यह गरूर पर आघात जैसा था
कल मन बेहद खिन्न था. मुम्बई पर हुए हमले में मेरा अपना कोई नहीं मरा, मगर आज सोचता हूँ तो पाता हूँ की यह मेरे गरूर पर चोट लगी थी, कहीं इसलिए तो ज्यादा दुखी नहीं था?
कल मन बेहद खिन्न था. मुम्बई पर हुए हमले में मेरा अपना कोई नहीं मरा, मगर आज सोचता हूँ तो पाता हूँ की यह मेरे गरूर पर चोट लगी थी, कहीं इसलिए तो ज्यादा दुखी नहीं था?
धन्यवाद सोनियाजी, राष्ट्र के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृहमंत्री जैसे तीन सर्वोच्च व महत्त्वपूर्ण पदों पर तीन कमजोर व चापलूस लोगो कों बैठाने के लिए. यह राष्ट्र सदा आपका ऋणी रहेगा.
कल मुम्बई में महाराष्ट्र सरकार द्वारा आयोजित सर्वभाषा सम्मेलन समाप्त हुआ. हिन्दी के लिए बोलना था अतः मैने जाना स्वीकार किया. मैने पाया कि वहाँ शुरूआत से ही सरकार को कोसने का काम शूरू हो चुका था.