तत्वज्ञानी के हथौडे
Tuesday, June 27, 2006
  गुरु घंटाल अरूंधती रोय
अक्षय कुमार ने सिखाये हुए इस भव्य शब्द “गुरु घंटाल” का अब जाके सफल प्रयोग हुआ है!! अब ये अरूंधती रोय को गाली देना चाहता था, लेकिन स्वंय को सेंसर्ड कर लिया। -----, ----, --- ये सब जगह आप भर सकते है इस मानुनी के लिये जो की सबसे बडी धोकेबाज और जालसाज “देवी” है। देखा मै इनको कितना सभ्यता पूर्वक गालियां दे रहा हूं!


दर असल “वन आइटम वंडर” मिस रोय, जो अपनी “GOD OF SMALL THINGS” नामक पुस्तक से प्रसिध्ध हो गयी, वो इतने आसमान मे उडने लगी की खुद को भी “GOD OF SMALL (POOR) PEOPLE” ग़िनने लगी। प्रसिध्ध होने की लालच और शायद कुछ एवार्ड जितने की तमन्ना मे यह खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने लगी। मेधा पाटकर जेसी कार्यकर्ता का साथ नर्मदा डेम जेसे संवेदन शील मुद्दे पे देने के बावजूद भी इनको बहुत बार मूंह की खानी पडी है!! ये दिखावा एसा करती है की वोही आदिवासीओ की मसिहां है!(यह पोइंट मार्क किया जाए, माय रिडर लोर्ड)!!लेकिन हर बार बेचारी औरत के विचार के साथ कोर्ट सहेमत नही होता। एक बार तो कोर्ट के आदेश न मानने के जूर्म मे जेल भी जाना पडा था। तो भी गाल लाल करके हंसना पडा था। लेकिन फिर भी घमंड तो था ही। इस बार आमिर खान के नर्मदा मामले मे कूदने से इनको साइड मे होना पडा। क्योकि पब्लिक आमिर का सुनती है, इनको तो जानती भी नही!! अब इस बार कोर्ट ने फिर से इनके विचारो से हटकर नर्मदा डेम का काम चालू रखने का फैसला किया तो फिर से जोर का झटका धिरे से लगा, लेकिन एक बार कोर्ट की निंदा करने की बजह से जेल की मस्त हवा खा चूकी देवीजी इस बार कोर्ट से पंगा लेने से बचती रही।

अब आप सोचते होंगे की बेचारी अकेली औरत पर इतना क्यो जूर्म ढाया जा रहा है?? सिर्फ इसिलिये की आदिवासीयो की इस मसिहा ने कुछ आदिवासीयो की जमीन पे नाजायज़ कब्ज़ा कर लिया है?? तो क्या हुआ? इनका यह करने का हक है! अब मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के पास पिपरीया में तो कोइ थोडी ही घर बनायेगा?? यहाँ तो सिर्फ फार्म हाउस होगा! अब इतनी सेवा करने के बाद एक आदिवासी को तो मिस रोय की फीस चूकानी पडेगी ना?


हथौडा

” क्यो भाइ, इतनी गालियां क्यो दे रहे हो? तो क्या हुआ “GODESS OF SMALL PEOPLE” कहलवाना चाहती अरुंधती रोय PEOPLE को भी अपने किताब के नाम की तरह THING गिने!! समझ मे आया कुछ??”
 
Comments:
ऐसे तथाकथित हाई प्रोफ़ाइल समाजसुधारकों के दबे-ढंके कार्य ऐसे ही तो होते हैं
 
देखो भाई समाज सुधारक या धर्म प्रचारक सेवा का ढ़ोंग करते ही इस लिए हैं कि उनके कारनामें जब सामने आये तो उनके अनुयायी-समर्थक वगेरे आड़ बन जाये.
 
जिस बात का ज़िक्र आप कर रहे हैं उसे पढ़ कर थोड़ा अज़ीब लगा. सुश्री राय की बात से असहमत हो सकते हैं, पर उनके लेख पढ़ कर मुझे लगता है कि उन्होने कितना शोध करके सारी बात निकाली होगी, और उनके लिखने का तरीका बहुत कवितामय है. उनसे एक छोटी सी मुलाकात की सुंदर याद है मन में. होने को तो सब हो सकता है, पर जिसने बुक्कर पुरस्कार से मिली राशि हो और वह सारा पैसा विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं को बाँट दे (उनमे से हिंदी की पत्रिका हँस भी थी), वह जानबूझ कर किसी गरीब के अधिकारों को कुचल सकती है, विश्वास नहीं होता!
 
હમમ,

સરસ યાર. આ લોકો તો તમાચો પડે ત્યારે જ સીધા થાય તેવા છે..
 
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कोइ मानता ही नहि के मेरे पास दिमाग हे इसिलिये खुद्को तत्वज्ञानी घोषीत करता हु!वैसे हु मैं गुज्जु Engineer.Magazine भी शुरु कर रहा|हु पर हु एक टपोरी|तो ये हे टपोरी का तत्वज्ञान् और हथौडे भी|हेल्मेट पहेन लो|

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A computer engineer by education, working in media field, "preaching" companies on technology and Business Stretegies and also earning bread from it. In short,I sell ideas and also execute them. This blog is personal thing not reflecting my profession.



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