Monday, September 25, 2006

नवरात्रि :: "रबर" की बिक्री जोरों पर

नवरात्रि का पर्व कई मायनों में अद्भूत है। दुनिया का सबसे लम्बा चलने वाला यह नृत्य महोत्सव अब गुजरात के बाहर भी अपनी पहचान बना चुका है।

यहाँ गुजरात में तो इस पर्व का उतनी ही बेसब्री से इंतजार किया जाता है, जितनी की पुराने जमाने में औरतें अपने परदेश गए पति का किया करती थी। बच्चे बुढे सभी नवरात्रि के माहौल में रंगे नजर आने लगे हैं। पर शायद जिनको इस त्यौहार की महत्ता का सबसे अधिक अन्दाज है वो है युवा वर्ग।

युँ तो गुजराती समाज काफी आधुनिक होता है, तथा युवा लडकों एवं लडकीयों पर अंकुश कम ही लगाया जाता है, पर नवरात्रि के आते आते तो बाकी की सारी वर्जनाएँ भी भंग होने लग जाती है।

आजकल सुबह होने पर अगर अहमदाबाद के युनिवर्सिटी इलाके में निकला जाए तो कोंडोम के खाली पैक बिखरे दिख जाते हैं, जब तक सफाई कर्मचारी उन्हे उनके नियत स्थान तक ना पहुँचा दें।

पहले नवरात्रि के त्योहार के बाद डोक्टरों की चाँदी हो जाती थी क्योंकि तब गर्भपात कराने के लिए लडकीयों का तांता लगा रहता था, पर अब युवाओं मे जागृति आने लगी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक आजकल इस सिज़न में कोंडोम की बिक्री 50 प्रतिशत तक बढ गई है। अब तो लडकीयाँ भी दवाई विक्रेताओं की दुकान में जाकर कोंडोम खरीदने पर शर्माना छोड चुकी है, जो ठीक भी है।

कई स्वयंसेवी संस्थाएँ इसबार प्रमुख गरबा केन्द्रो पर अपने अपने स्टॉल भी लगा रही हैं, जहाँ उनके स्वयंसेवक युवाओं को एड्स के खतरे से अवगत कराएंगे तथा उससे बचाव के तरिके भी बताएंगे। यह वाकई में अच्छी पहल है। इसके अलावा मोबाईल पर एम.एम.एस. के द्वारा भी एड्स एवं उससे बचाव सम्बन्धि सन्देश प्रसारीत किया जा रहा है।

इस मौसम का भरपूर फायदा उठाने के लिए कोंडोम उत्पादक कम्पनीयाँ कई सारी आकर्षक योजनाएँ भी लेकर आ गई हैं। उनका उद्देश्य भले ही अपने उत्पाद की अधिकाधिक बिक्री करना हो पर इससे युवाओं मे अपनी सुरक्षा को लेकर समझ तो बढी ही है।

3 Comments:

नीरज दीवान said...

ये ख़बर पढ़कर क्या कमेंट करूं भैये. मुझे तो शरम आ गई. ही ही

6:59 PM, September 25, 2006  
Udan Tashtari said...

"कई स्वयंसेवी संस्थाएँ इसबार प्रमुख गरबा केन्द्रो पर अपने अपने स्टॉल भी लगा रही हैं, जहाँ उनके स्वयंसेवक युवाओं को एड्स के खतरे से अवगत कराएंगे तथा उससे बचाव के तरिके भी बताएंगे। यह वाकई में अच्छी पहल है।"

--सही है, जब रोक लगान संभव नही है, तो कम से कम सुरक्षित रहने के उपाय ही बता दिये जायें.

6:59 PM, September 26, 2006  
आशीष said...

अब क्या कहें ?
प्रवीण तोगडीया जी कहां है ?

9:06 AM, September 27, 2006  

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