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गुजरात एक घृणित व अछूत राज्य है, जय हो…

March 26th, 2010 | 21 टिप्पणियाँ | श्रेणी राष्ट्ररंग में

कॉंग्रेस भारत की एक राष्ट्रीय पार्टी व प्रमुख सत्तापक्ष है. मगर हाल के इसके व्यवहार को देखें तो इसका व्यवहार गांधी परिवार की टुच्ची-सी क्षेत्रीय पार्टी का सा हो गया है. कांग्रेस पर इस परिवार का भय और उसकी पसंद-नापसंद इस हद तक हावी है कि यह देश के लोकतंत्र के लिए भी खतरा बन गया है. हद दर्जे की चापलुसी व घृणा आधारित राजनीति कम से कम भारतीय लोकतंत्र के एक राष्ट्रीय दल के लिए शर्म की बात है.

बांद्रा-वर्ली सी लिंक के उद्घाटन के मौके पर फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन की उपस्थिति को लेकर जन्मे विवाद ने कॉंग्रेस की लोकतांत्रिक बौनी सोच को उजागर कर दिया है. अमिताभ से मतभेद होना या पसन्द नापसन्द होना एक बात है और सार्वजनिक समारोह पर उनके साथ अछूत-सा व्यवहार करना नैतिक रूप से भी अपराध है. सी लिंक मैडम या चौहाण के पैसे से नहीं बना है. अतः यह न तो कांग्रेस की बपौती है न गाँधी परिवार की. बांद्रा-वर्ली सी लिंक एक राष्ट्रीय संपत्ति है.

अमिताभ अगर इसलिए अछूत है कि वे गुजरात के ब्रांड ऐंबैसडर बने हैं तो यह और भी दुर्भाग्य की बात है. गुजरात भारत का ही अंग है और वहाँ कॉग्रेस प्रमुख विपक्षी दल है. देश के एक राज्य से इस तरह की घृणा अक्षम्य राष्ट्रीय अपराध है. गुजरात कोई शत्रु देश नहीं है. गुजरात से जुड़ना ही अगर अपराध है तो अमिताभ को जेल भेजा जाना चाहिए और टाटा-अम्बानी-मित्तल जैसे लोगो को भी अछूत गिना जाना चाहिए. हर उस देश से भी सम्बन्ध विच्छेद कर लेने चाहिए जो हाल में गुजरात के सहयोगी बने है.

मैडम को मुगालता हो तो समझ लेना चाहिए कि सदा के लिए न तो कॉंग्रेस सत्ता में रहेगी न मोदी. अतः लोकतंत्र के तौर-तरीकों का सम्मान करना सीख लेना चाहिए.

जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधी से घृणा और देश वासियों के हत्यारों से प्रेम केवल कॉंग्रेस में ही सम्भव है. लोकतांत्रिक मुल्यों की कद्र कॉंग्रेस में वैसे भी कब हुई है. सुभाष चन्द्र बॉस का निष्कासन हो या वल्लभ भाई के स्थान पर नेहरू का प्रधानमंत्री बनना, बहुमत की सदा अनदेखी होती रही है. भारतीयों के रोष की नसबन्दी के रूप में एक (भारतीयों के) हत्यारे द्वारा कॉंग्रेस की स्थापना हुई थी. इस पार्टी ने स्वतंत्रतापूर्व ही सत्ता सुख भोगा और भारत की आजादी के लिए लड़ने वालों को आतंकवादी माना. सत्ता के लिए ही देश को तोड़ दिया. आश्चर्य है कि आज भी सत्ता के लिए देश द्रोहियों को अभयदान और विपक्ष से घृणा का इसका चरित्र कायम है.

कभी कॉग्रेस के अध्यक्ष रहे एक व्यक्ति ने छूआ-छूत को समाप्त करने के लिए काम किया था और आज कॉग्रेस की अध्यक्षा नए प्रकार के छूआ-छूत को जन्म दे रही है.

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21 प्रतिक्रियाएं to “गुजरात एक घृणित व अछूत राज्य है, जय हो…”

  1. veeru Says:

    लगता है कि अब अमिताभ जी पर लगाया जायेगा गुजरात के ब्रांड ऐंबैसडर बनने पर :lol: :lol: :lol: :lol:

    वैसे कुछ भी कहो नरेन्द्र मोदी ने जो ५ सालो में गुजरात का कायाकल्प किया है कांग्रेस वो ६० सालो में नहीं कर पाई इसलिए धिक्कार है कांग्रेस को

  2. veeru Says:

    NSA lagaya jayega

  3. सुरेश चिपलूनकर Says:

    चाहे कोई कितने ही उच्च पद पर पहुँच जाये, चाहे कितना भी पैसा बना ले, चाहे किसी के पास कितनी भी सत्ता हो… “नीच मानसिकता” जब-तब उभरकर सामने आ ही जाती है…।

    (सुना है कि इटली के माफ़िया भी ऐसे ही घृणा की हद तक जाकर ऑपरेट करते हैं…)

  4. पा.ना. सुब्रमनियन Says:

    इसके पीछे ईर्षा भी एक बहुत बड़ा कारण है.

