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पाकिस्तानी ध्वज तले भारत में स्वतंत्रता संग्राम?!!

October 11th, 2008 | 22 टिप्पणियाँ | श्रेणी राष्ट्ररंग में

बात कश्मीर की नहीं है. बात है ऐसे प्रांत की जहाँ अब तक हिन्दू बहुलता है. बात है ऐसे प्रांत की जहाँ सुनियोजित तरीके से विदेशीयों को शरणार्थियों के रूप में बसाया गया और अब वे उसी भूमि पर पाकिस्तानी झंडे तले अपना अधिकार जता रहे है, मूल निवासियों को खदेड़ रहे है और हमारे प्रतिनिधि जिन्होने “भारतीय संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण रखूँगा” जैसी शपत ली है, देश विभाजको को पाक-साफ बता रहे है!!!

बात है असम कि, जहाँ साठ लाख बंग्लादेश आ जमे है और अब भारतीय आदिवासियों को उनके क्षेत्रों से खदेड़ रहे है. असम के मुख्यमंत्री के सामने पाकिस्तानी झण्डे लहरा रहे है, और यह सब पाकिस्तानी चैनल दिखा भी रहे है और इसे पाकिस्तानी झण्डे तले चल रहा स्वतंत्रता आंदोलन भी बता रहे है.

एक कमजोर प्रधानमंत्री, रीडहीन गृहमंत्री और बेवकुफ मुख्यमंत्री हो तो कैसी संप्रभूता, कैसी अखण्डता और कैसा स्वाभिमान. बाहरी लोग आकर हमारे ही घर से हमें ही लात मार रहे है और हम आँखे बन्द किये हुए है!!! एक पाकिस्तान तो बन गया अब और नहीं. देश विभाजको को मार भगाओ. आखिर भारत, देश के कानून, संविधान और लोकतंत्र से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है.

यह भी देखे : असम में लहराए पाकिस्तानी झंडे, लेकिन सरकार के अनुसार सब ठीक

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22 प्रतिक्रियाएं to “पाकिस्तानी ध्वज तले भारत में स्वतंत्रता संग्राम?!!”

  1. सं Says:

    धारा के मग में अनेक जो पर्वत खडे हुए हैं
    गंगा का पथ रोक इन्द्र के गज जो अडे हुए हैं
    कह दो उनसे झुके अगर तो जग मे यश पाएंगे
    अड़े रहे अगर तो ऐरावत पत्तों से बह जाऐंगे

  2. Shiv Kumar Mishra Says:

    “देश विभाजको को पाक-साफ बता रहे है!!!”

    आप ही तो कह रहे हैं कि ये लोग पाकिस्तानी झंडा लिए आन्दोलन कर रहे हैं. ऐसे में ‘पाक’ साफ़ न बताएं तो और क्या बताएं?

    भारत का अगला टुकड़ा असम से ही निकलेगा. और जल्दी ही निकलेगा. तीस साल भी नहीं लगेंगे.

  3. anil pusadkar Says:

    han ye kaduva sach hai,jo bachcha hamari vajah se paida hua vo pal-badh kar hame hi khane ko daud raha hai.aapaka chintan jayaj hailekin ho sakata hai kuchh logo ko ye sampradayik lage.aapko badhaai es babak post ki

  4. परमजीत बाली Says:

    सही बात है लेकिन इन महात्माओ को कुर्सियां देता कौन है :?: इन्हें देश की नही कुरसीयों की परवाह है। :evil: तभी तो यह हाल है इनका :twisted: :evil: :roll:

  5. सुरेश चिपलूनकर Says:

    सेकुलर रावण के दस सिर भारत भर में फ़ैल गये हैं… सबको एक-एककर काटना होगा… यदि हिन्दू अभी भी नहीं जागे तो…

  6. bhuvnesh Says:

    सोनिया माता की जय….अंतर्राष्‍ट्रीय ख्‍याति प्राप्‍त दुमहिलाऊ मन्‍नू भाई जैसे प्रधानमंत्री जिस दिन कुर्सी पर बैठे उसी दिन इस देश का बंटाधार हो लिया था…अब तो तमाशा देखे जाईये

