<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><rss xmlns:atom='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' version='2.0'><channel><atom:id>tag:blogger.com,1999:blog-21203546</atom:id><lastBuildDate>Wed, 11 Jun 2008 04:54:06 +0000</lastBuildDate><title>तत्वज्ञानी के  हथौडे</title><description/><link>http://www.tarakash.com/ravi/index.htm</link><managingEditor>noreply@blogger.com (Ravi Kamdar)</managingEditor><generator>Blogger</generator><openSearch:totalResults>28</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><item><guid isPermaLink='false'>tag:blogger.com,1999:blog-21203546.post-116443914199300148</guid><pubDate>Sat, 25 Nov 2006 07:15:00 +0000</pubDate><atom:updated>2006-11-24T23:27:37.316-08:00</atom:updated><title>हे हे चिम्पू पंकजभाइ को क्या तोहफा दे?</title><description>अब जब पंकजभाइ सब के जन्मदिन पर उनको बधाइ देने के लिये एक पूरा “तरकश विशेष” बना डालते है तो स्वाभाविक है उनके जन्मदिन पर ब्लोग जगत मे हर कोइ कुछ ना कुछ तो लिखेंगे ही। मुझे यह भी पता है जो भी बधाइयॉ आयेंगी सब कोइ तारीफ ही करने वाला है। तो मैने सोचा मैं पंकजभाइ की थोडी लगा लेता हूं! दर असल चिंम्पू यानि आपके पंकज बेंगाणी को मारना चाहिये। अरे भाइयो, रूको तो सही मारने दौडे। मैं तो बड्डे बम्प्स की बात कर रहा हूं! वेसे पंकजभाइ हफ्ते मे 4 दिन बीमार रहते है। पहले दिन उनको एलर्जी होती है, फिर सर्दी-झुकाम, सिर दर्द तो शायद आसाम से उठा ले आये है। यही क्रम मे यह सब चलता रहता है। अब बोलो इन्हे वडा पाउ खाने से भी कुछ बीमारी आ जाती है! “अरे मेरे लिये वडापाउ एकदम “माइल्ड” लाना” फिर जब भी मै “माइल्ड” वडापाउ लेकर आंऊ तो भी “बहुत तीखा है” बोलते रहते है। हमेशा बात चीत करने के लिये उत्सुक रहते है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; वैसे मारवाडी है लेकिन पैसे बनाने कि चाह कम लगती है। मैं उनको “सेवा” करते देखता रहता हूं और चिढाता रहता हूं। वो सबकी सेवा करने मे और ग़ूगल टोक पे सब के साथ खपाने मे दिन का 35% समय देते है। दूसरा 20% समय “तरकश” मे जाता है। मै जब उनकी ओफिस मे जाता हू तो मेरे साथ चर्चा मे 10% समय जाता है। 5% समय घर जाकर खाने मे, और अगर वो दिन हफ्ते के 4 बीमार होने वाले दिन मे से है तो दूसरे 15% समय बीमारी को गालियां देने मे जाता है!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अरे हां, बाकी का बचा हुआ समय वो अपने काम पर भी देते है। वेसे वेब डिजाइनींग का काम अछ्छा कर लेते है । कुछ बार मिडीया जगत और न्युज़ की साइट्स पढते रहते है। वेसे “छवि” मे दोनो भाइ “तरकश” और “नारद” पे बहुत समय देते है। “नारद” तो इतना प्रिय है दोनो को की बिच मे “नारद” मे चल रहे प्रोब्लेम्स के चलते जब मैने तरकश पे नारद जेसा नया एग्रीगेटर बनाने का प्रस्ताव रखा तो वो बस्ते मे चला गया। बोले नारद मे बहुत महेनत लगी है उसका कोम्पिटीटर खडा नही करना। अब मै बोला इतने सारे हिन्दीभाषी है सबके लिये इनफ स्पेस है मार्केट में। मैने कहां ठीक है तो एक कुछ इ-सामायिक जेसा शुरु करते है। तो “निरंतर” बीच मे! मैने कहां “निरंतर” मे आने वाले आर्टीकल्स से अलग भी बहुत सा कंटेट है। कुछ प्रतियोगीता का आयोजन करके नये लोगो को लाते है हिन्दी जगत मे! आखिरकार अब हम नारद के एक्लुसिव वर्ज़न जेसा “लिमिटेड” ब्लोग वाला एग्रीगेटर लाने की तैयारी करने लगे! अब जाकर प्रतियोगीता के आयोजन के साथ इ-सामायिक की बात चली है। वेसे अब चिम्पू व्यवसायिक होने लगे है । तरकश पे एडवर्टाइज़मेंटस लाने के लिये महेनत कर रहे है। शायद प्रतियोगिता के लिये स्पोंसर्स भी मिल जायेंगे। वैसे चिम्पू गुजराती नही है लेकिन साले कोइ भी टोपिक पर गुजराती से ज्यादा गुजरात गुजरात लगा देते है। मोदी भक्त है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;“तरकश” पे 200 विज़ीटर आये थे पहली वार तो खुश खुश हो गये थे! बोले “तरकश” सुपर हिट को गया! मैने कहां, जाओ छत पे जाके नाचो! 3-4 लोग कोमेंट देते है तो खुश हो जाते है, जबकी मै हमेंशा ज्यादा हिटॅस लाने के चक्कर मे रहता हूं, लेकिन कुछ काम नही करता! “तरकश” मे नया सुडोकु डाला। मुझे फोन किया, “तरकश” मे नया विभाग सुपर हिट!! मैने कहां कैसे भाइ? बोले सब लोग पागल हो गये है, बोलते है जबरजस्त है। मैने बोला कितने लोग पागल हो गये? बोले मेरे को गूगल पे सब बता रहे है। अब उसमे से आधे तो हम तरकश टीम वाले होंगे! मैने कहां, घंटा हिट हुआ है! साला अपने तरकश टीम वाले बोले के अछ्छा है तो सुपर हिट थोडी हो गया! तो कभी बोले ये आज का आर्टीकल सुपरहीट! क्यो भाइ? बोले जीतूजी, सुनिलभाइ, अनुपभाइ, देबाशिष इन सब ने तारिफ की! मै बोलु वो तो घर के हुए अब! साले कुछ नये लोग लाओ अपनी तारिफ करने के लिये। जेसे मै थक गया आपकी तारिफ करते करते वेसे ही यह सब भी थक जायेंगे। वेसे समीरलाल की भी डेरिंग है! अभी तक पंकज भाइ की तारिफ कर रहे थे! खेर अब जब “तरकश” काफी हीट हुआ है और थोडी बहुत एड भी लाने लगा है तो लगता है हमारी धीरज काम करेगी। अभी भी कमाइ तो नही हो रही कुछ खास लेकिन हिटस बढ गयी है। वेसे पकंजभाइ एक ट्युबलाइट है “कुछ” चीजो मे और ज्यादातर मे फास्ट केचअप करते है। अरे साब, आप को अंदर की बात बताउ तो पूजाभाभी भी पंकजभाइ की खिंचाइ कर लेती है! वेसे मेरा दिमाग खा गये है, धूम 2 का रिव्यु लिख रिव्यु लिख रिव्यु लिख! ठीक है तो धूम 2 का रिव्यु आपको कल मिल जायेगा। बड्डे गिफ्ट समजना! साला मेरा मेसेंजर पूरा इससे भर दिया। बहुत कमीने पब्लिशर है। हां बताना भूल गया, मुझे एडवांस मे बड्डे पार्टी मिल चूकी है! बोलो क्या मिला होगा? हे हे, “वडा पाउ”!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हथौडा &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;तो इन्हे क्या तोहफा देना चाहिये?&lt;br /&gt;1. एनासिन । अरे नही यार कम पडेगी एक दवाइ! दवा की दुकान ही देते है ।&lt;br /&gt;2. “सेवाभावी आदमी ओफ दी यर” एसा कुछ अवार्ड?&lt;br /&gt;3. “तरकश.कोम” का मार्केटिंग करके कुछ हिट्स ज्यादा दे ताकी चिम्पू खुश हो जाये?&lt;br /&gt;4. हे हे, इसे क्या तोहफा देना! उल्टा पार्टी मांगो!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मै तो धूम 2 का रिव्यु लिख डालता हूं! पीछा भी छूटे और गिफ्ट भी दे सकू!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;!--
