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जर्मन हिटलर को स्वस्तिक के प्रति लगाव क्यों था? |
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समाज
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मंगलवार , , 15 जनवरी |
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तरकश ब्यूरो
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| हिटलर खुद को मूलत: आर्यवंशी मानता था.
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कुछ पश्चिमी इतिहासकारों का मत है कि आर्य संस्कृति का उद्भव जर्मनी मे रहाईन नदी के किनारे हुआ था.
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हिन्दू मान्यताओं और आर्य संस्कृति में स्वस्तिक चिह्न का बहुत महत्व है. वैसे इस चिह्न को मूलतः स्वस्तिक नही बल्कि स्वस्ति यानि कि "कल्याण हो" ऐसा कहा जाता था जो आगे चल कर अपभ्रंश होकर स्वस्तिक बना.
जर्मन तानाशाह अडोल्फ हिटलर को स्वस्तिक चिह्न के प्रति अथाह लगाव था और उसके ध्वज तथा सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर स्वस्तिक का चिह्न देखा जाता था.
हिटलर खुद को मूलत: आर्यवंशी मानता था. कुछ इतिहासकारों के अनुसार आर्य संस्कृति का उद्भव पामीर के प्रदेश में 3500 वर्ष पहले हुआ था. जहाँ से वे पलायन करते हुए दक्षिण दिशा की ओर बढते हुए भारत आए थे. वहीं लोकमान्य तिलक का मत था कि आर्य संस्कृति का उद्भव पामीर नही परंतु उत्तर ध्रुव प्रदेश मे हुआ था, क्योंकि आदि काल मे उत्तर ध्रुव हराभरा प्रदेश था लेकिन फिर वातावरण मे परिवर्तन हुआ और शीतयुग आने पर खाने की तलाश मे आर्य दक्षिण मे भारत की तरफ आए.
कुछ पश्चिमी इतिहासकारों का मत है कि आर्य संस्कृति का उद्भव जर्मनी मे रहाईन नदी के किनारे हुआ था. अडोल्फ हिटलर भी इसी मान्यता को मानता था. उसके अनुसार जर्मन लोग ही आर्य संस्कृति के असली वंशज थे और वह इस संस्कृति को विश्व की सबसे महान सभ्यता मानता था.
हिटलर दूनिया भर मे आर्य संस्कृति को फैलाना चाहता था. इसलिए उसने अपने ध्वज और अन्य दस्तावेजों मे आर्य संस्कृति के पवित्र चिह्न स्वस्तिक को स्थान दिया था.
आज दशकों बाद कुछ पश्चिमी देशों मे स्वस्तिक चिह्न के प्रति दुराग्रह देखा जाता है. वे लोग इस चिह्न को हिटलर के साथ जोडकर देखते हैं जो गलत है.
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