Friday, November 24, 2006

हे हे चिम्पू पंकजभाइ को क्या तोहफा दे?

अब जब पंकजभाइ सब के जन्मदिन पर उनको बधाइ देने के लिये एक पूरा “तरकश विशेष” बना डालते है तो स्वाभाविक है उनके जन्मदिन पर ब्लोग जगत मे हर कोइ कुछ ना कुछ तो लिखेंगे ही। मुझे यह भी पता है जो भी बधाइयॉ आयेंगी सब कोइ तारीफ ही करने वाला है। तो मैने सोचा मैं पंकजभाइ की थोडी लगा लेता हूं! दर असल चिंम्पू यानि आपके पंकज बेंगाणी को मारना चाहिये। अरे भाइयो, रूको तो सही मारने दौडे। मैं तो बड्डे बम्प्स की बात कर रहा हूं! वेसे पंकजभाइ हफ्ते मे 4 दिन बीमार रहते है। पहले दिन उनको एलर्जी होती है, फिर सर्दी-झुकाम, सिर दर्द तो शायद आसाम से उठा ले आये है। यही क्रम मे यह सब चलता रहता है। अब बोलो इन्हे वडा पाउ खाने से भी कुछ बीमारी आ जाती है! “अरे मेरे लिये वडापाउ एकदम “माइल्ड” लाना” फिर जब भी मै “माइल्ड” वडापाउ लेकर आंऊ तो भी “बहुत तीखा है” बोलते रहते है। हमेशा बात चीत करने के लिये उत्सुक रहते है।

वैसे मारवाडी है लेकिन पैसे बनाने कि चाह कम लगती है। मैं उनको “सेवा” करते देखता रहता हूं और चिढाता रहता हूं। वो सबकी सेवा करने मे और ग़ूगल टोक पे सब के साथ खपाने मे दिन का 35% समय देते है। दूसरा 20% समय “तरकश” मे जाता है। मै जब उनकी ओफिस मे जाता हू तो मेरे साथ चर्चा मे 10% समय जाता है। 5% समय घर जाकर खाने मे, और अगर वो दिन हफ्ते के 4 बीमार होने वाले दिन मे से है तो दूसरे 15% समय बीमारी को गालियां देने मे जाता है!

अरे हां, बाकी का बचा हुआ समय वो अपने काम पर भी देते है। वेसे वेब डिजाइनींग का काम अछ्छा कर लेते है । कुछ बार मिडीया जगत और न्युज़ की साइट्स पढते रहते है। वेसे “छवि” मे दोनो भाइ “तरकश” और “नारद” पे बहुत समय देते है। “नारद” तो इतना प्रिय है दोनो को की बिच मे “नारद” मे चल रहे प्रोब्लेम्स के चलते जब मैने तरकश पे नारद जेसा नया एग्रीगेटर बनाने का प्रस्ताव रखा तो वो बस्ते मे चला गया। बोले नारद मे बहुत महेनत लगी है उसका कोम्पिटीटर खडा नही करना। अब मै बोला इतने सारे हिन्दीभाषी है सबके लिये इनफ स्पेस है मार्केट में। मैने कहां ठीक है तो एक कुछ इ-सामायिक जेसा शुरु करते है। तो “निरंतर” बीच मे! मैने कहां “निरंतर” मे आने वाले आर्टीकल्स से अलग भी बहुत सा कंटेट है। कुछ प्रतियोगीता का आयोजन करके नये लोगो को लाते है हिन्दी जगत मे! आखिरकार अब हम नारद के एक्लुसिव वर्ज़न जेसा “लिमिटेड” ब्लोग वाला एग्रीगेटर लाने की तैयारी करने लगे! अब जाकर प्रतियोगीता के आयोजन के साथ इ-सामायिक की बात चली है। वेसे अब चिम्पू व्यवसायिक होने लगे है । तरकश पे एडवर्टाइज़मेंटस लाने के लिये महेनत कर रहे है। शायद प्रतियोगिता के लिये स्पोंसर्स भी मिल जायेंगे। वैसे चिम्पू गुजराती नही है लेकिन साले कोइ भी टोपिक पर गुजराती से ज्यादा गुजरात गुजरात लगा देते है। मोदी भक्त है।

“तरकश” पे 200 विज़ीटर आये थे पहली वार तो खुश खुश हो गये थे! बोले “तरकश” सुपर हिट को गया! मैने कहां, जाओ छत पे जाके नाचो! 3-4 लोग कोमेंट देते है तो खुश हो जाते है, जबकी मै हमेंशा ज्यादा हिटॅस लाने के चक्कर मे रहता हूं, लेकिन कुछ काम नही करता! “तरकश” मे नया सुडोकु डाला। मुझे फोन किया, “तरकश” मे नया विभाग सुपर हिट!! मैने कहां कैसे भाइ? बोले सब लोग पागल हो गये है, बोलते है जबरजस्त है। मैने बोला कितने लोग पागल हो गये? बोले मेरे को गूगल पे सब बता रहे है। अब उसमे से आधे तो हम तरकश टीम वाले होंगे! मैने कहां, घंटा हिट हुआ है! साला अपने तरकश टीम वाले बोले के अछ्छा है तो सुपर हिट थोडी हो गया! तो कभी बोले ये आज का आर्टीकल सुपरहीट! क्यो भाइ? बोले जीतूजी, सुनिलभाइ, अनुपभाइ, देबाशिष इन सब ने तारिफ की! मै बोलु वो तो घर के हुए अब! साले कुछ नये लोग लाओ अपनी तारिफ करने के लिये। जेसे मै थक गया आपकी तारिफ करते करते वेसे ही यह सब भी थक जायेंगे। वेसे समीरलाल की भी डेरिंग है! अभी तक पंकज भाइ की तारिफ कर रहे थे! खेर अब जब “तरकश” काफी हीट हुआ है और थोडी बहुत एड भी लाने लगा है तो लगता है हमारी धीरज काम करेगी। अभी भी कमाइ तो नही हो रही कुछ खास लेकिन हिटस बढ गयी है। वेसे पकंजभाइ एक ट्युबलाइट है “कुछ” चीजो मे और ज्यादातर मे फास्ट केचअप करते है। अरे साब, आप को अंदर की बात बताउ तो पूजाभाभी भी पंकजभाइ की खिंचाइ कर लेती है! वेसे मेरा दिमाग खा गये है, धूम 2 का रिव्यु लिख रिव्यु लिख रिव्यु लिख! ठीक है तो धूम 2 का रिव्यु आपको कल मिल जायेगा। बड्डे गिफ्ट समजना! साला मेरा मेसेंजर पूरा इससे भर दिया। बहुत कमीने पब्लिशर है। हां बताना भूल गया, मुझे एडवांस मे बड्डे पार्टी मिल चूकी है! बोलो क्या मिला होगा? हे हे, “वडा पाउ”!

हथौडा
तो इन्हे क्या तोहफा देना चाहिये?
1. एनासिन । अरे नही यार कम पडेगी एक दवाइ! दवा की दुकान ही देते है ।
2. “सेवाभावी आदमी ओफ दी यर” एसा कुछ अवार्ड?
3. “तरकश.कोम” का मार्केटिंग करके कुछ हिट्स ज्यादा दे ताकी चिम्पू खुश हो जाये?
4. हे हे, इसे क्या तोहफा देना! उल्टा पार्टी मांगो!

मै तो धूम 2 का रिव्यु लिख डालता हूं! पीछा भी छूटे और गिफ्ट भी दे सकू!

Sunday, August 13, 2006

क्युबा: अमेरिकन मार्केटिंग शुरु

अब क्युबा के मुखिया फिडेल कास्ट्रो अस्पताल मे क्या गये, अमेरिका ने अपना मार्केटिंग शुरु कर दिया। वेसे बहुत कम देश अमरिका के सामने खुद्दारी से खडॆ रह सके है। क्युबा तो करीबी पडोसी होने के बावजूत अमरिका अपने दुश्मन Castro का बाल भी हिला नही पाया। अमरिका ने सोवियेत संघ जेसे बडे देश की बेंड बजा दी लेकिन Cuba वही रहा। अब जब फिडेल कास्ट्रो 80 साल की उम्र मे अस्प्ताल मे ओपरेशन करा रहे है, अमरिका अभी से क्युबा के भविष्य के बारे मे सोचने लगा है। सही बात है वेसे।

कास्ट्रो ने अपने भाइ राउल कास्ट्रो को अपनी जगह क्या बिठाया, कोंडोलिज़ा राइज़ ने cuba को लोकशाही अपनाने की अपील कर दी। Florida मे बसे क्युबा से भागे लोग खुश हो गये और प्रार्थना करने लगे की कास्ट्रो अस्प्ताल मे ही दम तोड दे। इसी बात का फायदा वेसे अमरिका का नया विरोधी वेनेज़ुएला भी उठा रहा है। उसके प्रेसिडेंट और बुश के विरोधी ह्युगो शेवेज़ भी क्युबा मे कास्ट्रो का जन्मदिन मनाने पहुच गये है। देखते है कास्ट्रो के बाद अब क्या होता है।

हा, वेसे इसाइ मिशनरी लोग भी इस मौके के तलाश मे थे की कब कास्ट्रो जाए ओर वह क्युबा मे जाकर अपने धर्म का मार्केटिंग करे और वहा के चर्च की हालत सुधारे। देखा, आप सोच भी नही सकते, उतनी स्पीड मे अमरिकावालो का दिमाग चलता है। इसी बात से तो हम इंप्रेस है! This is known as Evangelism.


हथौडा

"वेसे इतने दिन क्युबा अमरिका से बचा केसे रहा? ""क्योकि क्युबा मे Oil नही है!"

Saturday, August 12, 2006

मेरा चिंतन : कितने रुपये वसूल होंगे कभी अलविदा मे से मेरे?

अब मैं तो फस चूका हूं। मेरी टिकट आ चूकी है, लेकिन सब इस फिल्म को बकवास बता रहे है। आशा है की पहेले से ही नेगेटीव दिमाग लेके जाउंगा, तो फिल्म पसंद भी आये!! मेरे 70 रुपये तो निकलेंगे ना??


अगर आपको फिल्म अंत तक कंफ्युज़ करती है तो सभी बडे कलाकारो ने घटिया एकटिंग की होगी! या तो करण जोहर को अपने सेट पर हंसी मज़ाक कम करके कुछ सिरीयस माहौल बना कर काम करना चाहिये। खेर, वो खुद समज जायेंगे इस फिल्म के पीटने के बाद!!


26 जनवरी को देखी हुइ "रंग दे बसंती" तो मुझे पसंद आयी थी, अब 15 अगस्त को देखते है क्या होता है! वेसे इस साल की सबसे बढिया फिल्म "गेंगस्टर" है। बहुत ही अफलातून फिल्म। इस फिल्म मे गेंगस्टर शाइनी आहूजा, देश का दुश्मन है, फिर भी अंत मे अगर उसे जीता ते तो कोइ गम नही होता, अगर भारत सरकार का अफ्सर इमरान हाश्मी जीतता तो भी कोइ गम नही होता। लेकिन अंत आया ओर मजेदार ढंग से!! इस फिल्म को मै मेरी अब तक की सबसे पसंदीदा फिल्मो मे शामेल करूंगा।

Sunday, July 16, 2006

जनरल मुशर्रफ को खरीद लो..

