Sunday, June 25, 2006

पेले की महानता?

फुटबॉल का बुखार लोगों के सिर चढकर बोल रहा है. इसी बीच मुझे एक प्रकरण याद आया जो मैनें कुछ दिनों पहले एक समाचारपत्र में पढा था. इस लेख में लेखक ने यह बताने की कोशिष की थी कि फुटबॉल के महान खिलाडी पेले अपनी निजी जिन्दगी में भी कितने महान हैं. पुरा लेख पढने के बाद भी मैं सशंकित रहा कि इसमें पेले की महानता है कहाँ? आप ही बता दें:

बात उन दिनों की है जब पेले अपनी सफलताओं के चरम पर थे. दुनिया भर में उनके लाखों प्रशंषक थे. पेले एक बार ऑस्ट्रेलिया क्लब फुटबाल खेलने के लिए गए. वे जिस होटल में ठहरे थे वहाँ काम करने वाली वेट्रेस पर उनका दिल आ गया. वो वेट्रेस भी पेले के पीछे दिवानी थी.

एक बार पेले ने उस वेट्रेस को अपने कमरे में आमंत्रीत किया और वेट्रेस ने भी उसे स्विकार कर लिया. अब पेले दिनभर फुटबाल खेलते तथा रात उस वेट्रेस के साथ बिताते. इसतरह से 15 दिन बीत गए और पेले ऑस्ट्रेलिया छोडकर वापस ब्राज़िल अपने घर पहुँच गए.

घर आकर वे उस वेट्रेस को भूल गए तथा पत्नी के साथ फिर से हंसी खुशी रहने लगे. इसीतरह पच्चीस वर्ष बित गए. पेले भी रिटायर हो गए. एक दिन वे अपने घर के लॉन में बैठे थे कि उनको किसीने "पापा" कहकर पुकारा. उन्होने देखा तो एक लडकी उनके पास खडी थी. उन्होने पुछा तो उस लडकी ने बताया कि वो उन्ही की बेटी है. पेले को यकिन नहीं हुआ तो उसने ऑस्ट्रेलिया, और उस वेट्रेस की बात कही.

पेले के जाने के बाद वो वेट्रेस उन्हे याद करती रही. वो पेले से प्यार करने लगी थी और उनसे गर्भवती भी हो गई थी. उसने आजीवन शादी नही की, तथा पेले का इंतजार करती रही. उसने एक लडकी को जन्म दिया और उसके बडे होने पर उसे बताया कि उसके पिता कौन हैं. साथ ही यह भी हिदायत दी कि उसके जिवित रहते वो उनसे सम्पर्क ना करें, क्योंकि वो नहीं चाहती थी कि पेले किसी मुसिबत में पडे.

पर उस वेट्रेस के निधन के बात उसकी बेटी ब्राज़िल अपने पिता के पास पहुँच गई थी. पेले को यकिन नही हुआ और उन्होने निजी जासुस की मदद से सत्य की खोज करवाई. अंत में वो लडकी सही साबित हुई. तब पेले ने उसे अपनी बेटी के रूप में स्विकार किया तथा अपनी जायदाद में हिस्सेदार भी बनाना चाहा. लेकिन उस लडकी ने मना कर दिया और कहा कि उसे सिर्फ पिता के रूप में उनका नाम चाहिए. और वो वापस ऑस्ट्रेलिया चली गई.


कहानी पुरी फिल्मी है, पर शायद सत्य है. लेकिन बात यह है कि महान कौन? पेले या वो वेट्रेस!!

3 Comments:

SHUAIB said...

माफ करना भाई, यहां मुझे बताना पड रहा है कि अरब लोग सिर्फ दो चीज़ों के दीवाने हैं - एक फुटबाल दूसरा लडकियाँ

9:08 PM, June 25, 2006  
ई-स्वामी said...

सचमुच इस मे पेले की महानता का कोई सवाल ही नही है.
याद आया की सितारवादक रविशंकर की पुत्री नोरा जोन्स की कहानी में जरा अलग ट्विस्ट है - वो अपने प्रसिद्ध पिता का जिक्र तक नहीं करतीं और खुद के दम पे स्टार बन गईं!

2:43 AM, June 26, 2006  
Pankaj Bengani said...

शुहैब, आपकी टिप्पणी इस लेख से सम्बन्धित नही है. वैसे काले पानी पर ऐश करने वाले अरबों को मौज शौख के अलावा और चाहिए ही क्या?

9:39 AM, June 26, 2006  

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