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प्रिति टेलर
श्रीमति प्रिति टेलर वडोदरा शहर में रहती हैं. प्रिति तरकश के लिए भ्रमण वृतांत लिखती हैं.
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बापु
आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिवस है. आज गांधीजी के आदर्शों का देशवासीयों के लिए भले ही महत्व ना रहो परंतु गांधी शब्द आज फिर से जनचेतना का परिचायक बन चुका है.
इस पावन पर्व पर प्रस्तुत है श्रीमति प्रिति टेलर की यह कविता. प्रिति टेलर मूलत: गुजराती हैं, तथा हिन्दी में नही लिखती हैं. लेकिन विगत कुछ दिनों से हिन्दी लिखने का प्रयास कर रही हैं. इस कविता में उन्होने अपनी मनोवेदना व्यक्त की है.
चलो आज एक और गाँधी जयंती मनाते है ,
तस्वीर पर उनकी फूल माला चढाते है ,
दिया जला कर सामने उनके, अगरबत्ती जलाते है,
फ़िर गाँधीटोपी पहनकर दो हाथ जोड़ शीश नमाते है.
गाँधीजी आपने भेंट दी थी हमें आज़ादी की,
अपनी सहूलियत के हिसाब से हम ये बात भूलाते है,
इस शुभ अवसर पर आज..
सिद्धांत आपके आपकी तस्वीर में ही रखकर,
उसे भी स्वर्गस्थ बनाते है
आज हमारी वफ़ादारी जुड़ी है गाँधी आदर्शों से नहीं, सिर्फ गाँधी नाम से ही ,
आदर्श आपके उच्च थे, पर हमारे लिए तो हैं मात्र नाम ही.
आपके इशारे पर चल दिए लाखों जवान गोली खाने अंग्रेजों की ,
अब भले अँग्रेज़ रहे नहीं पर गोली खाते है सब आतंक की बंदूकों की.
आज देश के सेवकों की जान जनता की जान से बहुत कीमती है,
जेड ग्रेड सुरक्षा प्राप्त है उन्हें, धमाकों में जनता मरती है क्योंकि सस्ती है.
बदलते वक्त का तकाजा है शायद ,
स्वार्थ के लिए सिद्धांत को ताक पर रखते है,
आप शहीद हो गए देश पर,
हम आपके सिद्धांतों को शहीद करते हैं.
फ़िर भी धन्यवाद कहेंगे आपको, जो उपलब्धियाँ हमने पायी है,
उसके लिए आज हम आपको ही देते बधाई है.
बधाई क्योंकि मानसिक गुलामी में भी देश ने तो आज़ादी पाई है,
ये तो आपकी ही नेमत है हमारे गाँधी जिसने हमें आजादी दिलाई है.
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