जानता हूं की पाकिस्तान को ज्यादातर लोग नफरत ही करते है, अगर प्यार करते है तो केवल थोडे समय के लिये। लेकिन यह मुंबइ ब्लास्ट के बाद मैं भारत और पाकिस्तान की स्ट्रेटेजी समजने की कोशिश कर रहा था। तकरीबन 9/11 के बाद से हमारे मिडीयावाले यह छापते आये है की मुशर्रफ की तो अब अमरिका बजायेगा। लेकिन हुआ उल्टा, अमरिका ने मुशर्रफ की मदद ली और उनके सैनिक शाशन को मूक रूप से मान्यता दी। फिर हमारे मिडीयावाले बोले, अब परवेज़ मुशर्रफ को उनके ही देश के तालिबान समर्थक मुस्लिम उडा डालेंगे क्योकि मुशर्रफ अमरिका की गोदी मे बैठ गये है, और उनपे कुछ हुमले हुए भी सही। फिर नयी कल्पना आयी, की मुशर्रफ के सैन्यवाले अफसर ही उनको मार डालेंगे। यह कल्पना इतनी प्रचलित हुइ की हम लोगो ने अगर मुशर्रफ जाते है तो पाकिस्तान के परमाणु बम आतंकीयो के हाथ मे जाने से रोकने के लिये भारत और अमरिका का पाकिस्तान पे हुमला भी कर दिया!! यानि हमने मन ही मन मे यह मान लिया था की मुशर्रफ के हाथ मे परमाणु बम सेफ है।

अब इधर देखिये, एक सैनिक, जो illegal रूप से पाकिस्तान की सरकार चला रहा है, भारत पे कारगिल युध्ध का आर्किटेक्ट रह चुका है, उसके सामने हम बारबार दोस्ती का हाथ फैला देते है, फिर एक धमाका होता है और हम बोलना बंध कर देते है। फिर 6 महिने के बाद दोस्ती। फिर धमाका.....
हर बार यह आदमी कुछ ना कुछ एक्स्टेंशन ले जाता है अपने प्रमुख बने रहने के लिये। 2001 की पाकिस्तान की देवालिया हालत से आज 6% से ज्यादा का विकास दर ले आने के लिये मुशर्रफ ने दुनिया से अछ्छी सौदेबाजी की है। हमसे भी।


अब जनरल मुशर्रफ, चीन के साथ भी अछ्छे दोस्त है। अमरिका के साथ भी पटती है। अमरिका और चीन हरीफ है। बहुत कम देश एसे है जो इन दोनो देश के साथ गहरी दोस्ती लंबे समय से चलाते आये है। ताइवान और नोर्थ कोरिया को सिर्फ चीन के साथ पटती है तो जापान को अमरिका के साथ। पता चला कुछ? पाकिस्तान अमरिका के कट्टर दुश्मन नोर्थ कोरिया को परमाणु बम बनाने मे मदद करता है और तालिवान समर्थक लोगो के होने से अमरिका उसे भारत जेसी न्युक्लियर डील ओफर नही करता, लेकिन इससे रुठ कर जनरल F-16 प्लेन का सालो से रूका हुआ सौदा फिर से करवाने का प्रयत्न चालू करते है। पाकिस्तान की फौज मे चीन के भी प्लेन और मिसाइल्स उतनी ही मात्रा मे है जितने अमरिकी हथियार।

हमलोग यह सोच के खुश होते है की चीन और अमरिका पाकिस्तान को बच्चा समज़कर मदद कर रहे है और हमे एक मजबूत हरीफ सोच कर डर रहे है और अपना फायदा देख कर हमे बार्गेन दे रहे है। लेकिन भाइ, एक बम सिर्फ एक बम से, हमारी पेंट मे सुसु हो जाता है। पाकिस्तान एसा देश है जिसके पास कुछ ना होने के बावजूद येन केन प्रकारेण वो पूरी दुनिया से कुछ ना कुछ ले लेता है। और हम हमेशा की तरह प्रतिक्षा करते रहते है की पाकिस्तान की यह ब्लेकमेलिंग से दुनिया कल उब जायेंगी। वो कल कब आयेंगी?


दर असल, हमारे इतिहास पर से यह मान लेना चाहिये की हम स्वभावगत थोडे कमजोर और कायर है। इसे आप हमारी अछ्छी सहनशीलता का सुवर्ण नाम दे सकते है। इसी शब्द की बजह से हम कश्मीर को चीन और पाकिस्तान को दे चूके है और चीन से 1962 का युध्ध हार चूके है। 1965-1971 का युध्ध तो जीतना ही था, क्योकि पाकिस्तान मे इतनी तो औकात नही है की वो बडे देश को हरा सके। लेकिन वो कोशिश चालू रखता है। कारगिल युध्ध मे पाकिस्तान की जीत बताउंगा। उसने क्या खोया इसमे? कुछ सैनिक ही। लेकिन हमने तो आत्मसन्मान खोया। इतने बडे पैमाने की घूसपैठ के बारे मे हमे बहुत देर से पता चला और हमारे भी बहुत सैनिक मारे गये। अगर हम एसे ही कायर रहे तो पाकिस्तान धीरे धीरे छोटी छोटी जीत दर्ज करवाता जायेगा।

अब देखो, अभी लेबेनोन मे हिजबूल्लाह ने 3 इसरायीली सैनिको को बंदी बनाया, और इसरायेल ने बिंदास लेबेनोन के सिविल एयरपोर्ट पे हमला किया, लेबेनोन का कोइ कसूर नही फिर भी (सिर्फ उसपे आरोप है) । हम तो कारगील युध्ध मे भी पाकिस्तान तो छोडो, POK भी हमला नही कर सके!! अमरिका एक 9/11 के बाद अफघानिस्तान को बदल सकता है। सिर्फ शक के आधार पर इराक को काट सकता है। और हम पक्की जानकारी होने के बावजूद एक दाउद को पाकिस्तान मे से उठवा नही सकते!!!और हमारे मुलायम यादव सिमी को सपोर्ट करते है जिसके सामने पुख्ता सूबूत है!!


हथौडा

हमे जनरल परवेज मुशर्रफ को अपना प्रधानमंत्री बनाना चाहिये। सोचो अगर वो आदमी पाकिस्तान जेसे कंगाल देश को अछ्छा सौदा दिलवा सकता है दुनिया से, तो हमे तो कितना फायदा दिला पायेगा?? क्या ख्याल है?

Tuesday, June 27, 2006

गुरु घंटाल अरूंधती रोय

अक्षय कुमार ने सिखाये हुए इस भव्य शब्द “गुरु घंटाल” का अब जाके सफल प्रयोग हुआ है!! अब ये अरूंधती रोय को गाली देना चाहता था, लेकिन स्वंय को सेंसर्ड कर लिया। -----, ----, --- ये सब जगह आप भर सकते है इस मानुनी के लिये जो की सबसे बडी धोकेबाज और जालसाज “देवी” है। देखा मै इनको कितना सभ्यता पूर्वक गालियां दे रहा हूं!


दर असल “वन आइटम वंडर” मिस रोय, जो अपनी “GOD OF SMALL THINGS” नामक पुस्तक से प्रसिध्ध हो गयी, वो इतने आसमान मे उडने लगी की खुद को भी “GOD OF SMALL (POOR) PEOPLE” ग़िनने लगी। प्रसिध्ध होने की लालच और शायद कुछ एवार्ड जितने की तमन्ना मे यह खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने लगी। मेधा पाटकर जेसी कार्यकर्ता का साथ नर्मदा डेम जेसे संवेदन शील मुद्दे पे देने के बावजूद भी इनको बहुत बार मूंह की खानी पडी है!! ये दिखावा एसा करती है की वोही आदिवासीओ की मसिहां है!(यह पोइंट मार्क किया जाए, माय रिडर लोर्ड)!!लेकिन हर बार बेचारी औरत के विचार के साथ कोर्ट सहेमत नही होता। एक बार तो कोर्ट के आदेश न मानने के जूर्म मे जेल भी जाना पडा था। तो भी गाल लाल करके हंसना पडा था। लेकिन फिर भी घमंड तो था ही। इस बार आमिर खान के नर्मदा मामले मे कूदने से इनको साइड मे होना पडा। क्योकि पब्लिक आमिर का सुनती है, इनको तो जानती भी नही!! अब इस बार कोर्ट ने फिर से इनके विचारो से हटकर नर्मदा डेम का काम चालू रखने का फैसला किया तो फिर से जोर का झटका धिरे से लगा, लेकिन एक बार कोर्ट की निंदा करने की बजह से जेल की मस्त हवा खा चूकी देवीजी इस बार कोर्ट से पंगा लेने से बचती रही।

अब आप सोचते होंगे की बेचारी अकेली औरत पर इतना क्यो जूर्म ढाया जा रहा है?? सिर्फ इसिलिये की आदिवासीयो की इस मसिहा ने कुछ आदिवासीयो की जमीन पे नाजायज़ कब्ज़ा कर लिया है?? तो क्या हुआ? इनका यह करने का हक है! अब मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के पास पिपरीया में तो कोइ थोडी ही घर बनायेगा?? यहाँ तो सिर्फ फार्म हाउस होगा! अब इतनी सेवा करने के बाद एक आदिवासी को तो मिस रोय की फीस चूकानी पडेगी ना?


हथौडा

” क्यो भाइ, इतनी गालियां क्यो दे रहे हो? तो क्या हुआ “GODESS OF SMALL PEOPLE” कहलवाना चाहती अरुंधती रोय PEOPLE को भी अपने किताब के नाम की तरह THING गिने!! समझ मे आया कुछ??”

Tuesday, May 09, 2006

अब क्रिकेट मे अनामत...

कल रात को अर्जुन सिह का फोन आया। वही अनामत वाले मंत्री। मेरे साथ कुछ खास बात करना चाहते थे। दर असल बहुत से बडी पर्सनालिटीस मुझे अकसर फोन करके परेशान करती रहती है। क्या करे लेकिन, मुझसे भी अमीरो के दुख दर्द देखे नही जाते। इसिलिये मै उनकी काफी मदद करता हूं।

अब जब अर्जुन ने मुझे फोन किया तो मुझे लगा शायद लंगूर को नोलेज कमिशन की राय पे कुछ बात करनी थी। कल साम पित्रोडा वाले 8 सदस्योवाले कमिशन ने अनामत का 6-2 से विरोध किया था। लेकिन अर्जुन जिसका नाम! कोइ परेशानी नही लेनेकी। बल्के देनेकी। मुझे बोले," रवि क्रिकेट में अनामत आना चाहिये। क्या ख्याल है?" मै भी सोच मे पड गया..साला इतने धांसू विचार इसके दिमाग मे कैसे आते है?? "सचिन, द्रविड यह सब से अब पूरा भारत उब चूका है। अब टीम मे पछात वर्गो को लाना चाहिये। उनको भी तक मिलनी चाहिये। " मैने कहा, " ठीक है। आपने कुछ ओर भी सोच ही डाला होगा तो बताही दिजीये" उन्होने बताये कुछ नियम लिख रहा हूं:

क्रिकेट में क्वोटा सिस्टीम
1. SC, ST, OBC के लिये अबसे बाउंड्री 15 यार्ड छोटी रहेगी ।
2. एक चोक्का अब्से इनके लिये छ्क्का कहेलायेगा।
3. अगर वो एक टप्पा खालेने के बाद भी गेंद पकडे तो भी सामने वाला सवर्णँ आउट।
4. उनका एक छक्का अब से आठ रन देगा।
5. वो 5 बोल की ओवर डाल सकेंगे।
6. अपने स्कूल की टीम मे 25 रन स्कोर करने वाले OBC को भारतीय टीम मे जगह मिलेंगी।
7. इन लोगो के 60 रन बराबर = 100 रन ।
8. अगर लोग इस सब बातो का विरोध करेंगे तो उनकी अलग टीम बनायेंगे जिसमे उनको 60% मेच में पहेले से ही जीत दी जायेगी। यानि मेच की जीत पर 60% अनामत।

अब आगे मुझे सोच कर बताना है। आप भी अपना दिमाग लगा सकते है। लेकिन मुझे नही लगता की कोइ बंदा अर्जुन सिंह जीतना अछ्छा भेजा रखता हो।

हथौडा
" अर्जुन सिंह दिन मे केवल 3 दिन अपनी पत्नी के साथ बिताते है। क्यो? बाकी के दिन SC, ST, OBC जेसे वर्गो के लिये अनामत है"

