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अब जानकारी कौन देगा?

March 17th, 2007 | 14 टिप्पणियाँ | श्रेणी में

आज दो-तीन जगहो पर इस खबर के बारे में लिखा गया है. पूरी खबर आप पढ़ सके इसलिए बड़े आकार में यहाँ रख रहा हूँ. यह हिन्दुस्तान से साभार है.

हिन्दुस्तान से साभार

सबसे अच्छी बात यह है की वे अगले लेखो के लिए जानकारी माँग रहे है, तो यह जिम्मेदारी कौन उठायेगा? :)
क्योंकि अभी जो जानकारी दी गई है उसका सुखद पहलू यह है की इसमें नये चिट्ठाकारों के साथ रविजी व सुनील दीपकजी का भी जिक्र हुआ है. इसके अलावा हिन्दी ब्लोगिंग की प्रमुख उपलब्धियाँ ही गायब है. न सर्वज्ञ है, न नारद और न ही अक्षरग्राम. जिन्होने हिन्दी ब्लोगिंग को स्थापित कर बढ़ावा दिया ऐसे नाम तो दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे.

सही-सही जानकारी देने की जिम्मेदारी उन लोगो की बनती है, जिनकी नजर हिन्दी चिट्ठाकारीता पर उसके शुरूआती दौर से ही रही है.

साथ ही मैं उन साथियों का आभार व्यक्त करता हूँ जिनके प्रयासो से हिन्दी-चिट्ठाकारी को प्रिंट-मीडिया में स्थान मिला.

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14 प्रतिक्रियाएं to “अब जानकारी कौन देगा?”

  1. yogesh samdarshi Says:

    अब और जगह भी इस दुनिया की चर्चा होनी चाहिये. मैं अपने स्तर पर प्रयास कर रहा हूं.

  2. Amitabh Tripathi Says:

    Sanjaiji janker bhi anjan kyon ban rahe hain. Jis din aapko Mohaal ke sath jodne ka prays hua tha usi din Narad mein tutan aarambh ho gayee thi. Jinhone aapko mihaall se jodkar “dimag ki gandh yaha na failane ki salah” di thi tabhi aaise logon ki bazar mein kimat lag gayee thi. Print aur electronic media ke pralobhan mein ye log multi national company ke hathon bik gaye hain. Yadi ab bhi aap logon ko kucch dubidha hai to Hindi blogging ko bhagean hi bachyega.

  3. शैलेश भारतवासी Says:

    संजय भाई,

    अब तो नीलेश जी ने हर सप्ताह यहाँ की हलचल देने का वादा कर ही दिया है। पहली बार कुछ खास कवर नहीं हुआ है। आप उन्हें थोड़ा विस्तार से समझाईये और अगर उनका सम्पर्क सूत्र आपके पास हो तो हमें भी दे दीजिए।

  4. अनामदास Says:

    नारद चलाने वाले साथियों मायूस न होना. ऐसा अक्सर होता है लेकिन ब्लॉगर आपके योगदान को कभी नहीं भूलेंगे. बिना रिसर्च किए, बिना पता किए,हड़बड़ी में ऐसा कचरा ही लिखा जा सकता है. मैं तो ब्लॉग पढ़ने के लिए नारद पर ही आता हूँ, नारद को ही जानता हूँ, अगर मोहल्ला हो या क़स्बा, चाहे कितने ही पते की बात की जाए, अगर नारद पर नहीं लगा हो तो कोई नहीं पढ़ेगा. मैं नारद और उसे चलाने वाली टीम का क़ायल हूँ. अब ज़रा मुस्कुरा दीजिए.
    अनामदास

  5. सागर चन्द नाहर Says:

    संजयजी
    बड़े आकार में यहाँ रकने पर भी पढा नहीं जा रहा, क्या आप इस समाचार टाईप कर सकेंगे ताकि सब आसानि से पढ़ सकें?

  6. अतुल शर्मा Says:

    अमिताभजी की बातों पर गौर किया जाना चाहिए।

  7. masijeevi Says:

    संजयजी मानिए कि मामला गंभीर है। मैं तो हर मुमकिन मौके पर अविनाश से पूछ रहा हूँ कि बता दो असल मामला क्‍या है ?
    तब तक अपनी समझ यह है कि औपनिवेशीकरण की स्‍वाभाविक कोशिश है और कुछ दोस्‍त अपनी दोस्‍ती निबाह रहे हैं।
    लेकिन मैं उतना मायूस नहीं- देखिए मामला सबके लिए खुला है, इससे बेहतर लिखिए, प्रतिद्वंद्वियों के यहॉं लिखिए।
    मुझे नहीं लगता कि नारद बिकाऊ है। सिर्फ बाजार में व्‍यापारी आने से बिक जाने की घोषणा ठीक नहीं। निबटेंगें इनसे भी।

  8. Jitu Says:

    संजय भाई,
    इस समाचार को दूसरी तरह लीजिए, लोगों ने दोस्ती निभायी है, साथ ही हिन्दी ब्लॉगिंग की बात भी की है। निराश मत होइए। ऐसे बहुत सारे लोग आएंगे जो एक ब्लॉग पोस्ट लिखकर, स्वयं को हिन्दी चिट्ठाकारी का प्रणेता कहेंगे, तब क्या करेंगे? उनके कहने से क्या ऐसा हो जाएगा?

