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हम सांस में कौन सी वायु लेते हैं? |
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विज्ञान
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शुक्रवार , , 10 अगस्त |
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पंकज बेंगाणी
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यह सवाल मुर्खतापूर्ण प्रतीत हो सकता है. यह सब जानते हैं कि मनुष्य तथा अन्य जीव सांस में ऑक्सीजन वायु लेते हैं और कार्बन डायोक्साइड छोडते हैं. लेकिन वास्तव में प्रश्न वह नहीं है. विद्यालयों में बच्चों को यही सिखाया जाता है कि मनुष्य ऑक्सीजन को नाक द्वारा खींचता है और वापस कार्बन डायऑक्साइड को छोडता है. इसतरह से यह चक्र निरंतर चलता रहता है.
वैज्ञानिक दृष्टि से यह बात सही है, लेकिन हकीक़त यही नहीं है. बच्चों को यह बात ढंग से नहीं बताई जा रही है, जिससे उनके मन में कई भ्रांतियाँ रह जाती है. और इसका असर यह होता है कि आज अधिकतर वयस्क लोगों के मन में भी यही भ्रांति है कि हम सिर्फ ऑक्सीजन को सांस द्वारा खिंचते हैं और कार्बन डायोक्साईड छोडते हैं. जबकि यह सच नहीं है और हो भी नहीं सकता है.
हकीक़त यह है कि शुद्ध ऑक्सीजन मानव के लिए प्राणदायक नहीं प्राणघातक होता है. मान लीजिए हम सिर्फ ऑक्सीजन ही सांस द्वारा लेने लगें तो?
अगर मानव सिर्फ ऑक्सीजन ही लेने लगे तो यह वायु शरीर मे जाने के बाद विभिन्न इलेक्ट्रोन हासिल करके धीरे धीरे अपना स्वरूप बदलेगी और अंत में हाइड्रोक्सिल रेडिकल यानि HO मे बदल जाएगी. यह HO सहाँरक होता है और धीरे धीरे शरीर के कोषो का खात्मा करने लग जाता है. इसकी घातक असर फेफडों के श्लेश त्वचा कोषो पर पडती है और फेफडों मे पानी भरने लगता है इससे मनुष्य को सांस लेने मे तकलीफ़ पहुँचती है और अंत मे ऑक्सीजन के ही अभाव मे वह मृत्यु प्राप्त करता है.
यानि कि ऑक्सीजन की अधिक मात्रा भी मानव के लिए ठीक नही है. तो आखिर जब हम सांस लेते हैं तो होता क्या है?
पहली बात तो यह कि मानव के नाक मे ऐसा कोई भी फिल्टर नही होता है जो सिर्फ ऑक्सीजन को ही खींच सके. यानि कि जब हम सांस लेते है तो सिर्फ ऑक्सीजन ही शरीर मे नही जाता है. वायुमंडल मे ऑक्सीजन की मात्रा 21% से अधिक नही है. यानि कि जब हम सांस लेते है तब 21% से ज्यादा ऑक्सीजन कभी शरीर में जाता भी नही है. उसी तरह से सांस छोडते समय थोड़ी मात्रा में ऑक्सीजन वापस बाहर भी निकल जाता है.
हाँ हमारे शरीर के बायोलोजिकल सिस्टम ने लाखों वर्षों की उत्क्रांति के बाद ऑक्सीजन की इस थोडी सी मात्रा को एंज़ाइम द्वारा ज्यों का त्यों रखने की क्षमता हासिल कर ली है. और यह प्राणदायक वायु प्राणघातक नही बन पाई है. लेकिन यदि हम 100% ऑक्सीजन ही सांस द्वारा लेने लगें तो हमारा शरीर इतनी मात्रा को सुरक्षित स्वरूप में नही रख पाएगा.
इसलिए अस्पताल में मरीज़ को ऑक्सीजन देते समय कभी भी एकदम शुद्ध ऑक्सीजन नही दी जाती है. उसमें थोड़ी मात्रा में हिलीयम भी मिली हुई होती है.
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