तत्वज्ञानी के हथौडे
Tuesday, April 04, 2006
  कोकरोज पुराण : मेरे साथ हुइ एक खतरनाक साजिश
यह लेख लिखने के लिये जिम्मेदार मैं नही पर एक कोकरोज़ है। हा, लिख तो मैं रहा हुं पर मेरे पास से यह कर्म कराने के लिये जिम्मेदार कोकरोज़ ही है। दर असल हुआ यु की आज अचानक मुझे मेरे शर्ट के अंदर कुछ घूमता हुआ महेसूस हुआ। अब साला वेसे तो मुझे खुद की प्रशंषा करने की आदत नही है लेकिन मै बहुत बहादुर हु। एक साथ दो-तीन लादेन को टपका डालने की औकात है मेरी। कभी कबार मनमोहन सिंह फोन भी कर डालते है दाउद को पकडने मे उनकी मदद करने के लिये, लेकिन मै आज कल बहुत व्यस्त रहता हुं। हा तो मैं यह कह रहा था की इतना बहादुर होने के बावज़ूद कुछ समय के लिये डर – नहीं नहीं डर नहीं- थोडा सा हिल गया था। वो क्या है की कोकरोज़ के साथ लडाइ लडने की आदत नहीं डाली अभी तक। अब प्रॉब्लम वहा हुआ की कोकरोज़ मेरे शर्ट के अंदर, मेरी सलमान जेसी बोडी पे रेंग रहा था (या रेंग रही थी??) वह भी डर गया था या पता नही मेरा शरीर उसे जर्मनी के हाइवे जेसा लग रहा था तो साला निकले ही नही।

अब मेरे सारे दोस्त मेरे सामने बेठे थै। उससे भी बडा प्रॉब्लम की उनमे लडकिया भी थी। अब अगर मैं शर्ट निकालु और सारी लडकिया मेरी बोडी पे फिदा हो जाये ओर कुछ ना करने का कर बेठे तो? मेरा तो ठीक, लेकिन दूसरे लडके तो शर्म या जेलसी के मारे मर ही जाए ना? इसिलिये मैं सिर्फ थोडा बहुत हिला, शर्ट का “इन” पेंट मे से निकाला और कुछ बार शर्ट को झटकाया। लेकिन वह कोकरोज़ निकली ही नही बहार।


लेकिन मैं ही क्यो??
वेसे मेरे दोस्त का मानना था की वह नर कोकरोज़ था और बहुत बहादुर था। इसलिये मुज पर बिन्दास घूम रहा था। लेकिन मै इन कोकरोजो को अछ्छी तरह से जानता हुं , बहुत डरपोक होते है। अब यह अगर नर कोकरोज़ था तो साला वो अपनी गर्ल फ्रेंड कोकरोज़ को इम्प्रेस करने के लिये मेरे पर घूमने तो लगा लेकिन बाद में उसकी 100% फट गयी होगी(पतलून)। मेरा मानना है की यह मादा कोकरोज़ का ही काम हो सकता है क्योकि इस दुनिया के सारे प्राणी जानते है की मै लडकियो पे हाथ नही उठाता। पैर के बारे मे क्लेरिफिकेशन किसी ने मांगा नही है। इसलिये कोकरोज़ मेरे बोडी पे घूमती रही होंगी, अपने सारे बोय-कोकरोज-फ्रेंड को इम्प्रेस करने के लिए।

मुझे दरअसल डर नही लग रहा था लेकिन अजीब सी चूभन हो रही थी। नही आता यकीन? ठीक है। एक बार ट्राय कर लो। मगर आपमें एसा कुछ भी नही की कोइ कोकरोज़ आपपे घूमने को आये। दरअसल मैने पिछले जन्म मे बहुत पूण्य किये थे।

बहुत बडे ज्योतिष का भी कहना है की जिनके नसीब में राजयोग हो, जो पूरे दुनिया को दुख में से मुक्ति दिला सकता है, उसके शरीर पर यकायक कोकरोजो के बादशाह आकर घूमेंगे और गुप्त शक्ति प्रदान करेंगे। यह घटना लाखो सालो मे एक बार होती है। यानि वो महान आदमी मै हुं।

अब मेने ज्योतिष से कह कर पूजा करवाली है आप सबके लिये। आप को सिर्फ आप के शरीर पर सुबह 10 मिनट तक, हररोज़ नर कोकरोज़ और शाम को 10 मिनट तक मादा कोकरोज़ को घूमने देना है। यह विधि सिर्फ 2 महिने तक करनी है। इससे आपकी सारी मनोकामना पूरी होंगी। शुरु करदो नर और मादा कोकरोज़ ढूंढना।

क्यो कोकरोज यह विधि करते है?

दरअसल ब्रम्हा का प्रिय प्राणी इंसान नही बलकी कोकरोज़ है। सारे इंसानो से उम्र मे यह प्रजाति बडी है। बडे बडे डायनासोर को यह अपनी गोदी मे खिला चूके है और उनके शरीर पर घूमते थे। जब इनको डायनासोर से अनबन हुइ तो ब्रम्हा ने डायनासोर को ही हटा दिया और इंसानो को भेज दिया, ताकी कोकरोज़ उनके बोडी पे खेल सके। है ना जोरदार जेक ब्रम्हा से? अब मुझे इंसान और कोकरोजो के बिच वार्तालाप करने के लिए कोकरोज बादशाह (शायद रानी) ने सिलेक्ट किया है। इंसानो के दवाइया छिडक कर पिछे से हमला करने पर यह काफी खफा है। उनको मेरे जेसे बहादुर इंसान जो उनको पैरो से रगडते है वह पसंद है। अब मै उनके साथ सिज़-फायर कर दूंगा, ताकि पूरी इंसान प्रजाति बची रहै। ओर खून ना बहे।

लोजिक – 2
शायद उसे मेरी सुपारी मिली हो तो?

