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रोचक तथ्य और जानकारी
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द्वारा/by : पंकज बेंगाणी
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बुधवार , , 06 दिसम्बर |
धूम 2 देखने के लिए जब मैं थिएटर में घुसा तब बहुत
से ऐसे लोग भी मैरे साथ अन्दर जा रहे थे जो फिल्म देखने में कम लेकिन
बिपाशा और ऐश्वर्या को पहली बार बिकिनी में देखने को लेकर अधिक उत्सुक थे।
मैं सोच रहा था, आखिर अधोवस्त्र के करीबी इस स्विमसुट परिधान में ऐसा क्या
विशेष है, और यह भी कि आखिर यह परिधान सामान्य अधोवस्त्रों से अलग कैसे है?
बिकिनी
का परिधान नया नहीं है। इसकी जडें वर्षों पुरानी है। ई. सन 1400 काल के
ग्रीक वास्तुशिल्पों और तैलिय चित्रों में भी महिलाओं को इसी प्रकार के
वस्त्रों में देखाया गया है। कहा जाता है कि प्राचीन रोम की महिलाएँ
बिकीनी के प्रकार के वस्त्र भी पहनती थी।
आधुनिक बिकनी का
अविष्कार लुइस रियर्ड (Louis Réard) और फेशन डिज़ायनर जैक हैम (Jacques
Heim) ने सन 1946 में पेरिस में किया था। हालाँकि उन्होने इसकी खोज साझा
रूप से नहीं बल्कि अलग अलग की थी। बिकनी का सबसे पहला प्रदर्शन उसी साल 5
जुलाई को पेरिस के ही एक फैशन शो में किया गया था।
दोनों
डिज़ायनरों ने अपने अपने तरीके से इसकी मार्केटिंग शुरू की थी। जैक हैम ने
इस परिधान का नाम “एटम” रखा। इस नाम के पीछे उनकी सोच यह थी कि एटम किसी
भी पदार्थ का सबसे छोटा स्वरूप होता है उसी तरह से उनके द्वारा डिजायन की
गई “एटम” भी सबसे छोटा वस्त्र है। हैम ने इसे सबसे पहले कैन (जहाँ
प्रसिद्ध सिनेमा महोत्सव होता है) के समूद्र तट पर इसे बेचना शुरू किया।
इसकी मार्केटिंग के लिए उसने स्कायरायटर्स (ऐसे पायलट जो उडान के दौरान
विमान से धुआँ छोडकर आकृतियाँ बनाते हैं) की मदद ली। शाम के समय जब
महिलाएँ समूद्र तट पर एकत्र होती थी, तब हैम के पायलट विमान उडाते और आकाश
में धुँए से लिखते – “एटम, दुनिया का सबसे छोटा परिधान”।
जैक
हैम के दुर्भाग्य से लुइस रियर्ड नामक दुसरे फैशन डिजायनर भी ठीक उसी समय
एटम के जैसे ही परिधान को डिजायन करने में जुटे हुए थे। लुइस ने अपने
परिधान का नाम बिकीनी रखा। यह नाम क्यों दिया गया, इसको लेकर विशेषज्ञों
मे मतभेद हैं। लेकिन जो सबसे आम धारणा है वो यह है कि लुइस रियर्ड को
बिकीनी नाम रखने की प्रेरणा बिकीनी एटोल नामक प्रदेश से मिली थी। बिकीनी
एटोल पेसिफिक समूद्र का एक टापु है जहाँ पर एटम बम के परिक्षण हुए थे।
लुइस को अपना अविष्कारी परिधान एटम बम की तरह ही धमाकेदार लगता था।
जैक
हैम के द्वारा एटम की मार्केटिंग शुरू करने के तीन हफ्ते बाद लुइस ने अपने
परिधान की मार्केटिंग शुरू की और जैक की ही तरह विमानों को किराये पर
लिया। उसके स्कायरायटर्स भी आकाश की गहराइयों को नापने लगे। फर्क सिर्फ
इतना था कि वे लिखते थे – “बिकीनी – दुनिया के सबसे छोटे परिधान से भी
छोटा परिधान”।
जैक हैम की मार्केटिंग लुइस रियर्ड के आगे चल नहीं पाई और फ्रांस के लोग धीरे धीरे एटम को भुलाकर बिकीनी को अपनाने लगे।
जैसा
कि उपर लिखा है, बिकीनी का सर्वप्रथम अधिकृत प्रदर्शन जुलाई 5 1946 को
पेरिस फैशन शो में किया गया। इसे पहनकर रेम्प पर चलने वाली पहली मोडल का
नाम था मिशेलिन बर्नाडिनी Micheline Bernardini। इस फैशन शो का आयोजन
व्यापक पैमाने पर किया गया था और दुनिया भर से पत्रकारों और फोटोग्राफरों
को बुलाया गया था। इन सब लोगों मे उत्सुकता थी कि “बिकीनी” आखिर होती क्या
है? और फिर जब मिशेलीन इसे पहनकर निकलीं तो लोगों में हडकम्प मच गया। कहना
ना होगा अगले दिन हर समाचार पत्र की सुर्खियों में यही विषय छाया हुआ था।
इसके
एक वर्ष बाद अमेरीका में बिकीनी की मार्केटिंग शुरू हुई। लोगों ने इसके
प्रति कुछ खाश उत्साह नहीं दिखाया। अमरीकन पुरूषों और महिलाओं को यह