  5. P.C.Godiyal Says:

    कुटिलताओ से भरी है कौंग्रेस की डगर , एक तरफ कहते है कि हम धर्मनिरपेक्ष है और दूसरी तरफ लोगो को यह अहसास दिलाने के लिए कि इन्होने कितने एस सी एस टी और ओ बी सी को अपने यहाँ पदों पर आसीन किया हुआ है , इनकी हाल की एक लिस्ट में lok sabhaa अध्यक्ष मीरा कुमारी के आगे उनका सर नेम चमार लिखा है , अब इनसे कौन पूछे कि क्या अगर ये सर नेम नहीं लिखते तो काम नहीं चलता क्या ? मगर पूछेगा कौन ! टाइटलर साहब तो मुकर ही गए कि उन्होंने ऐसी कोई लिस्ट जारी की !

  6. Shiv Kumar Mishra Says:

    बड़े आश्चर्य की बात है. अमिताभ बच्चन के साथ कृपा शंकर सिंह तक नहीं बैठना चाहते. सत्ता में रहते हुए ये गुंडों, हत्यारों और माफिया के साथ बैठने के लिए तैयार हैं और अमिताभ बच्चन के साथ नहीं. ऐसा केवल कांग्रेसी और कम्यूनिष्ट ही कर सकते हैं. जब भी एनडीए की सरकार बनी, शपथ समारोह में कम्यूनिष्ट नहीं आये. लोकतंत्र में राजनीति करते हैं ये लोग. इनके लिए बेशर्मी की कोई हद नहीं है.

  7. Shiv Kumar Mishra Says:

    और हाँ, गुजरात को घृणित ट्रीट करने की बात वैसे ही है जैसे कोई सूरज पर थूकने की कोशिश कर रहा हो.

  8. Sulabh Jaiswal Says:

    “मैडम को मुगालता हो तो समझ लेना चाहिए कि सदा के लिए न तो कॉंग्रेस सत्ता में रहेगी न मोदी. अतः लोकतंत्र के तौर-तरीकों का सम्मान करना सीख लेना चाहिए.” :sad:

    इस(कांग्रेसी राज परिवार)का तो लालची विदेशियों(जो भारतीय सम्पदा को लुटने के उपक्रम करते रहते हैं) से रोटी-बेटी का सम्बन्ध है. उन्हें भला यहाँ के बहुसंख्यक का दर्द कैसे महसूस हो. नेहरु डायनेस्टी शुरू से ही विदेशी ताकतों और उनके मेहमान नवाजी का हिस्सा रहा है. अपनी माटी और गौरवशाली संस्कृति से कभी रिश्ता रक्खा ही नहीं… :twisted:

  9. Neeraj Diwan Says:

    शाहरुख़ ख़ान के तलुए चाटने वाली अशोक चव्हाण सरकार को अमिताभ से गुरेज़ इसलिए है क्योंकि नरेंद्र मोदी के साथ बैठने से अमिताभ संक्रमित हो गए हैं। वोट बैंक का ख़तरा महसूस हो रहा है चव्हाण को।

  10. ज्ञानदत्त पाण्डेय Says:

    कांग्रेस की मनोवृत्ति गलत है। बाकी अमिताभ बच्चन और उनके मम्मी-पापा बहुत पहले से कांग्रेस से समीकरण सेट कर पर्याप्त मलाई चाभ चुके हैं। लिहाजा उनके साथ बहुत राग नहीं है।

  11. डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल Says:

    चलिये, इस विवाद का एक फायदा और किसी को हुआ हो या न हुआ हो, अमिताभ को तो हो ही गया. भाजपा खुले आम अमिताभ का समर्थन करने लगी. यह भूलकर कि कभी वे कॉंग्रेस के नज़दीक थे.

  12. अतुल शर्मा Says:

    कई लोगों की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। गुजरात का नाम आते ही सन्निपात हो जाता है।

  13. Dr.Manoj Mishra Says:

    सही कह रहे हैं,सहमत.

  14. ghughutibasuti Says:

    गुजरात से कहाँ कहाँ बचोगे? देश की कोई कम्पनी है जिसमें गुजराती पैसा न लगा हो? हर रुपए के नोट पर एक गुजराती विराजमान है। तो क्या रुपए भी स्वीकारना बंद कर दोगे? बढ़िया है। अब रिश्वत भी डॉलर में होगी?
    घुघूती बासूती

  15. JP Says:

    Good and touchy article Sanjayji. We share same pain with you.