Tuesday, April 04, 2006

कोकरोज पुराण : मेरे साथ हुइ एक खतरनाक साजिश

यह लेख लिखने के लिये जिम्मेदार मैं नही पर एक कोकरोज़ है। हा, लिख तो मैं रहा हुं पर मेरे पास से यह कर्म कराने के लिये जिम्मेदार कोकरोज़ ही है। दर असल हुआ यु की आज अचानक मुझे मेरे शर्ट के अंदर कुछ घूमता हुआ महेसूस हुआ। अब साला वेसे तो मुझे खुद की प्रशंषा करने की आदत नही है लेकिन मै बहुत बहादुर हु। एक साथ दो-तीन लादेन को टपका डालने की औकात है मेरी। कभी कबार मनमोहन सिंह फोन भी कर डालते है दाउद को पकडने मे उनकी मदद करने के लिये, लेकिन मै आज कल बहुत व्यस्त रहता हुं। हा तो मैं यह कह रहा था की इतना बहादुर होने के बावज़ूद कुछ समय के लिये डर – नहीं नहीं डर नहीं- थोडा सा हिल गया था। वो क्या है की कोकरोज़ के साथ लडाइ लडने की आदत नहीं डाली अभी तक। अब प्रॉब्लम वहा हुआ की कोकरोज़ मेरे शर्ट के अंदर, मेरी सलमान जेसी बोडी पे रेंग रहा था (या रेंग रही थी??) वह भी डर गया था या पता नही मेरा शरीर उसे जर्मनी के हाइवे जेसा लग रहा था तो साला निकले ही नही।

अब मेरे सारे दोस्त मेरे सामने बेठे थै। उससे भी बडा प्रॉब्लम की उनमे लडकिया भी थी। अब अगर मैं शर्ट निकालु और सारी लडकिया मेरी बोडी पे फिदा हो जाये ओर कुछ ना करने का कर बेठे तो? मेरा तो ठीक, लेकिन दूसरे लडके तो शर्म या जेलसी के मारे मर ही जाए ना? इसिलिये मैं सिर्फ थोडा बहुत हिला, शर्ट का “इन” पेंट मे से निकाला और कुछ बार शर्ट को झटकाया। लेकिन वह कोकरोज़ निकली ही नही बहार।


लेकिन मैं ही क्यो??
वेसे मेरे दोस्त का मानना था की वह नर कोकरोज़ था और बहुत बहादुर था। इसलिये मुज पर बिन्दास घूम रहा था। लेकिन मै इन कोकरोजो को अछ्छी तरह से जानता हुं , बहुत डरपोक होते है। अब यह अगर नर कोकरोज़ था तो साला वो अपनी गर्ल फ्रेंड कोकरोज़ को इम्प्रेस करने के लिये मेरे पर घूमने तो लगा लेकिन बाद में उसकी 100% फट गयी होगी(पतलून)। मेरा मानना है की यह मादा कोकरोज़ का ही काम हो सकता है क्योकि इस दुनिया के सारे प्राणी जानते है की मै लडकियो पे हाथ नही उठाता। पैर के बारे मे क्लेरिफिकेशन किसी ने मांगा नही है। इसलिये कोकरोज़ मेरे बोडी पे घूमती रही होंगी, अपने सारे बोय-कोकरोज-फ्रेंड को इम्प्रेस करने के लिए।

मुझे दरअसल डर नही लग रहा था लेकिन अजीब सी चूभन हो रही थी। नही आता यकीन? ठीक है। एक बार ट्राय कर लो। मगर आपमें एसा कुछ भी नही की कोइ कोकरोज़ आपपे घूमने को आये। दरअसल मैने पिछले जन्म मे बहुत पूण्य किये थे।

बहुत बडे ज्योतिष का भी कहना है की जिनके नसीब में राजयोग हो, जो पूरे दुनिया को दुख में से मुक्ति दिला सकता है, उसके शरीर पर यकायक कोकरोजो के बादशाह आकर घूमेंगे और गुप्त शक्ति प्रदान करेंगे। यह घटना लाखो सालो मे एक बार होती है। यानि वो महान आदमी मै हुं।

अब मेने ज्योतिष से कह कर पूजा करवाली है आप सबके लिये। आप को सिर्फ आप के शरीर पर सुबह 10 मिनट तक, हररोज़ नर कोकरोज़ और शाम को 10 मिनट तक मादा कोकरोज़ को घूमने देना है। यह विधि सिर्फ 2 महिने तक करनी है। इससे आपकी सारी मनोकामना पूरी होंगी। शुरु करदो नर और मादा कोकरोज़ ढूंढना।

क्यो कोकरोज यह विधि करते है?

दरअसल ब्रम्हा का प्रिय प्राणी इंसान नही बलकी कोकरोज़ है। सारे इंसानो से उम्र मे यह प्रजाति बडी है। बडे बडे डायनासोर को यह अपनी गोदी मे खिला चूके है और उनके शरीर पर घूमते थे। जब इनको डायनासोर से अनबन हुइ तो ब्रम्हा ने डायनासोर को ही हटा दिया और इंसानो को भेज दिया, ताकी कोकरोज़ उनके बोडी पे खेल सके। है ना जोरदार जेक ब्रम्हा से? अब मुझे इंसान और कोकरोजो के बिच वार्तालाप करने के लिए कोकरोज बादशाह (शायद रानी) ने सिलेक्ट किया है। इंसानो के दवाइया छिडक कर पिछे से हमला करने पर यह काफी खफा है। उनको मेरे जेसे बहादुर इंसान जो उनको पैरो से रगडते है वह पसंद है। अब मै उनके साथ सिज़-फायर कर दूंगा, ताकि पूरी इंसान प्रजाति बची रहै। ओर खून ना बहे।

लोजिक – 2
शायद उसे मेरी सुपारी मिली हो तो?

लेकिन यह भी हो सकता है की वह कोकरोज़ मुझे मार डालने के लिए आया हो। क्यो नहीं हो सकता? मुझे सिर्फ बहेकाने के लिये यह ज्योतिषी को पैसे खिला दिए हो तो? या फिर ज्योतिष को इतना बोल दिया हो की अगर तु रवि साहब को यह बोलता है की वह बहुत बडे इंसान है और कोकरोज-इंसान समजौते के लिये चुने गये है तो हम सब कोकरोज आप ज्योतिष के घर से निकल जायेंगे। हो सकता है की नही?? अगर कोइ इंसान को कोकरोज उसके घर से निकलने का वादा करे तो उसके इंसान में क्या इंसान किसी भी हद तक नही जायेगा? जायेगा और खून भी करेगा!! कोकरोज तो जा रहे है ना!!

शायद पिछ्ले जन्म में मैने कोकरोजो को मार डालने वाली दवाइ की शोध की हो और यह कोकरोज़ बदला लेने के लिये आया हो तो?

या फिर मै पिछ्ले जन्म मे कोकरोज था और मैने इस कोकरोज़ बादशाह की बेटी को भगा कर शादी की हो तो?

या फिर इसका भाइ मेरे पैर के निचे आकर शहिद हो गया हो?

शायद मेरी ज्योर्ज बुश और मनमोहन सिंह से करीबी दोस्ती की बजह से कोइ दुश्मन मुझे मारना चाहता हो और आर्टीफिशियल रोबो कोकरोज़ भेज कर मुझे मारना चाहे तो?

मेरा शक चाइना पर भी जाता है। उनकी तो कोकरोज़ो के साथ बहुत पटती है। बिन्दास खाते है। लेकिन कोकरोजो को तो चाइना से नफरत होंगी क्योकि चाइनीस लोग कोकरोजो को कच्चा चबा जाते है। तो फिर कोकरोज तो मेरी मदद ही करेगा ना? क्या पता? कुछ मदद करो। कोइ ओर कोंसपिरसी हो सकती है क्या? इसका निपटारा करके मै आपको मेरी एक ओर दुखभरी दास्तान सुनाना चाहूंगा। दर असल सोनिया गांधी हररोज मुझे फोन करके पकाती है और हथौडे मारती है। खेर वो बाद में कभी।

जो भी हो, वह कोकरोज सुंदर और शाही था।

हथौडा
”ये क्या कम था ओर क्या खाक हथौडा! एक बार कोकरोज सिर पर गीरा कर देखो। सब हवा निकल जायेगी। वेसे कोकरोज का हक इस प्रूथ्वी पे हमसे ज्यादा है क्योकि वह यहाँ डायनासोर से भी पहले से रह रहे है और हमारे जाने के बाद भी वह अपना जीवन बिंदास जियेंगे“

Sunday, April 02, 2006

वाह! अब “न्यूज़ वीक” मेगेज़ीन भारतमें

मेरी पसंदीदा मेगेज़ीनो में से एक “न्यूज़ वीक” अब भारत में लोंच हो रही है। आउटलूक पब्लिकेशन समूह के साथ मिलकर अमरिका की यह प्रभावशाली मेगेज़ीन अब यहाँ भी अपने जलवे दिखायेगी।

“News Week” मेगेज़ीन अपने अछ्छे लेखों की वजह से पहले से ही दुनिया मे प्रसिध्ध हो चुकी है। इसके तंत्री भारतीय मूल के फरीद ज़कारिया है, जो मूलरूप से गुजरात से है। यह बहुत प्रसिध्ध इंसान है और अमरिका मे उनकी पहुंच उपर तक है, खास कर के फोरेन पोलिसी मे उनके विचार सभी को सुनने ही पडते है।

“News Week” भारत में अब सिर्फ रू.25 मे मिलेंगी। अभी तक वह यहाँ रू.80 मे मिलती थी। “Out Look” के साथ आप इसे खरीदेंगे तो यह सिर्फ रू.30 मे मिलेगा। मेगेज़ीन के लेख आंतरराष्ट्रीय ही रहेंगे।

हथौडा
”इस मेगेज़ीन का पावर इतना ज्यादा है की एक कोंट्रोवर्शीयल स्टोरी की बजह से अफघानिस्तान मे सेंकडो लोग मर गये। हालाकि ये बूरे समाचार है और “न्युज़ वीक” की लापरवाही है लेकिन फीर भी यह स्टेज तक पहुँचने के लिए बहुत पापड बेलने पडते है।“

Thursday, March 30, 2006

स्युडॉ सेक्युलारिस्ट मतलब? और सिविल कोड पे अछछे समाचार

ये RSSवालो की पूरी एक जनरेशन खत्म होने को आयी लेकिन वह जिस मुद्दे को पकड कर बेठे है की सब धर्मो के लिये सिर्फ एक ही कानून होना चाहिये, वह ख्वाहिश अभी तक पूरी नहीं हो पायी। ज्यादातर खुदको राष्टृवादी और हिन्दुत्व का प्रखर समर्थक बतानेवाले लोगो को यह लगता है की तकरीबन हर पार्टी और अंग्रेजी बोलने-लिखनेवाले पत्रकार हिन्दु विरोधी है। हालाकि ध्यान से सोचे तो पता चलता है की ज्यादातर किस्सो में वह हिन्दु विरोधी नहीं होते। वह सिर्फ मुस्लिम या लघुमती कौम की बातें करें यानि सारे राष्टृवादी उनको, “स्युडो- सेक्युलारिस्ट” या “फाइव-स्टार सेक्युलारिस्ट” करके बुलाते है!! अब कुछ किस्सो में यह सही हो सकता है। लेकिन अब तो यह फेशन हो गयी है की आपने एसे ही कुछ मुस्लिमों के हक मे बात की तो हो गये आप स्युडो सेक्युलारिस्ट।

यानि साला इनका प्रॉब्लम क्या है वही पता नही चलता। अगर गलती से भी कोइ लघुमती कौम को आगे लाने के लिए क्या करना चाहिये इसके बारे में सोचे तो बन गये आप स्युडॉ सेक्युलारिस्ट। मुझे याद है दीपा महेता की “वॉटर” मूवी में बनारस की विध्वा औरतो पे कुछ कहानी थी। वीएचपी वालो ने ये बंध करा दी थी और दीपा एवं शबाना आज़मी को हिन्दु विरोधी बताया था। अगर स्युडो – सेक्युलारिस्ट शब्द तब मार्केट में होता तो शायद वही शब्द प्रयोग होता। क्योकि अब शबाना को यहा गुजरात में वहीं कहा जाता है (वह जाहिरा केस में जाहिरा को न्याय मिले इस लिये कुछ बोली थी और अपने पति जावेद अख्तर के साथ नरेन्द्र मोदी की निंदा की थी।) जब वो इधर कोइ सामाजिक संस्था में प्रवचन देने आने वाली थी तो लोगों ने विरोध करके वह प्रोग्राम केंसल करवा दिया। अब ये लोग जब शबाना मुस्लिमो की बात करती है तो कुछ नही कहते। क्या मुस्लिम कौम के लिये कुछ अलग अनामत या स्पेशियल आर्थिक स्कोलरशिप पेकेज जेसा कुछ शुरू करें एसा बोलना “स्युडॉ सेक्युलारिस्ट” है? है!