    जहाँ हिन्दी चिट्ठाकारी की निष्पक्ष चर्चा की बात है, नारद की अनदेखी करने की बात है। ये मीडिया के साथियों की बेइज्जती है और साथ ही यह भी सिद्द करता है कि इनकी समझ कितनी कम है। और कम अक्ल की बात का क्या बुरा मानना। जिन साहबान ने भी यह लेख लिखा है उसे सामूहिक रुप से चिट्ठी लिखी जाए और उसे हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे मे जानकारी दी जाए। उम्मीद है दोगनी संख्या मे मीडिया के साथी हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे मे निष्पक्ष रुप से लिखेंगे, बिना दोस्ती निभाए।

    अब कुछ सवाल हम अपने आपसे पूछें:

    क्या हम ब्लॉग मीडिया के लोगों के लिए लिखते है?
    क्या फूल की सुगंध को रोका जा सकता है?
    क्या नारद पर कोई चिट्ठा रजिस्टर किए बगैर, दुनिया उसके बारे मे जान पाएगी?
    क्या अगर मीडिया वाले नही बताएंगे तो क्या लोग चिट्ठाकारी के बारे मे नही जान सकेंगे?

    रही बात नारद के बिकने की बात, नारद के दरवाजे सबके लिए समान रुप से खुले है, ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर। किसी भी तरह का पक्षपात नही। लेकिन हाँ, नियमावली से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नही जाएगा। नारद को हमने आज तक विज्ञापन रहित रखा है, किसी भी तरह का प्रायोजित कार्यक्रम नही चलाया और ना ही कभी चलाएंगे। नारद नान-प्रोफ़िट था और रहेगा।

    इसलिए मस्त रहिए और लिखते रहिए। हमे किसी के भी प्रमाणपत्र की जरुरत नही।

  9. नीरज दीवान Says:

    किसी भी साथी को किसी और के प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं.देशभर के अख़बारों की कतरनों के बीच सात साल बैठकर इतना तो समझ ही चुका हूं कि कौन-कब किस कतार में खड़ा होकर मूत्र विसर्जन करता है. क़तारों पर न जाओ.. खेमेबाज़ी पर न जाओ.. अपनी अक़ल लगाओ. ख्वामख़्वाह ..आप इसे तवज्जो क्यों देते हैं संजय जी?
    मैं यह भी पूछता हूं कि क्या हमें तभी संतुष्टि मिलेगी जब हमारा किया-धरा अख़बार और चैनलों में आंका जाए? ये मोह क्यों? हमने फिर ब्लागिंग शुरू ही क्यों थी? हम समानांतर माध्यम लेकर चल ही इसलिए रहे हैं क्योंकि हम आज़ाद रहना चाहते हैं. ये मौक़ा मीडिया ने दिया होता तो समानांतर चलने की ज़रूरत क्या थी?

  10. समीर लाल Says:

    संजय भाई, बिंदास लिखते चलो. ये तो क्या, सब को नजर देनी ही होगी. हम सब लिखते ही ऐसा हैं. :)

  11. धुरविरोधी Says:

    अब जानकारी कौन देगा?
    संजय जी इसका भार आप खुद ही ही उठाईये.

  12. परम्जीत बाली Says:

    भाई हम तो नारद को जानते हैं।कोई क्या लिख रहा है उसकी क्या परवाह करनी ।कहते हैं ना -हाथ कंगन को आरसी क्या । एक दिन सच अपनें आप सामने आ जाएगा। हम हिन्दी प्रेमियों को तो हिन्दी का डंका पूरी दुनिया में बजाना है। अपना काम निस्वार्थ भाव से करते रहिए।

  13. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' Says:

    @अनामदास,
    अनामदास जी नारद से जुड़े लोगों को किसी श्रेय की जरुरत नहीं। नारद का नाम आने की जरुरत इसलिए थी कि सभी ब्लॉग नारद से ही जुड़े हैं।

    @सागर चन्द नाहर,
    सागर भाई फायरफॉक्स में तस्वीर को क्लिक करके जूम टूल आ जाएगा उससे जूम करके साफ दिखेगी।

    क्या अगर मीडिया वाले नही बताएंगे तो क्या लोग
    चिट्ठाकारी के बारे मे नही जान सकेंगे ?

    बहुत सही जीतू भाई! बहुत सही !

  14. rahul Says:

    नारद का ज़िक्र तो ज़रूर होना चाहिए था , क्योकि जिससे ये ब्लॉग पहचान मे आए और देखे पढ़े गये , सिर्फ़ नारद जी की ही कृपा से , ये तो ग़लत हुआ , नारद जी का नाम तो ज़रूर आना चाहिए था

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