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मुम्बई ब्लॉगर मीट – 2

June 13th, 2007 | 24 टिप्पणियाँ | श्रेणी में

शशिभाई मुझे दौड़ाते हुए से अभय तिवारीजी के घर ले गए. भारी उमस की वजह से हम पसीने से तर-बतर हुए जा रहे थे. साँस भी खींच खींच कर लेनी पड़ रही थी.

“दूसरे माले (मंजिल) है और लिफ्ट नहीं है” शशिसिंहजी ने कहा. ”अच्छा और भवन गुजराती स्टाइल का लगता है.” मैने कहा. फिर हम सीढ़ियाँ चढ़ते हुए उनके फ्लेट तक पहुँचे.

घंटी बजाई तब तक आँखो में अभय तिवारी की जो छवि थी वह थी गमछा डाले किसी ऐसे नौजवान की छवि जो लगता है अभी तस्वीर से निकलेगा और पान का बीडा दबा झट से गाने लगेगा, “खाइके पान बनारस…”.
मगर जिसने दरवाजा खोला वह कोई सफाचट शेव किये नौवजान नहीं था उसके स्थान पर रामदेवजीनुमा घनी दाड़ी वाला नौजवान था. मूँछों में लम्बी-सी मुस्कान छुपाये अभयजी ने हमारा अभिवादन किया. (पहला झटका, सफाचट दाड़ी के स्थान पर घनी दाड़ी-मूँछों में अभय तिवारी) हस्त-धुलन की प्रक्रिया हुई मगर झप्पी वप्पी से दूर रहे.
जी हाँ, मुम्बई मीट ब्लोगरीया झप्पी के बिना ही सम्पन्न हुई थी.
अभय तिवारी
हम सब कुर्सियाँ ग्रहण कर चुके तब ध्यान आया सामने एक दिवान है (खाट का छोटा स्वरूप) जिस पर एक अन्य व्यक्ति भी बैठा सिगरेट के कश पर कश खिंचे जा रहा है. मुझे लगा अभयजी के बड़े भाई होंगे. सोचता हूँ उनके एक हाथ में अगर जाम होता तो किसी “गहरे” लेखक का व्यक्तित्व पूरा हो जाता. यही एक कमी थी. बाकी स्टाइल वगेरे पूरे लेखको वाली थी.
प्रमोदसिंह
अभयजी पानी ले आये तो उनसे सामने वाले का परिचय पूछने ही वाला था की वे खुद ही किसी बात को लेकर बोले,” चाहे बेंगाणीजी हो…” मैं चौंका की बन्दा बेंगाणी को जानता है यानी है तो हिन्दी ब्लॉगर…मैं कुर्सि से उठ कर उनके पास दिवान पर जा बैठा, वहाँ पंखे की हवा बराबर आ रही थी. शशिजी ने जब उन्हे प्रमोदजी कह कर सम्बोधित किया तो मैने तुरंत उनसे पूछा,”अजदक”? वे बोले “हाँ” यह दुसरा झटका था. अब तक मेरी धारणा थी की प्रमोदजी दिल्ली-विल्ली में कहीं रहते है तथा मोहल्ला मार्का कोई चीर असंतुष्ट लेखक है. ऐसा लिखते है की हम जैसो के सर के उपर से निकल जाता है. उनका हाँ कहना था की मैं तुरंत खड़ा हो गया और उन पर बरस-सा पड़ा,”देखिये हिन्दी चिट्ठाकार स्व-घोषित मित्र होते है, इसलिए सही सही राय व्यक्त करता हूँ, यह क्या हाल बना रखा है चिट्ठे का, मैं तो हेडर देख कर ही वापस हो लेता हूँ. पढ़ता हूँ तो दो लाइन से ज्यादा पढ़ नहीं पाता. कुछ भेजे में घुसे वैसा भी लिखीये”

अभयजी मजे ले कर हँस रहे थे. शशिजी मुझे देख रहे थे. प्रमोदजी ने सिगरेट को मसल कर बुझाया और बोले,”मियाँ हमारा चिट्ठा है, जैसा चाहे लिखें, हेडर लगाएं, और समझ में तो तब आयेगा न जब ध्यान से पढ़ोगे”.
गम्भीरता से न ले यह सब नौक-झोक का हिस्सा था. हँसी टहाके होते रहे. ब्लोगरो के बारे में भी बाते हुई, आप भी जान लें अविनाश प्रमोदजी की नज़र में प्यार बच्चा है. ऐसे ब्लोगरों के बारे में भी बात हुई जो नक्सली है. और बतौर अभयजी नक्सली होने का अर्थ देशद्रोही होना नहीं है. हक के लिए हथियार उठाया जा सकता है. वे खुद भी (उनके अनुसार) नक्सली है, यह भी मेरे लिए एक झटका ही था. घड़ी के काँटे भागे जा रहे थे. मेरे पास समय बहुत कम था.
तब तक अभयजी रूह-अफ़्जा बनाकर ले आये तो उससे गला तर किया और उन्हे ढ़ेर सारी दुआएँ दी.
संजय,अभय,शशि