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&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;</description><link>http://www.tarakash.com/ravi/2006/06/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Ravi Kamdar)</author></item><item><guid isPermaLink='false'>tag:blogger.com,1999:blog-21203546.post-114717483838950518</guid><pubDate>Tue, 09 May 2006 11:12:00 +0000</pubDate><atom:updated>2006-05-09T04:42:51.780-07:00</atom:updated><title>अब क्रिकेट मे अनामत...</title><description>कल रात को अर्जुन सिह का फोन आया। वही अनामत वाले मंत्री। मेरे साथ कुछ खास बात करना चाहते थे। दर असल बहुत से बडी पर्सनालिटीस मुझे अकसर फोन करके परेशान करती रहती है। क्या करे लेकिन, मुझसे भी अमीरो के दुख दर्द देखे नही जाते। इसिलिये मै उनकी काफी मदद करता हूं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब जब अर्जुन ने मुझे फोन किया तो मुझे लगा शायद लंगूर को नोलेज कमिशन की राय पे कुछ बात करनी थी। कल साम पित्रोडा वाले 8 सदस्योवाले कमिशन ने अनामत का 6-2 से विरोध किया था। लेकिन अर्जुन जिसका नाम! कोइ परेशानी नही लेनेकी। बल्के देनेकी। मुझे बोले," रवि क्रिकेट में अनामत आना चाहिये। क्या ख्याल है?" मै भी सोच मे पड गया..साला इतने धांसू विचार इसके दिमाग मे कैसे आते है?? "सचिन, द्रविड यह सब से अब  पूरा भारत उब चूका है। अब टीम मे पछात वर्गो को लाना चाहिये। उनको भी तक मिलनी चाहिये। " मैने कहा, " ठीक है। आपने कुछ ओर भी सोच ही डाला होगा तो बताही दिजीये" उन्होने बताये कुछ नियम लिख रहा हूं:&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;क्रिकेट में क्वोटा सिस्टीम&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;1. SC, ST, OBC के लिये अबसे बाउंड्री 15 यार्ड छोटी रहेगी ।&lt;br /&gt;2. एक चोक्का अब्से इनके लिये छ्क्का कहेलायेगा।&lt;br /&gt;3. अगर वो एक टप्पा खालेने के बाद भी गेंद पकडे तो भी सामने वाला सवर्णँ आउट।&lt;br /&gt;4. उनका एक छक्का अब से आठ रन देगा।&lt;br /&gt;5. वो 5 बोल की ओवर डाल सकेंगे।&lt;br /&gt;6. अपने स्कूल की टीम मे 25 रन स्कोर करने वाले OBC को भारतीय टीम मे जगह मिलेंगी।&lt;br /&gt;7. इन लोगो के 60 रन बराबर = 100 रन ।&lt;br /&gt;8. अगर लोग इस सब बातो का विरोध करेंगे तो उनकी अलग टीम बनायेंगे जिसमे उनको 60% मेच में पहेले से ही जीत दी जायेगी। यानि मेच की जीत पर 60% अनामत।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब आगे मुझे सोच कर बताना है। आप भी अपना दिमाग लगा सकते है। लेकिन मुझे नही लगता की कोइ बंदा अर्जुन सिंह जीतना अछ्छा भेजा रखता हो।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;हथौडा&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;" अर्जुन सिंह दिन मे केवल 3 दिन अपनी पत्नी के साथ बिताते है। क्यो? बाकी के दिन SC, ST, OBC जेसे वर्गो के लिये अनामत है"&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;!--
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&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;</description><link>http://www.tarakash.com/ravi/2006/05/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Ravi Kamdar)</author></item><item><guid isPermaLink='false'>tag:blogger.com,1999:blog-21203546.post-114420984337597872</guid><pubDate>Wed, 05 Apr 2006 04:50:00 +0000</pubDate><atom:updated>2006-04-04T21:52:23.316-07:00</atom:updated><title>कोकरोज पुराण : मेरे साथ हुइ एक खतरनाक साजिश</title><description>यह लेख लिखने के लिये जिम्मेदार मैं नही पर एक कोकरोज़ है। हा, लिख तो मैं रहा हुं पर मेरे पास से यह कर्म कराने के लिये जिम्मेदार कोकरोज़ ही है। दर असल हुआ यु की आज अचानक मुझे मेरे शर्ट के अंदर कुछ घूमता हुआ महेसूस हुआ। अब साला वेसे तो मुझे खुद की प्रशंषा करने की आदत नही है लेकिन मै बहुत बहादुर हु। एक साथ दो-तीन लादेन को टपका डालने की औकात है मेरी। कभी कबार मनमोहन सिंह फोन भी कर डालते है दाउद को पकडने मे उनकी मदद करने के लिये, लेकिन मै आज कल बहुत व्यस्त रहता हुं। हा तो मैं यह कह रहा था की इतना बहादुर होने के बावज़ूद कुछ समय के लिये डर – नहीं नहीं डर नहीं- थोडा सा हिल गया था। वो क्या है की कोकरोज़ के साथ लडाइ लडने की आदत नहीं डाली अभी तक। अब प्रॉब्लम वहा हुआ की कोकरोज़ मेरे शर्ट के अंदर, मेरी सलमान जेसी बोडी पे रेंग रहा था (या रेंग रही थी??) वह भी डर गया था या पता नही मेरा शरीर उसे जर्मनी के हाइवे जेसा लग रहा था तो साला निकले ही नही।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब मेरे सारे दोस्त मेरे सामने बेठे थै। उससे भी बडा प्रॉब्लम की उनमे लडकिया भी थी। अब अगर मैं शर्ट निकालु और सारी लडकिया मेरी बोडी पे फिदा हो जाये ओर कुछ ना करने का कर बेठे तो? मेरा तो ठीक, लेकिन दूसरे लडके तो शर्म या जेलसी के मारे मर ही जाए ना? इसिलिये मैं सिर्फ थोडा बहुत हिला, शर्ट का “इन” पेंट मे से निकाला और कुछ बार शर्ट को झटकाया। लेकिन वह कोकरोज़ निकली ही नही बहार।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;लेकिन मैं ही क्यो??