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मालगाडी को नाम प्रदान करने की अनोखी पद्धति |
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रोचक तथ्य और जानकारी
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बुधवार , , 27 फ़रवरी |
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तरकश ब्यूरो
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| एक निश्चित संज्ञा के
रूप में रात 12 बजे के बाद के हर एक घंटे के लिए एक अलग रोमन अक्षर तय
किया जाता है. इसमें J तथा U का समावेश नही किया गया |
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भारत में मालगाडी को नाम प्रदान करने की एक अनोखी प्रणाली है. यह प्रणाली सवारी गाडियों की प्रणाली से एकदम अलग होती है. सवारी गाडियों को अमूमन 4 अंकों का नम्बर दिया जाता है. जैसे कि अहमदाबाद-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस का नम्बर 2952 और आश्रम एक्सप्रेस का नम्बर 2916 है.
लेकिन मालगाड़ियों को नम्बर देने की एक अलग प्रकार की ही पद्धति होती है. जब भी कोई मालगाडी अपना सफर शुरू करती है तो उसे अधिकतर समय एक नया नाम दिया जाता है. वह नाम India 15, zebra 40 या Cricket 59 हो सकता है.
इस प्रकार के लेबल देने की पद्धति कुछ इस प्रकार से काम करती है. मार्शेलिंग यार्ड में खडे माल भरे डिब्बों को जोडकर मालगाडी तैयार की जाती है. उसके बाद वह गाडी मार्शेलिंग यार्ड से कितने बजे यानि कि किस घंटे और मिनट मे निकली उसके उपर उसका नाम तय होता है.
एक निश्चित संज्ञा के रूप में रात 12 बजे के बाद के हर एक घंटे के लिए एक अलग रोमन अक्षर तय किया जाता है. इसमें J तथा U का समावेश नही किया गया है. बाकी बचे 24 मुलाक्षर 24 घंटो के लिए तय होते हैं. इस प्रकार से यदि किसी गाडी का नाम India 40 है तो इसका मतलब यह है कि वह गाडी मार्शेलिंग यार्ड से सुबह 9 बज कर 40 मिनट पर निकली है.
क्योंकि I मूलाक्षर सुबह 9 बजे के साथ जुडता है. उसी तरह से रात 12 से 1 बजे के बीच निकलती गाडी के साथ Z मूलाक्षर जुडता है. यानि यदि कोई गाडी आधी रात के बाद यानि कि 00:38 बजे निकले तो उसे Zebra 38 या Zimbabwe 38 इस प्रकार से कोई भी एक नाम दिया जा सकता है.
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