अब हुआ ना कंफ्युज़न? साला कोइ स्युडो-सेक्युलर क्यो है? इसलिये की वह हिन्दु धर्म विरोध मे बोला या हिन्दु धर्म में होने वाले गलत रिवाज़ॉ को बहार लाया? या फिर इसलिये की वह कोइ भी लघुमती कौम के बारे में अछ्छा बोला? अभी आप मुस्लिमो के लिये सरकारी स्कोलरशिप की बात करें या हिन्दुओ में विध्वाओ के बूरे हाल पर बात करें तो आप स्युडो-सेक्युलारिस्ट! यानि अगर मुझे अपने को निर्दोष बताना है तो मुझे लघुमती कौम को मिल रहे महत्व या उनकी जनसंख्या से हिन्दु कौम लघुमती में आयेगी उसपर कुछ बोलना ही होंगा।

स्युडो सेक्युलारिस्ट यानि...
एसी मान्यता है की वह खादी के कुर्तो में ज्यादातर पाये जाते है।
एसी मान्यता है की वह अंग्रेजी में ही बोलते है।
एसी मान्यता है की वह हिन्दु विरोधी, मुस्लिमो के हित में बोलते है।
अगर वह हिन्दु विरोधी न बोले फिर भी वह स्युडो है क्योकि वह मुस्लिमो के बारे मे बोलते है। लेकिन हिन्दु लोगों के फायदे के बारे मे कुछ नहीं बोलते।

एसी मान्यता है की यह सब फाइव स्टार होटल में ही पाये जाते है।
एसी मान्यता है जी इन सबको विदेशो से बहुत पैसे मिलते है। (वेसे RSS को भी बहुत मिलते है)
एसी मान्यता है की यह सब पब्लिसिटी भूखे होते है।

उदाहरण : अंगेजी मिडीया के 90% पत्रकार, 90% फेशन डिज़ाइनर्स, शबाना आज़मी, तिस्ता सेतलवाड, जावेद अख्तर, नंदिता दास वगैरह

वेसे इन लोगों को यह नही दिखता की यही अंग्रेजी पत्रकार मुस्लिमो के फतवे पर भी चिंता जताते है और गुडिया की शादी जैसे या निंद में हुए तलाक पर फतवे के सामने भी बोलते है। तब इन चैनलो को मुस्लिम कट्टरवादीयो की गालिया मिलती ही होंगी की "आपने क्यो फतवा ज़ायज़ है या नही उसपे वोट करवाया??" ये तो ज़ायज़ ही है ना!! शबाना आज़मी मुस्लिम औरतो पे होने वाले अत्याचार पर बोलती है तो मुस्लिम कट्टरवादीयो की गालिया खाती है!! मुझे ये पता नही है की हिन्दु कट्टरवादी जेसे मुस्लिम लोग शबाना आज़मी को क्या कहते होंगे? अब न्युज़ चेनलो ने बेस्ट बेकरी- बेस्ट बेकरी बहुत किया तो उसे स्युडो सेक्युलारिस्ट कहा जाता है!! क्यों? मरनेवाले मुस्लिम थे इसलिये या तो हिन्दु मरने वाली जगह के केस को इतना नही दिखाया इसिलिये? याद करो गोधरा मे S-6 जला था उस समय इन्होने पूरा कवरेज़ दिखाया था। अब दंगे हुए तो वजह? पूरा दिन कवरेज़ दिखाया वह!! नही दिखाते तो? स्युडो सेक्युलारिस्ट! बहुत से हत्याकांडो को चैनलो ने बहुत कवरेज़ दिया है जिसमे विक्टीम हिन्दु थे। लेकिन अगर बिहार मे रणवीर सेना दूसरी हिन्दु कौम के लोगों को जला डालती है तो ये चैनलवालो का कवरेज़ भी कम होता है और ये हिन्दु राष्ट्र्वादी तो कुछ बोलते ही नहीं!! अरे खुश हो जाओ बंदो!! चैनलोने आपके लोगों में होने वाली बर्बर लडाइ को नहीं दिखाया! (सबके सब नालायक है...)अब एक मुस्लिम भी ऐसा ही फील करता है अंग्रेजी प्रेस के बारे में, यहाँ क्लिक करो तो सभी हिन्दु राष्ट्रवादीयों की बोलती बंद की प्रेस हिन्दु विरोधी और स्युडॉ सेक्युलर है!

वेसे एक अछ्छी बात , नोबेल प्राइज़ विजेता अमर्त्य सेन ने NDTV पे सिविल युनिफोर्म कोड को अनिवार्यता बताया। (यहा राजदीप सरदेसाइ और NDTV को स्युडो सेक्युलारिस्टो के महाराजा बताये जाते है, जो हिन्दु विरोधी है)

(मेरी पिछ्ली पोस्ट की टिप्पणीयो पर मै नयी पोस्ट लिख रहा हूं। लेकिन रिसर्च में कुछ समय लगेगा। सब लोगों का टिप्पणि देने के लिये आभार व्यक्त करता हूं)

हथौडा
मैं मानता हूं अन्याय होते है और डबल स्टेंडर्ड भी होता है, लेकिन हिन्दु या मुस्लिम दोनो कौम के लोग बगैर सोचे नेता और अपने धार्मिक गुरुओ की बातों में आकर दूसरो को आसानी से नफरत करते है, उतना तो ठीक लेकिन अपनी आंख भी बन्द कर लेते है।सेक्युलर- सेक्युलर का खेल सिर्फ नेता लोग खेलते है और मूर्ख जनता बातों में आ जाती है।

इसे कहते है छप्प्ड फाड नफरत, आंखे बंद करके!!

Monday, March 20, 2006

मैं भी, मैं भी: क्यों मुझे नहि पसंद मेरा धर्म (जैन / हिंदु)

यह लेखमे धार्मिक बाबतो मे टिका टिप्पणी की गयी है, अगर आप की पाचन शक्ति अछ्छी है तो ही पढे। आपकी धार्मिक मान्यता को ठेंस पहुंचे तो मै जिम्मेदार नहि हूं। चाय पीकर संयम से और खुले दिमाग से सोच कर पढे। अगर आप मेरे किसी प्रश्न का उत्तर दे सके तो मै आप का आभारी रहुंगा।

यह लेख सबसे बडा हथौडा हो सकता है। फिर भी आप यह पढे एसी प्रार्थना करता हूं।

यह लेख शोएब के यह विनम्र लेख पढने के बाद उअके जवाब और समर्थन मे लिखा गया है।
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शोएब एवं सभी वाचकमित्रो,

आपके विचार पढके मुस्लिम बिरादर ब्लोगर गुस्सा होंगे तो कट्टरवादी हिन्दु बिरादर ब्लोगर मन मे खुश होंगे और शायद आपके विचारो की तारिफ करे। वेसे तो मै भी आप से सहेमत हूं लेकिन मुझे मेरा धर्म जैन बिलकुल पसंद नहि है। आपने तो इतनी शराफत दिखायी है कि आपने धर्म को लताडा नहि है। मैने तो वह शराफत छोड दी है। हां, मै मानता हूं जिसे जो करना है वह करे इसिलिये मुझे कोइ आपत्ति नहि है कि कौन क्या करता है । शायद इसका रीज़न ये नहि है कि मै लोकशाही के अनुरुप लोगो को अपनी मर्जी से जीने देना चाहता हूं, पर शायद इसकी बजह यह है कि मुझे किसी की परवाह नहि है।

अगर कोइ मुस्लिम मानता है के बकरे को काटने से जन्नत मिलती है तो काटने दो, मेरा क्या जाता है? अगर जैन जेसे धर्म मे मानने वाले लोग यह मानते है कि चिंटी को मारने से या सांस लेने से भी पाप होता है और नर्क मिलता है तो मानो! मेरा क्या जाता है? मै मानता हूं हर कोइ अपने किये गये कर्मो को जस्टीफाइ करने की कोशिश करता है। कोइ मुस्लिम दारू पिता है और बाद मे नमाज़ पढके खुद ही संतोष व्यक्त्त करता है कि अब मेरे पाप धूल गये।

दूसरे धर्मो का पता नहि पर मैने अपने धर्मो मे इतने दंभी, स्वार्थी और बेवकूफ लोग देखे है की मुझे पछतावा है कि मै क्यूं जैन पैदा हुआ? अब जैन मे तो हर चिज़ करने मै पाप लगता है फिर भी लोगो ने अपना अर्थघटन कर लिया है। कुछ जैन संप्रदाय मूर्ति पूजा करते है तो कुछ आप मिंये लोग की तरह मूर्तिपूजा के खिलाफ है! अब एक जैन मंदिर मै जाकर लाइट चालू करके, माइक पे वंदना करके, यह संतोष व्यक्त करते है कि मुझे स्वर्ग मिलेगा तो कुछ “स्थानकवासी” जैन मानते है कि बिजली चालू करने से पाप लगता है और मूर्ति बनाने से बहुत छोटे जीव मरते है इसिलिये पाप लगता है!! यहां दोनो संप्रदाय एक ही भगवान की पूजा करेंगे लेकिन अलग ढंग से। फिर 8 दिन भूखे रहकर यह मान लेंगे कि उनका पाप मिट गया!! यानि आपने 3 खून किये हो या तो फिर लाखो लोगो के रुपिये लूंटे हो फिर भी कुछ दिन भूखे रहने से पाप मिट जायेंगे!

आज इस दुनिया मै कोइ आदमी, कोइ बडा संत भी धर्म कि व्याख्या नहि कर सकता! अगर कर सकता तो आज एक ही साधू के लोग दीवाने होते, इतने सारे साधू की दूकाने न चलती। दर असल यह धर्म- बर्म कुछ नहि है। अगर कोइ नियमो मे इतना दम होता तो आज हर धर्म के इतने संप्रदाय न होते।

अब “जैन धर्म” (जी हा धर्म पे ही) पे मुझे शंका इसिलिये है कि यह धर्म सिर्फ मैदानी इलाको मै ही फैल पाया। क्यो भला? क्योकि आर्कटिक के इलाके मै घांसफ़ुंस मिलता ही नहि है, तो भला एस्किमो क्या खाक खाते?? यानि इस धर्म के मुताबिक बेचारे एस्किमो लोग नर्क मे जायेंगे! वेसे ही 100 करोड चीनी लोग भी। सिर्फ 50 लाख जैन लोगो के ही स्वर्ग मै जाने के चांस है।


वेसे जैनो और हिंदुओ को अकेली गाय पे ही दया आती है। और बना डालते है गाय के लिए गौशाला। क्यों? क्योकि यह बहुत ही सीधा सा जानवर है, जो दूध देता है, किसी को काटता नहि है, धार्मिक महत्व भी है। लेकिन अगर यह लोग इतने ही अंहिसावादी है तो बेचारे शेर, उल्लु, भालू, मछ्छर, गधे या घोडे का क्या कसूर? यह भी किसी ना किसी देव द्वारा उपयोग मे लिये गये थे। तो फिर सिर्फ गाय क्यो?? गाय तो फिर भी लाखो की तादाद मे है। कभी शेर, गीध, उल्लु या घोडे के लिए भी गाय की जितनी गोशाला है, उससे 25% तो आश्रयस्थान बनाओ! नहि... यह लोग उल्लु को घटिया मानते है क्योकि वह कोइ फायदा नहि कराता। अगर आप मानते है कि सांप या नाग आपके सबसे बडे देवता का वाहन है तो फिर उसे देख कर फटती क्यो है?? चलो अगर वह आपको मार ही डालेगा, तो भी खुश होना क्योकि भगवान विष्णु या शिव के पालतू आप की जान लेने वाला है, जिनकी आप पूजा करते हो हर रोज। नहि पूजा तो कुछ अछ्छा मांगने के लिए करते है, भगवान अगर जान लेना चाहे तो वह मेरा भगवान नहि!