&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;वेसे मेरे दोस्त का मानना था की वह नर कोकरोज़ था और बहुत बहादुर था। इसलिये मुज पर बिन्दास घूम रहा था। लेकिन मै इन कोकरोजो को अछ्छी तरह से जानता हुं , बहुत डरपोक होते है। अब यह अगर नर कोकरोज़ था तो साला वो अपनी गर्ल फ्रेंड कोकरोज़ को इम्प्रेस करने के लिये मेरे पर घूमने तो लगा लेकिन बाद में उसकी 100% फट गयी होगी(पतलून)। मेरा मानना है की यह मादा कोकरोज़ का ही काम हो सकता है क्योकि इस दुनिया के सारे प्राणी जानते है की मै लडकियो पे हाथ नही उठाता। पैर के बारे मे क्लेरिफिकेशन किसी ने मांगा नही है।  इसलिये कोकरोज़ मेरे बोडी पे घूमती रही होंगी, अपने सारे बोय-कोकरोज-फ्रेंड को इम्प्रेस करने के लिए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुझे दरअसल डर नही लग रहा था लेकिन अजीब सी चूभन हो रही थी। नही आता यकीन? ठीक है। एक बार ट्राय कर लो। मगर आपमें एसा कुछ भी नही की कोइ कोकरोज़ आपपे घूमने को आये। दरअसल मैने पिछले जन्म मे बहुत पूण्य किये थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बहुत बडे ज्योतिष का भी कहना है की जिनके नसीब में राजयोग हो, जो पूरे दुनिया को दुख में से मुक्ति दिला सकता है, उसके शरीर पर यकायक कोकरोजो के बादशाह आकर घूमेंगे और गुप्त शक्ति प्रदान करेंगे। यह घटना लाखो सालो मे एक बार होती है। यानि वो महान आदमी मै हुं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब मेने ज्योतिष से कह कर पूजा करवाली है आप सबके लिये। आप को सिर्फ आप के शरीर पर सुबह 10 मिनट तक, हररोज़ नर कोकरोज़ और शाम को 10 मिनट तक मादा कोकरोज़ को घूमने देना है। यह विधि सिर्फ 2 महिने तक करनी है। इससे आपकी सारी मनोकामना पूरी होंगी। शुरु करदो नर और मादा कोकरोज़ ढूंढना।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;क्यो कोकरोज यह विधि करते है?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दरअसल ब्रम्हा का प्रिय प्राणी इंसान नही बलकी कोकरोज़ है। सारे इंसानो से उम्र मे यह प्रजाति बडी है। बडे बडे डायनासोर को यह अपनी गोदी मे खिला चूके है और उनके शरीर पर घूमते थे। जब इनको डायनासोर से अनबन हुइ तो ब्रम्हा ने डायनासोर को ही हटा दिया और इंसानो को भेज दिया, ताकी कोकरोज़ उनके बोडी पे खेल सके। है ना जोरदार जेक ब्रम्हा से? अब मुझे इंसान और कोकरोजो के बिच वार्तालाप करने के लिए कोकरोज बादशाह (शायद रानी) ने सिलेक्ट किया है। इंसानो के दवाइया छिडक कर पिछे से हमला करने पर यह काफी खफा है। उनको मेरे जेसे बहादुर इंसान जो उनको पैरो से रगडते है वह पसंद है। अब मै उनके साथ सिज़-फायर कर दूंगा, ताकि पूरी इंसान प्रजाति बची रहै। ओर खून ना बहे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold; font-style: italic;"&gt;लोजिक – 2&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;शायद उसे मेरी सुपारी मिली हो तो?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन यह भी हो सकता है की वह कोकरोज़ मुझे मार डालने के लिए आया हो। क्यो नहीं हो सकता? मुझे सिर्फ बहेकाने के लिये यह ज्योतिषी को पैसे खिला दिए हो तो? या फिर ज्योतिष को इतना बोल दिया हो की अगर तु रवि साहब को यह बोलता है की वह बहुत बडे इंसान है और कोकरोज-इंसान समजौते के लिये चुने गये है तो हम सब कोकरोज आप ज्योतिष के घर से निकल जायेंगे। हो सकता है की नही?? अगर कोइ इंसान को कोकरोज उसके घर से निकलने का वादा करे तो उसके इंसान में क्या इंसान किसी भी हद तक नही जायेगा? जायेगा और खून भी करेगा!! कोकरोज तो जा रहे है ना!!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शायद पिछ्ले जन्म में मैने कोकरोजो को मार डालने वाली दवाइ की शोध की हो और    यह कोकरोज़ बदला लेने के लिये आया हो तो?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;या फिर मै पिछ्ले जन्म मे कोकरोज था और मैने इस कोकरोज़ बादशाह की बेटी को भगा कर शादी की हो तो?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;या फिर इसका भाइ मेरे पैर के निचे आकर शहिद हो गया हो?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शायद मेरी ज्योर्ज बुश और मनमोहन सिंह से करीबी दोस्ती की बजह से कोइ दुश्मन मुझे मारना चाहता हो और आर्टीफिशियल रोबो कोकरोज़ भेज कर मुझे मारना चाहे तो?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरा शक चाइना पर भी जाता है। उनकी तो कोकरोज़ो के साथ बहुत पटती है। बिन्दास खाते है। लेकिन कोकरोजो को तो चाइना से नफरत होंगी क्योकि चाइनीस लोग कोकरोजो को कच्चा चबा जाते है। तो फिर कोकरोज तो मेरी मदद ही करेगा ना? क्या पता? कुछ मदद करो। कोइ ओर कोंसपिरसी हो सकती है क्या? इसका निपटारा करके मै आपको मेरी एक ओर दुखभरी दास्तान सुनाना चाहूंगा। दर असल सोनिया गांधी हररोज मुझे फोन करके पकाती है और हथौडे मारती है। खेर वो बाद में कभी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जो भी हो, वह कोकरोज सुंदर और शाही था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;हथौडा&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;”ये क्या कम था ओर क्या खाक हथौडा! एक बार कोकरोज सिर पर गीरा कर देखो। सब हवा निकल जायेगी। वेसे कोकरोज का हक इस प्रूथ्वी पे हमसे ज्यादा है क्योकि वह यहाँ डायनासोर से भी पहले से रह रहे है और हमारे जाने के बाद भी वह अपना जीवन बिंदास जियेंगे“&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;!--