यूनुस भाई भी आने वाले थे मगर तब तक पहुँचे नहीं थे. मैने सोचा पता नहीं मुलाकात हो भी पाएगी या नहीं. मुझे दूसरे दिन हर हाल में अहमदाबाद पहुंचना था, अतः ट्रेन छुट न जाये इसलिए थोड़ी हड़बड़ी भी थी. मैं और शशिजी विदा ले नीचे आए तो साथ में अभयजी व प्रमोदजी भी छोड़ने के बहाने नीचे आ गए. अभी टेम्पो को तलाश ही रहे थे की एक मोटरसाइकल सवार हमारे आगे आ कर रूका. वे यूनुस खान थे. मेरी उनसे ज्यादा बाते नहीं हो पायी, अभिवादन का आदान प्रदान कर मैं वहाँ से रवाना हो गया.
प्रमोद,संजय,अभय
पीछे रह गए ब्लॉगर बन्धु मेरी टाँग खिंचाई कैसे की इसका हिसाब उन्ही से माँगा जाना चाहिए. बताओ भाई फिर क्या-क्या गप्पियाते रहे.

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24 प्रतिक्रियाएं to “मुम्बई ब्लॉगर मीट – 2”

  1. धुरविरोधी Says:

    वाह संजय, अच्छा लगा.
    इसमें तो अभय जी सुदर्शन ही लग रहे हैं, निर्मल आनन्द पर तो इनका स्वरूप डरावना ही है.
    अब पीछे रह गये बन्धुओं के हिसाब देने की बारी है.

  2. PRAMENDRA PRATAP SINGH Says:

    मिल कर अच्‍छा लगा

  3. sajeev sarathie Says:

    भाई इनमे से अज्दक कौन से हैं..उनसे कहियेगा कि अपनी मेल ज़रा चेक करें…. अगर वो मुझे जावाब देंगे तो मुझे ख़ुशी होगी … तस्वीरों के साथ नाम भी देते तो अछा रहता

  4. अफलातून Says:

    सुन्दर रपट और दाढ़ी के बावजूद और बगैर दाढ़ी के सुन्दर लोगों की सुन्दर तसवीरें देख पाए । बाकी लिखें इसकी उम्मीद लगा कर ‘जोह’ रहे हैं ।

  5. alok puranik Says:

    दिल्ली आइये, तो हमसे मिलिये। हममें और हमारी फोटू कोई फर्क न पायेंगे, दोनों में चिरकुटत्व की बराबर डिग्री है।
    और प्रमोदजी के लेखन के बारे में मेरी राय यह है कि वह हमारे समय के सबसे विलक्षण गद्यकार हैं। वैसा गद्य कोई नहीं लिख रहा है। शायद लिख भी नहीं सकता, जितने तजुरबों से वह गुजरे हैं, उतने तजुरबों से गुजर कर ही वैसा लिखा जा सकता है। सो उन्हे जितनी जल्दी आप समझ पायें, उतना ही बेहतर।
    आलोक पुराणिक

  6. Sanjeet Tripathi Says:

    शुक्रिया विस्तृत वर्णन के लिए।
    अभय जी पर दाढ़ी बढ़िया फ़ब रही है।

    प्रमोद जी अपने लिखे से ज्यादा वरिष्ठ लगते है फोटो में , उनके लेखन में एक बैचेनी है पर फोटो में वह निर्लिप्त या शांत प्रतीत होते हैं।

  7. प्रियंकर Says:

    अच्छा विवरण . पर और ज्यादा की उम्मीद थी . इतने धुरंधर ब्लॉगर जो जमा हुए थे .

  8. समीर लाल Says:

    साधुवाद, सबके दर्शन करवा दिये, सबसे मिलवा दिये और काफी हद तक ब्यौरा भी दे दिये. अब बाकि लोग भी अपनी कहें. :)

  9. राम चन्द्र मिश्र Says:

    अच्छा लगा सबसे मिलकर, धन्यवाद सञ्जय जी।

  10. Jagdish Bhatia Says:

    अच्छा लगा पढ़ कर।

  11. अनूप शुक्ल Says:

    बहुत अच्छा लगा सबके फोटो देखकर। अब अभय जी और प्रमोद जी भी लिखें ब्लागर मीट के किस्से। :)

  12. जीतू Says:

    अच्छा विवरण। यार अब तो मुम्बई मे भी इत्ते लोग हो गए है, मिलना ही पड़ेगा।

  13. अरुण Says:

    वाह दिल्ली आना दाढी बढाकर तब हम भी ढूढेगे सामने बैठे संजय को सारे हाल मे :)

