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उम्मीदों का सूरज लेकर आई पावन रात है |
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कविता
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शुक्रवार , , 09 नवम्बर |
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प्रिति टेलर
श्रीमति प्रिति टेलर वडोदरा शहर में रहती हैं. प्रिति तरकश के लिए भ्रमण वृतांत लिखती हैं.
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उम्मीद की नई किरण लेकर आई है दीपावली ,
तिमिर से तेज तक का नया सफर है दीपावली.
बुझती हुई जिंदगी में आशा की नई किरण है दीपावली,
जिंदगी में ख़ुशियाँ उजागर करती है दीपावली .
निराशा से बुझ रहे दीप में आशा का तेल है दीपावली ,
हकीकतों से नए ख्वाबों तक का सफर है दीपावली .
दुश्मनों से प्यार से गले मिलने का पर्व है दीपावली ,
बिछड़े हुए अपनों से मिलने का अवसर है दीपावली.
सूरज-चाँद -सितारों से भले देदीप्यमान हो साल भर की सब रातें ,
अपने आँगन में दीप बनाकर उन्हें कैद करने की रात है दीपावली .
पटाखों की शरारतें, रंगोली का रंग भरा अहसास,पकवानों की मिठास है दीपावली,
लक्ष्मी पूजन का सुअवसर है तहे दिल से उसका स्वागत है, आज है दीपावली .
अपने सारे ग़मों को विदा कर दो इस बहती हुई रात के साथ ,
आज नई उम्मीदों का सूरज लेकर आई रात है ये दीपावली ....
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