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है!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब हुआ ना कंफ्युज़न? साला कोइ स्युडो-सेक्युलर क्यो है? इसलिये की वह हिन्दु धर्म विरोध मे बोला या हिन्दु धर्म में होने वाले गलत रिवाज़ॉ को बहार लाया? या फिर इसलिये की वह कोइ भी लघुमती कौम के बारे में अछ्छा बोला? अभी आप मुस्लिमो के लिये सरकारी स्कोलरशिप की बात करें या हिन्दुओ में विध्वाओ के बूरे हाल पर बात करें तो आप स्युडो-सेक्युलारिस्ट! यानि अगर मुझे अपने को निर्दोष बताना है तो मुझे लघुमती कौम को मिल रहे महत्व या उनकी जनसंख्या से हिन्दु कौम लघुमती में आयेगी उसपर कुछ बोलना ही होंगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;स्युडो सेक्युलारिस्ट यानि...&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;एसी मान्यता है की वह खादी के कुर्तो में ज्यादातर पाये जाते है।&lt;br /&gt;एसी मान्यता है की वह अंग्रेजी में ही बोलते है।&lt;br /&gt;एसी मान्यता है की वह हिन्दु विरोधी, मुस्लिमो के हित में बोलते है।&lt;br /&gt;अगर वह हिन्दु विरोधी न बोले फिर भी वह स्युडो है क्योकि वह मुस्लिमो के बारे मे बोलते है। लेकिन हिन्दु लोगों के फायदे के बारे मे कुछ नहीं बोलते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एसी मान्यता है की यह सब फाइव स्टार होटल में ही पाये जाते है।&lt;br /&gt;एसी मान्यता है जी इन सबको विदेशो से बहुत पैसे मिलते है। (वेसे RSS को भी बहुत मिलते है)&lt;br /&gt;एसी मान्यता है की यह सब पब्लिसिटी भूखे होते है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उदाहरण : अंगेजी मिडीया के 90% पत्रकार, 90% फेशन डिज़ाइनर्स, &lt;a href="http://www.vigilonline.com/reference/columns/vicharamala_view.asp?col_id=32"&gt;शबाना आज़मी&lt;/a&gt;, तिस्ता सेतलवाड, जावेद अख्तर, नंदिता दास वगैरह&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वेसे इन लोगों को यह नही दिखता की यही अंग्रेजी पत्रकार मुस्लिमो के फतवे पर भी चिंता जताते है और गुडिया की शादी जैसे या निंद में हुए तलाक पर फतवे के सामने भी बोलते है। तब इन चैनलो को मुस्लिम कट्टरवादीयो की गालिया मिलती ही होंगी की "आपने क्यो फतवा ज़ायज़ है या नही उसपे वोट करवाया??" ये तो ज़ायज़ ही है ना!! शबाना आज़मी मुस्लिम औरतो पे होने वाले अत्याचार पर बोलती है तो मुस्लिम कट्टरवादीयो की गालिया खाती है!!  मुझे ये पता नही है की हिन्दु कट्टरवादी जेसे मुस्लिम लोग शबाना आज़मी को क्या कहते होंगे? अब न्युज़ चेनलो ने बेस्ट बेकरी- बेस्ट बेकरी बहुत किया तो उसे स्युडो सेक्युलारिस्ट कहा जाता है!! क्यों? मरनेवाले मुस्लिम थे इसलिये या तो हिन्दु मरने वाली जगह के केस को इतना नही दिखाया इसिलिये? याद करो &lt;a href="http://en.wikipedia.org/wiki/2002_Gujarat_violence"&gt;गोधरा&lt;/a&gt; मे S-6 जला था उस समय इन्होने पूरा कवरेज़ दिखाया था। &lt;a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Talk:2002_Gujarat_violence"&gt;अब दंगे हुए तो वजह&lt;/a&gt;? पूरा दिन कवरेज़ दिखाया वह!! नही दिखाते तो? स्युडो सेक्युलारिस्ट! बहुत से हत्याकांडो को चैनलो ने बहुत कवरेज़ दिया है जिसमे विक्टीम हिन्दु थे। लेकिन अगर बिहार मे रणवीर सेना दूसरी हिन्दु कौम के लोगों को जला डालती है तो ये चैनलवालो का कवरेज़ भी कम होता है और ये हिन्दु राष्ट्र्वादी तो कुछ बोलते ही नहीं!! अरे खुश हो जाओ बंदो!! चैनलोने आपके लोगों में होने वाली बर्बर लडाइ को नहीं दिखाया! (सबके सब नालायक है...)अब एक मुस्लिम भी ऐसा ही फील करता है अंग्रेजी प्रेस के बारे में, &lt;a href="http://daga.dhs.org/daga/urm/up9v/v93-4-26.htm"&gt;यहाँ क्लिक करो &lt;/a&gt;तो सभी हिन्दु राष्ट्रवादीयों की बोलती बंद की प्रेस हिन्दु विरोधी और स्युडॉ सेक्युलर है!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff9900;"&gt;&lt;span style="color:#3366ff;"&gt;वेसे एक अछ्छी बात , नोबेल प्राइज़ विजेता अमर्त्य सेन ने NDTV पे सिविल युनिफोर्म कोड को अनिवार्यता बताया। (यहा राजदीप सरदेसाइ और NDTV को स्युडो सेक्युलारिस्टो के महाराजा बताये जाते है, जो हिन्दु विरोधी है)&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;em&gt;(मेरी पिछ्ली पोस्ट की टिप्पणीयो पर मै नयी पोस्ट लिख रहा हूं। लेकिन रिसर्च में कुछ समय लगेगा। सब लोगों का टिप्पणि देने के लिये आभार व्यक्त करता हूं)&lt;br /&gt;&lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हथौडा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;मैं मानता हूं अन्याय होते है और &lt;a href="http://www.rediff.com/news/2005/mar/19arvind.htm"&gt;डबल स्टेंडर्ड भी होता है&lt;/a&gt;, लेकिन हिन्दु या मुस्लिम दोनो कौम के लोग बगैर सोचे नेता और अपने धार्मिक गुरुओ की बातों में आकर दूसरो को आसानी से नफरत करते है, उतना तो ठीक लेकिन अपनी आंख भी बन्द कर लेते है।सेक्युलर- सेक्युलर का खेल सिर्फ नेता लोग खेलते है और मूर्ख जनता बातों में आ जाती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसे कहते है छप्प्ड फाड नफरत, आंखे बंद करके!!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;!--
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&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;</description><link>http://www.tarakash.com/ravi/2006/03/blog-post_31.html</link><author>noreply@blogger.com (Ravi Kamdar)</author></item><item><guid isPermaLink='false'>tag:blogger.com,1999:blog-21203546.post-114288487848281028</guid><pubDate>Mon, 20 Mar 2006 19:57:00 +0000</pubDate><atom:updated>2006-03-28T01:24:57.273-08:00</atom:updated><title>मैं भी, मैं भी: क्यों मुझे नहि पसंद मेरा धर्म (जैन / हिंदु)</title><description>&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-size:100%;" &gt;यह लेखमे धार्मिक बाबतो मे टिका टिप्पणी की गयी है, अगर आप की पाचन शक्ति अछ्छी है तो ही पढे। आपकी धार्मिक मान्यता को ठेंस पहुंचे तो मै जिम्मेदार नहि हूं। चाय पीकर संयम से और खुले दिमाग से सोच कर पढे। अगर आप मेरे किसी प्रश्न का उत्तर दे सके तो मै आप का आभारी रहुंगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह लेख सबसे बडा हथौडा हो सकता है। फिर भी आप यह पढे एसी प्रार्थना करता हूं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह लेख शोएब के यह &lt;a href="http://shuaib-hindi.blogspot.com/2006/03/blog-post_20.html"&gt;विनम्र लेख&lt;/a&gt; पढने के बाद उअके जवाब और समर्थन मे लिखा गया है।