  16. nishcahar Says:

    कांग्रेस पार्टी को यह मुगालता है कि वह आजादी से पूर्व की कांग्रेस की धरोहर है. गाहे-बगाहे वह इसका भोंपू सभाओं, चैनलों, अख़बारों में बजाते रहते हैं. वास्तविकता यह है कि १८८७ में कांग्रेस की स्थापना से लेकर १९२२ में गांधीजी के इसका अध्यक्ष बनने तक कांग्रेस की स्थिति भारतीय राजनीति में देशसेवा का शगल रखने वाले और अंग्रेजों के सम्मुख दीन याचक के रूप में खड़े होने वाले कुछ अभिजात्य वकीलों के समूह से अधिक नहीं थी. गांधीजी ने ही कांग्रेस को आन्दोलन के रूप में खड़ा किया परन्तु १९३३ में गांधीजी ने कांग्रेस छोड़ दी थी.

    देश की आजादी के बाद गांधीजी ने कांग्रेस को तुरंत भंग करने की इच्छा जताई थी और इसे अपनी अंतिम इच्छा कहा था. उनके निजी सचिव प्यारेलाल जी ने इसे गांधीजी की वसीयत के रूप में दर्ज किया है.

    वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पहली उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहे श्री महावीर त्यागी ने एक संस्मरण में लिखा कि गांधीजी ने १९३५ में प्रांतीय सरकारों में कांग्रेस को सत्ता प्राप्त होने के बाद कांग्रेसी मंत्रियों और नेताओं के रंग-ढंग देखकर कहा था कि एक दिन ऐसा आएगा जब जनता खद्दर पहनने वालों से नफ़रत करेगी और उनके पीछे जूते लेकर दौड़ेगी.

    देश की जनता और स्वयं कांग्रेसियों को जान लेना चाहिए कि वर्तमान कांग्रेस किसी भी तरह आजादी से पूर्व वाली कांग्रेस नहीं है. यह कांग्रेस -आई (इंदिरा) है. यह राजवंश के रूप में संचालित होने वाली पार्टी है जिसके नेता और कार्यकर्त्ता नीचता की हद तक पहुँच चुकी चाटुकारिता और ओछी प्रतिद्वंदिता से पीड़ित है और देशहित के बजाये राजवंश की मालकिन और बबुआ की पसंद और नापसंद को प्राथमिकता देते हैं.

    अब यह तय करने का समय आ गया है कि कैसे जल्द से जल्द देश को गुलामी की ओर धकेलते इस राजवंश से देश की जनता छुटकारा पायेगी और इस कोढ़ को सदा के लिए समाप्त कर देगी.

  17. Sulabh Jaiswal Says:

    Sahi kaha Nisachar Ji ne,

    “..देश की जनता और स्वयं कांग्रेसियों को जान लेना चाहिए कि वर्तमान कांग्रेस किसी भी तरह आजादी से पूर्व वाली कांग्रेस नहीं है. यह कांग्रेस -आई (इंदिरा) है. यह राजवंश के रूप में संचालित होने वाली पार्टी है जिसके नेता और कार्यकर्त्ता नीचता की हद तक पहुँच चुकी चाटुकारिता और ओछी प्रतिद्वंदिता से पीड़ित है और देशहित के बजाये राजवंश की मालकिन और बबुआ की पसंद और नापसंद को प्राथमिकता देते हैं.

    अब यह तय करने का समय आ गया है कि कैसे जल्द से जल्द देश को गुलामी की ओर धकेलते इस राजवंश से देश की जनता छुटकारा पायेगी और इस कोढ़ को सदा के लिए समाप्त कर देगी.”
    लम्हों ने खता की और सदियों ने सजा पाई

    http://myblogistan.wordpress.com/2010/03/27/small-mistake-big-punishment/

  18. Ravi Rajbhar Says:

    bahut achchha laga gujrat ka hall-chal jankar sath hi cangres ka..
    mai dil aur atma dono se modi-aur-amitabh ji ka prashansak aur samarthak hun…so agar hwayen bhi unke khilf kuchh bole to dukh hoga insan (netao) ki bat hi chhod dijiye.

    JAI HIND.

  19. दीपेश Says:

    थोडा और इंतज़ार कीजिए, तिरंगे का केसरिया रंग भी घृणित हो जायेगा |

  20. शिवांश Says:

    कम शब्दों में लिखने वाले संजयजी ने आज कुछ ज्यादा शब्दों मे लिखा ।

    कॉंग्रेस सिर्फ भाजपा( नरेन्द मोदी )की वजह से गुजरात( और गुजरात से जुडे लोगो )को बदनाम करने का कोई भी मौका छोड़ते नही है ।

    कोमी-दंगों की बात कॉंग्रेस ने कई बार उछाली लेकिन कभी यह नही कहेंगे वो लोग की ये दंगे हुए क्यो थे ।

  21. pandey deep Says:

    abhi tak apki tippaniyan hi padhta aya hun aaj pahali bar apke blog ke darshan huye. bahut shandar likhte hain aap. apaka kartoon bhi dekha. bhagwan ne apko lekhan va chitran ki adbhut pratibha se nawaja hai. aap bahut hi saubhagyashali hai.

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