यह हिन्दु या जैन लोग सिर्फ एक भगवान के पास मांगकर संतुष्ठ नहि होंगे। अगर भगवान बिज़ी हुए और ना सुना तो? इसिलिए वो ही शंकर के 10 मंदिर, एक ही विष्णु के 2 अवतार, राम और क्रिष्णा के 5 मंदिर जाने के बाद, एक ही पार्वती देवी के 6 रुप वाले 15 मंदिर मे जायेंगे, भीख मांगने या शुक्रिया कहेने। अगर ना मिले तो अमिताभ बच्चन की फिल्मो की तरह झगडने जायेंगे!! फिर व्रत रखेंगे , वो भी फ्लेकसिबल व्रत। फिर कहेंगे “इतना तो चलता है व्रत मे, खा सकते है!!” अब इसे घटिया किसम के दंभी नहि कहे तो क्या कहे?? अगर आप के मुख्य भगवान विष्णु है तो फिर सांइबाबा के पास क्यो जाते हो?? क्या आपको विष्णु पर से श्रध्धा उठ गयी तो एक भगवान को छोड कर साधू की पूजा ज्यादा करते हो? याद रहे, आप समजते हो कि यह साधू आपको भगवान के समीप ले जाने पर मदद करेगा तो वह बडा सट्टा है। अगर वह गलत हुआ तो?? यानि अब आपको 10 भगवान कि तरह 10 साधू के पास भी जाना चाहिये। ज्यादा सिक्योरिटी के लिए! J


वेसे अगर सहि में मुझे 84 लाख हजार अलग अलग रूप मे जनम लेने है तो मै सारे शेर, हाथी , गधे, घोडे और जो भी दूसरे जीव हाथ मै आए उनको खत्म कर देना चाहुंगा। समझ मे आया क्यो? अरे उतने जन्म कम होंगे ना मेरे!! और ज्यादा आदमी पैदा हो रहे है इसिलिये मेरे इंसान बनने की संभावनाए भी बढी है।


वेसे मेरा कर्म के सिध्धांत मे भी भरोसा नहि है। क्योकि यह सिर्फ बहाना है आपके दिल को बहेलाने का, फुसलाने का। कुछ भी घटना घटी और आपको पता नहि एसा क्यो हुआ?? है ना कर्म का सिध्धांत ! यह घटना आपके कर्मो का फल है। क्या?? आप मानते है की आपने बहुत अछ्छे कर्म किये है?? तो भी जवाब हाज़िर है: यह आपके पिछले जन्मो के कर्मो का फल है!! अभी भी कंफ्युज़?? होंगे ही ना क्योकि आपने सुना होगा की आदमी को उसके किये की सज़ा या किये हुए कर्मो का फल इसी जन्म मे मिलता है तो फिर मुझे पिछले जन्मो की सजा केसे मिली?? यही तो है कर्म! यह सब मत सोच मित्र, सिर्फ कर्म किये जा, फल की आशा मत रख ..क्यो सोचता है कि एसा फल क्यो मिला, जो भी मिला खा ले!! यह डिप्लोमेटिक, गोल-गोल बातो मे बहुत लोग गोल गोल घूमते रहेते है। अगर कर्म का सिध्धांत सेट नहि हो रहा हो, तो फिर “जेसी प्रभू की मरज़ी!!”


क्या पिछ्ले जन्मो के पाप की सजा इस जन्म मे नहि उसी जन्म मे मिल गयी थी?? सिर्फ इसी जन्म के कर्म की सजा इस जन्म मे मिलती है और मिलती “ही” है?? और आप नहि समज पाते ये कौन से कर्मो की सजा है?? तो याद रखिये, यह कर्मो की सजा नहि है: यह प्रभु की मर्जी है या तो फिर आपका नसीब है! J
यानि ओवरओल : कर्म का फल = नसीब = प्रभु की मर्जी = प्रभु

अब आप अहिंसावादी है तो याद करके यह बताये: जब लास्ट टाइम एक कुत्ते या बिल्ली ने आपके सामने किसी पंछी या चुहे को मारके खाने की कोशिश की थी तो आपने या आपके दोस्त ने क्या किया था?? शिकारी को मार के भगाया था ? या तो फिर उसे खाने दिया था??अगर शिकारी शेर होता और शिकार जंगली कुत्त्ता होता तो क्या करते?? वोही चीज़ दोहराते?? मुझे नहि सुनना आपका जवाब..सिर्फ सोचो.. क्या यह जीव अपना खाना नहि खा सकते? या आप उनको भी शाकाहारी बनाना चाहते हो?

मै नहि मानता की कोइ गलत काम करता है। जिसको जो सही लगता है वह वो करता है। और उसमे भी जानवर तो कभी पाप करते ही नहि है J! अब वो तो सिर्फ खाना खाते है, सोते है और कुछ रेग्युलर क्रिया करते रहते है। अब इसमे कहा से कर्म का सिध्धांत आया?? कोइ एसा जानवर बताओ जिसने कोइ गलत काम किया हो। क्या आप मानते है की जानवर की आत्मा और आपकी आत्मा एक जेसी होती है ? या अलग होती है? अगर एक जेसी होती है तो क्या वह भगवान मै मानते होंगे?? अगर हा तो आप केसे पता लगायेंगे कि यह गाय हिंदू है? अगर वह मुस्लिम निकली तो?? कोइ फोर्म्युला है आपके पास?? डायनासोर क्या मानते होंगे?? अभी आप सिर्फ जानवरो पे सोचते है, लेकिन मछलीयो का क्या? वाइरस?? क्या उनको भी अहिंसक होना चाहिये?? फिर से, हे कोइ फोर्म्युला?? कोइ साधू के पास क्लेरीफिकेशन?

क्या आप मानते है कि प्रिथ्वी की रचना ब्रम्हा ने फटाक से की थी?? या तो फिर इसाइयो कि तरह ये मानते है कि 6 दिन मे हुइ थी?? तो फिर डायनासोर थे या नहि? अगर नहि थे तो क्या सिधे आदमी पैदा हो गये?? अगर हा तो इतने सारे जीव कहा से आये? यह सब जीव के बारे में कोइ धर्मग्रंथ मे उल्लेख क्यो नहि है? अगर भगवान ने ही बनाया है तो फिर उल्लेख होना चाहिये ना?? या भगवान इंसानो को ज्यादा प्यार करते है? इसिलिये हम किसी को भी मार सकते है? भगवान भी जीव मे भेदभाव रखते है तो फिर इसका मतलब ये हुआ कि हर जीव की आत्मा अलग अलग किसम की होती है। अगर भगवान भेदभाव नहि रखते तो सबकी फिर से, यह सब जीवो का उल्लेख क्यो नहि है? देवियां क्यो सिर्फ हिमालया पे मिलते फूल लगाती है?? आर्जेंटिना मे होते फूल क्यो नहि पहेनती, अगर पुरे विश्व की रचना उनके पतिदेव ने की है तो? शिव क्यो आफ्रिका मे घूमने जाते?? क्या वहा के लोग उनके बच्चे नहि है? क्यो जब हम हिंदु आफ्रिका मे गये तब ही वहा शिव के बारे मे लोगो को पता चला? अगर ब्रम्हा ने सब निर्माण किया है तो वहा भी काले लोग क्यो उन्हे नहि पूजते?

आपको अगर इनमे से एक प्रश्न का भी उत्तर नहि पता या आप कोइ भी कंसेप्ट मे नहि मानते जेसे कि 6 दिन मे या ब्रम्हा द्वारा हम सब जीव की रचना या फिर कुछ और जादू..तो फिर आप मंदिर या चर्च जाना छोड दे। क्योकि इन्ही सिध्धांतो की बुनियाद पर पुरे के पुरे धर्म खडे है। अगर आपको कोइ भी सिध्धांत पे शक है तो आप केसे यह दावा कर सकते है की आप हिंदु, मुस्लिम या इसाइ है? आप सिर्फ स्वार्थी और दंभी है, मेरे जेसे। आपको सिर्फ आपकी या आपके लोगो के सुख का ख्याल है इसिलिये आप मंदिर मे मांगने के लिये पहुंच जाते है, और मिलने पर शुक्रिया कर के भी कहते है की हम पे क्रिपा रखना! आप इसिलिये कोइ अनदेखी ताकत मे विश्वास करते है क्योकि आपको बहुत से प्रश्न का जवाब नहि पता, और आप उसपे अपना कमझोर सा दिमाग नहि लडाना चाहते, इसिलिये न्युटन से पहले तक आप के और मेरे परदादा पेड से सेब गीरने को और सूर्यग्रहण को भगवान की करतूत मानते थे। आज भी बहुत सी करतूत के लिये हम भगवान को ही जिम्मेदार ठ्हराते है, लेकिन जेसे जेसे हमे कुछ चिज़ो का समाधान मिलेगा हम भगवान से उसका नाम बदलकर “ग्रेविटेशनल फोर्स” जेसा कुछ बना देंगे। जिससे कुछ और सवाल मिलेंगे और फिर उनका जिम्मेदार भगवान ही होगा।


मै कोइ धर्म के खिलाफ मार्केटिंग नहि करना चाहता, नहि तो मै नया धर्म खोलना चाहता हूं..क्योकि मै पहले ही बता चूका हू मेरा क्या जाता है? लेकिन मछलीओ के धर्म के बारे मे सोचना और आपकी प्रतिक्रिया मै अगर मुझे मेरे कोइ प्रश्न का हल मिले तो बहुत अछ्छा। FYI: मोरारीबापु डोल्फिन को बचाने के लिए प्रयास कर रहे है, अछछा है, कोइ तो गाय-गाय के खेल से बहार निकल कर किसी और जीव को बचा रहा है।

अस्तु।


हथौडा

इतना बडा काफी नहि है क्या??? और चाहिये?? तो ये लेख 5 बार पढो!!

Saturday, March 18, 2006

मार्च 17 : आयरलेंड मे सेंट पेट्रिक डे

आज याहू के लोगो का बेकग्राउंड हरे रंग का था तो सोचा आज जरूर कुछ पर्यावरण से रीलेटेड दिन होगा। लेकिन जब उसपे क्लिक किया तो पता चला कि यह तो आयरलेंड के संत पेट्रिक के मान मे मनाया जाने वाला दिन है। अब आपके जनरल नोलेज़ को बढाने के प्रयास मे यह पोस्ट लिख रहा हुं । इसी बहाने किसी दूसरे देश की सभ्यता जान सके।

दरअसल यह पादरी पेट्रिक ने आयरीश लोगो को इसाइ धर्म का महत्व समजाया और उनको इसाइ बनाया। इसिलिये तब से आयरीश लोग नया जीवन पाने की खुशी मे धन्य हो कर इस त्यौहार को मनाते है, उस संत की याद मे। इस दिन पे हरे रंग का महत्व बहुत होता है। ऐसी मान्यता है कि पेट्रिक ने आयरलेंड के सारे साप समंदर मे डूबा दिये थे। उनकी अछ्छी पर्सनालिटी और कुछ साप को भगाने जेसे चमत्कारो कि बजह से उनका महत्व बढ गया। वेसे यह संत आयरलेंड के नहि थे और वह संत भी फ्रांस मे बने थे।

ज्यादा जानकारी के लिये खुद ही सर्च कर ले!

