वयस्कता की उम्र Print E-mail
Social Issue
Written by Armando Halder   
Wednesday, 27 June 2007

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Armando Halder

भारतीय कानून के अनुसार यदि आप 18 वर्ष के हैं तो आप वयस्क माने जाते हैं. आपको मतदान का अधिकार मिलता है, आप वर्जित फिल्मे देख सकते है. जी हाँ आप शादी भी कर सकते है(अगर आप लडकी हैं).

लेकिन आजकल वयस्कता की इस उम्र सीमा पर सवाल उठ रहे है. कुछ लोगो का मानना है कि वयस्कता की यह सीमा बढनी चाहिए. इसे 23 वर्ष शादी के लिए तथा 21 वर्ष बाकी अधिकारों के लिए कर देनी चाहिए.इसके पीछे ये लोग यह कारण देते है कि इन्सानी दिमाग 18 वर्ष की उम्र मे इतना विकसित नही होता है.

लेकिन वहीं कुछ और लोग यह कहते है कि आज के Technological ज़माने मे हमे 18 वर्ष की सीमा को घटा कर 16 वर्ष कर देनी चाहिए. लोग इसके पीछे यह तर्क देते है कि आजकल की युवा पिढी जो Internet से जुडी है, वह वक्त से पहले ही वयस्कता को छू लेती है तो बेकार मे 18 साल की सीमा का कोई तुक नही बनता है.

हमने इस बारे मे एक छोटा सा Survey किया और हमे कई मज़ेदार जवाब मिले. चन्द्रशेख्रर (22) जो पुना के निवासी है उनका कहना है कि इन्सान अपनी ज़िन्दगी के अनुभवों से वयस्क बनता है ना की किसी क़ानून से. मुम्बई की निष्ठा (17) कहती है आज की पिढी अपने परिवार पर निर्भर नही रहती, आज युवक/युवतियों अपने खर्चे खुद उठाते है और अपने फैसले भी खुद लेती है तो हुमे वयस्कता की सीमा 16 वर्ष कर देनी चाहिए.

वही वडोदरा निवासी साहिर (31) मानते है कि वयस्कता की सीमा 23 वर्ष होनी चाहिए क्योंकि इससे पहले इन्सान का दिमाग इतना विकसित नही होता कि वो सही गलत का फैसला खुद कर सके. गुडगावँ निवासी विनय (21) कहते है कि उम्र की सीमा बदाने से कुछ नही होगा; आज भी हर दिन हज़ारो नाबालिक शादिया हो रही है, हुमे पहले इन्हे रोकने के उपाय ढूढने चाहिए फिर इस सीमा को बढाने के बारे मे बात करनी चाहिए.

तो क्या हमे वयस्कता की सीमा बढानी चाहिए? मैं विनय की बात से सहमत हुँ की इस बारे मे कोई कदम उठाने से से पहले यह सोचना जरूरी है कि क्या वयस्क होने की उम्र की सीमा बढाने पर लोग उसका पालन करेंगे? शायद नही! तो क्या हम वयस्क होने की उम्र सीमा घटा दें? क्या ये समस्या का समाधान है? नही!

अभी पुरी दुनिया भारत की प्रगति की बात कर रही है, तब क्या हम उनके सामने ऐसी छवि पेश करेंगे कि भारत एक ऐसा देश की जहाँ आज भी नाबालिग शादियाँ होती है? मेरे हिसाब से तो नही! तो हम क्या करे?

सरकार तो कानून बनाती है पर जनता का कर्तव्य है की उसका पालन करे. आप अपने परिवार मे नाबालिग शादियाँ ना होने दे. अपने आस पडोस मे भी ना होने दे. इन छोटे छोटे कदमों से ही हम सुधार ला पाएंगे.

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