इरान, अमरिका, बम और भारतीय(बेवकूफ) : IRAN NUKE ISSUE
किसी जमाने कि ये बहुत रसप्रद कथा है| दुनिया मे एक बहुत शक्तिशाली महाराजा था| नाम उनका अमरिका| उसी दुनिया मे एक और भाइ बसते थे| वेसे तो वो बहुत खास नहि थे , लेकिन फिर भी उनकी थोडी बहुत इज्ज्त थी, क्योकि उनके खेतो मे ओयल मिलता था | जो बाकि लोगो के लिये काम का था ये दोनो के बीच हमेशा नोक झोंक होती रहती थी अब यह महाराजा के पुराने दुश्मन, रशिया, जो अब राजा के सामने हार चुके थे वो थोडे बहुत इरान को मदद करते थे किन्तु अब रशिया थोडे कमझोर हो गये थ और खुद को मजबूत करने मे लगे थे इसिलिये दुनिया मे महाराजा के सामने आवाज ऊंची करने वाला कोई नहि था वेसे कुछ लोग चाहे तो थोडा बहुत बोल सकते थे लेकिन जेसे होता है कहानियो मे वेसे वो लोग राजा के दरबार मे शामिल थे और राजा कि तारिफ करते रहते थे अब ये जनाब इरान को एक बार थोडे बहुत पैसे बनाने के बाद परमाणु उर्जा से बिजली पैदा करने कि खुजली हुइ, जबकी उसके पास ओयल के भंडार थे अब राजा को ये चीझ पसंद नहि आयी कि इरान की डिक्शनरी मे "परमाणु उर्जा" शब्द आये, तो डांटने लगे इरान को इरान भी साला बेवकूफ था अगले साल राजा ने इरान के पुराने दुश्मन इराक को मार दिया था और उसकी जमीन पर अपना कब्जा जमा दिया था फिर भी इरान अपने दो दुश्मनो मे से शक्तिशाली दुश्मन का साथ देने कि बजह कमजोर दुश्मन की तरफ थोडा सा नरम पडा तो राजा को भी कोइ फर्क नहि पडता था
अब इस समूह मे एक बेवकूफ, भारत रहता था जिसके घर मे, घर चलाने वाले लोग हमेशा लडते रहते थे (left vs congress vs nda vs others) इसिलिये भारत के बच्चे भी परेशान थे (citizen) ये घर चलाने वाले, जबसे भारत जन्मा तबसे बेवकूफ ही मिलते थे क्योकि भारत के सारे बच्चे गुन्गे थे और इन्को हि हमेशा वोटृ देकर जीताते थे और एक आदर्श बच्चे कि तरह, घर चलाने वालो के सामने कभी भी अपना मूंह नहि खोलते थे इसिलिये भारत के मालिक कभी उसको रशिया के साथ, तो कभी अमरिका के साथ तो कभी कुछ छोटे-मोटे लोगो का समुह मे अपने आप को यानि की भारत को नेता बना देते थे ये सब खेल अगर भारत के लाभ मे होता तो ठिक था लेकिन इसमे फायदा घर चलाने वालो का ज्यादा होता था क्योकि राजा लोग खुद को मदद करने वाली पार्टी को पैसे देते थे जिससे वो ऐश कर सके इस लिये भारत को आखिर दबाव मे झुक कर काम करने कि आदत हो गयी दरसल उसकी कमर मे अब दर्द होने लगा था, रीटायरमेन्ट की उम्र जो हो गयी थी फिर भी खुजली तो थी दुनिया का नेता बनने की! एक और बन्दा, चीन धीरे धीरे मजबूत हो गया था, उसे दुनिया मे किसि का डर नहि था वो खुद को जो ठिक लगे वो करता था, खुद के लिये (yuan currency issue) हालाकि बाकी सब लोग उससे जलने की बजह से उसकी ताकत का कारण उसमे लोकशाही ना होने को देते थे और फिर अंदर ही अंदर जलते थे चीन भी यह सब जानते हुए भी मन मे मुस्कुराता था और अपनी मस्ती मे चलता रहता था उसे दुनिया मे बाकी लोगो मै बहुत रस नहि था
