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स्क्रीन सीने अवार्ड में हिन्दी का हुआ अपमान
प्रयोक्ता का मूल्यांकन: / 6
बेकारअति उत्तम 
विशेष
सोमवार , , 28 जनवरी

star-svreen-awards.jpg कल रात 27/01/08 को हिन्दी चैनल स्टार प्लस पर इंडियन एक्सप्रेस समूह की पत्रिका स्क्रीन द्वारा आयोजित्त 14वें "स्क्रीन सीने अवार्ड" में प्रस्तोता साजिद खान द्वारा राजभाषा हिन्दी का बेहुदा मजाक उडाया गया.

श्री राजेन्द्र त्यागी के शब्दों में.. "साजिद खान अंग्रेजी का हिन्दी में भ्रष्ट अनुवाद कर करके लोगों को हंसाने लगे। इस भ्रष्ट अनुवाद के तहत गीतकार के स्थान पर पद-लेखक, डायलॉग के लिए वार्तालाप और डिस्ट्रिब्यूशन का अनुवाद विभाजन के रूप में कर मनोरंजन किया जाता रहा। यह क्रम काफी देर तक चलता रहा।" 

तरकश नेटवर्क के श्री संजय बेंगाणी के अनुसार " बात धरती के सितारों की हो तो बात कुछ और ही हो जाती है. हिन्दी का दिया खाने वाले फिल्म उद्योग के लोगो का जलसा लगा था. हिन्दी फिल्म निर्माता, हिन्दी कथा लेखक, हिन्दी पटकथा लेखक, हिन्दी संवाद लेखक, हिन्दी गीतकार, हिन्दी गायक, हिन्दी संगीतकार…कौन नहीं थे वहाँ…बस उन्हे हिन्दी नहीं आती..हिन्दी का मजाक उड़ाना बखुबी आता है."

खेदजनक बात यह है कि यह भौंडापन कई राजनितिकों और लेखकों, कवियों की हाजिरी मे चलता रहा और लोग मजे लेते रहे. हम इस घटना का पूरजोर विरोध करते हैं. यहाँ आप भी अपना विरोध दर्ज करवाएँ.  

इस घटना का वीडियो इस संजाल पर है. यहाँ और भी वीडियो हैं.  

टिप्पणियाँ (18)add
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द्वारा प्रेषित हर्षवर्धन , जनवरी 28, 2008
हां, मैंने देखा था निश्चित तौर पर हिंदी का इससे गंदा मजाक नहीं बनाया जा सकता। इसका मुखर विरोध होना चाहिए। मेरा भी जबरदस्त विरोध
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द्वारा प्रेषित Madan Kumar , जनवरी 28, 2008
इसका मुखर विरोध होना चाहिए। मेरा भी जबरदस्त विरोध
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द्वारा प्रेषित शास्त्री जे सी फिलिप् , जनवरी 28, 2008
हिन्दी न केवल हमारी राजभाषा है, बल्कि यह हमारे अस्तित्व एवं व्यक्तित्व का एक अभिन्न भाग है. इसका मजाक उडाने जैसा नीच कार्य कोई नहीं हो सकता. मै उन लोगों की भर्त्सना करता हूं जिन्होंने हिन्दी के साथ ऐसा नीच व्यवहार किया है -- शास्त्री जे सी फिलिप

जिस तरह से हिन्दुस्तान की आजादी के लिये करोडों लोगों को लडना पडा था, उसी तरह अब हिन्दी के कल्याण के लिये भी एक देशव्यापी राजभाषा आंदोलन किये बिना हिन्दी को उसका स्थान नहीं मिलेगा.
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द्वारा प्रेषित Sanjeet Tripathi , जनवरी 28, 2008
प्रोग्राम तो देखा नही मैने लेकिन ब्लॉग्स के माध्यम से जानकारी मिली।
हिंदी का ऐसा मजाक बनाया जाना निंदा योग्य है।
मैं इस तरह हिंदी ही नही बल्कि किसी भी भाषा का मजाक बनाए जाने का विरोध करता हूं।
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द्वारा प्रेषित शशि सिंह , जनवरी 28, 2008
साजिद की इस हरकत के लिए हिन्दी में एक शब्द है चिरकुटई. मजे की बात यह कि इन चिरकुटों को कोई भाषा ही आती... जी हां, अंग्रेजी भी नहीं. क्योंकि जहां तह मुझे जानकारी है अंग्रेजी के जनक अंग्रेजों का अपनी भाषा में शिष्टाचार पर बहुत जोर होता है।

