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आपका दिमाग मुझसे बडा तो नहीं? |
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विज्ञान
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मंगलवार , , 21 अगस्त |
Team Tarakash
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कहते हैं कि जिस व्यक्ति का दिमाग बडा होता है वह उतना ही बुद्धिमान होता है. शायद इसलिए प्राचीन काल से ऊँचे ललाट वाले लोग अधिक सक्षम और तेजस्वी माने जाते थे. हालाँकि इसमें सच्चाई कितनी है ?
वास्तव में यह एकदम सच भी नहीं है और एकदम गलत भी नही है. एकदम गलत इसलिए नहीं कि फिर चिडीया और इंसान की बुद्धि एक जैसी ही होती. लेकिन ऐसा नही है. चिडीया का दिमाग छोटा है और इंसान का बडा. और इससे दोनो प्राणियों की सोचने समझने की शक्ति में फर्क भी आया है. लेकिन एक औसत वजन हासिल करने के बाद दिमाग का वजन उसी प्राणि के लिए कितना महत्व रखता होगा?
देखा जाए तो वयस्क इंसान के दिमाग का वजन करीब 1 किलो 400 ग्राम होता है. वह लगभग 15 अरब कोषों का बना हुआ होता है. अब यदि पूरे शरीर के वजन के अनुपात के हिसाब से देखा जाए तो दिमाग का वजन बहुत ही मामुली लगता है. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से दिमाग शरीर को मिलने वाली ऑक्सीजन की कुल मात्रा का 20% तक इस्तेमाल कर लेता है.
यानि कि हमारे शरीर में दिमाग छोटा भले ही लगता हो लेकिन संसाधन सबसे अधिक इस्तेमाल करता है, और यह स्वाभाविक भी है क्योंकि उसे पूरे शरीर को नियंत्रित करना होता है. लेकिन मुद्दे की बात यह है कि यदि आपका दिमाग औसत माप से बडा है तो क्या आप अधिक बुद्धिजीवी है?
कुछेक उदाहरणों पर गौर करें तो यह सच नहीं लगता. प्रसिद्ध रशियन लेखक इवान तुर्गन्येव का दिमाग 2 किलो का था और यह सबसे अधिक वजन वाला दिमाग माना जाता है. तो इस हिसाब से तो उनके बडे और भारी वजन के अनुरूप ही वे बहुत बुद्धिमान थे. लेकिन प्रसिद्ध फ्रेंच उपन्यासकार एनातोल फ्रांस के दिमाग का वजन सिर्फ 1 किलो 100 ग्राम था, लेकिन उन्होने कुछ बहुत बेहतरीन रचनाएँ लिखी थी और उन्हे 1921 में नोबल पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था.
1891 में ब्रिटीश मेडिकल जर्नल ने एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जानकारी प्रकाशित की जिसके दिमाग का वजन 1 किलो 800 ग्राम था लेकिन वह पागल था और अपनी अधिकतर जिन्दगी एडिनबर्ग के पागलखाने में बिताई थी.
तो यह स्पष्ट है कि दिमाग के वजन और आकार का बुद्धिमता और समझ पर असर तो होता है, पर कुछ हद तक ही होता है. एक हद के बाद दिमाग के वजन के हिसाब से बुद्धि का आकलन करना बेमानी हो जाता है.
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