नरेन्द्र मोदी के दस अवगुण
दो-तीन दिन गहन विचार किया कि आखिर क्या वजह है कि तीन उद्योगपतियों के (मोदी को प्रधानमंत्री बनने लायक व्यक्ति ) कहने मात्र से ही जबरदस्त विरोध दर्ज हो रहा है, यहाँ तक कि उन उद्योगपतियों द्वारा संचालित कम्पनियों के फोन एक दिन के बन्द रखने का अभियान भी चलाया जा रहा है. ऐसे में प्रखर बुद्धिजीवियों को जिन सम्भावित नामों पर आपत्ति नहीं है, उनके साथ तुलनात्मक अध्ययन करने पर कुछ ऐसे दस अवगुण सामने आए जो मोदी में है.
नरेन्द्र मोदी के वे खास अवगुण जिनकी वजह से वे प्रधानमंत्री पद के लिए सर्वथा अनुपयुक्त है. और जिन्हे लायक माना जा रहा है, उनमें यह मौजूद है….
1.नेता ऐसा हो जो भाई समान हो:
मोदी अपने जन्म दिन पर चोथ नहीं उगाहते. यह भी कोई बात हुई, जब नेता खुद जनता को नौच नौच नहीं खाएगा, निचले स्तर के लोगो को मौका कैसे मिलेगा? हमे ऐसा नेता चाहिए जो खुद भी खाए और दुसरों को भी खाने दे. वहीं मोदी कहते है, न खाऊँगा, न खाने दुंगा. ऐसा “रूखा” आदमी प्रधानमंत्री पद के लिए सर्वथा अनुपयुक्त है. चुंकि हमें खिलाने-पिलाने वाला “लूखा” नेता चाहिए, इसलिए मोदी नहीं चाहिए.
2.नेता ऐसा हो जो जाति का कल्याण करे:
नेता ऐसा हो जो राज्य या देश का न होकर किसी जाति विशेष का हो. अपनी जाति का भला करे, आरक्षण दे, नोकरियाँ दे. जाति विशेष का मसीहा बन कर वोट माँगे. मोदी कभी जात-पात पर वोट नहीं माँगते, ऐसे जातिहंता को सत्ता क्यों दें? चुंकि हमें तो जातिवादी नेता चाहिए, इसलिए मोदी नहीं चाहिए.
3.नेता ऐसा हो जो पानी-बिजली-सड़क देने का वादा करे और करता रहे:
हम चाहते है, सड़क-पानी-बिजली का मुद्दा सदा चुनावी मूद्दा बना रहे. और सौ साल तक इस पर वोट देते रहें. मोदी के राज्य में ये तीनों चीजे ही चुनावी मुद्दा नहीं होती. क्योंकि वहाँ तीनों की ही हालत बेहतर है. अब ऐसा नेता ही किस कामका जो रटे रटाए मूद्दे ही खत्म कर दें. चूंकि हमें वादे करने वाला नेता चाहिए, इसलिए मोदी नहीं चाहिए.
4.नेता ऐसा हो जो जवाँ मर्द हो:
हमें ऐसा मर्द नेता चाहिए जो बेशर्मी से नौ नौ बच्चे पैदा कर देश के परिवार नियोजन अभियान की हवा निकाल सके. मोदी क्या खाक बच्चे पैदा करेंगे. ऐसा घर-बार छोड़ देने वाला नेता हमें नहीं चाहिए. चूंकि हमें मीडिया की आँखों का तारा, चारा-चोर चाहिए, इसलिए मोदी नहीं चाहिए.
5.नेता ऐसा हो जो अपने परिवार से प्रेम करे:
हमें ऐसा नेता चाहिए जिसके मन में परिवार के प्रति भारी लगाव हो. अपने पूरे खानदान को यहाँ वहाँ सेट कर भला कर सके. पत्नी बेटों को मुख्यमंत्री बना सके. राज्य/देश को अपने बाप की जागीर समझ देखभाल कर सके. ऐसा मोदी नहीं चाहिए जिसकी माताजी एक साधारण से सरकारी क्वाटर में रहे और भाई सरकारी नोकरी बजाए. जो आदमी अपने माँ-भाई का भला न कर सके उसे प्रधानमंत्री कैसे बनाया जा सकता है? चुंकि हमें जागीरदार चाहिए, इसलिए मोदी नहीं चाहिए.
