जनरल मुशर्रफ को खरीद लो..
जानता हूं की पाकिस्तान को ज्यादातर लोग नफरत ही करते है, अगर प्यार करते है तो केवल थोडे समय के लिये। लेकिन यह मुंबइ ब्लास्ट के बाद मैं भारत और पाकिस्तान की स्ट्रेटेजी समजने की कोशिश कर रहा था। तकरीबन 9/11 के बाद से हमारे मिडीयावाले यह छापते आये है की मुशर्रफ की तो अब अमरिका बजायेगा। लेकिन हुआ उल्टा, अमरिका ने मुशर्रफ की मदद ली और उनके सैनिक शाशन को मूक रूप से मान्यता दी। फिर हमारे मिडीयावाले बोले, अब परवेज़ मुशर्रफ को उनके ही देश के तालिबान समर्थक मुस्लिम उडा डालेंगे क्योकि मुशर्रफ अमरिका की गोदी मे बैठ गये है, और उनपे कुछ हुमले हुए भी सही। फिर नयी कल्पना आयी, की मुशर्रफ के सैन्यवाले अफसर ही उनको मार डालेंगे। यह कल्पना इतनी प्रचलित हुइ की हम लोगो ने अगर मुशर्रफ जाते है तो पाकिस्तान के परमाणु बम आतंकीयो के हाथ मे जाने से रोकने के लिये भारत और अमरिका का पाकिस्तान पे हुमला भी कर दिया!! यानि हमने मन ही मन मे यह मान लिया था की मुशर्रफ के हाथ मे परमाणु बम सेफ है।
अब इधर देखिये, एक सैनिक, जो illegal रूप से पाकिस्तान की सरकार चला रहा है, भारत पे कारगिल युध्ध का आर्किटेक्ट रह चुका है, उसके सामने हम बारबार दोस्ती का हाथ फैला देते है, फिर एक धमाका होता है और हम बोलना बंध कर देते है। फिर 6 महिने के बाद दोस्ती। फिर धमाका.....
हर बार यह आदमी कुछ ना कुछ एक्स्टेंशन ले जाता है अपने प्रमुख बने रहने के लिये। 2001 की पाकिस्तान की देवालिया हालत से आज 6% से ज्यादा का विकास दर ले आने के लिये मुशर्रफ ने दुनिया से अछ्छी सौदेबाजी की है। हमसे भी।
अब जनरल मुशर्रफ, चीन के साथ भी अछ्छे दोस्त है। अमरिका के साथ भी पटती है। अमरिका और चीन हरीफ है। बहुत कम देश एसे है जो इन दोनो देश के साथ गहरी दोस्ती लंबे समय से चलाते आये है। ताइवान और नोर्थ कोरिया को सिर्फ चीन के साथ पटती है तो जापान को अमरिका के साथ। पता चला कुछ? पाकिस्तान अमरिका के कट्टर दुश्मन नोर्थ कोरिया को परमाणु बम बनाने मे मदद करता है और तालिवान समर्थक लोगो के होने से अमरिका उसे भारत जेसी न्युक्लियर डील ओफर नही करता, लेकिन इससे रुठ कर जनरल F-16 प्लेन का सालो से रूका हुआ सौदा फिर से करवाने का प्रयत्न चालू करते है। पाकिस्तान की फौज मे चीन के भी प्लेन और मिसाइल्स उतनी ही मात्रा मे है जितने अमरिकी हथियार।
हमलोग यह सोच के खुश होते है की चीन और अमरिका पाकिस्तान को बच्चा समज़कर मदद कर रहे है और हमे एक मजबूत हरीफ सोच कर डर रहे है और अपना फायदा देख कर हमे बार्गेन दे रहे है। लेकिन भाइ, एक बम सिर्फ एक बम से, हमारी पेंट मे सुसु हो जाता है। पाकिस्तान एसा देश है जिसके पास कुछ ना होने के बावजूद येन केन प्रकारेण वो पूरी दुनिया से कुछ ना कुछ ले लेता है। और हम हमेशा की तरह प्रतिक्षा करते रहते है की पाकिस्तान की यह ब्लेकमेलिंग से दुनिया कल उब जायेंगी। वो कल कब आयेंगी?
दर असल, हमारे इतिहास पर से यह मान लेना चाहिये की हम स्वभावगत थोडे कमजोर और कायर है। इसे आप हमारी अछ्छी सहनशीलता का सुवर्ण नाम दे सकते है। इसी शब्द की बजह से हम कश्मीर को चीन और पाकिस्तान को दे चूके है और चीन से 1962 का युध्ध हार चूके है। 1965-1971 का युध्ध तो जीतना ही था, क्योकि पाकिस्तान मे इतनी तो औकात नही है की वो बडे देश को हरा सके। लेकिन वो कोशिश चालू रखता है। कारगिल युध्ध मे पाकिस्तान की जीत बताउंगा। उसने क्या खोया इसमे? कुछ सैनिक ही। लेकिन हमने तो आत्मसन्मान खोया। इतने बडे पैमाने की घूसपैठ के बारे मे हमे बहुत देर से पता चला और हमारे भी बहुत सैनिक मारे गये। अगर हम एसे ही कायर रहे तो पाकिस्तान धीरे धीरे छोटी छोटी जीत दर्ज करवाता जायेगा।
अब देखो, अभी लेबेनोन मे हिजबूल्लाह ने 3 इसरायीली सैनिको को बंदी बनाया, और इसरायेल ने बिंदास लेबेनोन के सिविल एयरपोर्ट पे हमला किया, लेबेनोन का कोइ कसूर नही फिर भी (सिर्फ उसपे आरोप है) । हम तो कारगील युध्ध मे भी पाकिस्तान तो छोडो, POK भी हमला नही कर सके!! अमरिका एक 9/11 के बाद अफघानिस्तान को बदल सकता है। सिर्फ शक के आधार पर इराक को काट सकता है। और हम पक्की जानकारी होने के बावजूद एक दाउद को पाकिस्तान मे से उठवा नही सकते!!!और हमारे मुलायम यादव सिमी को सपोर्ट करते है जिसके सामने पुख्ता सूबूत है!!
हथौडाहमे जनरल परवेज मुशर्रफ को अपना प्रधानमंत्री बनाना चाहिये। सोचो अगर वो आदमी पाकिस्तान जेसे कंगाल देश को अछ्छा सौदा दिलवा सकता है दुनिया से, तो हमे तो कितना फायदा दिला पायेगा?? क्या ख्याल है?