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बच्चों की इंटरनेट गतिविधियों पर नजर रखने का अनोखा तरीका |
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समाज
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बुधवार , , 09 अप्रेल |
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तरकश ब्यूरो
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| एक मनोचिकित्सक के मुताबिक छद्म प्रोफाइल बनाकर बच्चों पर जासूसी करने से अच्छा है कि उनके साथ बात की जाए |
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भारत मे इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ रहा है. आसानी से उपलब्ध हो रहे ब्रोडबेंड कनेक्शन और सस्ते दरों की वजह से इंटरनेट का व्याप बडे शहरों ही नहीं बल्कि छोटे शहरों और गाँवों तक फैलता जा रहा है.
लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि इंटरनेट का उपयोग करने वाली अधिकतर आबादी ऐसे युवाओं की है जो अपना समय मात्र चैटिंग करने अथवा सोश्यल नेटवर्किंग संजालों मे नए नए दोस्त बनाने मे बिताते हैं.
ओर्कुट, मायस्पेस, हाय 5 और फेसबुक जैसी सोश्यल नेटवर्किंग संजालो के द्वारा कोई भी कभी भी किसी का भी मित्र बन सकता है और अपने सुख दुख की बात जान सकता है. इस तरह के संजालों का प्रयोग करने वाले प्रयोक्ताओं की असलियत कम ही सामने आती है. लेकिन इन छद्म मित्रों की मित्रता युवाओं के उपर भावनात्मक रूप से गलत प्रभाव भी डाल सकती है.
अब अभिभावक अपने बच्चों की साइबर गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अनोखे तरीके अपना रहे हैं. एक समाचार पत्र की खबर के मुताबिक मुम्बई के कई अभिभावक छद्म नाम से अपनी ओर्कुट और फेसबुक प्रोफाइल बना रहे हैं, ताकि अपने बच्चों की प्रोफाइल मे जाकर उनकी गतिविधियों पर नजर रख सकें. इससे उन्हे कई चौंकाने वाली बातें भी पता चलती है, जैसे कि उनके बच्चे अपने घर की कई अंदरूनी बातों को अनजान लोगों से बाँटते हैं. यह कई बार घातक भी हो सकता है.
एक मनोचिकित्सक के मुताबिक छद्म प्रोफाइल बनाकर बच्चों पर जासूसी करने से अच्छा है कि उनके साथ बात की जाए और उन्हे समझाया जाए कि इस तरह की सोश्यल नेटवर्किंग संजालों मे बने दोस्त अमूमन ऐसे लोग होते हैं जो वास्तविक जीवन मे काफी भिन्न होते हैं. इसलिए युवाओं को इस तरह के संजालों मे बातचीत करते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए.
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