हथौडा

वेसे अपने यहा एसे चमत्कारी बाबाओ की कमी नहि है। ना जाने कितने बाबा अपने विशाल भक्त समुदायो को सच्ची राह दिखाते होंगे। किसी को ठेंस पहुचाना नहि चाहता लेकिन ये तो मेरी मान्यता है कि कौए हर जगह काले होते है। सिर्फ हमारे साधु या बाबा या पिर या उनके सेंट, सब लोगो ने पता नहि क्या बडा काम कर दिया लेकिन आज भी सालो बाद भी, सब उनकी पूजा करते है। ये मार्केटिंग नहि तो क्या है? क्योकि आज जो भी उन्हे पूजते है वह सिर्फ उनके उन जमाने मे किये हुए चमत्कारो कि कहानिया सुन कर ही पूजते है।


Thursday, March 09, 2006

Flash + AJAX  ओनलाइन ओपरेटींग सिस्टम: बाय बाय विंडोस??

मुझे लगता है अब मुझे हिन्दी और अंग्रेजी दोनो मे अपना एक तकनीकी ब्लोग शुरु करना पडेगा। आजकल मै Technology से जुडे हुए न्यूज़ बहुत पढ रहा हु तो सोचा क्यू ना कुछ चिज़े लिखी जाए। हालाकि हिन्दी ब्लोगजगत मे इनके कितने खरीददार मिलेंगे उस पर शंका है मुझे, क्योकि अमित, जितु, प्रतिक, इ-स्वामी और हमारे बेंगाणीबंधू तो टेकनोलोजी के बारे मे जानते है और लिखते भी है।

खेर अब मुद्दे पे आता हु। यह साइट देख ले : http://www1.goowy.com/ अब आप देखने ही वाले है यह साइट तो मे इसके बारे मै कम बताउंगा , यह साइट मे रजीस्टर करके आप इसे एक ओनलाइन OS की तरह युज़ कर सकते है। इ-मैल, मेनु, कोंटेक्टस से लेकर बहुत सी चिजे कर सकते है। अब यह साइट flash script का प्रयोग करती है। अब जिनको नहीं पता उनको बताता हु पडदे के पीछे का कमाल। आजकल AJAX तकनीक बहुत चर्चा मे है। माइक्रोसोफ़्ट ने तो AJAX पर बडा दांव खेलते हुए अपनी एक नयी ब्रांड ही लोंच करदी। यही नहि, उसने दुसरी भी एक वेबसाइट भी शुरु करदी है | जिन लोगोने यह आज पहेली बार सुना है उनके लिए मै कुछ लिंक देना चाहुंगा, लेकिन ध्यान रहे कि यह सब BETA है अभी|

http://www.start.com/1

http://www.netvibes.com/

http://ideas.live.com/

अभी मार्केट मे यह चर्चा गरमा गर्म है कि क्या एजेक्स अब फ्लेश का स्थान लेगा? अब जो लिंक मेने आपको सबसे पहेले दी थी वह, गूवी दर असल फ्लेश और AJAX का थोडा मिश्रण है। AJAX मतलब Java Script, XML का मिश्रण। ताकी यह दोनो मिलकर दूसरी httprequest के साथ मिलकर आपके पेज बहुत जल्दी लोड कर दे। इसिकिये जीमेल, गूगल रीडर और याहू कि बहुत सारी एप्लीकेशन जल्दी लोड होती है। लेकिन फिर भी जावा स्क्रीप्ट कभी कभी धोखा देकर ब्राउज़र सिक्युरीटी की बजह से स्पीड कम कर देती है। दर असल यह सब मुम्कीन होता है AJAX Engine की बजह से, जो आपके पेज के साथ ही लोड हो जाता है। इसिलिये रिस्पोंस जल्दी मिलता है। यानि java script आगे का लेआउट बनाती है, XML जल्दी से बहुत कम कद की फाइल के रुप मे डाटा ट्रांसफर करती है। इसि बजह से, अब आप वेब एप्लिकेशन मे भी ड्रेग एन ड्रोप कर सकते है, उपर दिये हुए सारे उदाहरण मे यह सुविधा मौजूद है।

बहुत हो गया न?? पका दिया, लेकिन मेने तो पहेले ही कहा है की इधर आये तो हथौडे तो पडेंगे! अब जिनको डेवेलोप करना है इससे, वह xajax library (PHP) या ajax.net library (ASP.Net) का प्रयोग कर सकते है। अब सब कुछ मै ही बताउ क्या? बोलो गूगलबाबा जिंदाबाद...

क्रिकेट गेंद मार्केट : इस पर भी ओस्ट्रेलिया का कब्जा!

अभी Financial Times मे एक रिपोर्ट पढी, जिसके अनुसार भारतीय क्रिकेट बोर्ड यानि BCCI अब भारत मे खेले जाने वाली सारी क्रिकेट टेस्ट मेचो मे ओस्ट्रेलिया की कंपनी कूकाबुरा की बनायी हुइ गेंद का प्रयोग करने के लिए सोच रहा है। अभी विश्व मार्केट मे कूकाबुरा कंपनी का 85% हिस्सा है। अभी तक भारत में Sanspareils Greenlands की बनी हुइ गेंदे चलती थी, लेकिन अब वो ज्यादा देर तक नहि चलेंगी। अगर ओस्ट्रेलिया की कंपनी ने अपनी गेंदो के दाम थोडे कम कर दिए तो हमारे सचिनभैया अब हिन्दुस्तान मे भी कूकाबुरा की गेंद पर खेल सकते है। चलो, कोइ बात नहि, जहा तक हमे अछ्छी क्वोलिटी की गेंद मिले।


हथौडा

”अब हमारे बोलर्स और बेट्समेन निष्फल होने पर कूकाबुरा को गाली दे सकेंगे, कहेंगे की Kookaburra कंपनी का बोल हमे हमारी भारतीय पिच पर जचा नहि!”

Wednesday, March 08, 2006

सरकारी बाबु से पंगा लेने के लिये लिंक्

वेसे हम सब भारत की धीमी प्रगति के लिये या तो सरकार को या तो सरकारी बाबुशाही को जिम्मेदार बताने मे कोइ देर नहि लगाते क्योकि हम तो सहि है और भारतमाता के एक लोते सुपुत्र है इसिलिये दो दुसरो को गाली अपने बाप का क्या जाता है? फिर क्यूना हम खुद पान खाकर रास्ते मे थूंके या तो रास्ते मे कचरा डाले! गंदकी के किये जिम्मेदार तो सरकार ही है, हम नहि!

अगर आपको ऐसी ही कोइ शिकायत करनी है सरकार के कोइ अधिकारी के बारे मे या आपको हुए अन्याय के बारे में, तो सरकार ने online फरियाद सेवा चालु की है,
http://darpg-grievance.nic.in/

वेसे यह सेवा भी सरकारी है लेकिन कभी कभी काम कर जाती है और लोगो को न्याय भी मिलता है वेसे आपको यह पता था कि आप ओनलाइन फरियाद कर सकते है? खामखा सरकार सुनती नहि है ऐसी गालीया देते रहे ना!

Tuesday, February 21, 2006

मुझे लता और आशा पसंद नहि तो?

इस देश मै अगर आपको खुदको एक सहि संगीत प्रेमी साबित करना है तो आपको लता मंगेश्कर का फेन होना ही पडेगा लता, मुकेश, रफी, आशा यह सब महान गायक है और कुछ् लोगो का मानना है कि आज काल के गायको को इनके जैसा गाना नहि आता इसिलिये इन्हे हंमेशा रफी के ही गाने पसंद आते है ये लोग अपने जमाने मे ही खोये हुए रहते है क्योकि वो मानसिक रुप से बुढे हो चुके होते है अरे अगर मुझे लता मंगेशकर से ज्यादा श्रेया घोषाल और आशा भोंसले से ज्यादा सुनिधि चौहान के गाने पसंद आये तो क्या गलत है? बस मिल गया बडो से लेक्चर! "इसे लता के गाने नहि पसंद्!" जेसे मै कोई दुसरी दुनिया से आया हुआ एलियन हूं!

अरे यार, होंगे तुम्हारे जमाने के गीत अछ्छे , इसिलिये तो उनमे से रिमिक्स बनते है अगर हम आपके जमाने के गानो कि तारिफ करके उसमे से नया रिमिक्स बनाते है तो क्या गलत है? अब इतना भी मत इतराईये, यह रिमिक्स आपके जमाने के गानो का नहि, दरअसल वो गाने के बोल का होता है रिमिक्स यानि पुरानी शराब नयी बोटल मे नहि, क्योकि यहा तो गाने के बोल से लेकर संगीत और गायक सब अलग है, सिर्फ थोडी बहुत साम्यता है गाने के बोल मे भी अंग्रेजी शब्द है यानि पुरा का पुरा नया गाना बन गया है तो इसमे भी बहुत महेनत होती है लेकिन मानसिक बुढे लोगो को इसमे कोइ महेनत नहि लगती, सिर्फ चोरी लगती है! अरे भाई, नये गाने का भी रिमिक्स बनाते है हम् सिर्फ आपके जमाने के गानो का हि नहि

मेरा मानना है कि सुनिधि मे आशा से ज्यादा क्षमता है अभी तो वो बहुत छोटी है आशा की उम्र तक पहुंचने मे बहुत समय है आज कल आपके जमाने कि तरह नहि है कि १०-१२ गायक ज्यादा गाते थे Indian Idol जेसी स्पर्धाओ कि बजह से टककर कडी हो गयी है फिर भी टिकना है
अब ये बच्ची श्रेया घोषाल का गाना सुनिये देवदास और परिणिता मे क्या गाने गाये है! क्या वह थोडे सालो मे लता को टक्कर देने वाली बडी अमर गायिका नहि बनेंगी? बेशक बनेंगी यह नोट करले कि इन दोनो गायिका कि मनपसंद गायिका लता और आशा है

हथौडा
वेसे अगर आपके जमाने कि बात करे तो भी लता से बहेतर बहुत सी गायिकाए होन्गी लेकिन आपकि कमझोर संगीत सुझ कि बजह से वह आपको दिखी नहि! शायद आप पोप्युलर गाने हि सुनते थे इसिलिये शमशाद बेगम को भुल गये शायद लताजी फिल्मो मे राजनिति करती थी और इसिलिये कोई और आपके जमाने मे से उभर नहि पाया? मुझे अफसोस होता है कि आप लोगो ने केवल २-३ "अछ्छी" गायिकाए दी!

Tuesday, February 07, 2006

औरतो के अनेक रुप तो मर्दो के क्या कम है??