हालाकि भारतीय लोग अंदर से तो चीन से जलते थे, लेकिन फिर "अपने पास लोकशाही है" एसा करके मन मना लेते थे और भुल जाते थे कि सिंगापुर और अमरिका मे भी लोकशाही है किसी ओर के सामने अपना हक मांगने मे शर्माने वाले भारत (lost patents of neem, kashmir and so on) को किसी दुसरे का हक किसी तीसरे के पास से मांगने मे बडा मझा आता था मूलत: भारत मानसिक रुप से कमझोर था इसिलिये खुद के पास ताकत होने के बावजुद डर जाता था, जेसे जब पडोशी पाकिस्तान के पास परमाणु बम जेसे हथियार नहि थे तब भी उसने राजा के सामने झुक कर अपना जीता हुआ और अपने हक का प्रदेश तीन तीन बार वापस कर दिया था (WAR :1948,1965,1971) जबकि दूसरा एक छोटा सा बंदा, इसरायेल, इसमे राजा को मनाने मे सफल रहा था (The six day war)
अब जब इरान को परमाणु शब्द प्रयोग करना था तो अमरिका को गुस्सा आया सब लोग् अमरिका को मनाने और इरान को एस न करने के लिये समझाने लगे पहले परमाणु की नयी भाषा बोलने वाले भारत पे प्रतिबंध लगाने वाला अमरिका (1998) अब भारत को परमाणु मदद की लोलिपोप दिखाने लगा और तो और वो हमेंशा की तरह सफल भी रहा!इसमे एक तकलीफ हो गयी किन्तु भारत को चलाने वाले फिर से लडने लगे क्योकि हमेंशा कि तरह इरान भी भारत का मित्र था वेसे भारत के मित्र बहुत थे अमरिका को जो भी पसंद नहि आता वो भारत का मित्र था इराक भी था अब वो पुरानी दोस्ती की दुहाई दे कर कुछ लोग इरान को अमरिका के कोप से बचाने के लिये, अमरिका क साथ देनेवाले भारत चालक को कमझोर बताने लगे वेसे इसमे स्वार्थ भी था, इरान ने भी भारत को लोलिपप दिखायी थी: गेस की, जो भारत के भविष्य के लिये जरुरी था अब दोनो ही चालक आमने सामने थे खेर वो क्या फेसला करते है वो एपिसोड 2 February को प्रसारित होगा
वेसे कहानिया बाजु पर्, मेरे ख्याल से इस बार अमरिका की बजह से नहि लेकिन हमे इरान का साथ नहि देना चाहिये कुछ देशो मे सरकार का भरोसा नहि किया जा सकता, इरान भी वैसा है बंदर के हाथ मे बम बनाने कि टेकनोलोजी नहि जानी चाहिये दुनिया मे कोइ दोस्त नहि होता इरान की अगली सरकार यह टेकनोलोजी से बम बना कर किसी के सामने प्रयोग भी कर सकती है याद रहे कि अफघानिस्तान हमारा पुराना दोस्त था लेकिन हमे तालिबान के सामने लडना पडा और हमारी फट पडी थी!! अगर अफघानिस्तान को हमने हथियार बनाने मे मदद की हुइ होती तो वो तालिबान हमारे सामने युझ करते जेसे उन्होने अमरिका का स्ट्रिंजर मिसाइल उसके हि सामने ही युझ किया था ये देश का दुर्भाग्य हे कि बेवकूफ लेफ़्ट वाले शाशन मे भागीदार है
हथोडा
"पाकिस्तानी सरमुख्यतार आतंकी परवेज मुर्शरफ उवाच : इरान को परमाणु टेकनोलोजी से दूर रखना चाहिये" हे ना मस्त जोक चूहे को मारकर.....!!









2 Comments:
आप मेरे बकरे बने है!!
रवि भाई इस बार वाकई आपने कमाल कर दिया है लगता है "मोसाद ना जासूसी पराक्रमों" पढ ली है, इस बार आपकी साफ़गोई की तारीफ़ करनी पडेगी, लगे हाथ उन बेवकूफ़ो के नाम भी लिख देते जिन कि वजह से कश्मीर ओर पाकिस्तान की समस्या उत्पन्न हुई तो ज्यादा मजा आता
::सागर चन्द नाहर::
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