&lt;br /&gt;-----------------------------------------------------------------------------------------------&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शोएब एवं सभी वाचकमित्रो,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आपके विचार पढके मुस्लिम बिरादर ब्लोगर गुस्सा होंगे तो कट्टरवादी हिन्दु बिरादर ब्लोगर मन मे खुश होंगे और शायद आपके विचारो की तारिफ करे। वेसे तो मै भी आप से सहेमत हूं लेकिन मुझे मेरा धर्म जैन बिलकुल पसंद नहि है। आपने तो इतनी शराफत दिखायी है कि आपने धर्म को लताडा नहि है। मैने तो वह शराफत छोड दी है। हां, मै मानता हूं जिसे जो करना है वह करे इसिलिये मुझे कोइ आपत्ति नहि है कि कौन क्या करता है । शायद इसका रीज़न ये नहि है कि मै लोकशाही के अनुरुप लोगो को अपनी मर्जी से जीने देना चाहता हूं, पर शायद इसकी बजह यह है कि मुझे किसी की परवाह नहि है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अगर कोइ मुस्लिम मानता है के बकरे को काटने से जन्नत मिलती है तो काटने दो, मेरा क्या जाता है? अगर जैन जेसे धर्म मे मानने वाले लोग यह मानते है कि चिंटी को मारने से या सांस लेने से भी पाप होता है और नर्क मिलता है तो मानो! मेरा क्या जाता है? मै मानता हूं हर कोइ अपने किये गये कर्मो को जस्टीफाइ करने की कोशिश करता है। कोइ मुस्लिम दारू पिता है और बाद मे नमाज़ पढके खुद ही संतोष व्यक्त्त करता है कि अब मेरे पाप धूल गये।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दूसरे धर्मो का पता नहि पर मैने अपने धर्मो मे इतने दंभी, स्वार्थी और बेवकूफ लोग देखे है की मुझे पछतावा है कि मै क्यूं जैन पैदा हुआ? अब जैन मे तो हर चिज़ करने मै पाप लगता है फिर भी लोगो ने अपना अर्थघटन कर लिया है। कुछ जैन संप्रदाय मूर्ति पूजा करते है तो कुछ आप मिंये लोग की तरह मूर्तिपूजा के खिलाफ है! अब एक जैन मंदिर मै जाकर लाइट चालू करके, माइक पे वंदना करके, यह संतोष व्यक्त करते है कि मुझे स्वर्ग मिलेगा तो कुछ “स्थानकवासी” जैन मानते है कि बिजली चालू करने से पाप लगता है और मूर्ति बनाने से बहुत छोटे जीव मरते है इसिलिये पाप लगता है!! यहां दोनो संप्रदाय एक ही भगवान की पूजा करेंगे लेकिन अलग ढंग से। फिर 8 दिन भूखे रहकर यह मान लेंगे कि उनका पाप मिट गया!! यानि आपने 3 खून किये हो या तो फिर लाखो लोगो के रुपिये लूंटे हो फिर भी कुछ दिन भूखे रहने से पाप मिट जायेंगे!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज इस दुनिया मै कोइ आदमी, कोइ बडा संत भी धर्म कि व्याख्या नहि कर सकता! अगर कर सकता तो आज एक ही साधू के लोग दीवाने होते, इतने सारे साधू की दूकाने न चलती। दर असल यह धर्म- बर्म कुछ नहि है। अगर कोइ नियमो मे इतना दम होता तो आज हर धर्म के इतने संप्रदाय न होते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब “जैन धर्म” (जी हा धर्म पे ही) पे मुझे शंका इसिलिये है कि यह धर्म सिर्फ मैदानी इलाको मै ही फैल पाया। क्यो भला? क्योकि आर्कटिक के इलाके मै घांसफ़ुंस मिलता ही नहि है, तो भला एस्किमो क्या खाक खाते?? यानि इस धर्म के मुताबिक बेचारे एस्किमो लोग नर्क मे जायेंगे! वेसे ही 100 करोड चीनी लोग भी। सिर्फ 50 लाख जैन लोगो के ही स्वर्ग मै जाने के चांस है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वेसे जैनो और हिंदुओ को अकेली गाय पे ही दया आती है। और बना डालते है गाय के लिए गौशाला। क्यों? क्योकि यह बहुत ही सीधा सा जानवर है, जो दूध देता है, किसी को काटता नहि है, धार्मिक महत्व भी है। लेकिन अगर यह लोग इतने ही अंहिसावादी है तो बेचारे शेर, उल्लु, भालू, मछ्छर, गधे या घोडे का क्या कसूर? यह भी किसी ना किसी देव द्वारा उपयोग मे लिये गये थे। तो फिर सिर्फ गाय क्यो?? गाय तो फिर भी लाखो की तादाद मे है। कभी शेर, गीध, उल्लु या घोडे के लिए भी गाय की जितनी गोशाला है, उससे 25% तो आश्रयस्थान बनाओ! नहि... यह लोग उल्लु को घटिया मानते है क्योकि वह कोइ फायदा नहि कराता। अगर आप मानते है कि सांप या नाग आपके सबसे बडे देवता का वाहन है तो फिर उसे देख कर फटती क्यो है?? चलो अगर वह आपको मार ही डालेगा, तो भी खुश होना क्योकि भगवान विष्णु या शिव के पालतू आप की जान लेने वाला है, जिनकी आप पूजा करते हो हर रोज। नहि पूजा तो कुछ अछ्छा मांगने के लिए करते है, भगवान अगर जान लेना चाहे तो वह मेरा भगवान नहि!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह हिन्दु या जैन लोग सिर्फ एक भगवान के पास मांगकर संतुष्ठ नहि होंगे। अगर भगवान बिज़ी हुए और ना सुना तो? इसिलिए वो ही शंकर के 10 मंदिर, एक ही विष्णु के 2 अवतार, राम और क्रिष्णा के 5 मंदिर जाने के बाद, एक ही पार्वती देवी के 6 रुप वाले 15 मंदिर मे जायेंगे, भीख मांगने या शुक्रिया कहेने। अगर ना मिले तो अमिताभ बच्चन की फिल्मो की तरह झगडने जायेंगे!! फिर व्रत रखेंगे , वो भी फ्लेकसिबल व्रत। फिर कहेंगे “इतना तो चलता है व्रत मे, खा सकते है!!” अब इसे घटिया किसम के दंभी नहि कहे तो क्या कहे?? अगर आप के मुख्य भगवान विष्णु है तो फिर सांइबाबा के पास क्यो जाते हो?? क्या आपको विष्णु पर से श्रध्धा उठ गयी तो एक भगवान को छोड कर साधू की पूजा ज्यादा करते हो? याद रहे, आप समजते हो कि यह साधू आपको भगवान के समीप ले जाने पर मदद करेगा तो वह बडा सट्टा है। अगर वह गलत हुआ तो?? यानि अब आपको 10 भगवान कि तरह 10 साधू के पास भी जाना चाहिये। ज्यादा सिक्योरिटी के लिए! J&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वेसे अगर सहि में मुझे 84 लाख हजार अलग अलग रूप मे जनम लेने है तो मै सारे शेर, हाथी , गधे, घोडे और जो भी दूसरे जीव हाथ मै आए उनको खत्म कर देना चाहुंगा। समझ मे आया क्यो? अरे उतने जन्म कम होंगे ना मेरे!! और ज्यादा आदमी पैदा हो रहे है इसिलिये मेरे इंसान बनने की संभावनाए भी बढी है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वेसे मेरा कर्म के सिध्धांत मे भी भरोसा नहि है। क्योकि यह सिर्फ बहाना है आपके दिल को बहेलाने का, फुसलाने का। कुछ भी घटना घटी और आपको पता नहि एसा क्यो हुआ?? है ना कर्म का सिध्धांत ! यह घटना आपके कर्मो का फल है। क्या?? आप मानते है की आपने बहुत अछ्छे कर्म किये है?? तो भी जवाब हाज़िर है: यह आपके पिछले जन्मो के कर्मो का फल है!! अभी भी कंफ्युज़?? होंगे ही ना क्योकि आपने सुना होगा की आदमी को उसके किये की सज़ा या किये हुए कर्मो का फल इसी जन्म मे मिलता है तो फिर मुझे पिछले जन्मो की सजा केसे मिली?? यही तो है कर्म! यह सब मत सोच मित्र, सिर्फ कर्म किये जा, फल की आशा मत रख ..