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चीन के साम्यवाद का आखिरी प्रतीक भी ढहा |
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समाज
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गुरुवार , , 01 मई |
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तरकश ब्यूरो
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| चीन के हेनान प्रदेश का एक छोटा सा गाँव नानजी चीन के माओवाद का आदर्श प्रतीक था. |
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चीन दूनिया का एक ऐसा देश है जो वामपंथ की विचारधारा को बढावा देने मे अग्रसर रहता है लेकिन उसका असली चेहरा कुछ और ही है. चीन ने अब बाकी विश्व की तरह मुक्त अर्थव्यवस्था को आत्मसात कर लिया है. बाहर से प्रगतिशील और विकसित देश के रूप मे दिखाई देते चीन की अंदरूनी वास्तविकता बहुत अलग है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अपनी दमनकारी नीतियों की वजह से देश के अंदर अपना एकछत्र राज बनाए रखी हुई है. लेकिन जमीनी वास्तविकता यही है कि अब देश की आम जनता अपने आपको उपेक्षित और ठगा हुआ महसूस करती है.
चीन के हेनान प्रदेश का एक छोटा सा गाँव नानजी चीन के माओवाद का आदर्श प्रतीक था. इस गाँव मे रहने वाले 3500 लोग माओवाद मे यकीन रखते थे और चीन के साम्यवाद को अपनाए हुए थे. चीन के प्रशासक इस गाँव को दूनिया के समक्ष वामपंथ के प्रतीक के रूप मे प्रस्तुत करते थे. यह गाँव विकसित और आधुनिक लगता था और इसके बलबूते चीन यह प्रचार करता था कि वामपंथ की वजह से समाजिक समरसता के साथ साथ आर्थिक विकास भी होता है.
इस गाँव के मुखिया सहित किसी भी व्यक्ति के पास अपनी सम्पत्ति नही थी. सबकुछ सार्वजनिक था. इस प्रदेश में चीन के सत्ताधीशों द्वारा कई कारखाने लगाए गए थे जहाँ ये लोग काम करते थे और चीन प्रचार करता था कि यहाँ के लोग सर्वाधिक खुशहाल हैं. लेकिन अब सच्चाई सामने आने लगी है. वास्तविकता यह है कि यह गाँव भारी कर्ज मे डूब चुका है. खबर है कि इस गाँव की खुशहाली की मार्केटिंग दूनिया मे होती रहे इसलिए चीन की कृषि बैंक इसे लगातार कर्ज़ देती रही. लेकिन अब यह गाँव 25 करोड लाख के भारी भरकम कर्ज तले दब चुका है, और दिवालिया हो गया है.
अधिकारियों मे व्याप्त भ्रष्टाचार, सार्वजनिक वितरण प्रणाली मे हो रहे घोटाले, और बिना जिम्मेदारी की कार्यशैली ने इस गाँव की अर्थव्यवस्था को तहस नहस कर दिया है. अब इस गाँव की प्रशासन समिति ने अपनी दयनीय हालत को सुधारने के लिए निजीकरण का रास्ता अपनाना शुरू कर दिया है. अब यह गाँव 30 साल पहले डेंग ज़िओपिंग द्वारा शुरू की गए आर्थिक उदारीकरण की राह पर चल पडा है. इस प्रकार चीन के माओवादी वामपंथ का आखिरी किला ढह गया है.
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