लेकिन यह भी हो सकता है की वह कोकरोज़ मुझे मार डालने के लिए आया हो। क्यो नहीं हो सकता? मुझे सिर्फ बहेकाने के लिये यह ज्योतिषी को पैसे खिला दिए हो तो? या फिर ज्योतिष को इतना बोल दिया हो की अगर तु रवि साहब को यह बोलता है की वह बहुत बडे इंसान है और कोकरोज-इंसान समजौते के लिये चुने गये है तो हम सब कोकरोज आप ज्योतिष के घर से निकल जायेंगे। हो सकता है की नही?? अगर कोइ इंसान को कोकरोज उसके घर से निकलने का वादा करे तो उसके इंसान में क्या इंसान किसी भी हद तक नही जायेगा? जायेगा और खून भी करेगा!! कोकरोज तो जा रहे है ना!!

शायद पिछ्ले जन्म में मैने कोकरोजो को मार डालने वाली दवाइ की शोध की हो और यह कोकरोज़ बदला लेने के लिये आया हो तो?

या फिर मै पिछ्ले जन्म मे कोकरोज था और मैने इस कोकरोज़ बादशाह की बेटी को भगा कर शादी की हो तो?

या फिर इसका भाइ मेरे पैर के निचे आकर शहिद हो गया हो?

शायद मेरी ज्योर्ज बुश और मनमोहन सिंह से करीबी दोस्ती की बजह से कोइ दुश्मन मुझे मारना चाहता हो और आर्टीफिशियल रोबो कोकरोज़ भेज कर मुझे मारना चाहे तो?

मेरा शक चाइना पर भी जाता है। उनकी तो कोकरोज़ो के साथ बहुत पटती है। बिन्दास खाते है। लेकिन कोकरोजो को तो चाइना से नफरत होंगी क्योकि चाइनीस लोग कोकरोजो को कच्चा चबा जाते है। तो फिर कोकरोज तो मेरी मदद ही करेगा ना? क्या पता? कुछ मदद करो। कोइ ओर कोंसपिरसी हो सकती है क्या? इसका निपटारा करके मै आपको मेरी एक ओर दुखभरी दास्तान सुनाना चाहूंगा। दर असल सोनिया गांधी हररोज मुझे फोन करके पकाती है और हथौडे मारती है। खेर वो बाद में कभी।

जो भी हो, वह कोकरोज सुंदर और शाही था।

हथौडा
”ये क्या कम था ओर क्या खाक हथौडा! एक बार कोकरोज सिर पर गीरा कर देखो। सब हवा निकल जायेगी। वेसे कोकरोज का हक इस प्रूथ्वी पे हमसे ज्यादा है क्योकि वह यहाँ डायनासोर से भी पहले से रह रहे है और हमारे जाने के बाद भी वह अपना जीवन बिंदास जियेंगे“
 
Comments:
मजा आया. लेकिन आखिरकार वो कोकरोच निकला किधर से.
 
क्या पता! शायद स्वर्ग में से आया था। शायद ये खुद भगवान क्रिष्ण थे, जो अब कोकरोज़ के अवतार में मुझे कुछ आशीर्वाद देने आये थे या मुज पापी को मारने को आये थे।
एक ओर संभावना भी है, ये शायद मेरे शरीर मे से ही निकला हो?? यानि अब मेरे शरीर मे से कोकरोज निकलते है? हे भगवान, ये क्या किया? मै ही क्यो?
 
मेरे सूत्रों ने मुझे बताया है कि काकरोच कम्यूनिटी एक अनुगूँज आयोजित कर रही है "मनुष्य का हमारे जीवन पर प्रभाव" उसी लिए तो आपके द्वारे सॉरी शरीर पर थीसिस लिखने के लिये आया होगा/होगी। लो अब एक चुटकला सुनो:

जीवशास्त्र का एक विद्यार्थी जो काकरोच पर थीसिस लिख रहा था, उसे एक काकरोच मिला, उसने उसे टेबिल पर रखा, और बोला "अब चल कर दिखा", काकरोच बेचारा एक दो कदम चला, विद्यार्थी ने उसकी दो टांगे तोड़ दी, और बोला, "अब चल कर दिखा" काकरोच ने फिर ट्राई मारा, इसी तरह विद्यार्थी ने उसकी एक एक करके सारी टांगे तोड़ दी और अन्त मे बोला "अब चल कर दिखा" काकरोच बेचारा क्या करता, वंही पड़ा रहा। इस पर विद्यार्थी ने अपनी थीसिस मे लिखा:
"काकरोच की सारी टांगे तोड़ने के बाद वो बहरा हो जाता है"

 
बढ़िया लिखा।काश काक्रोच भी ब्लाग लिखते-हथौड़े वाले रवि की सैर के बारे में कुछ बताते!
 
बहुत मस्त लिखते हैं काक्रोच की कसम.
 
मस्त मस्त
 
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कोइ मानता ही नहि के मेरे पास दिमाग हे इसिलिये खुद्को तत्वज्ञानी घोषीत करता हु!वैसे हु मैं गुज्जु Engineer.Magazine भी शुरु कर रहा|हु पर हु एक टपोरी|तो ये हे टपोरी का तत्वज्ञान् और हथौडे भी|हेल्मेट पहेन लो|

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A computer engineer by education, working in media field, "preaching" companies on technology and Business Stretegies and also earning bread from it. In short,I sell ideas and also execute them. This blog is personal thing not reflecting my profession.



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