6.नेता ऐसा हो जो दोनो हाथों से दान करे:
हमें ऐसा नेता चाहिए जो मुफ्त में बिजली दे, टीवी और सायकिल बाँटे. दारू और पैसे बाँटे. उलटा मोदी ने तो बिजली चोरों पर अंकुश लगा दिया है. यह अधर्म है, अगर अल्पसंख्यक भाई इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं तो यह सर्वथा अनुचित है. ऐसा निर्दयी व्यक्ति प्रधानमंत्री न ही बने तो अच्छा है. चुंकि हमें अदूरदर्शी मुफ्तखोरी को बढ़ावा देने वाला नेता चाहिए, इसलिए मोदी नहीं चाहिए.
7.नेता ऐसा हो जो वफादार हो:
हमें ऐसा नेता चाहिए जिसका जनाधार न हो, वह लोकप्रिय न हो. जिसे जनता चुने वह भी कोई नेता हुआ? नेता ऐसा हो जो थोपा जाय. वह देश के प्रति नहीं राजपरिवार के प्रति निष्ठावान हो. मोदी जनप्रिय नेता है. तीन-तीन बार मुख्यमंत्री बने और तय है जनता उन्हे चौथी बार भी चुनेंगी. ऐसा नेता हमें नहीं चाहिए जो न मेडम को, न मीडिया को पसन्द हो. चुंकि हमें थोपे गए चापलूस नेता चाहिए, इसलिए मोदी नहीं चाहिए.
8.नेता ऐसा हो जो अल्पसंख्यको का हितैशी हो:
हमें ऐसा नेता नहीं चाहिए जो दंगे फसाद का टंटा खत्म कर विकास के लिए राह बनाएं, हमें ऐसा नेता चाहिए जो अल्पसंख्यको को संरक्षण दे दे कर उन्हे पंगू बना दे. चुंकि हमें तुष्टिकरण को बढावा देने वाला देशद्रोही नेता चाहिए, इसलिए मोदी नहीं चाहिए.
9.नेता ऐसा हो जो शान्तचित्त हो:
नेता ऐसा हो जो कहीं भी कभी भी सो सके और नौकरशाही को अपने अनुसार काम करने दे. ऐसा नेता किस काम का जो दीर्घावधि की योजनाएं बनाए, फिर दिन में 16-16 घंटे काम करे और नौकरशाही पर अंकुश लगा कर उनसे भी काम करवाए. हमें भगवान भरोसे देश को छोड़ शांति से सोने वाला नेता चाहिए, इसलिए मोदी नहीं चाहिए.
10.नेता हो तो गाँधी हो:
सबसे बड़ा कारण ऐसा अवगुण है जो करोड़ों भारतीयों में भी है, कि वे किसी खास गाँधी परिवार में पैदा नहीं हुए. वे मोदी है, गाँधी नहीं. चुंकि हमें लोकतंत्र में राजतंत्र का आनन्द लेने से वंचित नहीं होना, इसलिए मोदी नहीं चाहिए.













January 22nd, 2009 at 11:24 am
हम तो समझ गए, एक बार देश की साड़ी जनता भी समझ जाए तो मजा आ जाए|
January 22nd, 2009 at 11:33 am
संजय जी, बातों बातों में बात कह दी.. भले ही मैं नरेन्द्र मोदी की कुछ (अव) गुणों को नापसन्द करता हूँ, पर आपने जो बताया वो सभी नेताओं के लिये मिसाल होनी चाहीये.. काश इस देश में बहुत सारे लोग प्रधानमंत्री बनने के लिये अन-उपयुक्त होते
January 22nd, 2009 at 12:03 pm
मोदी टेलीविजन वालों और मीडिया को आलतू फालतू देकर पालतू नहीं बनाता.
मोदी बहुत भ्रस्टाचारी है, दो दर्जन कुरते है इसके पास.
January 22nd, 2009 at 12:04 pm
यह तो बड़ी आई-ओपनर पोस्ट है!
