यह फायदा है या नुकसान?
भाटीयाजी का लेख यहाँ देखें. उनके अनुसार “अब इस सर्च साईट पर crcketscorecard का नतीजा देखिये। मेरी एक ही प्रविष्टी हिंदी, कन्नड़ और गुजराती तीन भाषाओं में नजर आ रही है।“
यहाँ मैं यह कहता हूँ की तीन ही क्यों दस या पन्द्रह भाषाओं में दस-पन्द्रह लिंक आये या और ज्यादा आये. मगर जब मैं सर्च करता हूँ तब मेरा ध्येय किसी एक लिंक को विभिन्न भाषाओं में देखने का नहीं होगा. मैं चाहूँगा मुझे अधिक से अधिक कड़ीयाँ मिले न की हर पन्ने पर एक कड़ी की भिन्न लिपियों में एक ही जगह की विभिन्न कड़ीयाँ दिखे. ऐसे में तो “सर्च’ करना एक समस्या बन जाएगा.
इसी प्रकार मान लें मुझे गुजराती में कुछ खोजना है और खोज के ढ़ेर सारे परिणामों को गुजराती लिपि में देख मैं खुश भी हो जाऊँगा मगर जब परिणामो को देखने लगुंगा तो पता चलेगा वास्तव में एक कन्नड़ में है, दुसरा मलयालम में तीसरा बंगाली में है चौथा हिन्दी में. सब लिप्यांतरित है. मूल गुजराती सामग्री को खोजना भारी काम हो जाएगा.













October 8th, 2007 at 5:24 pm
अच्छा है.
October 8th, 2007 at 7:28 pm
क्षमा कीजिए सञ्जय भाई पर मैं आपसे सहमत नहीं, कई सारी भाषाओं में सर्च परिणाम होने से खोज कर्ता को जो भाषा आती होगी वह उसमें पढ़ सकता है।
मान लीजिए मुझे पञ्जाबी समझ आती है लेकिन गुरुमुखी नहीं आती तो मैं उपलब्ध सर्च परिणामों में से देवनागरी में पढ़ सकता हूँ।