Tuesday, July 25, 2006

एक चिट्ठी हिमेश रेशमीया के नाम

पहले एक चिट्ठी अपने स्पाइडरमेन को लिखी थी. उसका नतीजा यह हुआ कि जनाब मार्केट से गायब ही हो गए. अब एक चिट्ठी अपने हिमेश रेशमी-या को भी लिख रहा हुँ. ना भई, मैरे ईरादे सो फिसदी नेक हैं.


प्रिय हेमु,

देखो बुरा मत मानना, हेमु कह रहा हुँ. भई प्यार मोहब्बत भी कोई चीज होती है ना. जब लाखों लोग तुम्हारे दिवाने हैं तो मैने भी तुमको प्यार से नवाज़ना ही श्रेयकर समझा. और सुनाओ क्या हाल चाल हैं? अब यह पुछना कि क्या सब कुशल मंगल है बेमानी होगा. हँसोगे तुम, क्यों? कहोगे, भैया यह सवाल तो तुम अनु मलिक से पुछो. ऐसा लगता है दुकान ही उठ गई. अभी तो तुम छाये हुए हो. जब तब बरसते ही रहते हो. कभी शितल बरखा देते कभी बिजलीयाँ कडकाते दिख ही जाते हो.

पर भैया यह क्या? आजकल ये क्या धुनें दे रहे हो? भई पता है हमें कि निर्माताओं की लाइन जो है वो लम्बी ही लम्बी होती जा रही है. और भई भगवान झुठ ना बुलवाए, घर आए ग्राहक को गाली कौन दे? पर भाई, इत्ती सारी फिल्मे तो साईन कर ली पर उत्ती ही सारी धुनें कहाँ से लाओगे? अब तुम क्या करोगे कि किसी धुन का सिर और किसी और धुन की धड लेकर श्री गणेश करने तो जाओगे पर अंत में कोई भस्मासुर सुर बना डालोगे. वही तो करते हो. अब देखो ना, वो याद है वो गाना.. क्या कहते हैं-

दिल की सुर्ख दिवारों पे... नाम है तेरा तेरा.. नाम तेरा तेरा..

हाँ, गाना बढिया था. धुन भी बढिया थी. पर यह क्या!! अभी अभी एक गाना सुना. पिक्चर है “एंथोनी कौन है”? कोई भी हो, पर यह कहाँ पुछा लोगों ने कि “हिमेश रेशमीया कौन है”? नहीं पुछा ना! फिर क्यों अपनी छाप युँ इस तरह छोडे जाते हो:

इश्क तेरा तेरा... इश्क तेरा तेरा...

ल्लो. यह भी कोई बात हुई. एक ही धुन टिका दी. और लोग टिक लिए.

भाई कुछ तो मौलिकता, नवीनता लाओ. आजकल तो ऐसा लागे है, जैसे तुम किसी गाने का बस पिछवाडा पकड के धोबी पछाड किए जाते हो. कभी नाम तेरा तेरा, कभी इश्क तेरा तेरा, कभी आई लव यु सय्योणी.. आइ लव यु ओ सय्योणी, कभी आहिस्ता आहिस्ता. बस एक ही इस्टाईल. पकडो पिछवाडा और दो पछाड, दो पछाड.

वो तुम ही थे ना दोस्त जिसने, वाह क्या धुनें दी थी “तेरे नाम” में. एक से बढकर एक. पर तब हेमुभैया ने टोपी नहीं पहनी थी. अब जिम्मेदारी बढ गई है. तब केवल हाथ में हारमोनियम था. अब मुँह के आगे माईक भी है. पर भैया टोपी पहने लोगों को टोपी कब तक पहनाओगे? टोपी थोडी देर के लिए उतारो और सोचो. सोचो. कुछ तो नया लाओ मैरे भाई. एक और तेरे नाम हो जाए.

शेष शुभ.

तुम्हारा,
पंकज बेंगाणी

4 Comments:

Sagar Chand Nahar said...

आजकल बनी धुनों पर से तो सन्देह होता है कि "तेरे नाम" की धुन आपके हेमू ने बनाई होगी। कहीं Music Industries में भी Ghost Writing की तरह कोई प्रयोग तो नहीं चलता, जिसमें संगीत कोई अनाम या नया संगीतकार दे और नाम किसी और का प्रचारित हो?

3:47 PM, July 25, 2006  
Nidhi said...

सही मुद्दा पकड़ा पंकज भाई । मैने भी कल-परसों ही देखा एक बॉबी देयोल का गाना शायद । और ये सय्योनी वाला भी । सुनते ही लगा बासी खाने में छौंक लगा के परोसा है । इनका खुद का भी एक गाना आया है । क्या करूँ बोल याद नहीं । हमारे छोटे से मगज में भी सब खिचड़ी हो गया । अब हेमू भाई आपकी सुन लें तो हमारे कानों को भी शांति मिले ।

12:06 PM, July 26, 2006  
Pankaj Bengani said...

बोबी वाला गाना तो मैने सुना नही. पर होगा तो वो भी नकली है. क्योंकि हेमुभैया असली को तो भूले जा रहे हैं

3:09 PM, July 26, 2006  
रजनीश मंगला said...

पंकज भाई, आपकी ये प्रविष्टी मुझे अच्छी लगी, इस लिए यहां डाल दी है। अगर आपत्ती हो तो बताईएगा। धन्यवाद।

2:37 PM, July 31, 2006  

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