January 22nd, 2009 at 12:10 pm
कुछ और अवगुण हैं जैसे प्रदेश में उद्योग और निवेश की स्थिति बेहतर करना, गृहराज्य ही नहीं दूसरे राज्य के लोगों तक को रोजगार मुहैया कराना (गुजरात में सर्विस सेक्टर में अधिकांश कर्मी बाहरी राज्यों से है, क्योंकि स्थानीय गुजराती व्यक्ति अधिकतर स्वरोजगार करना पसंद करता है), स्वयं की भाषा और संस्कृति को हेय दृष्टि से न देखना।
ऐसे कई अवगुण मिल जाएँगे मोदी में।
वे लोग ही विरोध कर रहे हैं जो अधिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पैरोकार बने फिरते हैं। आज कुछ लोगों ने मोदी के रूप में अपनी पसंद अभिव्यक्त कर दी तो स्यापा करने लगे। वैसे लोकतंत्र में उन उद्योगपतियों को भी अपनी बात कहने का अधिकार है।
January 22nd, 2009 at 2:22 pm
बिल्कुल सही कहा जी आपने . जो आदी अपनी माताजी को इतना बडा मुख्यमन्त्री होके एक आलिशान महल ना दे सका हो और जिसका भाई एक साधारण सी सरकारी नोकरी बजाता हो. यानि जो खुद का भला बुरा ना समझता हो वो जनता का क्या भला करेगा?
और गांधी परिवार का ना हो, और कवांरा हो? नही जी नही, बिल्कुल ऐसा प्रधान मंत्री हमे नही चलेगा.
रामराम.
January 22nd, 2009 at 2:47 pm
मोदी विरोधियो का एक गुण यहा पढे जी
http://diaryofanindian.blogspot.com/2009/01/blog-post_22.html इनको मिर्ची लगी तो मै क्या करू
January 22nd, 2009 at 2:59 pm
कुछ भी कहिए, बाकियों की मैं नहीं जानता लेकिन अनिल अंबानी का जनाब मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की फूँक देना और कुछ नहीं है सिवाय भेद नीति के। अंबानी, अमर सिंह और अमिताभ की तिकड़ी बहुत प्रसिद्ध है और अमर सिंह को अंबानी का भा.ज.पा. की ओर जाने देना स्वीकार्य हो ही नहीं सकता। इसलिए अंबानी को तो भूल जाएँ, उसके ढोल में पूरे की पूरी पोल है!!
January 22nd, 2009 at 3:00 pm
सबसे बड़ा अवगुण तो आपने बताया ही नही.. उनका उपनाम.. मोदी जो है.. अगर गाँधी होता तो कितना अच्छा होता??
January 22nd, 2009 at 3:40 pm
वाह वाह क्या कहू?बहुत ही गज़ब लिखा हैं .नरेन्द्र मोदी जी ने जितना काम गुजरात में किया हैं न वह वाकई कबीले तारीफ हैं ,और इतना काम होने लगा तो भारत विकासशील थोड़े ही रह पायेगा विकसित हो जाएगा ,न भाई हम विकसित राष्ट्र नही चाहते
January 22nd, 2009 at 4:17 pm
काश नरेंद्र मोदी जी से माकपाई मुख्यमंत्री कुछ सीख पाते। पं बंगाल की दुर्दशा देखने के बाद यह सहज कहा जा सकता है कि मार्क्सवाद एक प्रदूषित विचारधारा है।
January 22nd, 2009 at 4:24 pm
घुघूती बासूती
January 22nd, 2009 at 4:49 pm
बहुत ही सही लिखा है आपने . मोदी जैसे सही आदमी को पीएम बना दिया तो राजनीती का व्यापार करने वालो की रोजी रोटी बंद हो जायेगी. वैसे एक बार इस पर प्रयोग करना ही चाहिए.
