Wednesday, November 15, 2006

पहले खुद तो कुछ करें

नीरजबाबु ने अपनी बात बहुत सही ढंग से रखी है।

पर उपाय भी तो बताइए। यहाँ हम सिर्फ सवाल ही सवाल खडे कर रहे हैं। हल कोई नहीं ढुंढता। जिस सरकार को ढुंढना चाहिए वो भी नहीं।

क्योंकि किसी की भी प्राथमिकता इन प्राथमिक समस्याओं को लेकर है ही नहीं।

मेरा अभी भी मानना है कि पाँच सितारा विद्यालयों के अस्तित्व में होने का असर सामान्य प्राथमिक स्कूलों पर नहीं पड सकता, बशर्ते सरकार की सोच मजबुत हो, और सरकारी विद्यालय स्तर के हों। यह हो सकता है पर होता नहीं। क्योंकि सरकारी शिक्षकों को पता है कि उन्हे कोई निकाल नही सकता चाहे पढाएँ ना पढाएँ।

यह मेरा निजि अनुभव रहा है, क्योंकि मेरी शिक्षा किसी पाँच सितारा अंग्रेजी विद्यालय में ना होकर सरकारी विद्यालय में हुई थी जहाँ शिक्षक होते थे, बस होते ही थे, करते कुछ नही थे।

पेयजल की समस्या भी दूर हो सकती है, पर कुछ करने का माद्दा तो हो पहले! वर्षा का पानी युँही बह जाता है, क्यों? इससे तो हमारे गाँववाले अच्छे थे, एक बुन्द भी व्यर्थ नहीं जाती थी। आज भी वहाँ वर्षा का पानी सिधे जमीन में बने कुण्ड मे जाता है। शहरों में होता है ऐसा?

सिर्फ विरोध करने से बात नही बनती। हम खुद क्या नेताओं से कम हैं जो सिर्फ भाषण देना जानते हैं। हम करते क्या हैं, समाज के लिए? कुछ नहीं।

पहले खुद तो कुछ करें। पूंजीपतियों की कारस्तानीयों, सरकार की नाकामीयों, वामपंथियों की नितियों, दक्षिणपंथीयों की फुलझडियों से निबट सकते हैं, पर क्यों ना हम यह सोचें की सार्थक क्या कर सकते हैं?

एक अनपढ को पढा नहीं सकते क्या हम? कम से कम अपनी सोसाइटी में पानी के अपव्यय को रोक नहीं सकते क्या हम? मार्ग में थुकने वाले को, कचरा फैलाने वाले को रोक नहीं सकते हम? पत्थर हटा नहीं सकते हम?

पहले खुद तो कुछ करें........

5 Comments:

आशीष said...

युग निर्माण योजना का नारा है

हम सुधरेंगे जग सुधरेगा

11:52 AM, November 15, 2006  
Manish said...

जी सही कहा आपने बिलकुल कर सकते हैं ।

12:18 PM, November 15, 2006  
सागर चन्द नाहर said...

पर उपदेश कुशल बहुतेरे वाली बात है,
कहना आसान करना बहुत मुश्किल।

4:11 PM, November 15, 2006  
Anonymous said...

आशीष ने बिलकुल ठीक कहा;

हम सुधरेंगे जग सुधरेगा

5:33 PM, November 15, 2006  
Amit said...

सही कहा पंकज भाई, सिर्फ़ बात करने से कुछ नहीं होता। जिस दिन लोगों को यह समझ आएगा तभी कुछ होएगा, अभी समय नहीं आया है।

6:55 PM, November 15, 2006  

Post a Comment

Links to this post:

Create a Link

<< Home