हिन्दी के उचित सम्मान के लिए हमें तो उन अंग्रेजों को अपना आदर्श बनना चाहिये जिन्होंने युरोप में फ्रेंच की भाषाई कुलीनता को धाराशायी कर तब गंवई भाषा समझी जाने वाली अंग्रेजी को विश्व भाषा के रूप में स्थापित किया।
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द्वारा प्रेषित Nimmi Priya , जनवरी 28, 2008
Hindi ka Apmaan Karne walon ko, ya Ganda Mazaak Banane walon Ko Nishchit hi maaf nahi karna chahiye, or agar samay rahte inlogon par ya is tarah ke ghatna hone par Awaaz nahi uthaya gaya to in logo ka manobal bathta hi chala jayega. is liye iska purjor birodh hona hi chahiye. or un logo se jo is karyakarm me shamil the, un sabhi logo ko sarwajanik maphi mangani chahiye, or sajid khan ko to nischit hi ban kar dena chahiye ya phir unko punish milna chahiye. or is samaroh ke aayojak indin express par to bhasha apmaan ke tahat maanhani ka mukdma thok dena chahiye. jo kisi karyakarm ka aayojan to kar lete hai, par usme sammlit baykti ya baktaon ke liye ek saaf suthara content tak tayaar nahi kar sakte.
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द्वारा प्रेषित काकेश , जनवरी 28, 2008
मेरा विरोध भी दर्ज माना जाय.
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द्वारा प्रेषित आलोक , जनवरी 28, 2008
आश्चर्य है तो बस इस बात का ही कि हिन्दी की रोटी खाने वाले ऐसा कर रहे हैं। क्या इन्हें लगता है कि हिन्दी भाषियों को ये जो भी परोसेंगे वह खा लेंगे? शायद ऐसा लगता है उन्हें।
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द्वारा प्रेषित rachna , जनवरी 28, 2008
इसके खिलाफ आवाज उठानी ही चाहीये और जितने भी नेता वहाँ थे उनके खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहीये. अगर राष्ट्र ध्वज का अपमान होता है तो ये राष्ट्र भाषा का अपमान है . और ब्लोग पर बहुत मीडिया कर्मी है क्या वह इसमे हमारी साहयता नहीं करेगे ?
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द्वारा प्रेषित pramendra , जनवरी 28, 2008
मेरा विरोध भी दर्ज माना जा smilies/angry.gif
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द्वारा प्रेषित Shuaib.designer , जनवरी 28, 2008
HINDI KA MAZAK UDAYA KHUD HINDI WALON NE!
JIN LOGON KO THIK SE HINDI NAHI MALOOM UNKO AISE AWARDS DIYE JATE HAIN?
IS KHABAR PER APNA TO VIRODH HAI HI MAGAR KYA VO HAMARI AWAZ PER MAFI MANG LENGE?
MUJHE TO BES UN LOGON KI HERKAT PER KHUD SHARAM AA RAHI HAI.
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द्वारा प्रेषित G Vishwanath , जनवरी 28, 2008
मैंने भी देखा।
पहले कुछ अजीब सा लगा।
फ़िर सोचा, चलो, इतना संवेदनशील मत बनो, यह तो फ़िल्मी दुनिया है, इनका काम ही है लोगों को हंसाना, रुलाना, और मनोरंजन करना।
जान बूझकर यह अपमान नहीं कर रहे हैं, यह सब मज़ाक है, इस कान से अन्दर आने दो, उस कान से बाहर निकलने दो और बात भूल जाओ। लगता है मेरा पहला impression गलत नहीं था। इतने सारे लोगों को भी इस बात पर दुख हुआ है।

एक और बात मैने नोट की।
केवल "भारत" (मनोज कुमार) और शत्रुघ्न सिन्हाजी शुद्ध और अच्छी हिन्दी बोल सके। जो हिन्दी script और पठकथा, dialogue और lyrics के लिए पुरस्कार पाए वे भी हिन्दी में बोलने में असमर्थ हुए और अंग्रेज़ी में ही बोलने लगे। मेरी हिन्दी कमजोर है क्योंकि यह मेरी मातृभाषा नहीं है। मजबूरन मैं जगह जगह पर अंग्रेज़ी शब्दों का प्रयोग करता हूँ, लेकिन हिन्दी फ़िल्म जगत की हस्तियाँ भी हिन्दी में इतने कमजोर हैं? ऐसा क्यों?

G विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळूरु


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द्वारा प्रेषित अंकित पाटनी , जनवरी 28, 2008
मै भी विश्वनाथजी से सहमत हुँ साजिद खान से ज्यादा तो मुझे उन लोगो पर गुस्सा आरहा है जिन्होने हिन्दी मे कहानी लिखी है या फिर हिन्दी मे गीत लिखे है साजिद खान तो केवल जान बुझ कर एसा कर रहे थे लेकिन बाकि लोगो का क्या ? अब तो मुझे लगता है कि समय आगया है अब हमारे देश कि मातृभाषा को बदल कर अग्रेजी कर देनी चाहिये। भाई कम से कम इस बात पर शर्मिदगी तो नही होगी को लोग इस भाषा को नही जानते है वैसे 100 मे से 80 नागरिक भले ही हिन्दी नही जानते हो लेकिन अग्रेजी जरुर जानते है।
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द्वारा प्रेषित डा प्रवीण चोपडा़ , जनवरी 28, 2008
मुझे भी यह सब टीवी पर देख कर बेहद बुरा लगा और मैंने तो अपने आप को अपमानित महसूस किया। फिर सोचता हूं कि यह तो एक तरह से इस देश की भोली भाली जनता का ही मज़ाक उड़ा दिया। लेकिन इस कार्यक्रम के आयोजकों को यह भी समझ लेना चाहिए....यह जो पब्लिक यह , सब जानती है....यह चाहे तो सिर पे बिठा ले, चाहे फैंक दे नीचे, पहले यह पीछे भागे, फिर भागो इस के पीछे। जिन बंदों ने यह हरकत की है उन्हें मीडिया के माध्यम से माफी मांगनी चाहिए।
जय हिंदी...जय प्रिय़ राष्ट्रभाषा जिस की वजह से हमारा वजूद है।
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द्वारा प्रेषित G Vishwanath , जनवरी 29, 2008
मुझे शक है।

जिन्हें हिन्दी फ़िल्मों के संवाद, कहानी, पटकथा, के लिए पुरस्कार मिले, क्या वे असली लेखक हैं?

यह भी तो संभव है कि असली लेखक कोई ghost writer हो।
शक इसलिए हो रहा है कि पुरस्कार स्वीकार करते समय यह लोग हिन्दी में बोल ही नहीं सके। केवल धन्यवाद कहना था इन लोगों को, और कुछ खास लोगों का नाम लेकर आभार प्रकट करना था।
कार्यक्रम के पहले ही अपना Thank You भाषण तैयार करके रख सकते थे और मंच पर जाकर उगल सकते थे। इसमें भी असफ़ल रहे।
क्या ऐसे लोग फ़िल्मों में संवाद, कहानी इत्यादि लिखने में सक्षम हो सकते हैं?

मुझे दाल में कुछ काला नज़र आता है।
हो सकता है कि संवाद अंग्रेज़ी में लिखा था और किसी गुमनाम अनुवादक ने आगे का काम किया!
G विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळूरु

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द्वारा प्रेषित mohinder56 , जनवरी 29, 2008
साजिद खान अपने आप में एक बहुत बडा मजाक हैं....और ऐसे लोग जो इस समारोह को देख रहे थे वो इस वात के लिये दोषी है कि उसे वक्त कोई जूता स्टेज पर क्यों नहीं फ़ैंका गया
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द्वारा प्रेषित suman , फ़रवरी 04, 2008
hindi ka khate hain aur hindi ka hi majak banate hain.
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hindi
द्वारा प्रेषित lalit , मई 07, 2008
मेरा विरोध भी दर्ज माना जाय. lalit.
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