आज मेरी एक दोस्त के साथ फिर से बबाल हो गयी मैं CROSSWORD BOOK STORE मे कुछ पुस्तके देख रहा था और मेरी दोस्त को भी साथ ले गया था तभी मैंने एक पुस्तक पढी जिसमे एक फेमिनिस्ट महिला के विचार लिखे थे जिनका मानना था की दुनिया के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिये मर्दो का कम होना जरुरी है, इसिलिये अब से नर बच्चो को पैदा नहि होने देना चाहिये खेर मुझे तो यह बात सुन कर हंसी आ गयी तो मैंने मेरी मित्र को यह बात बतायी उसने यह बात का समर्थन तो नहि किया लेकिन मुझे औरतो के मर्दो पर कितने उपकार है वो गिनाना शुरु कर दिया


अब यह बात सही है कि मर्दो को हर रुप मे औरतो कि मदद और सहारा (साथ शब्द थोडा घमंड दिखायेगा ) चाहिये लेकिन यह फेमिनिस्ट लोग औरतो पे हो रहे हर अत्याचार के लिये सिर्फ मर्दो को जिम्मेदार नहि ठहरा सकती घर मे नयी आयी हुइ बहु को ससुर या पति से ज्यादा सास परेशान करती है अगर पति परेशान करे तो सास को बहु कि मदद करनी चाहिये लेकिन यह फेमिनिझम का झंडा पकडनेवाली महिलाये तो सिर्फ मर्दो पे आरोप लगायेगी महिलाओ को मर्दो पे आरोप लगाने से पहले खुद अपने आप को दुसरी महिलाओ पे अत्याचार करते हुए रोकना चाहिये " क्योंकि हर मर्द अपने बाप(नर) से ज्यादा अपनी मां (जेसे मैं:D) या अपनी बीबी (नारी) को सुनता है!" कोख मे से अगर बच्ची का abortion होता है तो वह कोख औरत की होती है औरत को अपनी कोख की बच्ची गिरवाने के लिये जिम्मेदार सिर्फ उसका पति नहि लेकिन उसकी सास और आस पास की औरते भी होती है, जो हर दोपहर को अपनी टाईम पास गपशप मै बिन बेटे कि औरत का मजाक उडाती रहती है


हथौडा

" यह बात अक्सर लोग सुनाते है कि औरतो के अनेक रुप है लेकिन यह ना भुले वो रुप मर्दो के साथ होने से हि बनते है "

Friday, January 27, 2006

इरान, अमरिका, बम और भारतीय(बेवकूफ) : IRAN NUKE ISSUE

किसी जमाने कि ये बहुत रसप्रद कथा है| दुनिया मे एक बहुत शक्तिशाली महाराजा था| नाम उनका अमरिका| उसी दुनिया मे एक और भाइ बसते थे| वेसे तो वो बहुत खास नहि थे , लेकिन फिर भी उनकी थोडी बहुत इज्ज्त थी, क्योकि उनके खेतो मे ओयल मिलता था | जो बाकि लोगो के लिये काम का था ये दोनो के बीच हमेशा नोक झोंक होती रहती थी अब यह महाराजा के पुराने दुश्मन, रशिया, जो अब राजा के सामने हार चुके थे वो थोडे बहुत इरान को मदद करते थे किन्तु अब रशिया थोडे कमझोर हो गये थ और खुद को मजबूत करने मे लगे थे इसिलिये दुनिया मे महाराजा के सामने आवाज ऊंची करने वाला कोई नहि था वेसे कुछ लोग चाहे तो थोडा बहुत बोल सकते थे लेकिन जेसे होता है कहानियो मे वेसे वो लोग राजा के दरबार मे शामिल थे और राजा कि तारिफ करते रहते थे अब ये जनाब इरान को एक बार थोडे बहुत पैसे बनाने के बाद परमाणु उर्जा से बिजली पैदा करने कि खुजली हुइ, जबकी उसके पास ओयल के भंडार थे अब राजा को ये चीझ पसंद नहि आयी कि इरान की डिक्शनरी मे "परमाणु उर्जा" शब्द आये, तो डांटने लगे इरान को इरान भी साला बेवकूफ था अगले साल राजा ने इरान के पुराने दुश्मन इराक को मार दिया था और उसकी जमीन पर अपना कब्जा जमा दिया था फिर भी इरान अपने दो दुश्मनो मे से शक्तिशाली दुश्मन का साथ देने कि बजह कमजोर दुश्मन की तरफ थोडा सा नरम पडा तो राजा को भी कोइ फर्क नहि पडता था

अब इस समूह मे एक बेवकूफ, भारत रहता था जिसके घर मे, घर चलाने वाले लोग हमेशा लडते रहते थे (left vs congress vs nda vs others) इसिलिये भारत के बच्चे भी परेशान थे (citizen) ये घर चलाने वाले, जबसे भारत जन्मा तबसे बेवकूफ ही मिलते थे क्योकि भारत के सारे बच्चे गुन्गे थे और इन्को हि हमेशा वोटृ देकर जीताते थे और एक आदर्श बच्चे कि तरह, घर चलाने वालो के सामने कभी भी अपना मूंह नहि खोलते थे इसिलिये भारत के मालिक कभी उसको रशिया के साथ, तो कभी अमरिका के साथ तो कभी कुछ छोटे-मोटे लोगो का समुह मे अपने आप को यानि की भारत को नेता बना देते थे ये सब खेल अगर भारत के लाभ मे होता तो ठिक था लेकिन इसमे फायदा घर चलाने वालो का ज्यादा होता था क्योकि राजा लोग खुद को मदद करने वाली पार्टी को पैसे देते थे जिससे वो ऐश कर सके इस लिये भारत को आखिर दबाव मे झुक कर काम करने कि आदत हो गयी दरसल उसकी कमर मे अब दर्द होने लगा था, रीटायरमेन्ट की उम्र जो हो गयी थी फिर भी खुजली तो थी दुनिया का नेता बनने की! एक और बन्दा, चीन धीरे धीरे मजबूत हो गया था, उसे दुनिया मे किसि का डर नहि था वो खुद को जो ठिक लगे वो करता था, खुद के लिये (yuan currency issue) हालाकि बाकी सब लोग उससे जलने की बजह से उसकी ताकत का कारण उसमे लोकशाही ना होने को देते थे और फिर अंदर ही अंदर जलते थे चीन भी यह सब जानते हुए भी मन मे मुस्कुराता था और अपनी मस्ती मे चलता रहता था उसे दुनिया मे बाकी लोगो मै बहुत रस नहि था

हालाकि भारतीय लोग अंदर से तो चीन से जलते थे, लेकिन फिर "अपने पास लोकशाही है" एसा करके मन मना लेते थे और भुल जाते थे कि सिंगापुर और अमरिका मे भी लोकशाही है किसी ओर के सामने अपना हक मांगने मे शर्माने वाले भारत (lost patents of neem, kashmir and so on) को किसी दुसरे का हक किसी तीसरे के पास से मांगने मे बडा मझा आता था मूलत: भारत मानसिक रुप से कमझोर था इसिलिये खुद के पास ताकत होने के बावजुद डर जाता था, जेसे जब पडोशी पाकिस्तान के पास परमाणु बम जेसे हथियार नहि थे तब भी उसने राजा के सामने झुक कर अपना जीता हुआ और अपने हक का प्रदेश तीन तीन बार वापस कर दिया था (WAR :1948,1965,1971) जबकि दूसरा एक छोटा सा बंदा, इसरायेल, इसमे राजा को मनाने मे सफल रहा था (The six day war)

अब जब इरान को परमाणु शब्द प्रयोग करना था तो अमरिका को गुस्सा आया सब लोग् अमरिका को मनाने और इरान को एस न करने के लिये समझाने लगे पहले परमाणु की नयी भाषा बोलने वाले भारत पे प्रतिबंध लगाने वाला अमरिका (1998) अब भारत को परमाणु मदद की लोलिपोप दिखाने लगा और तो और वो हमेंशा की तरह सफल भी रहा!इसमे एक तकलीफ हो गयी किन्तु भारत को चलाने वाले फिर से लडने लगे क्योकि हमेंशा कि तरह इरान भी भारत का मित्र था वेसे भारत के मित्र बहुत थे अमरिका को जो भी पसंद नहि आता वो भारत का मित्र था इराक भी था अब वो पुरानी दोस्ती की दुहाई दे कर कुछ लोग इरान को अमरिका के कोप से बचाने के लिये, अमरिका क साथ देनेवाले भारत चालक को कमझोर बताने लगे वेसे इसमे स्वार्थ भी था, इरान ने भी भारत को लोलिपप दिखायी थी: गेस की, जो भारत के भविष्य के लिये जरुरी था अब दोनो ही चालक आमने सामने थे खेर वो क्या फेसला करते है वो एपिसोड 2 February को प्रसारित होगा


वेसे कहानिया बाजु पर्, मेरे ख्याल से इस बार अमरिका की बजह से नहि लेकिन हमे इरान का साथ नहि देना चाहिये कुछ देशो मे सरकार का भरोसा नहि किया जा सकता, इरान भी वैसा है बंदर के हाथ मे बम बनाने कि टेकनोलोजी नहि जानी चाहिये दुनिया मे कोइ दोस्त नहि होता इरान की अगली सरकार यह टेकनोलोजी से बम बना कर किसी के सामने प्रयोग भी कर सकती है याद रहे कि अफघानिस्तान हमारा पुराना दोस्त था लेकिन हमे तालिबान के सामने लडना पडा और हमारी फट पडी थी!! अगर अफघानिस्तान को हमने हथियार बनाने मे मदद की हुइ होती तो वो तालिबान हमारे सामने युझ करते जेसे उन्होने अमरिका का स्ट्रिंजर मिसाइल उसके हि सामने ही युझ किया था ये देश का दुर्भाग्य हे कि बेवकूफ लेफ़्ट वाले शाशन मे भागीदार है

हथोडा
"पाकिस्तानी सरमुख्यतार आतंकी परवेज मुर्शरफ उवाच : इरान को परमाणु टेकनोलोजी से दूर रखना चाहिये" हे ना मस्त जोक चूहे को मारकर.....!!

Thursday, January 26, 2006

रंग दे बसंती (Movie Review: Rang De Basanti)

जेसे कि मेने पिछले पोस्ट मे लिखा, मै सोच रहा था कि २६ जनवरी को केसे मनाया जाये रात को ये ब्लोग लिखने कि बजह से और J2ME पढते हुए मै ४ बजे सोया यानि २६ जनवरी की सुबह ध्वज फरकाना तो साईड पर हो गया लेकिन भारतमाता के कुछ निकम्मे बेटो कि तरह मै सुबह ११ बजह तक सोता रहा! और वो भी ज्यादा सोता अगर दोस्तो ने आधे घन्टे मे २५ किलोमीटर दूर वाले मल्टीप्लेक्स मे "रंग दे बसंती" देखने के लिये पहुंचने की नोटिस ना दी होती, और वो भी एक सूचना के साथ: स्नान कर के आना! तो चल दिया मै फिल्म देखने

खेर मै सोच रहा था कि ब्लोग मे फिल्म की पुरी कि पुरी स्टोरी लिखु लेकिन अब सोच रहा हु कि यह पढने वाले खुद ही फिल्म देखे मै तो सिर्फ एक ही शब्द प्रयोग करुंगा मेरी और मेरे दोस्तो की इस फिल्म के बाद हुइ स्थिति के बारे मे: "स्थितप्रज्ञ" बहुत ही झकास पिकचर है ये आमिर खान से लेकर हर किसी ने बढीया एकटिंग की है अरे सोहा अली खान को भी अभिनय आता है! हालाकि इन्टरवल से पहले एसा लगा कि डाइरेक्टर को शहीद भगतसिंह पर फिल्म बनानी है और थोडा बहुत पक भी गये, लेकिन कोमेडी पल हंसाते रहे लेकिन इन्टरवल के बाद मे पता चला कि यह भगतसिंह की दुसरी फिल्म हमे मुफ्त मे क्यो भेंट दी जा रही है इस फिल्म के साथ! खेर मुझे तो इस फिल्म पे आमिर, रोनी स्क्रूवाला और शर्मन जोशी कि बजह से पहले से यकिन था, लेकिन मेरे कुछ दोस्त जो फिल्म के ट्रेलर कि बजह से इसे सामाजिक फिल्म और "स्वदेश्" जेसी पकाउ फिल्म समझ रहे थे, उनकी आंखे अंत मे नर्म दिखी संगीत बहुत ही झकास है, अंत का भी दुख नहि होता जेसे दुसरी फिल्मो मे होता हे किसी हीरो के जाने के बाद

शायद्, इस फिल्म कि बजह से मेरी २६ जनवरी बच गयी, वरना पता नहि क्या करता
इसिलिये शायद मै भी २ साल से अंग्रेजी मेगेझीन शुरु करने का प्रयास कर रहा हु और पैसे ना होने के बावजुद अभी तक आस लगाये हुए हु कि मै अपने विचारो को अपने ही माध्यम से लोगो तक पहुचा सकू आज मुझे पता चला कि मै भी साला देश भक्त हू या तो फिर कोइ कोशिश कर रहा हू आमिर खान जो डाईलोग इस फिल्म मे कहेता हे वो ही मैने १ साल पहले अपने मेगेझीन के अपने पहले एडीटोरीयल लेख मे लिखा था: "There are only two ways to live happily in any system : 1. Join with the system 2. Dare to change the system as per YOUR THINKING, whatever it is!" और इसिलिये सुबह मे ११ बजे उठाने के लिये मैने अप्ने दोस्त को पीटा नहि!!

