' Says:

    और हाँ तरकश के कई पन्नों पर वर्तनी संबंधी सुझाव मैं आपको कैसे दे सकता हूँ, उसी पन्ने पर नीचे टिप्पणी में, ईमेल द्वारा या गूगल टॉक पर रियल टाइम में। जो तरीका सबसे सही हो वो बताएं।

    पॉडकास्ट सेक्शन में दिए सुझावों को आपने लागू किया इसीलिए उपरोक्त बात कह रहा हूँ।

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