परिधान अति आधुनिक लगा जो उनके समाज मे मान्य नहीं था। लेकिन धीरे धीरे
महिलाओं ने इस स्वीमसुट को अपनाना शुरू किया और सन 1960 तक इसकी बिक्री
आसमान को छुने लगी।आज बिकीनी एक सामान्य स्वीमसुट बन गया है। आज कोई यह
सोच भी नहीं सकता कि यह परिधान मात्र 60 साल पहले विधिवत रूप से अपनाया
गया था।
बिकीनी के प्रकार:
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स्ट्रींग बिकीनी (String Bikini):
स्ट्रींग बिकीनी सबसे पुरानी डिज़ायनों में से एक है। इस प्रकार की बिकीनी
में आवरण का आधार एक स्ट्रींग पर होता है। फैशन डिजायनर इस प्रकार की
बिकीनी को सभी महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं मानते, जैसा कि जीम रिवा का
कहना है, “यह एक ऐसा परिधान है जिसे मैं दुनिया की सभी महिलाओं को पहने
देखना पसन्द नही करूंगा।“ |
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तांकिनी Tankini: अन्य बिकीनी के विपरीत तांकिनी टु पीस ना होकर वन पीस होती है। यह बिकीनी का सबसे नया अवतार है और स्वीमशुट के रूप में अत्यधिक लोकप्रिय भी है। |
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बेंडिनी Bandini: बेंडिनी बिकीनी टु पीस होती है। नीचे का परिधान सामान्य बिकीनी जैसा ही होता है पर उपरी परिधान बेन्डेवु (bandeau) प्रकार का होता है, जो स्ट्रेपलेस (strapless)और ट्युब आकार का होता है।
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मोनोकिनी Monokini: मोनोकिनी सबसे विवादास्पद बिकीनी है जो स्वीमवेर के रूप में इस्तेमाल की गई। फेशन डिजायनर रूडि गेरनिक (Rudi Gernreich) ने 1964 में इसे डिजायन किया था। तब मोनोकिनी में नीचे का हिस्सा सामान्य बिकीनी की तरह ही होता था पर उपर के हिस्से पर सिर्फ स्ट्रेप ही होते थे। अमेरीका में इसके लॉंच होते ही हडकम्प मच गया था और चर्च के साथ साथ कई फैशन डिजायनरों ने भी विरोध के स्वर उठाए थे। धीरे धीरे इस प्रकार की बिकीनी में फेरबदल होते गए, और आज यह एक अलग ही रूप में उपलब्ध है।
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थोंग Thong: थोंग बिकीनी भी रूडि गेरनिक (Rudi Gernreich) के द्वारा डिजायन की गई थी। इस प्रकार की बिकीनी भी टु पीस होती है जिसका उपरी भाग सामान्य बिकीनी जैसा ही होता है पर नीचे का भाग अलग होता है। गेरनिक ने इस प्रकार की बिकीनी की प्रेरणा ब्राजिल की आदिवासी प्रजा एरेजोनियन (Amazonian tribes) के पारम्परिक पोशाक से ली थी।
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हाल्टर Halter Bikini: हाल्टर प्रकार की बिकीनी भी टु पीस होती है, जिसमें नीचे का भाग कोई भी, स्ट्रींग – बोय शोर्ट्स वगैरह, हो सकता है पर उपरी भाग अलग होता है। इसमें स्ट्रीप गले के पीछे से बान्धी जाती है। इस प्रकार की बिकीनी महिलाओं मे सबसे अधिक लोकप्रिय है।
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रोचक तथ्य:
- लुइस रियर्ड ने अपनी पहली बिकीनी मात्र 30 वर्ग इंच के कपडे से बनाई थी।
- जब लुइस ने अपनी बिकीनी का पेरिस फैशन शो में प्रदर्शन करना चाहा तो उन्हे कोई मोडल ही नहीं मिली जो इसे पहनने के लिए राजी हो। अंत में मिशेलीनी बर्नांडिनी को लिया जो एक नाइट क्लब में नग्न नृत्य करती थी।
- 1980 में बिकीनी की खरीद एकदम से गिर गई और बिकीनी का उत्पादन करने वाली कई कम्पनीयाँ दिवालीया हो गई थी, यह आज तक राज है कि बिक्री में अचानक आई उस भारी गिरावट का राज क्या था।
- उस भारी मंदी के दौर में लुइस रियर्ड को भी अपनी कम्पनी बन्द करनी पड गई थी।
- सन 1993 में ऑलम्पिक कमेटी ने बिकीनी को बीच वॉलिबोल की अधिकृत पोशाक घोषित किया।
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यार प?रूषों के लि? इस तरह की कोई साहसी खोज अब तक नहीं ह?ई क?या? समीर भाई के हिसाब से कोई आइटम बनाओ जी. :shock: