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7 अजूबे तो हो गए, अब क्या? |
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मंतव्य
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गुरुवार , , 12 जुलाई |
मंतव्य - पंकज बेंगाणी द्वारा |
न्यू सेवन वंडर्स में अब ताज भी है, यह तो कोई नई बात नहीं और इतनी विशेष भी नहीं. जब यह अभियान शुरू हुआ था तब से लग ही रहा था कि ताज सात अजूबों में स्थान हासिल कर ही लेगा. लेकिन बीच मझदार बात चली कि ताज टॉप 7 में तो क्या 20 में ही नही है, क्योंकि उदासीन भारतीय वोट ही नहीं कर रहे.
और भारत जो कि पूरे विश्व में मोबाइल के बाज़ार का सबसे तेज खिलाड़ी साबित हो रहा है, जहाँ हर महिने लाखों नए मोबाइल आदमी पैदा हो रहे हैं, वहाँ से एस.एम.एस. कमाई ना हो, यह तो अनपेक्षित स्थिति होगी. और बर्नाड वेबर, जिन्हे मै मार्केटिंग के उस्तादों में से एक मानने लगा हुं, को यह कैसे मंज़ूर होता.
तो फटाफट बर्नाड साहब की कम्पनी ने भारत में एक अधिकृत मार्केटिंग कम्पनी नियुक्त की (भास्कर) जिन्होंने ज़िम्मा लिया ताज अभियान को जन जन तक पहुँचा देने का, और देखिए वे सफल भी हो गए. 6 भाषाओं में रहमान से गाना गवा कर, हर दिन अखबार में फलाँना दिन ही बाकी है छाप कर, हर दूसरे दिन ताज की खुबसुरती के कसीदे पढकर, अपने सवांददाताओं को स्कूल स्कूल भेजकर इस समूह ने ऐसा मंतर मारा कि लोग लाखों की संख्या में वोट करने लग गए और ना जाने कितने रूपये स्वाहा हो गए.
मैं सोच रहा था कि इन एस.एम.एसों का हिसाब किताब क्या होगा. तो मेरे सोचने के दूसरे ही दिन भास्कर में छप भी गया कि भाई एस.एम.एस. की कमाई में से 20% तो सरकार रख लेगी, 50% मोबाइल ओपरेटर रख लेंगे, बाकी नए 7 अजूबों वाली कम्पनी और उसके सहयोगी बाँटेगे तो सही लेकिन वे भी इस रकम को स्मारकों के रख रखावों में खर्च करेगी. सोचिए इससे भारतीय पुरातत्व विभाग को कितनी राहत मिलेगी. अगर यह संस्था सचमुच में ताज की हिफाज़त करने लग जाए तो सरकारी बाबू तो गंगा नहा लें.
खैर वेबर साहब का सात साल का अति सफल अभियान को रोनाल्डो के बिपाशा को चूमने के चांस के साथ ही समाप्त भी हो गया. तो क्या वैबरभाई अब शांति से आराम करेंगे. जी नहीं, न्यू सेवन वंडर्स की साइट पर जाकर देखिए, नई हलचल तैयार है!
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