January 22nd, 2009 at 5:01 pm
संजय भाई माफ़ करना पर यही लिख दे रहा हू माननीय बडे सेकुलर पत्रकार जी के ब्लोग पर अभी कुछ देर पहले उन्होने एक विदेशी डिजाईनर बासुरी माफ़ करना फ़्लूट बजाई थी . हमने उन्हे भी उनका जवाब दे मारा पर रघुराज जी ने पूर्ण रूप से सेकुलरता दिखाते हुये हमे मॊडरेशन के जरिये गोल कर गये . देखा आपने कित्ती हिम्मत होती है एक सच्चे कम्यूनिष्ट नेताओ के चमचे पत्रकार की . बात करते है बहस की और डर्पोक इत्ते की हम अपने नाम से टिपिया रहे है ये बेसुरी बासुरी बजा रहे है और फ़िर दुम दबाई भग लिये वैसे भी हम जानते है कि इन्हे यू ही देश का अनिष्ट करने के लिये बनी कंजर मलेच्छ यूनिट अर्थार्थ कम्यूनिष्ट कहा जाता है
हे रघुराज जी की डिजाईनर बेसुरी बासुरी उर्फ़ फ़्लूट आप खुद उन के फ़ूके और वे अपने मालिके के फ़ूके बज रही है हमारे साथ ऐसा नही है हम आपकी तरह किसी के फ़ूके नही बजते ( कृपया नोट करे बेसुरी डिजाईनर फ़्लूट) हम देखते है कि कौन देश का भला कर रहा है कौन बुरा
नही तो आप और आपके रघुराज जी जब राम विलास पासवान राष्ट्रपती से बेंगलादेशियो के राशन कार्ड बनाने की गुहार लेकर गया था तब आप दोनो क्यो नही बजे तब क्या रघुराज जी आपको डिजाईन करने मे व्यस्त थे
नही तो जब अर्जुन सिंह सीबी एस सी को मदरसे के बराबर ला रहे थे तब रघुराज जी की पत्रकार दिमांग घास चरने गया था या वो आपमे फ़ूक मारने मे व्यस्त थे
चलो अब तुम दोनो अपने बच्चो को मदरसे मे भरती करवाकर हमे बताओ हम मानलेगे की वाकई मे तुम किसी के फ़ूक मे आकर नही खुद अपना घर फ़ूकने की कोशिश मे लगे हॊ सम्झी रघुराज जी की बेसुरी बासुरी ( कम से कम एक काम तो ढंग से करते रघुराज जी बासुरी डिजाईन की वो भी अपनी तरह बेसुरी
January 22nd, 2009 at 6:08 pm
बस, दस ठो?
और लिस्ट बढ़ाओ भाई या ओपन सोर्स टाइप छोड़ दो, लोग बढ़ा लेंगे.
January 22nd, 2009 at 6:21 pm
बहुत अच्छी पोस्ट है यह…..।
January 22nd, 2009 at 7:08 pm
Modi ke kuch aur AVGUNO ke bare me SACCHI charcha honi chahiye.
January 22nd, 2009 at 7:45 pm
आप ने मोदी के बहाने बहुतों को छील दिया। मगर ये अवगुण तो सब कम्युनिस्टों के हैं।
January 22nd, 2009 at 10:29 pm
प्रभु जी मेरे अवगुण चित्त ना धरो …।
January 22nd, 2009 at 10:41 pm
क्या उलटा कान पकडा है
-लावण्या
January 22nd, 2009 at 11:44 pm
भई वाह क्या बात कही है, मोदी में ढूंढ ढूंढ के कमिया निकालने वाले सोचें कि उनके कथित सेकुलर नेता क्या कर रहे हैं, अब अर्जुन सिंह जैसे घटिया नेता को ही ले, उन्हें मदरसों और सी बी एस सी स्कूलों में कोई फर्क नज़र नही आ रहा, ऐसे चाटुकार नेताओं से तो दस अवगुण वाले मोदी ही ठीक हैं।
January 23rd, 2009 at 12:40 am
Bahut sahi kaha aapne…….
Ekdam sateek vyangy hai……
January 23rd, 2009 at 5:14 am
साथक लेख, गुण आवगुण हर व्यक्ति मे होते है। कोई इससे परे नही है गांधी भी नही
January 23rd, 2009 at 5:27 am
संख्या शुद्ध ग्यारह की होनी चाहिये जी!
