मृत?य? के मार?ग अनेक
यूथेनेसिया, आत?महत?या और संथारे में भेद को सम?ने के लि? पहले मृत?य?-मृत?य? के भेद को वर?गीकृत कर सम?ना होगा.
मन?ष?य की मृत?य? के तीन मार?ग हैं:
प?रकृति द?वारा मारा जाना
द?सरों द?वारा मारा जाना
अपने आप को मार देना
प?रकृति द?वारा मारा जाना :
इसे स?वभाविक मौत कह सकते हैं, जो जन?मा है वह मरेगा भी. इसमें आप द?र?घटनावश या बिमारी से ह?ई मृत?य? के भी जोड़ सकते हैं. क?योंकि इसमें ख?द का तथा किसी द?सरे का किसी को मार डालने का इरादा नहीं होता.
द?सरों द?वारा मारा जाना
इसे हत?या कह सकते हैं पर मजेदार बात यह है की सभी मामलो में यह अपराध भी नहीं हैं, इसलि? इसे फिर से दो भागो में बांट सकते हैं
हत?या जो अपराध नहीं हैं:
किसी अच?छे उद?देश?य के लि? किसी को मार देना जिसे उचित ठहराया जाता हैं जैसे य?द?ध में द?श?मन, ?नकाउंटर, थेनेसिया, गर?भपात, बलि, अदालत द?वारा मृत?य?दण?ड आदी आते हैं. इसमें पहले तथा बलि के अलावा बाकी के विवादास?पद हैं.
हत?या जो अपराध हैं:
अपनी स?वार?थ के लि? किसी को मार देना इस श?रेणी में आता हैं जो निर?विवाद अपराध माना जाता हैं. आतंकवादी कृत?य भी इसमें शामिल हैं. इसमें बलि का समावेश नहीं किया जा सकता क?योंकि हत?या होते ह?? भी वह ?क अन?ष?ठान के तहत दी जाती है.
अपने आप को मार देना:
इसे आत?महत?या कह सकते हैं पर इसके भी दो प?रकार हैं ?क जो अपराध हैं, द?सरा वह जो अपराध नहीं हैं. हा? कान?न बना कर किसी को गेरकान?नी बनाया जा सकता है.
आत?महत?या जो अपराध नहीं है
समाधि लेकर या संथारा ले कर या सती हो कर मृत?य? का वरण करना. इसमें मरने वाला बिना किसी द?वेष या निराशा के मौत को गले लगाता हैं. इसमें धार?मिक भावना?ं उत?प?रेरक का काम करती हैं.
आत?महत?या जो अपराध है
इसमें मरने वाला या तो द?वेषभाव से या फिर घोर निराशा में मौत को गले लगाता हैं. इसमें ख?द का या समाज का भला करने की कोई भावना नहीं होती. शायद इसी लि? इसे अपराध माना जाता है.
अब हम सम? सकते हैं की यूथेनेसिया निरअपराध मगर विवादास?पद हत?या हैं तथा संथारा निरअपराध मगर विवादास?पद आत?महत?या हैं, वहीं आत?महत?या निर?विवाद अपराध हैं.













September 25th, 2006 at 9:41 am
बह?त जानकारीपूर?ण लेख
संथारा लेना तो फ़िर भी गलत नहीं लगता पर सती हो जाना सही नहीं लगता!?क बात और सती जबरदस?ती की जा सकती है पर संथारा जबदस?ती दिलवाना म?श?किल है।
दूसरी श?रेणी में ?क और भी प?रकार है जिसे “वध” कह सकते हैं, क?छ सालों पहले ?क सामान?य व?यक?ति पर ?क अपराधी ने हमला किया और प?रतिकार करने के दौरान वह अपराधी मारा गया। जनता ने तो चैन की सा?स ली, प?लिस ने उस पर हत?या की बजाय वध का म?कदमा चलाया था, क?यों कि ?क तो अन?जाने में अपराधी मारा गया, और द?सरे उस य?वक ने अन?जाने में ही सही पर प?लिस की सरदर?दी कम कर दी थी।
September 25th, 2006 at 9:56 am
माफ़ी चाहता ह?? यह लिखना रह गया था कि यह घटना ग?जरात में ह?ई थी।
September 26th, 2006 at 7:19 am
संथारा के विषय मे जानकारी के लिये धन?यवाद.
September 26th, 2006 at 12:38 pm
अच?छा लेख है – पोस?ट करने के लि? धन?यवाद
September 26th, 2006 at 9:28 pm
जानकारी के लिये धन?यवाद।
मै इच?छा मृत?यू का समर?थक हूं। हर इन?सान को अपनी जिवन के अंत का निर?णय का अधिकार होना चाहिये !