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मेरे जवाब – 1

February 25th, 2007 | 12 टिप्पणियाँ | श्रेणी में

हमें तीन लोगो ने टेग किया है. यानी हमें कूल जमा पन्द्रह जवाब देने होंगे.

मुश्किल यह है की हमारे पास न फुरसतीयाजी वाला अन्दाज है न जितूभाई वाला. न समीरलालजी जैसे हँसा सकते है. हमारी तो लठमार शैली है.

चलिए अब जैसा भी लिख सकते है इमानदारी से लिख देते है. वैसे भी कई दिनो से कुछ नहीं लिखा.

पहले ताऊ द्वारा दागे गए सवाल निपटा लेते है. :)

क्या चिट्ठाकारी ने मेरे जीवन/व्यक्तित्व को प्रभावित किया है?

परिवर्तन कुछ इस तरह का हुआ है की पहले किसी बात पर गुस्सा आता था तो एक कोने में जाकर दीवार को ही समयोचित गाली देकर मन हल्का कर लेता था. अब चिट्ठे पर लिख कर मन हल्का कर लेता हूँ.

वैसे अपनी बात कह सकने की क्षमता में काफी सुधार हुआ है. भाषा सुधरी है.

चिट्ठाकारी से कुछ सम्मान अर्जित किया है, इसकी खुशी होती है.

मैने कितने लोगों को चिट्ठाकारी के लिए प्रेरित किया है?

अम्मा यार पूरे परिवार को तो लगा दिया.. इसके अलावा रवि, अभिजीत जैसे अहिन्दी भाषीयों को हिन्दी में लिखना सिखा दिया. मनोज के माध्यम से सुदूर-पूर्व में यह बात पहूँचा दी की कमप्युटर का मतलब केवल अंग्रेजी नहीं होता.

बाकी दूसरों द्वारा फांसे गए या भटक कर आए चिट्ठाकारो को टिप्पणीयो के भ्रमजाल में उलझाये रखता हूँ, कहीं भाग न जाए :)

आपके मनपसन्द चिट्ठाकार कौन है और क्यों?

यह पंगे व दंगे करवाने वाला सवाल है. मगर हमेशा की तरह सीधे सीधे कह देता हूँ. सुनीलदीपक, उन्हे पढ़ते समय लगता है खूद को पढ़ रहा हूँ. सुनिलजी अन्यथा न ले.

बादमें बारी आती है समीरलालजी की, मस्त हास्य लिखते है. फिर शुक्लजी. इनकी चिकौटी-काट शैली लाजवाब है. फिर मेरा पन्ना, दस्तक, हरयाणवी में श्रीश का लिखा..रचनाजीनीधी को पढ़ना अच्छा लगता है. सम्भव होता है तब तक कोई भी चिट्ठा नहीं छोड़ता. कविताएं भी नहीं :) . बेजी अच्छा लिखती है.

मुझे चिट्ठाकारी शुरु करते समय कैसा प्रोत्साहन और सहयोग मिला था?

सबसे ज्यादा तकनीकी सहयोग ताऊ का मिला तथा टिप्पणीयाँ प्रतिक पाण्डे से.

मैं किन विषयों पर लिखना पसन्द/झिझकता हूँ?

जिस विषय का सरोकार भारत से है, मुझे लिखना अच्छा लगता है. झिझकता शायद ही हूँ. थोड़ी बहुत झिझक सेक्स व मुसलमानो पर लिखने से पूर्व होती है.

आशा है, साफ-साफ व इमानदार जवाब दे पाया हूँ.  

लम्बा न हो इसलिए दुसरे भाग में सागरजी को जवाब व बादमें श्रीशजी को जवाब देता हूँ. 

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12 प्रतिक्रियाएं to “मेरे जवाब – 1”

  1. manya Says:

    बहुत ईमान्दार जवाब लगे..और रोचक भी.. कौन कहता की आप हंसा नहीं सकते.. और अन्दाज़ भी है और दिल्चस्प भी…

  2. Jitu Says:

    सही जवाब, अच्छा लगा।

    हिन्दी चिट्ठाकारों के परिवार मे आपका योगदान अमूल्य है।

  3. नितिन Says:

    तरकश के युधिष्टिर के सीधे और सरल जवाब पसंद आये

  4. उन्मुक्त Says:

    मुझे तो सबसे अच्छा जवाब यह लगा, ‘चिट्ठाकारो को टिप्पणीयो के भ्रमजाल में उलझाये रखता हूँ, कहीं भाग न जाए’

  5. समीर लाल Says:

    बहुत सच्चाई के साथ सटीक जबाब दिये जा रहे हैं, अब आगे वाले जबाब देखता हूँ. :)

  6. PRAMENDRA PRATAP SIN Says:

    आपाकी कॉपी जचने गई है, भगवान आपका भला करे और ढेर सारी टिप्‍पणी प्रदान करे। :)

    अन्‍यथा न लेने के लिये धन्‍यवाद :)

    अच्‍छे जवाब है।

  7. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' Says:

    अम्मा यार पूरे परिवार को तो लगा दिया..

    बाकी तो सही है लेकिन भाभी जी का चिट्ठा नहीं देखा आज तक।

    बाकी दूसरों द्वारा फांसे गए या भटक कर आए चिट्ठाकारो को टिप्पणीयो के भ्रमजाल में उलझाये रखता हूँ, कहीं भाग न जाए :)

    हाँ ये काम तो मैं भी करता हूँ, पुराने चिट्ठों पर टिप्पणी करुं न करुं नए चिट्ठाकारों के प्रति मेरी कोशिश होती है कि भागने न पाएं। यथासम्भव सब को पकड़ पकड़ कर ‘परिचर्चा’ पर भी ले जाता हूँ। अब तक कम से कम दस लोगों को तो ले ही जा चुका हूँ। :P

  8. अनूप शुक्ला Says:

    पास हो गये यहां भी !

  9. संजय बेंगाणी Says:

    भाई श्रीश हमारे चिट्ठा लेखन से आपकी भाभी कतई खुश नहीं है, इसलिए उन्हे लिखने को कैसे कहें? आगे आप समझदार है.. :)

    परिचर्चा पर ले जाने का काम आप बखुबी कर रहें है, इसलिए मैने इस काम में हाथ नहीं डाला है, आपसी ‘कम्पीडिसन’ नहीं होनी चाहिए. :)

  10. BRIEJSH SHARMA Says:

    AIK BA SHARAT LAGI HARYANA A HOSTEL KE CHHORYAN MAI, AK ANGREJI BOLANI SA HARYANAVI BOLAN PA 5 RU. JURMANA. BATAO KE HOYA HOGA? NAHI TO KAL MAIN BATAUNGA.

  11. BRIJESH SHARMA Says:

    AIK BA SHARAT LAGI HARYANA A HOSTEL KE CHHORYAN MAI, AK ANGREJI BOLANI SA HARYANAVI BOLAN PA 5 RU. JURMANA. BATAO KE HOYA HOGA? NAHI TO KAL MAIN BATAUNGA.

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