तत्वज्ञानी के हथौडे
Wednesday, January 25, 2006
  दो दिन का राष्टृप्रेम्
गणतंत्र दिन और छूट्टी की कथा!
आज मेरे दोस्त के साथ दिमाग हटा देने के स्तर तक दलीलबाजी हुइ, वो भी एक फालतू से लगने वाले मुद्दे पर : क्या २६ जनवरी को छुट्टी होनी चाहिये? वेसे तो मेरे पास कुछ् काम धंधा था नही उस समय पे और भगवान ने दिमाग भी पुरा दिया नहि तो वो तो हटाने का सवाल ही नहि था, इसिलिये मेने भी बोल डाला: छुट्टी होनी ही चाहिये! अब इतनी जल्दी नतीजा मत निकालीये, मे ऐश करने के लिये नही मांग रहा था छुट्टी लेकिन पहेले उस जनाब का लोजिक सुनिये उनका मानना था कि जीस तरह जापानीओ ने समय की परवह किये बीना हमेशा काम करके अपने देश को आगे बढाया उसी तरह, हमे भी काम करके आगे आना चाहिये छुट्टीया कम होनी चाहिये और २६ जनवरी को तो सबको दुगना काम करना चाहिये ये सब दलील वो इस लिये कर रहे थे क्योकि उनका काम आज भी चालु था और वो खुश थे इससे

हालाकी मे इससे सहमत नही था तो हो गयी बबाल क्योकि सारे भारतीयो को इस पुरे साल मे २-३ दिन थोडा बहुत देश प्रेम जागता है, उसमे भी कोइ अगर देश को आगे ले जाने की बजह पिछे ले जाने की बात करे तो ये भारतमाता के पुत्रो को केसे हजम होता, फीर क्यू न वो बाकी के दिन वो USA के वि़जा के लिये ही लगे रहते हो(अभी तो तेझी भी है, इसिलिये नोकरी भी थोडी आसानी से मिलती है यहा, तो अमरीका का भी मोह घटा है) खेर लेकिन मै तो परेशान हू इस दो-तीन दिन के देश प्रेम से अरे भाई, ये राष्ट्रिय उस्तवो को मनाना चाहिये धूम धमाके से, जेसे अमरीका वाले मनाते है, अपने से कइ सालो पहले से वेसे मै भी थोडा बहुत तो सोचता हू कि इन दिनो मे क्या करना चाहिये? लेकिन एक बात तो तय हे कि अंधे राष्ट्र प्रेम मे खो कर, वो भी एक-दो दीन के, हमे हमारे समाज और देश के प्रति long term का नुकशान नहि करना चाहिये अगर १९९९ मे हम पाकिस्तान के साथ युध्ध कर देते तो क्या होता? उस समय तो सब बडे जोश मे कह रहे थे कि मौका हाथ मे आया है, उडा दो सालो को! मगर मरता हुआ पाकिस्तान भी अगर एक-दो एट्म बम मुम्बइ जेसे शहर पर फैंक देता, तब आती नानी कि याद् फिर क्या जीता हुआ कश्मीर या पुरा पाकिस्तान का क्या करते?? और अगर एसा होता तो आज का ये थोडा बहोत शान्ति का दिन कहा से देख्ते? माना आज भी हमारे पास कश्मीर नही है पूरा, लेकिन कमसे कम बाकी भारत तो थोडे चेन से जी रहा है! एक साथ २ करोड जान चले जाने का खतरा तो नहि है ना!

इसिलिये यह बडे दिन को सिर्फ temporary उत्सव ना बनाये और सोच समज कर देश भक्ति करे क्योकि पागलो कि देश भक्ति हिटलर के जर्मनी, एट्म बम खाया हुआ जापान और स्टालिन के रशिया जेसी होती है और इन देशो कि जनता बाद मे वो प्रचंड देश भक्ति के दिन याद भी नहि करना चाहती, फिर भले हि ना कुछ लोगो को हिटलर आदर्श नेता लगे, हकिकत तो ये ही हे कि आज सारे जर्मन उसे नफरत करते है और एक बात्, अगर आपको हिटलर पसन्द है तो आपका ईतिहास कमझोर हो सकता है, क्योकि जिस चिजो के लिये आपको हिट्लर पसंद है, स्तालिन उस सबमे हिटलर का बाप था!

हथोडा

" यह भी भारत की लाचारी या बेवकूफी है कि लोकशाही के इस पर्व पे हमारे मुख्य अतिथि एक सरमुख्यत्यार, साउदी अरब के प्रिन्स है!! क्योकि उनके देश मे ओयल है और बहुत से भारतीय वहा नौकरी करते है वेसे भारतीय लोगो को चाहिये क्या? पैसे या आज़ादी??"
 
Comments:
वेसे भारतीय लोगो को चाहिये क्या? पैसे या आज़ादी??
चाहिए तो दोनों, बिना आज़ादी के पैसो का क्या करोगे, और बिना पैसे के आज़ादी का क्या करोगे!! ;) ये कोई ऐसी दो चीज़ें नहीं जिनमे से एक को चुन लिया जाए, यह एक दूसरे की पूरक हैं, एक के बिना दूसरी बेकार है। :)
 
बात सही है कि ऐसे उत्सव धूम-धाम से मनाना चाहिए | आखिर साल में कभी तो देश के नाम का उत्सव हो जिसमें आम जनता भाग ले | वैसे भारत में भी हर जगह छुट्टी नही होती .. जैसे बी. पी. ओ. में लोग आज भी काम कर रहे हैं |
 
रवि भाई मात्रा की गल्तियां बहुत ज्यादा हो रही है जो अखरती है, इन्हें सुधारने की कोशिश करिये
::सागर चन्द नाहर::
 
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कोइ मानता ही नहि के मेरे पास दिमाग हे इसिलिये खुद्को तत्वज्ञानी घोषीत करता हु!वैसे हु मैं गुज्जु Engineer.Magazine भी शुरु कर रहा|हु पर हु एक टपोरी|तो ये हे टपोरी का तत्वज्ञान् और हथौडे भी|हेल्मेट पहेन लो|

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Name: Ravi Kamdar
Location: Ahmedabad, Gujarat, India

A computer engineer by education, working in media field, "preaching" companies on technology and Business Stretegies and also earning bread from it. In short,I sell ideas and also execute them. This blog is personal thing not reflecting my profession.



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