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समाज
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मंगलवार , , 10 जुलाई |
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टीम तरकश
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कोई आश्चर्य नहीं कि दूनिया की आला विमान उत्पादक कंपनियों जैसे की बोईंग, एयरबस, एम्ब्रेयर वगैरह के कारख़ानों में बन रहे आधे विमान अगले कुछ सालों में भारतीय आकाश पर मंडराने लगेंगे. भारत की निजी नागरिक उड्डयन कंपनियों ने उन्हे इतने ऑर्डर दिए हैं कि इन विमान उत्पादक कंपनियों की बाछें खिल गई हैं.
एक अनुमान के मुताबिक भारतीय ऐयरलाइन कम्पनियाँ 300 नए विमान खरीद रही है जिनकी कुल लागत करीब 65,000 करोड से अधिक ही है.
इस यात्री विमानों के साथ साथ देश में कोर्पोरेट जेट के आयात में भी भारी बढ़ोत्तरी हो रही है. देश में जहाँ करोडपतियों की संख्या बढती जा रही है, वहीं बडे उद्योगपति अपने लिए निजी विमान खरीदने की होड में शामिल हो रहे हैं.
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किसके पास क्या?
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| मुकेश अम्बानी |
बोम्बार्डियर एक्सप्रेस
फाल्कन 900
ऐयरबर कोर्पोरेट जेट
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| विजय माल्या |
बोइंग 727
ऐयरबर कोर्पोरेट जेट
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| अनिल अम्बानी |
बोम्बार्डियर एक्सप्रेस
फाल्कन 2000
बीचक्राफ्ट 200
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| रतन टाटा |
फाल्कन 2000 |
| कुमारमंगलम बिडला |
सेसना साइटेशन
गल्फस्ट्रीम 100
किंग ऐयर 200
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| विजयपत सिंघानिया |
होकर सिडली 125 |
तुलसी तंती
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सेसना साइटेशन |
| सुब्रतो राय सहारा |
बोइंग 737 |
जिस समय देश को आज़ादी मिली थी तब देश में सिर्फ 24 हवाई अड्डे थे और किसी भी हवाई अड्डे में रात्रिकालिन लेंडीग या टेक ऑफ की सुविधा नहीं थी. इसके अलावा आधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल प्रणाली भी नहीं थी.
लेकिन आज समय बदल गया है, और दूसरे शब्दों में कहे तो नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में वर्तमान समय भारतीय विमान उद्योग का है. क्योंकि भारत में नागरिक उड्डयन की विकास दर 50% के आसपास है, जो पूरे विश्व में सबसे अधिक है.
इसके साथ ही कॉर्पोरेट जेट के आयात में भी भारत अग्रसर है. आज की तारीख में भारत में जिस कोर्पोरेट जेट की सबसे अधिक चर्चा की जाती है वह है किंगफिशर के विजय माल्या का जेट. ऐयरबस 319 के इस कॉर्पोरेट जेट में हाइ डेफिनेश स्क्रीन, मिटींग रूम, डायनिंग रूम, म्यूज़िक सिस्टम, बेडरूम, ब्राडबेंड डेटा पॉर्ट, ड्राइंग रूम आदि अनेकों सुविधाएँ हैं.
इसके अलावा मुकेश अंबानी का बोम्बार्डियर एक्सप्रेस और कुमारमंगलम बिड़ला का सेसना साइटेशन भी चर्चा में रहता है.
इन उद्योगपतियों के निजी जेट काफी खर्चिले भी होते हैं. प्रति किलोमीटर यह विमान करीब 38000 रूपये का हवाई तेल यानि की एवियेशन फ्युल पी जाते हैं. इसके अलावा उन्हे ऐयरपोर्ट ओथोरिटी को लेंडिंग चार्ज देना होता है, जो कि लगभग 61 रूपये प्रति 1000 कि.ग्रा. (विमान का) होता है, यह निजी जेट करीब 10000 कि.ग्रा. के होते हैं. इसके बाद पार्किंग और हाउसिंग चार्ज अलग से लगता है. और फिर मुख्य पायलट और को पायलट जिनका मासिक वेतन 2 से 3 लाख के करीब होता है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि ज्यादातर कंपनियों के जेट हर दिन इस्तेमाल में भी नहीं आते हैं और ज्यादातर समय खडे ही रहते हैं. लेकिन अब स्टेटस सिम्बोल बन चुके ये जेट भारत में अपनी पैठ बढाते ही जा रहे हैं. हालाँकि यह भी सच है कि ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में भारतीय उद्योगपतियों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान जल्द से जल्द पहुँचना होता है और तब उनके निजी जेट ही एकमात्र सहारा होते हैं.
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