क्यो सोचता है कि एसा फल क्यो मिला, जो भी मिला खा ले!! यह डिप्लोमेटिक, गोल-गोल बातो मे बहुत लोग गोल गोल घूमते रहेते है। अगर कर्म का सिध्धांत सेट नहि हो रहा हो, तो फिर “जेसी प्रभू की मरज़ी!!”&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 255);"&gt;क्या पिछ्ले जन्मो के पाप की सजा इस जन्म मे नहि उसी जन्म मे मिल गयी थी?? सिर्फ इसी जन्म के कर्म की सजा इस जन्म मे मिलती है और मिलती “ही” है?? और आप नहि समज पाते ये कौन से कर्मो की सजा है?? तो याद रखिये, यह कर्मो की सजा नहि है: यह प्रभु की मर्जी है या तो फिर आपका नसीब है! J&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 255);"&gt;                यानि ओवरओल : कर्म का फल = नसीब = प्रभु की मर्जी = प्रभु&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब आप अहिंसावादी है तो याद करके यह बताये: जब लास्ट टाइम एक कुत्ते या बिल्ली ने आपके सामने किसी पंछी या चुहे को मारके खाने की कोशिश की थी तो आपने या आपके दोस्त ने क्या किया था?? शिकारी को मार के भगाया था ? या तो फिर उसे खाने दिया था??अगर शिकारी शेर होता और शिकार जंगली कुत्त्ता होता तो क्या करते?? वोही चीज़ दोहराते?? मुझे नहि सुनना आपका जवाब..सिर्फ सोचो.. क्या यह जीव अपना खाना नहि खा सकते? या आप उनको भी शाकाहारी बनाना चाहते हो?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मै नहि मानता की कोइ गलत काम करता है। जिसको जो सही लगता है वह वो करता है। और उसमे भी जानवर तो कभी पाप करते ही नहि है J! अब वो तो सिर्फ खाना खाते है, सोते है और कुछ रेग्युलर क्रिया करते रहते है। अब इसमे कहा से कर्म का सिध्धांत आया?? कोइ एसा जानवर बताओ जिसने कोइ गलत काम किया हो। क्या आप मानते है की जानवर की आत्मा और आपकी आत्मा एक जेसी होती है ? या अलग होती है? अगर एक जेसी होती है तो क्या वह भगवान मै मानते होंगे?? अगर हा तो आप केसे पता लगायेंगे कि यह गाय हिंदू है? अगर वह मुस्लिम निकली तो?? कोइ फोर्म्युला है आपके पास?? डायनासोर क्या मानते होंगे?? अभी आप सिर्फ जानवरो पे सोचते है, लेकिन मछलीयो का क्या? वाइरस?? क्या उनको भी अहिंसक होना चाहिये?? फिर से, हे कोइ फोर्म्युला?? कोइ साधू के पास क्लेरीफिकेशन?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्या आप मानते है कि प्रिथ्वी की रचना ब्रम्हा ने फटाक से की थी?? या तो फिर इसाइयो कि तरह ये मानते है कि 6 दिन मे हुइ थी?? तो फिर डायनासोर थे या नहि? अगर नहि थे तो क्या सिधे आदमी पैदा हो गये?? अगर हा तो इतने सारे जीव कहा से आये? यह सब जीव के बारे में कोइ धर्मग्रंथ मे उल्लेख क्यो नहि है? अगर भगवान ने ही बनाया है तो फिर उल्लेख होना चाहिये ना?? या भगवान इंसानो को ज्यादा प्यार करते है? इसिलिये हम किसी को भी मार सकते है? भगवान भी जीव मे भेदभाव रखते है तो फिर इसका मतलब ये हुआ कि हर जीव की आत्मा अलग अलग किसम की होती है। अगर भगवान भेदभाव नहि रखते तो सबकी फिर से, यह सब जीवो का उल्लेख क्यो नहि है? देवियां क्यो सिर्फ हिमालया पे मिलते फूल लगाती है?? आर्जेंटिना मे होते फूल क्यो नहि पहेनती, अगर पुरे विश्व की रचना उनके पतिदेव ने की है तो? शिव क्यो आफ्रिका मे घूमने जाते?? क्या वहा के लोग उनके बच्चे नहि है? क्यो जब हम हिंदु आफ्रिका मे गये तब ही वहा शिव के बारे मे लोगो को पता चला? अगर ब्रम्हा ने सब निर्माण किया है तो वहा भी काले लोग क्यो उन्हे नहि पूजते?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आपको अगर इनमे से एक प्रश्न का भी उत्तर नहि पता या आप कोइ भी कंसेप्ट मे नहि मानते जेसे कि 6 दिन मे या ब्रम्हा द्वारा हम सब जीव की रचना या फिर कुछ और जादू..तो फिर आप मंदिर या चर्च जाना छोड दे। क्योकि इन्ही सिध्धांतो की बुनियाद पर पुरे के पुरे धर्म खडे है। अगर आपको कोइ भी सिध्धांत पे शक है तो आप केसे यह दावा कर सकते है की आप हिंदु, मुस्लिम या इसाइ है? आप सिर्फ स्वार्थी और दंभी है, मेरे जेसे। आपको सिर्फ आपकी या आपके लोगो के सुख का ख्याल है इसिलिये आप मंदिर मे मांगने के लिये पहुंच जाते है, और मिलने पर शुक्रिया कर के भी कहते है की हम पे क्रिपा रखना! आप इसिलिये कोइ अनदेखी ताकत मे विश्वास करते है क्योकि आपको बहुत से प्रश्न का जवाब नहि पता, और आप उसपे अपना कमझोर सा दिमाग नहि लडाना चाहते, इसिलिये न्युटन से पहले तक आप के और मेरे परदादा पेड से सेब गीरने को और सूर्यग्रहण को भगवान की करतूत मानते थे। आज भी बहुत सी करतूत के लिये हम भगवान को ही जिम्मेदार ठ्हराते है, लेकिन जेसे जेसे हमे कुछ चिज़ो का समाधान मिलेगा हम भगवान से उसका नाम बदलकर “ग्रेविटेशनल फोर्स” जेसा कुछ बना देंगे। जिससे कुछ और सवाल मिलेंगे और फिर उनका जिम्मेदार भगवान ही होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मै कोइ धर्म के खिलाफ मार्केटिंग नहि करना चाहता, नहि तो मै नया धर्म खोलना चाहता हूं..क्योकि मै पहले ही बता चूका हू मेरा क्या जाता है? लेकिन मछलीओ के धर्म के बारे मे सोचना और आपकी प्रतिक्रिया मै अगर मुझे मेरे कोइ प्रश्न का हल मिले तो बहुत अछ्छा। FYI: मोरारीबापु डोल्फिन को बचाने के लिए प्रयास कर रहे है, अछछा है, कोइ तो गाय-गाय के खेल से बहार निकल कर किसी और जीव को बचा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-size:100%;" &gt;अस्तु।&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-size:100%;" &gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-size:100%;" &gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;हथौडा&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;इतना बडा काफी नहि है क्या??? और चाहिये?? तो ये लेख 5 बार पढो!!&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;!--