  7. मिहिरभोज Says:

    :?:

  8. Gyan Dutt Pandey Says:

    और देश खड़ा गुबार देख रहा है! दुखद |

  9. अतुल शर्मा Says:

    क्षोभ होता है यह सब देख सुनकर। यही गुबार एक दिन बवंडर बन जाएगा।

  10. yoginder moudgil Says:

    वाह
    आपका अंदाज़
    जरा हटके लगा
    बधाई

  11. Ratansingh Says:

    दुखद |

  12. Ghost Buster Says:

    स्थिति सचमुच बहुत विकट है.

  13. जीतू Says:

    बांग्लादेशी घुसपैठिए, देश की सबसे बड़ी समस्या बनने जा रहे है। आने वाले समय मे आतंकवाद और इस समस्या का चोली दामन का साथ रहेगा। आज पूरे देश मे बांग्लादेशियों की कालोनिया फल फूल रही है, यदि सही समय पर इसको रोका नही गया तो देश को इसका खामियाजा उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए।

    यदि आज बांग्लादेशियों के खिलाफ कोई अभियान चलाया जाता है तो अल्पसंख्यक बीच मे आ जाते है। वैसे कांग्रेस सरकार को भी एक मजबूत वोटबैंक मिलता है, इसलिए इन बांग्लादेशियों को राशनकार्ड एवम अन्य सुविधाए उपलब्ध करा दी जाती है। वाह री सरकार?

  14. Anunad Singh Says:

    जागो भारत ; छद्म सेक्युलरों के मायाजाल को तोड़ दो. व्यावहारिक चिंतन करो. देश की सुरक्षा की सम्यक नीति बने. आस्तीन के साँपों का सफाया कराने की शक्ति विकसित की जाय.

  15. प्रवीण त्रिवेदी-प्राइमरी का मास्टर Says:

    :twisted: :evil: :mrgreen: :twisted: :evil: :mrgreen:

    क्या करे ?

    कई स्थानों पर बांग्लादेशी घुसपैठिए सैकड़ों की संख्या में झोपड़ी बनाकर व किराए के मकान में रह रहे हैं। आड़ में ये गैर कानूनी कार्य कर रहे हैं। प्रशासन के अधिकारी यदा-कदा बांग्लादेशियों के खिलाफ कार्रवाई करके अपनी पीठ थपथपा लेते हैं। जबकि जब तक इमानदारी के साथ एक-एक बांग्लादेशी को चिह्नित करके वापिस बांग्लादेश नहीं भेजा जाता तब तक ये लोग देशवासियों व सरकार व प्रशासन के लिए सिरदर्द बने रहेगे। देश में अन्य स्थानों पर भी हुए सीरियल बम धमाकों में भी बांग्लादेशियों की भूमिका संदिग्ध है।

  16. गोपालकृष्ण विश्वनाथ Says:

    सब कुछ उल्टा हो रहा है।
    अपने ही देश के उत्तर भारतीयों को मुम्बई छोड़ने ने लिए कहा जा रहा है।

    Article 370 के कारण हिन्दू कश्मीर में नहीं बस सकते।
    पर कश्मीरी पंडितों को वहाँ से अवश्य खदेडा जा सकता है।
    उधर बाँगला देशियों की घुसपैठ पर रोक नहीं लगा रहे हैं और राशन कार्ड भेंट करके उनका स्वागत भी हो रहा है।
    अमरनाथ बोर्ड के लिए शायद दुर्योधन से प्रेरित होकर एक सूई की नोक के बराबर जमीन भी नहीं दी जा सकती।
    लेकिन हाज के लिए सबसिडी चलता रहेगा।

    अफ़ज़ल गुरू भी अवश्य बच जाएगा।
    वाह रे ईन्डिया! जब अपने ही देश में इतने सारे शत्रु हैं तो पाकिस्तान की क्या आवश्यकता?

