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रोचक तथ्य और जानकारी
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बुधवार , , 30 अप्रेल |
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तरकश ब्यूरो
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| दूनिया में चीयरलीडर्स द्वारा किसी टीम का उत्साह बढाने का इतिहास करीब 110 वर्ष पुराना है. |
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इस समय आइपीएल ट्वेंटी ट्वेंटी क्रिकेट अपने शबाब पर है आठ स्थानीय टीमें एक दूसरे के खिलाफ मोर्चे खोले खेल रही है. यह टूर्नामेंट में हर दूसरे दिन एक नया विवाद शुरू हो जाता है. कुछ दिन पहले महाराष्ट्र सरकार ने मुम्बई मे हो रहे मैचों के दौरान अर्धनग्न चीयरलीडर्स द्वारा किए जाने वाले नृत्य पर आपत्ति जताई थी. कुछ ऐसी ही आपत्ति पश्चिम बंगाल में भी जताई गई थी.
इस वजह से शाहरुख खान को अपनी टीम के चीयरलीडर्स के कपडे फिर से डिजायन करवाने पडे थे और अब वे पूरे कपडे पहनती हैं. भारत मे चीयरलीडर्स का व्यापक पैमाने पर पहली बार इस्तेमाल हो रहा है. इससे पहले इंडियन क्रिकेट लीग मे भी चीयरलीडर्स का उपयोग हुआ है.
क्रिकेट में मात्र ट्वेंटी ट्वेंटी के खेलों मे ही चीयरलीडर्स का प्रयोग होता है. इसकी शुरूआत दक्षिण अफ्रीका से हुई थी. दक्षिण अफ्रीका में आयोजित पहले ट्वेंटी ट्वेंटी विश्वकप के दौरान चीयरलीडर्स का प्रयोग शुरू हुआ था.
दूनिया में चीयरलीडर्स द्वारा किसी टीम का उत्साह बढाने का इतिहास करीब 110 वर्ष पुराना है. सन 1884 में अमरीका की प्रिस्टन युनीवर्सिटी के एक विद्यार्थी को यह युक्ति आई कि क्यों ना विश्वविद्यालय की बास्केटबाल टीम का उत्साह बढाने के लिए चीयरलीडर्स का प्रयोग किया जाए, जिससे दर्शकों का भी मनोरंजन हो.
चीयरलीडर्स का सबसे पहला व्यवस्थित प्रयोग मिनेसोटा विश्वविद्यालय ने किया था. सबसे पहले जॉनी केम्पबेल नामक एक विद्यार्थी इस विश्वविद्यालय का चीयरलीडर्स बना था. बाद में 6 लोगों की एक टीम बनाई गई. इस विश्वविद्यालय की चीयरलीडर्स टीम यूनीफ़ॉर्म पहनती थी और नृत्य का प्रशिक्षण भी लेती था.
शायद यकीन करना मुश्किल हो लेकिन 1923 तक चीयरलीडर्स सिर्फ पुरूष ही होते थे और महिलाओं के लिए चीयरलीडींग करना उपयुक्त नही माना जाता था. लेकिन उसके बाद समय बदलता गया और चीयरलीडींग मे महिलाओं का अधिक प्रयोग होने लगा. आज 97% चीयरलीडर्स महिलाएँ ही होती हैं. आज बास्केटबाल, आइसहॉकी, रग्बी, अमरीकन फुटबॉल और अब ट्वेंटी ट्वेंटी क्रिकेट में चीयरलीडर्स का प्रयोग होता है.
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