ये तड़प जरूर गजब ढाएगी
वे अभी भी भटकना और स्टोरी लाना और छापना या दिखाना चाहते है. मगर छापेगा कौन? दिखाएगा कौन? मीडिया मालिकों को स्टोरी नहीं, मात्र विज्ञापन चाहिए. या फिर वे अब निष्पक्ष नहीं रहे है. व्यवस्था-सुविधा-विचारधारा के आगे घुटने टेक चुके हैं.