हथोडा
"१४ फरवरी और नव वर्ष मे SMS भेज कर मोबाइल नेटर्वक जाम हो जाते है, जो कि आज ज्यादा समय तक खुल्ले थे"

Wednesday, January 25, 2006

दो दिन का राष्टृप्रेम्

गणतंत्र दिन और छूट्टी की कथा!
आज मेरे दोस्त के साथ दिमाग हटा देने के स्तर तक दलीलबाजी हुइ, वो भी एक फालतू से लगने वाले मुद्दे पर : क्या २६ जनवरी को छुट्टी होनी चाहिये? वेसे तो मेरे पास कुछ् काम धंधा था नही उस समय पे और भगवान ने दिमाग भी पुरा दिया नहि तो वो तो हटाने का सवाल ही नहि था, इसिलिये मेने भी बोल डाला: छुट्टी होनी ही चाहिये! अब इतनी जल्दी नतीजा मत निकालीये, मे ऐश करने के लिये नही मांग रहा था छुट्टी लेकिन पहेले उस जनाब का लोजिक सुनिये उनका मानना था कि जीस तरह जापानीओ ने समय की परवह किये बीना हमेशा काम करके अपने देश को आगे बढाया उसी तरह, हमे भी काम करके आगे आना चाहिये छुट्टीया कम होनी चाहिये और २६ जनवरी को तो सबको दुगना काम करना चाहिये ये सब दलील वो इस लिये कर रहे थे क्योकि उनका काम आज भी चालु था और वो खुश थे इससे

हालाकी मे इससे सहमत नही था तो हो गयी बबाल क्योकि सारे भारतीयो को इस पुरे साल मे २-३ दिन थोडा बहुत देश प्रेम जागता है, उसमे भी कोइ अगर देश को आगे ले जाने की बजह पिछे ले जाने की बात करे तो ये भारतमाता के पुत्रो को केसे हजम होता, फीर क्यू न वो बाकी के दिन वो USA के वि़जा के लिये ही लगे रहते हो(अभी तो तेझी भी है, इसिलिये नोकरी भी थोडी आसानी से मिलती है यहा, तो अमरीका का भी मोह घटा है) खेर लेकिन मै तो परेशान हू इस दो-तीन दिन के देश प्रेम से अरे भाई, ये राष्ट्रिय उस्तवो को मनाना चाहिये धूम धमाके से, जेसे अमरीका वाले मनाते है, अपने से कइ सालो पहले से वेसे मै भी थोडा बहुत तो सोचता हू कि इन दिनो मे क्या करना चाहिये? लेकिन एक बात तो तय हे कि अंधे राष्ट्र प्रेम मे खो कर, वो भी एक-दो दीन के, हमे हमारे समाज और देश के प्रति long term का नुकशान नहि करना चाहिये अगर १९९९ मे हम पाकिस्तान के साथ युध्ध कर देते तो क्या होता? उस समय तो सब बडे जोश मे कह रहे थे कि मौका हाथ मे आया है, उडा दो सालो को! मगर मरता हुआ पाकिस्तान भी अगर एक-दो एट्म बम मुम्बइ जेसे शहर पर फैंक देता, तब आती नानी कि याद् फिर क्या जीता हुआ कश्मीर या पुरा पाकिस्तान का क्या करते?? और अगर एसा होता तो आज का ये थोडा बहोत शान्ति का दिन कहा से देख्ते? माना आज भी हमारे पास कश्मीर नही है पूरा, लेकिन कमसे कम बाकी भारत तो थोडे चेन से जी रहा है! एक साथ २ करोड जान चले जाने का खतरा तो नहि है ना!

इसिलिये यह बडे दिन को सिर्फ temporary उत्सव ना बनाये और सोच समज कर देश भक्ति करे क्योकि पागलो कि देश भक्ति हिटलर के जर्मनी, एट्म बम खाया हुआ जापान और स्टालिन के रशिया जेसी होती है और इन देशो कि जनता बाद मे वो प्रचंड देश भक्ति के दिन याद भी नहि करना चाहती, फिर भले हि ना कुछ लोगो को हिटलर आदर्श नेता लगे, हकिकत तो ये ही हे कि आज सारे जर्मन उसे नफरत करते है और एक बात्, अगर आपको हिटलर पसन्द है तो आपका ईतिहास कमझोर हो सकता है, क्योकि जिस चिजो के लिये आपको हिट्लर पसंद है, स्तालिन उस सबमे हिटलर का बाप था!

हथोडा

" यह भी भारत की लाचारी या बेवकूफी है कि लोकशाही के इस पर्व पे हमारे मुख्य अतिथि एक सरमुख्यत्यार, साउदी अरब के प्रिन्स है!! क्योकि उनके देश मे ओयल है और बहुत से भारतीय वहा नौकरी करते है वेसे भारतीय लोगो को चाहिये क्या? पैसे या आज़ादी??"

फोटो सर्च मे धमाका

वेसे तो अभी तक सभी तस्वीरे ढूंढने के लिये गूगल या तो कोइ सर्च एन्जीन का प्रयोग कर रहे थे हम लेकिन एक भारतीय कम्पनी इस फोटो सर्च की दुनिया मे धमाका मचा सकती हे नाम भी इस साईट का भारतीय लडकी के नाम से ही है : रिया.कोम ये साईट फोटो सर्च अलग तरीके से करती है जेसे हर साइट फोटो के नाम और उसकी डीटेल से फोटो ढूंढता है, यह साइट फोटो के अन्दर की डीटेल भी पता करता है तो अगर आपका और करीना कपूर का फोटो एक साथ चाय पीते हुए है तो यह करीना और आपको उस फोटॉ मे से अलग करके पेहचानेगा ज्यादा जानने के लिये उनकी साइट पे जाये वेसे अभी ये साइट alpha मे है तो बहुत ही धीमी है लेकिन भारतीय् अंग्रेजी ब्लोग दुनिया मे इस साइट के बारे मे एसी भी चर्चा थी कि गूगल इस टेकनोलोजी को खरीदने वाला है

हथोडा

" ये साइट सचमे स्मार्ट कहेलाती अगर ये george bush लिखने पर कोई cartoon दिखाती खेर अभी तो ये आल्फा मे है, तो काफी वक्त है"

Tuesday, January 24, 2006

विन्डो़ज़ विएना (Windows Vienna)

माईक्रोसोफ़टने अपने नये ओपरेटिंग सिस्टम का नाम विन्डोज़ विस्टा रखा हे जो अभी beta स्टेज मे हे खेर अभी उसपे तो प्रयोग चालु हे लेकिन माईक्रोसोफ्ट ने अपनी विस्टा के बाद वाली OS का नाम भी रख दिया हे : Windows Vienna हालाकि उसका दूसरा नाम भी अभी जीवंत हे : BlackComb

बाउन्सर
"ये वियेना वो ही शहर हे जो अपने सारे सरकारी computers को लिनक्स मे ट्रान्सफर करा चुका हे यानि बिल भैया चाहते हे कि अब सारे लोग वियेना को याद रखे और कुछ वियेना वालो से सीखे शायद बिलभाई सन्यास ले ने कि सोच रहे हे!"

Monday, January 23, 2006

पेट्रोल के बिना, दारु से चलाओ बाईक्!

यार अपने देश मे मिनिस्टर लोग भी कभी कभी अछ्छा काम करते हे अभी ओयल के भाव आसमान छु रहे हे, जिससे मेरे जेसे सडक छाप रोमियो लोग परेशान हो गये हे क्युकि कोस्ट पर लडकि बहुत बढ जाता हे अब लडकियो का पिछा करना बहुत मेंघा हो गया हे, जो इस गरीब बच्चे को नहि भाता क्योकि फिल्म, म्युझिक और स्टाईल मे पैसे उडाने के बाद कुछ बचता नहि या तो मुझे पेट्रोल कि बजह से बाकि चिजो मे संयम बताना पडता हे वैसे मे इतना कमिना भी नहि हु कि पापा से कहु कि कुछ ज्यादा कमाओ मेरे लिये! फिर भी एक बार मस्ती मे ट्राय किया था जवाब क्या मिला उसके बारे मे किसिको जानने कि जरूरत नहि हे बहुत बुरी आदत हो गयी हे आप लोगो की किसी की भी पर्सनल बातो मे घुसते हो!

खेर ये रामायण लिखने की बजह जो हे वो एक बढिया समाचार हे कि छत्तिसगढ के जंगल विभाग के मंत्री अपनी बाईक अब पेट्रोल से नहि पर महुधा के रस यानि दारु से चलाते हे और बाईक भी दारु के पेग लगाने के बाद मस्त किक लगते ही भागती हे मंत्री तो भाई केह्ते हे कि उन्की बाईक हीरो होन्डा स्पलेन्डर अब पेट्रोल से भी मस्त चलती हे खेर मे तो बहुत खुश नहि हु इस सब से क्योकि यहा गुजरात मे दारुबन्धि हे तो मुझे तो नहि पीने देते पर मेरे काईनेटीक को भी देशी दारु का मझा नहि मिलेगा मंत्री तो बहुत खुश हे क्योकि आदिवासी लोगो को अब रोजगार मिलेगा लेकिन इसमे खर्च मेरे खयाल से ज्यादा ही होगा खेर मिनिस्टर ने तो अपने घर के पिछे ही छोटी भट्टी लगा ली हे और इसमे ईथेनोल होने कि बजह से पेट्रोल के बिना सिर्फ यह रस से ही बाईक चलता हे

बाउन्सर
अब आप पेट्रोल पम्प पे जा के क्या कहेन्गे??
" १० पेग महुधा बाईक मे डालना और १ पेग ग्लास मे मुझे दे"

क्या ख्याल हे??

Sunday, January 22, 2006

Live Messenger Invitation

मेरे पास विन्डोस् लाईव मेसेन्जर ८.० बीटा वर्जेन के बहुत सारे निमंत्रण पडे हे खेर मे तो कबसे इसे युझ कर रहा हु और अछ्छा हे Microsoft का गूगल और याहू के सामने टककर लेने के लिये msn ब्रान्ड को बाजु छोड कर live ब्रान्ड को आगे करने का प्रयास रहता हे अब् जिसमे यह मेसेन्जर और ईमेल सर्विस मुख्य हे ज्यादा आप मेरे अंग्रेजी ब्लोग http://blog.talkncafe.com/ पे से जान सकते हे और या तो Microsoft की साइट http://ideas.live.com/ पे जाये अगर किसीको इसमे रस हे तो मुझे अपना होटमेल एड्रेस दे

निवेदन

जो भी यहा अब comment देने वाले हे वह सब महानुभावो से एक निवेदन हे कि आप मुझे "रविभाई" ना कहा करे मे मानता हु कि मेरा जो नाम हे,"रवि कामदार्" वो बडा ही sexy लगता हे!! bluff master के नाना पाटेकर के पात्र चन्दु कि तरह मे भी अपनी और अपने नाम कि पूजा करता हु! और वेसे भी मेरी उमर २१ साल हे तो ये सब विशेषण लगाने का मतलब नहि हेआ अगर आपकी उम्र मेरे से ३ साल से ज्यादा छोटी हे तो मुझे "आप" करके बुला सकते हे!

Saturday, January 21, 2006

मेरी मस्त गलती..

इस हिन्दी ब्लोग मे आ तो गया लेकिन मस्त मस्त गल्ती कर रहा हु, हालाकिं उससे कुछ फर्क नहि पडेगा मुझे या समझने वाले को फीर भी देखो मेने इस ब्लोग मे अभी तक गुजराती भाषा मे प्रयोग किये जाने वाला पूणॅविराम किया हे जो हे "." हालाकि हिन्दी मे सही होगा "|". खेर मुझे तो ये सब गलतीयो से बहुत हंसी आती हे अब्...