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होली सभी जगह मस्ती और मजाक के माहौल में मनायी जाती है. राजस्थान में इसका अलग ही अन्दाज होता है. खुब मजाक मस्ती होती है. छेड़छाड़ होती है. इस दिन कोई बुरा जो नहीं मानता. जिन्दा आदमी को अर्थी पर लेटा कर शवयात्राएँ निकाली जाती है, तो गदहे पर बैठा कर बारात निकलती है. संस्कारी पुरूष स्त्री वेश धारण कर मोहल्ले भर में आशीर्वाद लेने निकते है. क्या क्या उटपटांग नहीं होता?!!.....
इसी से प्रेरित हो कर हमने सोचा की अगर हिन्दी के ये धूरन्धर चिट्ठाकार भी होली के मूड में कुछ भेष बदल कर आशिर्वाद लेने निकले तो कैसे लगेंगे....वर्च्युअली.....ही सही. कुछ प्रिय लोग छुट गये है, इसका रंज है की हाथ आया मौका हमसे छुट गया. पर बकरे की अम्मा कब तक खैर मनायेगी, उनका नम्बर भी आयेगा.
विश्वास जाने की यहाँ वे लोग है जिनके प्रति हमारे मन में बेहद प्रेम है, सम्मान है. किसी का मजाक बनाना हमारा इरादा नहीं है. हाँ यह होली की मस्ती में थोड़ी हँसी मजाक है. इसका आनंद लें...मत भूलें की आपकी टिका टिप्पणी इसमें चार चाँद लगा देगी.
अरबी सुंदरी (जितेन्द्र चौधरी)
ज्ञान की गंगा (ज्ञानदत्त पाण्डेय)
असली मालदार (कमल शर्मा)
चुनरी सम्भाल गौरी..
(अनूप शुक्ल)
बंगाल का काला जादू (शिवजी )
ब्यूटी विथ ब्रेन (अमित गुप्ता)
अभी तो मैं जवान सी ही हुँ... (आलोक)
खिलाडियों की खिलाडी (महाशक्ति प्रमेंद्र)
जूमला गर्ल (पंकज बेंगाणी)
मिस टेक्नो क्रांति (देबुदा)
इटालियन सुन्दरी (सुनिल दीपक )
अगड़म-बगड़म, मस्त हूँ तिगड़म (आलोक पौराणिक )
हैदराबादी तडका (सागर नाहर)
मिस लिनक्स (रवि रतलामी)
टीनएजर गौरी कन्या (समीरलाल)
मेरी मानो कन्याओं... (अनीता कुमार )
कैसी रही? जय भारत जय गुजरात...जय महाराष्ट्र जय उडीसा बंगाल... (संजय बेंगाणी)
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मज़ा आ गया