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पोप बेनेडिक?ट की नजर में भारत सामप?रदायीक राष?ट?र !

July 17th, 2006 | 5 टिप्पणियाँ | श्रेणी में

यह लेख हटा लिया गया हैं तथा नई जानकारीयों के साथ सम?पादीत कर प?नः रखा जा?गा.

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5 प्रतिक्रियाएं to “पोप बेनेडिक?ट की नजर में भारत सामप?रदायीक राष?ट?र !”

  1. सागर चन?द नाहर Says:

    क?छ दिनों पहले मलयालम फ़िल?मों की नायिका मीरा जॉस?मीन जो ईसाई है, ?क मन?दिर में दर?शन करने चली गयी, उस घटना का इतना विवाद ह?आ कि पूछिये मत।
    यह विवाद इस लिये ह?आ क?यों कि उस मन?दिर में किसी और धर?म के अन?यायी प?रवेश करने पर रोक लगी ह?ई है। जब ईसाइ लोग हर धर?म के लोगों को अपने चर?च में लाने के लिये तत?पर रहते हैं हर अच?छे ब?रे तरीके अपनाते हैं लोगो को इसाई बनाने के लिये।
    फ़िर हम क?यों रोना रोते रहते हैं, त?रावणकोर महाराजा ने सही कहा था हिन?द? उदार नहीं गैर जिम?मेदार है।

  2. नीरज Says:

    भैये, ये विलाप क?यूं. नाहक मीडिया को दोष देते हो. दिनभर में ?क पेपर ही ढंग से पढ़ लिया करो. ये ख़बर पढ़ो कि कैसे भारत सरकार ने ना सिर?फ़ पोप की करनी पर नाराज़गी जताई बल?कि वेटिकन के राजदूत को ब?लाकर फटकारा भी था.
    Indian gov’t upset at Holy See’s remarks on religious intolerance
    http://www.catholic.org/international/international_story.php?id=19962

  3. नीरज दीवान Says:

    भैये, ये विलाप क?यूं. नाहक मीडिया को दोष देते हो. दिनभर में ?क पेपर ही ढंग से पढ़ लिया करो. ये ख़बर पढ़ो कि कैसे भारत सरकार ने ना सिर?फ़ पोप की करनी पर नाराज़गी जताई बल?कि वेटिकन के राजदूत को ब?लाकर फटकारा भी था. इसमें नवतेज सरना, विदेश राज?य मंत?री आनंद शर?मा के बयान भी हैं.
    Indian gov’t upset at Holy See’s remarks on religious intolerance
    http://www.catholic.org/international/international_story.php?id=19962

  4. संजय बेंगानी Says:

    नीरजजी आप मिडीया के सजग प?रहरी हैं. भ?ल के लि? म??े खेद हैं. यह प?रविष?टी ‘सफारी’ पत?रिका के सम?पादकिय पर आधारित हैं.

  5. नीरज दीवान Says:

    भाई, पांचजन?य ने जो कवर स?टोरी छापी थी. लाहौर के कृष?ण मंदिर पर वह भी कोरी गप?प थी. अलबत?ता ये तो मैं मानता हूं कि पाकिस?तान में सहिष?ण?ता तार तार होती है. फिर भी यहां की मीडिया ने हल?ला मचा दिया था कि कृष?ण मंदिर टूट गया. सच यह है कि वो मंदिर टूटा ही नहीं था. ?से में तो हमारी ही किरकिरी होती है ना. अत?व निवेदन है कि हम सभी को ज़िम?मेदारी से लिखना चाहि? वरना ?क ?ूठ की क़ीमत सौ सच पर भारी पड़ती है. आगे से हम पर कोई कैसे विश?वास करेगा. अब जल?दी से ये पोष?ट हटा दीजि? और कमेंट भी.

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