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Poems
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Written by Ankit Patni
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Wednesday, 27 June 2007 |
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Ankit Patni
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चाँद भी तन्हा है मेरी तरह,
इस विरानी रात में क़ातिल की तरह.
आँखो में नींद नही आती
बिस्तर पर हूँ पडा, काफ़िर की तरह.
सो गया है जग सारा
फिर भी जाग रहा हूँ, साकी की तरह.
दिल की धडकने, बढ़ने लगी है
कही तड़प करना टूट जाए घुंघरू की तरह.
कितनी मुश्किल है ज़िंदगी
फिर भी कट जाएगी, जुगनू की तरह.
मंज़िल कितनी दूर है और
चाहत भी अधूरी है अरमानो की तरह.
जितना खुदको समझा मैने
तन्हा था, तन्हा रह, ख्वाईश की तरह
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Last Updated ( Friday, 29 June 2007 )
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