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&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;</description><link>http://www.tarakash.com/ravi/2006/03/17.html</link><author>noreply@blogger.com (Ravi Kamdar)</author></item><item><guid isPermaLink='false'>tag:blogger.com,1999:blog-21203546.post-114196093325234456</guid><pubDate>Fri, 10 Mar 2006 03:18:00 +0000</pubDate><atom:updated>2006-03-27T22:09:56.973-08:00</atom:updated><title>Flash + AJAX  ओनलाइन ओपरेटींग सिस्टम: बाय बाय विंडोस??</title><description>&lt;p style="color: rgb(51, 51, 51);" class="MsoNormal"&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;मुझे लगता है अब मुझे हिन्दी और अंग्रेजी दोनो मे अपना एक तकनीकी ब्लोग शुरु करना पडेगा। आजकल मै &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;Technology &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;से जुडे हुए न्यूज़ बहुत पढ रहा हु तो सोचा क्यू ना कुछ चिज़े लिखी जाए। हालाकि हिन्दी ब्लोगजगत मे इनके कितने खरीददार मिलेंगे उस पर शंका है मुझे, क्योकि अमित, जितु, प्रतिक, इ-स्वामी और हमारे बेंगाणीबंधू तो टेकनोलोजी के बारे मे जानते है और लिखते भी है।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p style="color: rgb(51, 51, 51);" class="MsoNormal"&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p style="color: rgb(51, 51, 51);" class="MsoNormal"&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;खेर अब मुद्दे पे आता हु। यह साइट देख ले : &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;http://www1.goowy.com/&lt;span style=""&gt;  &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;अब आप देखने ही वाले है यह साइट तो मे इसके बारे मै कम बताउंगा , यह साइट मे रजीस्टर करके आप इसे एक ओनलाइन &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;OS &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;की तरह युज़ कर सकते है। इ-मैल, मेनु, कोंटेक्टस से लेकर बहुत सी चिजे कर सकते है। अब यह साइट &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;flash script &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;का प्रयोग करती है। अब जिनको नहीं पता उनको बताता हु पडदे के पीछे का कमाल। आजकल &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;AJAX &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;तकनीक बहुत चर्चा मे है। माइक्रोसोफ़्ट ने तो &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;AJAX &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);"&gt;पर बडा दांव खेलते हुए अपनी एक&lt;/span&gt; &lt;a href="http://www.live.com/"&gt;नयी ब्रांड&lt;/a&gt; &lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);"&gt;ही लोंच करदी। यही नहि, उसने दुसरी भी एक वेबसाइट भी&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);"&gt; &lt;/span&gt;&lt;a href="http://www.start.com/"&gt;शुरु करदी है&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt; &lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);"&gt;| &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;जिन लोगोने यह आज पहेली बार सुना है उनके लिए मै कुछ&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;लिंक देना चाहुंगा, लेकिन ध्यान रहे कि यह सब &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;BETA &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;है अभी&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);"&gt;|&lt;/span&gt; &lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal" style="line-height: 150%; color: rgb(51, 51, 51);"&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;&lt;span style=""&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;&lt;a href="http://www.start.com/1"&gt;http://www.start.com/1&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal" style="line-height: 150%; color: rgb(51, 51, 51);"&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;&lt;span style=""&gt;  &lt;/span&gt;&lt;a href="http://www.netvibes.com/"&gt;http://www.netvibes.com/&lt;/a&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;&lt;span style=""&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal" style="line-height: 150%; color: rgb(51, 51, 51);"&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;&lt;span style=""&gt;  &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(255, 255, 255);"&gt;&lt;a href="http://ideas.live.com"&gt;http://ideas.live.com&lt;/a&gt;/&lt;/span&gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p class="MsoNormal" style="margin-left: 123pt; color: rgb(51, 51, 51);"&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;&lt;o:p&gt; &lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p style="color: rgb(51, 51, 51);" class="MsoNormal"&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;अभी मार्केट मे यह चर्चा गरमा गर्म है कि क्या एजेक्स अब फ्लेश का स्थान लेगा?&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  lang="HI" &gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;अब जो लिंक मेने आपको सबसे पहेले दी थी वह, &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;“&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;गूवी&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;”&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt; दर असल फ्लेश और &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;AJAX &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);"&gt;का थोडा मिश्रण है।