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"नेनो" के बाद अब क्या? हवा से चलने वाली कार?
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शनिवार , , 12 जनवरी
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टाटा की सिटी केट - हवा से चलेगी यह कार 


टाटा मोटर्स का दावा है कि इस कार को और बेहतर बनाने तथा इसको और अधिक कार्यक्षम बनाने में अभी दो साल का समय और लगेगा


  टाटा मोटर्स आज अपनी एक लाख की जनता कार को लॉंच कर रहा है. आम लोगों के अलावा दूनिया भर के ऑटो विशेषज्ञों और ऑटो निर्माताओं की नजर टाटा की एक लाख की कार की ओर लगी हुई है. आजतक यह असंभव सी बात थी कि कोई सिर्फ 1 लाख में कार भी उपलब्ध करा सकता है. लेकिन टाटा मोटर्स ने यह कर दिखाया है.

टाटा की लखटकिया कार के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है और लिखा जा रहा है. लेकिन जो कम लिखा गया है वह है टाटा की एक अन्य परियोजना के बारे में. लखटकिया कार के अलावा टाटा मोटर्स भविष्य की सम्भावनाओं की ओर देखते हुए कई अन्य परियोजनाओं पर भी कार्य कर रहा है और हाइड्रोजन तथा हवा से चलने वाली कार भी बना सकता है.

शुरूआत:

इसकी शुरूआत होती है लक्समबर्ग से. लक्समबर्ग के मोटेर डवलपमेंट इंस्टिट्यूट मे एक ऐसी कार का प्रोटोटाइप बनकर तैयार है जो हवा से चलती है. इस कार के अविष्कारक हैं पूर्व फार्मूला वन इंजीनियर गाय नेगर. गाय नेगर ने यह प्रदूषण मुक्त कार का प्रोटोटाइप बनाकर एक हलचल खडी कर दी है.

इस कार की डिजायन बनाने में 10 साल का समय लगा है. और इस छोटी कार का नाम फिलहाल सिटीकेट रखा गया है. एक बार शुरू होने के बाद यह कार 150 मील प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड सकती है और एक बार में 200 किमी तक का सफर पार कर सकती है.

चूँकि यह कार हवा से चलती है, इसमे एयर पम्प द्वारा हवा भरी जाती है, जो इसके फायबर से बने टेंक में कम्प्रेसड रूप मे संग्रहित हो जाती है. हवा भरने मे मात्र 2 मिनट का ही समय लगता है.

कार्य प्रणाली:

इसके फायबर के फ्यूल टेंक में कम्प्रेसड हवा भरी जाती है. जब कार चलती है तब यह हवा फैलती है और इंजिन मे पिस्टन को धकेलती है जिससे गति प्राप्त होती है. इसके अलावा यह इंजिन वातावरण मे उपलब्ध गर्मी को शोषित कर अधिक उर्जा प्राप्त करता है. कार का वातानुकूलित सिस्टम भी इसी हवा से चलता है. चूँकि यह कार पुरी तरह से प्रदूषण से मुक्त है इसका मेंटेनेंस खर्च भी बहुत ही कम है. एक अनुमान के मुताबिक 100 रूपये मे यह कार करीब 200 किलोमीटर तक चल सकती है.

टाटा की भागीदारी:

एम.डी.आई. इंस्टीट्यूट ने अपने विस्तरण की योजना के अंतर्गत कई यूरोपीय और एशियन कम्पनियों के साथ करार किए हैं. टाटा मोटर्स भी इनमें से एक प्रमुख साझेदार बना है. एम.डी.आई. के अनुसार टाटा मोटर्स की भागीदारी से कम्पनी को तकनीकी सलाह मिलेगी और और टाटा मोटर्स के अनुभव से इस प्रोजेक्ट को काफी मदद मिलेगी.

टाटा मोटर्स का दावा है कि इस कार को और बेहतर बनाने तथा इसको और अधिक कार्यक्षम बनाने में अभी दो साल का समय और लगेगा. अभी इसकी तकनीक में सुधार की काफी सम्भावना है.

इसके अलावा इस कार को हाइब्रिड रूप भी दिया जा रहा है जिससे यह कार हवा और ईन्धन दोनों से चल सके.

अभी यह प्रोजेक्ट शुरूआती दौर मे है, लेकिन एक दिन ऐसा आएगा जब भारत की सडकों पर एक ऐसी कार दौडेगी जो हवा से चलेगी. और जब तक यह सम्भव नही होता तब तक आप और हम लखटकिया कार से संतुष्ट रह सकते हैं.

 

टिप्पणियाँ (1)add
...
द्वारा प्रेषित amit , जनवरी 28, 2008
हाईड्रोजन से चलने वाली गाड़ियाँ तो बाज़ार में आ रही हैं; होन्डा, टोयोटा, फोर्ड, बीएमडब्लू, जनरल मोटर्स आदि कंपनियाँ ला रही हैं। smilies/wink.gif

और इस हवा से चलने वाली गाड़ी के दो मॉडल बनेंगे, लंबे सफ़र की सिटीकैट और शहर में चलने वाली मिनीकैट। अधिक जानकारी कंपनी की वेबसाइट पर यहाँ उपलब्ध है
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