January 23rd, 2009 at 9:06 am
अवगुणों की खान के ये १० अवगुण सुबह पढ़ लिये थे, सोचा बता भी दें कि यही अवगुण इन्हें आगे नही बढ़ने दे रहे
January 23rd, 2009 at 9:35 am
माफ़कीजीयेगा प्रिय राकेश जी ने यहा पढकर मुझ से एक सवाल रघुराज जी की पोस्ट पर दाग दिया है वहा मोडरेशन की सेकुलर लोकतांत्रिक तानाशाही जारी है सो मै यहा जवाब ठेल रहा हू जी
प्रिय राकेश जी आपका संदेश पढा . चलिये आपके संदेश का जुगाड करने के बाद रघुराज जी हमारे टिपियाये को प्रकाशित करने का कार्य तो कर पाये
महोदय हम आपकी तरह किसी के बारे मे पहले से ही तय करके नही बैठ जाते कि इसे गालिया देनी ही है . यही अंतर है भारत और अमेरिका के लोकतंत्र मे यहा आप जैसे लोग तय कर के काम करते है जैसे तहलका के महानुभावो को काग्रेस से बीजेपी का स्टिंग आपरेशन करने का ठेका मिला था क्या उसके बाद की सरकार मे कॊइ भ्रष्टा चारी इन्हे नही मिला . लेकिन अब इन्हे ऐसा नही करना है ठीक ऐसे ही आप जैसे लोगो ने गुजरात मे मीडिया का भौंडा रूप[ दर्शाया था जिस्का काम नयूट्रल रहने के बजाय मोदी हराओ था आप लोगो ने जनता की आवाज को दबाने की बदलने की नाकाम कोशिश की जो एक निहायत भद्दी और घटिया तथा टुच्ची और ंइडिया के नाम पर कलंक वाली हरकत थी . आप लोगो की तमाम इच्छाओ के बाद भी जब जनता ने मोदी को चुना तो आप उसे हजम नही कर पाये आप लोगो ने जनता से मोदी तक को फ़िर भी उलटा सीधा कह डाला पुराने आकडो तक का पोस्ट मार्टम कर आप अपने आप्को ये समझने मे जुटे रहे कि अबकी बार मोदी को पहले से कुछ कम वोट तो मिले ही है बाकी सारे देश मे आपकी बिनाई ( दिखाई देना)कुछ कमजोर हो जाती है शायद ये सेकुलर रतौधी की वजह से ना ? कितने कारण गिना सकता हू मै आप लोगो के अंधेपन के . कशमीर से लेकर क्न्या कुमारी तक . लेकिन क्या फ़ायदा एक बिके हुये कुतर्की आदमी को समझाने का एक अंधे को शीशा दिखाने का उम्मीद है आप समझ रहे ह्पंगे की मै आपको क्या समझा रहा हू . अगर इत्ते लिखे मे से दो चार ग्राम भि समझ मे आया हो तो फ़ौरन लिखे , मै ऐसे आदमी को जिसकी अंतर आत्मा अभी पूरी तरह से मरी नही है बचाने के लिये पूरा कोर्स देने को तैयार हू
January 23rd, 2009 at 9:40 am
राकेश जी मै अमेरिका की बात बीच मे ही छॊड गया भारत मे आप की चहेती पार्टी हार जाती है तो आप हर कोने से मीन मेख निकालते है जनता का फ़ैसला स्वीकार करने के बजाय उसे गरियाने के मौके ढूढते फ़िरते है और अमेरिकामे हिलेरी हारने के बाद उन्ही के साथ विदेश मंत्रालय संभाल लेती है आई कुछ अपनी गलती समझने की बात आपकी बुद्धी शरीफ़ मे जनाबे आली ? पर आप क्या समझेगे आपको बात वही समझ मे आती है मदरसे वाली
January 23rd, 2009 at 10:29 am
देखा संजय भाई, मोदी के नाम में ही ऐसा “जादू” है कि मिर्ची लग ही जाती है, पेट दर्द होने ही लगता है, गठानें पड़ने ही लगती हैं, आँखों के आगे अँधेरा छाने ही लगता है… यानी कि लगभग दिल का दौरा पड़ने की नौबत आ जाती है… अब सोचिये यदि ऐसे व्यक्ति प्रधानमंत्री बन जायें तो कितने “नकली” और “सेकुलर”(?) पत्रकारों को दिल का असली दौरा पड़ जायेगा…
January 23rd, 2009 at 12:03 pm
मैं कुछ और बोलूं !
