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Poems
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Written by Ankit Patni
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Wednesday, 27 June 2007 |
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Ankit Patni
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आरी ने घायल किये हरियाली के पावँ,
कंक्रीट मे दब गया शांति प्रिय गाँव ।
दूर शहर की चिमनीयाँ देती ये आभास
जैसे बीडी पी रहे बुड्ढे कई उदास ।
वन्य जीव मिटते रहे और कटे वृक्ष दिन रात
तो एक दिन मिट जायगी, खुद आदम की जात ।
अब धरती आकाश पर खाओ रहम हुजुर
बदल रहे रात-दिन मौसम के दस्तुर।
सुखा, बाड, अकाल नित्य कर रहे वार
आखिर धरती कब तक सहे अत्याचार।
धुन्ध धुँए ने धात दी, रोगी हुए हकीम
असमय बुडडा हो चला "आंगन वाला नीम"।
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Last Updated ( Friday, 29 June 2007 )
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