  17. Abhishek Says:

    दुखद है! और हम हाथ पे हाथ धरे हैं अपने सरकार की ही तरह !

  18. SHUAIB Says:

    और ये भी सच है कि हमारे पड़ोस मे पता नहीं बंगाली रहते हैं या बंग्लादेशी, कशमीरी या उन्के भेस मे पाकिस्तानी?
    हमारा देश इतना आज़ाद है कि विदेशीयों के लिए अपना दिल खोल रखा है और हम आपस मे लड़ते हैं उत्तर भारती और दक्षण भारती!
    बाहरी लोग यहां आकर अपना राशन कार्ड और पास्पोर्ट तक बनवालिए हैं और हम भारतिय हैं कि गैरों के आगे शर्मशार हैं।

  19. Bidyut Chatterjee Says:

    You are an educated man. What kind of a thing are you saying. Is a poor man terrorist? Nobody leaves his land for fun. The exteme poor leave it to earn living, to work as coolies, labourers and domestic helps.

    It’s a petty mind to describe Bangladeshis as bad. Nepalis can come without any visa or passport to India because it was a Hindu country though never a part of India. But Bangladesh was India’s part. Millions of Hindus come from there and now more Muslims are coming. They are poor and come.

    You can’t stop them. Just like we, with money, go to USA through visa and the rural Sikhs and Punjabis go to europe through ‘kabootarbazi’ without proper documents. Why are you making your blog a leaf of RSS textbook?

  20. G Vishwanath Says:

    No, poor men are not necessarily terrorists
    These days terrorists are educated and come from good families.

    Yes, no one leaves his land for fun.
    The poor from Bangla Desh are welcome here if they wish to work as coolies, labourers and domestic help. But let them come through legal channels, work, earn and return and not seek to settle here and get voting rights.

    Yes, Bangla Desh was part of India. We did not want them to separate but wanted to live together as brothers. They demanded partition and got it. Now why do want to come here? Can poor Hindus go to any Muslim country and make a living without proper papers and procedures?

    We can’t stop them? Of course we can. Provided we are united in actually wanting to. Some politicians see benefits in allowing them and that is the problem.

    We go to USA, Dubai and other countries for a living but we follow proper procedures.
    Yes, there are occasional instances of kabooterbaazi but we in India do not condone it. When they are caught and repatriated we in India do not defend them. Neither do these people try to get voting rights in the places they go to.

    It is not just the RSS that finds illegal immigrants unwelcome.
    Everyone is against it except for those who benefit from it.

    I have seen no evidence any RSS leanings in this blog.
    I am not an RSS member and also do not subscribe to all their views but I fully support the views expressed here on this subject.

  21. Bidyut Chatterjee Says:

    Vishwanath,

    Every green flag is not the flag of Pakistan. Of course, RSS never unfurls Indian national flag on its headquarters. I like Sanjay Bengani’s writings but he should be more accodmodative.

  22. Hindustani Says:

    संजय
    मेरे विचार में आप की पोस्ट में अत्यधिक भावुकता के कारण संकीर्णता का पुट आ गया है। हमें ये देखना चाहिए की किस तरह आज समस्त तमिल पार्टियां लिट्टे की मदद के लिए भारत सरकार पर दबाव बना रही हैं।
    ये कितना गंभीर है।

    क्या अरब या इरान देश के नागरिक गुजरात दंगों या बाबरी मस्जिद के मामले में कभी अपनी सरकारों पर ऐसा दबाव बनाते थे? ये ऐसा ही है की कश्मीरी मुसलमान तालिबानियों का आह्वाहन करे। आपने ये सोचा ज़रूर होगा। मेरा विनम्र निवेदन है की पोस्ट को ऐसा उन्मादी टाइटल न दीजिये। इससे ब्लॉग की प्रतिष्ठा पर असर पड़ता है। ये बात ज़रूर है की फाशी मानसिकता वाले खुश हो कर ताली बजा देंगे।

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