ख़ुदा जिसको चाहे उसके जीवन मे ही मशहूर करदे और जिसको चाहे ज़लील करदे।
ऐसे कई लोग हैं जो अपनी ज़िन्दगी मे ही बहुत नाम कमालिया और नाम ऐसे ही नहीं मिलता जबतक दूसरे लोग उसकी तारीफ़ नहीं करते। जिसके विचार अच्छे हों और जज़बात भी सच्चे हों उसे ऊंचाईयों को छूने मे कोई रोक नहीं सकता। प्रधानमंत्री बनने के लिए गांधी जैसा होना ज़रूरी नहीं और मोदी अगर प्रधानमंत्री बनजाए इससे कुछ तो अच्छी उम्मीद रखसकते।
January 23rd, 2009 at 12:25 pm
माफ़ करना दुबारा हज़िर हुआ हूं।
मैं कभी गुजरात नहीं आया और मोदी के बारे सिर्फ इतना जानता हूं वे गुजरात के मुख्यमंत्री हैं। मगर मेरी आंखें और कान खुले हैं सब देखता और सुनता हूं। कुछ लोगों के लिए मोदी अगर घटिया और कट्टर धार्मिक है तो वहीं कुछ लोगों केलिए ये एक ईडियल आदमी हैं। फिर क्या बात है कि ये दो बार मंत्री बन गए? खुद नहीं बल्कि गुजरात की जनता ने इन्हें ये मक़ाम दुबारा दिलाया है। अगर मोदी बुरा या घटिया होता तो कभी का लुढक जाता यहा फिर इसको बदनाम करने वाले लोग उसकी टांगें खींच-2 कर गिरा डालते। मोदी के पैरों मे बहुत ताक़त है और ये बहुत दूर तक चलना चाहता है।
January 23rd, 2009 at 6:30 pm
बातें तो आपने सच्ची कही है लेकिन यैसी बाते ना ही कहें तो अच्छा है से-कूलरो को दर्द होने लगता है नरेन्द्र भाई मोदी का नाम सुन कर।
January 23rd, 2009 at 6:33 pm
ये लो नाम लिया शेतान हाजीर बाली कहावत एक लिंक दिया हू पड़लें इन्हे आपसे भी दर्द हो रहा है कह नही सकता कहा हो रहा है। क्यों हो रहा है ये भी पता नही
http://diaryofanindian.blogspot.com/2009/01/blog-post_22.html
January 23rd, 2009 at 10:29 pm
नरेन्द्र मोदी की उपलब्धियों से इनकार करना कलुषित विचारधारा का प्रतीक है.
January 24th, 2009 at 10:05 am
संजय भाई, आपका यह चिट्ठा मेरे मोबाईल के ओपेरा मिनी ब्राउजर पर पढ़ने में नहीं आता। बैकग्राउंड का ग्रे रंग पूरे चिट्ठे पर फैल जाता है, मुख्यभाग का सफेद बैकग्राऊंड नजर नहीं आता। हो सके तो इसे ठीक करदें अथवा अपनी फीड में पूरा पोस्ट जाने दें जिससे आपके पोस्ट गूगल रीडर पर पढ़े जा सकें। धन्यवाद।
February 1st, 2009 at 12:47 pm
uttam vichar hai aapke, shaayad desh ki janta ko bhagwan buddhi de de….!
December 2nd, 2009 at 12:37 pm
संजय, (ना)लायक कहीं के (तुम-मैं भाई-भाई),
अपने भाई समान मोदीजी को तो छोड़ देते. वे किसी एक से नौ बच्चे क्यों पैदा करें? मोदीजी तो श्रीकृष्ण समान हैं. सभी के लिये प्रेम-पुजारी है वे. कृष्ण-कृष्ण, हे प्रभु मुझे क्षमा करें…
June 25th, 2010 at 1:29 pm
kya khub aina dikhaya hai tathakathit secular politicians ko.public sab dekh rahi hai .MODI jarur PM banenge.
thanks
July 16th, 2010 at 2:14 pm
प्रत्यक्ष लोकतंत्र की शुरुआत हो चुकी है, उस दीं का इंतजार है जब प्रधान मंत्री पद के लिए मतदाता सीधे मतदान करेंगे , हम प्रयास करें की वो दीन जल्दी आए. फिर मोदी ही प्रधान मंत्री होगे.