  14. Amit Says:

    खूब, तो भागम-भाग मुम्बई ब्लॉगर भेंटवार्ताएँ सम्पन्न हुईं!! :) किसी ने सही कहा है, मुम्बई भागता शहर है, वहाँ तो स्लो शहरों से आने वाले भी ओलम्पिक के धावक हो जाते हैं!! ;)

  15. kakesh Says:

    दो चेहरों से तो मैं भी परिचित ही हूँ .. सोचता हूँ मैं भी लिखुंगा अपनी मुम्बई यात्रा के बारे में…

  16. प्रमोद सिंह Says:

    क्‍या, संजय, भई, आपने तो हमारा दिल तोड़ दिया! इतनी मुहब्‍बत से हमने आपको गुरुज्ञान दिया था कि अभय का गंदा और हमारा अच्‍छा फ़ोटो छापिएगा, और देखिए, आपने हमारी समझाइश का क्‍या किया!.. अभय को हीरो और हमको कैरेक्‍टर आर्टिस्‍ट बना दिया!.. फ़ोटोशॉप में बाल काले करने की मेरी सलाह पर भी आपने गौर नहीं किया और पैसा बनाने में लगे रहे.. मैं आपके इस पूरे पोस्‍ट का विरोध करता हूं.. और जल्‍दी ही एक ऐसा पोस्‍ट चढ़ाने जा रहा हूं जिसमें आप शक्ति कपूर लगेंगे और मैं जॉर्ज़ क्‍लूनी! अपनी घरवाली के आगे अपना मुंह बचाये रखने के लिए आप चाहते हैं कि मैं वह पोस्‍ट रोक दूं, तो कृपया अब भी ऊपर के फ़ोटो में मेरे बाल काले कर डालिए.. टेक्‍नीकल दिक्‍कत हो तो अभय के बाल चोरी कर लीजिए! हां, वही सही रहेगा..

  17. अभय तिवारी Says:

    वाह भई संजय जी.. आपकी स्मृति तो कमाल की है.. पौने घंटे की मुलाका़त की आप को सब बातें याद हैं.. अब मेरे ऊपर दबाव है कि मैं भी लिखूँ.. आप की पोस्ट का सहारा ले के ही लिखूँगा.. तस्वीरे तो वैसे भी अपने पास नहीं हैं..

  18. sunita(shaanoo) Says:

    बहुत अच्छा लगा आप सब को देख कर…अभय भाई तो किसी हीरो से कम नही लग रहे…दाड़ी बढ़ा कर तो कोई उपन्यासकार ही नजर आ रहे हैं और अजदक भाई लगता है किसी फ़िल्म के प्रोड्यूसर से लगते है…
    …मगर अच्छा लगा सभी से मिल कर…क्या चार ही लोगो से मिलवाया और भी डिटेल लिखीये… :)

  19. श्रीश शर्मा Says:

    कुछ दिनों पहले ही प्रमोद जी की फोटो नारद पर देखी उससे पहले मैं उन्हें कोई नौजवान पत्रकार समझता था।

    अभय भाई यहाँ तो तस्वीर में दाढ़ी के साथ जँच रहे हैं, बस अपने ही चिट्ठे पर डरावने लग रहे थे।

    और आप भी ठीक ठाक ही बंदे हो, मैं सोचता था कि लाला टाइप मोटे से करके आदमी होंगे। :)

  20. शशि सिंह Says:

    संजय भाई,

    प्रमोद भाई के साथ बहुत नाइंसाफी की आपने… कैरेक्टर आर्टिस्ट बना दिया उनको :) । प्रमोद भैया, घबराइये नहीं… मेरी स्क्रिप्ट में तो आप ही हीरो होंगे (अभय भाई अब आप नाराज़ हों मेरी फिल्म मल्टी स्टारर होगी) ।

    जीतू भाई, नेक विचार है… निकालिये कोई गुंजाइश मुम्बई आने का (मेरी कान खींचने का मौका भी मिलेगा)… बहुत मज़ा आयेगा।

  21. शशि सिंह Says:

    संसोधन:
    (अभय भाई अब आप नाराज़ ना हों मेरी फिल्म मल्टी स्टारर होगी) ।

  22. अतुल शर्मा Says:

    अच्छा हुआ आपने सभी के दर्शन करा दिए, हमने तो दिमाग में कोई और ही फोटू बना रखी थी।

  23. विजेन्द्र एस. विज Says:

    अदभुत लगा. संजय भाई..आपके द्वारा कराया गया दिव्यदर्शन…अभय जी पर इलाबादी झलक देख अच्छा लगा…

  24. कमल शर्मा Says:

    बहुत अच्‍छा वर्णन ब्‍लागर मीट का। संजय जी जरा समय निकालकर मुंबई आएं तभी आप यहां खूब लोगों यानी ब्‍लॉगर मित्रों से मिल सकेंगे। भागदौड़ तो यहां खूब है और अहमदाबाद में भी कम नहीं है। लेकिन समय खूब होगा तो गपशप भी खूब होगी और विचारों का लेनदेन भी।

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