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पंजाबी भाषा बनी फोरेंसिक जाँच मे सहायक |
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विज्ञान
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मंगलवार , , 18 मार्च |
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तरकश ब्यूरो
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| संशोधकों के अनुसार उनके अभ्यास के नतीजे काफी उत्साहवर्धक रहे हैं |
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ब्रिटिश फोरेंसिक विशेषज्ञों ने एक शोध के दौरान पंजाबी लिपी गुरूमुखी का उपयोग कर एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे लेखक की उम्र और उसका कुल और जिस समाज से वह संबंध रखता है वह पता किया जा सकता है.
डर्बी विश्वविद्यालय के संशोधकों ने एक पंजाबी पैनग्राम (एक ऐसा विवरण जिसमें गुरूमुखी के सभी 40 अक्षर आते हैं) को अपने शोध का हिस्सा बनाया और इसकी मदद से लेखक की एक प्रोफाइल तैयार की.
संशोधकों के अनुसार उनके अभ्यास के नतीजे काफी उत्साहवर्धक रहे हैं और और इससे लेखक के मूल के बारे में पता लगाया जा सकता है.
इस अभ्यास के दौरान करीब 200 स्वयंसेवकों को जो कि ब्रिटेन और पाकिस्तान से संबंधित थे, एक समान वाक्य रचना लिखने को कहा गया. इसके बाद उनकी हस्तलिपि का अभ्यास करने के पश्चाता यह पता लगाना आसान हो गया कि वे लोग मूलत: ब्रिटिश हैं, अथवा भारतीय उपमहाद्विप के हैं. इससे यह भी पता चला कि वे लोग उपमहाद्विप से आकर ब्रिटेन मे बसे लोग हैं अथवा दूसरी पीढी के थे वहीं पर जन्मे भारतीय/पाकिस्तानी हैं.
ब्रिटिश फोरेंसिक विज्ञान के अधिकारी इस शोध से बहुत खुश हैं. इसकी मदद से वे ब्रिटिश समाज मे व्याप्त सामाजिक तानेबाने में से अपनी शोध के अनुसार लोगों का वर्गीकरण कर सकते हैं.
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