&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;&lt;a href="http://adaptivepath.com/publications/essays/archives/000385.php"&gt;AJAX &lt;span  lang="HI" style="font-family:Mangal;"&gt;मतलब&lt;/span&gt;&lt;/a&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt; &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;&lt;span style="color: rgb(255, 255, 255);"&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);"&gt;Java Script, XML&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;का मिश्रण। ताकी यह दोनो मिलकर दूसरी &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;httprequest &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;के साथ मिलकर आपके पेज बहुत जल्दी लोड कर दे। इसिकिये जीमेल, गूगल रीडर और याहू कि बहुत सारी एप्लीकेशन जल्दी लोड होती है। लेकिन फिर भी जावा स्क्रीप्ट कभी कभी धोखा देकर ब्राउज़र सिक्युरीटी की बजह से स्पीड कम कर देती है। दर असल यह सब मुम्कीन होता है &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;AJAX&lt;span style=""&gt;  &lt;/span&gt;Engine &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;की बजह से, जो आपके पेज के साथ ही लोड हो जाता है। इसिलिये रिस्पोंस जल्दी मिलता है। यानि &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;java script &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;आगे का लेआउट बनाती है, &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;XML &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;जल्दी से बहुत कम कद की फाइल के रुप मे डाटा ट्रांसफर करती है। इसि बजह से, अब आप वेब एप्लिकेशन मे भी ड्रेग एन ड्रोप कर सकते है, उपर दिये हुए सारे उदाहरण मे यह सुविधा मौजूद है।&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p style="color: rgb(51, 51, 51);" class="MsoNormal"&gt;&lt;span style=";font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;  &lt;p style="color: rgb(51, 51, 51);" class="MsoNormal"&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;बहुत हो गया न?? पका दिया, लेकिन मेने तो पहेले ही कहा है की इधर आये तो हथौडे तो पडेंगे! अब जिनको डेवेलोप करना है इससे, वह &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;xajax library &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Shruti;font-size:100%;"  lang="GU" &gt;(&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;PHP) &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;&lt;span style=""&gt; &lt;/span&gt;या &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Arial;font-size:100%;"  &gt;ajax.net&lt;span style=""&gt;  &lt;/span&gt;library (ASP.Net) &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;का प्रयोग कर सकते है। अब सब कुछ मै ही बताउ क्या? बोलो गूगलबाबा जिंदाबाद...&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Mangal;font-size:100%;"  lang="HI" &gt;&lt;o:p&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 51, 51);font-size:100%;" &gt;   &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;script type="text/javascript"&gt;&lt;!--
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&lt;/script&gt;&lt;/div&gt;</description><link>http://www.tarakash.com/ravi/2006/03/blog-post.html</link><author>noreply@blogger.com (Ravi Kamdar)</author></item><item><guid isPermaLink='false'>tag:blogger.com,1999:blog-21203546.post-114051098247821914</guid><pubDate>Tue, 21 Feb 2006 08:34:00 +0000</pubDate><atom:updated>2006-03-27T22:32:27.103-08:00</atom:updated><title>मुझे लता और आशा पसंद नहि तो?</title><description>&lt;span style="color:#333333;"&gt;इस देश मै अगर आपको खुदको एक सहि संगीत प्रेमी साबित करना है तो आपको लता मंगेश्कर का फेन होना ही पडेगा लता, मुकेश, रफी, आशा यह सब महान गायक है और कुछ् लोगो का मानना है कि आज काल के गायको को इनके जैसा गाना नहि आता इसिलिये इन्हे हंमेशा रफी के ही गाने पसंद आते है ये लोग अपने जमाने मे ही खोये हुए रहते है क्योकि वो मानसिक रुप से बुढे हो चुके होते है अरे अगर मुझे लता मंगेशकर से ज्यादा श्रेया घोषाल और आशा भोंसले से ज्यादा सुनिधि चौहान के गाने पसंद आये तो क्या गलत है? बस मिल गया बडो से लेक्चर! "इसे लता के गाने नहि पसंद्!" जेसे मै कोई दुसरी दुनिया से आया हुआ एलियन हूं!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अरे यार, होंगे तुम्हारे जमाने के गीत अछ्छे , इसिलिये तो उनमे से रिमिक्स बनते है अगर हम आपके जमाने के गानो कि तारिफ करके उसमे से नया रिमिक्स बनाते है तो क्या गलत है? अब इतना भी मत इतराईये, यह रिमिक्स आपके जमाने के गानो का नहि, दरअसल वो गाने के बोल का होता है रिमिक्स यानि पुरानी शराब नयी बोटल मे नहि, क्योकि यहा तो गाने के बोल से लेकर संगीत और गायक सब अलग है, सिर्फ थोडी बहुत साम्यता है गाने के बोल मे भी अंग्रेजी शब्द है यानि पुरा का पुरा नया गाना बन गया है तो इसमे भी बहुत महेनत होती है लेकिन मानसिक बुढे लोगो को इसमे कोइ महेनत नहि लगती, सिर्फ चोरी लगती है! अरे भाई, नये गाने का भी रिमिक्स बनाते है हम् सिर्फ आपके जमाने के गानो का हि नहि&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरा मानना है कि सुनिधि मे आशा से ज्यादा क्षमता है अभी तो वो बहुत छोटी है आशा की उम्र तक पहुंचने मे बहुत समय है आज कल आपके जमाने कि तरह नहि है कि १०-१२ गायक ज्यादा गाते थे Indian Idol 