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नई खोज, माँ का खानपान तय करता है बच्चे का लिंग!
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बेकारअति उत्तम 
समाज
गुरुवार , , 24 अप्रेल
teamtarakash.jpg तरकश ब्यूरो



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जिन महिलाओं ने अधिक पौष्टिक खाना खाया था, उन्हें लडका हुआ था.
क्या कोई माँ अपने खानपान के व्यवहार से अपने होने वाले बच्चे का लिंग तय कर सकती है? यदि ब्रिटेन मे हुए एक सर्वेक्षण को आधार माना जाए तो यह सच है.

इस सर्वेक्षण से पता चला है कि जो गर्भवती महिला गर्भ ठहरने के शुरूआती दिनों में अधिक कैलोरी और प्रोटीन का सेवन करती है उसे लडका होने की अधिक सम्भावना होती है.

इससे यह भी पता चला पिछले कुछ दशकों मे अमरीका और ब्रिटेन मे लड़कों की बजाय लडकियों के जन्म की दर में क्यो बढोत्तरी हुई है. इन दोनों देशों मे तेजी से हुए औद्योगीकरण और तीव्र प्रतियोगिता की वजह से लोगों के खानपान मे भारी फेरबदल हुआ और इसका असर नवजात शिशुओं पर भी पडा.

यह सर्वेक्षण 750 महिलाओं के साथ किया गया था जो पहली बार माँ बनी थी. उन्हे तीन समूहों मे बाँट कर उनसे पूछा गया कि गर्भ ठहरने के दिनों मे उन्होने किस प्रकार का आहार लिया था. उनके उत्तरों को बाद में प्रोटीन और कैलोरी के मानकों पर विभाजित कर परखा गया और यह देखा गया कि उनकी संतान का लिंग क्या है.

इसके जो नतीजे सामने आए वो चौंकाने वाले थे. जिन महिलाओं ने अधिक पौष्टिक खाना खाया था, उन्हें लडका हुआ था.

अमरीका जैसे देशों मे लडकियों के अधिक जन्म के पीछे की वजह यह मानी जा रही है कि वहाँ की महिलाएँ अपने शरीर को सुदृढ बनाए रखने के लिए कम कैलोरी का खाना खाती हैं और डायटिंग करती हैं. अमरीका मे तेज प्रतियोगिता की वजह से सुबह का नाश्ता करने वाले लोगों की संख्या मे भी भारी गिरावट आई है. और इसका असर नवजात शिशुओं के लिंग पर पडा है.

हालाँकि कई चिकित्सक इस सर्वेक्षण को सही नही मान रहे हैं. उनका कहना है कि खानपान की वजह से लिंग का तय होना एक भ्रम है.







 

टिप्पणियाँ (3)add
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द्वारा प्रेषित Akshar , अप्रेल 24, 2008
Very informative article
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द्वारा प्रेषित Akshar , अप्रेल 24, 2008
very informative
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Bhramak
द्वारा प्रेषित Kavita Vachaknavee , अप्रेल 25, 2008
Poornataya Bharamak va tathyaheen baat hai. yahan pashchim mein shodh ke taurr par har koi kuchh bhi karta hai va svayam hi apne purane parinamon ko chunauti dene ka sahas bhi rakhta hai,aisi batein keval jan ne ki vritti ki dyotak hain,na ki sunishcit parinamon ki. aise samachqaron ko tarjeeh dena bahut hi ghatak va haniprad hai,balki kahna chahiye ki samajik paap hai Bharteey parivesh mein ise charcha mein lana. so ise kripya hata dein- samajik jagrookta ka praman dete hue.
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