(यहा गेजेट यानि कोइ हार्डवेर नहीं बलकि सॉफ्टवेयर की ओर दिशा निर्देश करता है।)
मुझे टेक्नोलोजी से ज्यादा टेक्नोलोजी डेवेलोप करनेवाली कंपनियो के बीच कीं लडाइया देखने में ज्यादा मज़ा आता है। क्योंकि अंत में अछ्छी टेक्नोलोजी नहीं जीतती, बल्कि अछ्छी मार्केटिंग और पेकेजिंग स्ट्रेटेजी ही जीतती है। अब देखो, माइक्रोसोफ़्ट की सफलता को। भले ही बहुत से लोग माइक्रोसोफ़्ट को गालियॉ देते है, लेकिन मैं नहीं समझता किसी ओर आदमी में बिल गेट्स जितनी ताकत, समझ या काबिलीयत थी या अभी भी है, जो इतने सारे लोगों को इतने आसान सॉफ्टवेयर बना कर बेच भी सकता है और पैसे भी बना सकता है। एपल अछ्छी प्रोडक्टस बनाती है, उनकी पेकेजिंग भी अछ्छी होती है, लेकिन टार्गेट ओडियंस, स्ट्रेटेजी और भविष्य की सोच कमजोर होती है। खेर हिन्दी ब्लोग जगत में माइक्रोसोफ़्ट की तारिफ करना खतरे से खाली नहीं क्योकि इधर सब ओपन सोर्स के समर्थक ही लगते है। ज्यादातर ओपन सोर्स के समर्थक माइक्रोसोफ़्ट को दिल से नफरत करते है, बहुत कम मेरे जेसे, दोनो बाज़ु पॉव रखनेवाले होते है।
खेर माइक्रोसोफ़्ट और ओपन सोर्स पुराण फिर कभी। माइक्रोसोफ्ट विस्टा मै आनेवाले “साइड बार” और माइक्रोसोफ्ट की नयी साइटस पर चलने वाली गेजेट एक प्रकार की एप्लिकेशन होती है जो बहुत ही स्लिक लगती है। अगर आपको गेज़ेट या मेक और याहू की विजेट्स के बारे मे नहीं पता तो सरल भाषा में, आप गेजेट को एक आइकन (icon) जेसा समझ सकते है। फर्क सिर्फ इतना है की यह गेजेट्स आइकन जैसे सिर्फ पिक्चर्स नहीं है। गेजेट्स तो आपकी एप्लिकेशन की तरह ही काम करती है। छोटी छोटी गेजेट्स के कुछ उदाहरण: घडी, फीड रिडर, इमेल चेकर, तापमान मीटर वगैरह। यानि आपके डेस्कटोप पर आइकन के साथ साथ यह गेजेट्स चिपके रहेंगे लेकिन आपको माहिती देंगे या आपके किसी विंडोज़ में खुलने वाले एप्लिकेशन जेसा ही काम कर सकेंगे। अगर आप माइक्रोसोफ़्ट की नयी प्रोडक्टस देखेंगे तो आपको साफ पता चलेगा की माइक्रोसोफ़्ट अब मेनूबार को उडाने की फिराक में है। कुछ उदाहरण जिसमें मेनूबार गौण है: मिडिया प्लेयर 10, IE 7 Beta, Windows Live Messenger, बाकी सारी Live प्रोडक्टस और विन्डोज़ डीफेंडर।
गेजेट्स इसी परंपरा को आगे बढा रहे है। इनका कोडिंग सिम्पल जावा स्किप्ट और XML से होता है। आगे चलकर डेटाबेज़ से कनेक्ट करने वाली कोमप्लेक्स गेजेटस भी आयेंगी। यानि गेम फिर से AJAX जेसी तकनीक के आसपास खेली जा रही है। एडोबी फ्लेक्स इसी रिच युज़र इंटरफेस के मार्केट को हडपने के लिए बनाया गया है। यानि अब आपको मेनुबार बगैर काम करना पडेगा। डेवेलोपर और डिज़ाइनर्स को अब नयी तरह से सोच कर, युज़र्स को अपने एप्लिकेशन यानि गेज़ेट्स में घूमाना पडेगा। मेनुबार तो अस्तित्व मे रहेगा लेकिन नये युज़र्स की मदद के लिये ही। आप गेजेट् डेवेलोप कर रहे हो तो उसी दिशा मे मुख्य रूप से सोचना पडेगा
वेसे इन्ही गेजेट्स को एपल कबका मार्केट में ला चूकी है। एपल इसे “विज़ेट” कहती है। एपल मेक ओ.एस. पे यह डेशबोर्ड पे चलायी जाती है।
अब बहुत लोगों को यह सुनके हैरानी होंगी की याहू विंडोज़ पर अपने “विज़ेट” (यानि बिलचाचू की गेजेट) मार्केट में कबके उतार चूका है! लेकिन जेसा की मैने पहले कहाँ, याहू या एपल में बिलभैया जितनी ताकत, दिमाग, कुशलता नहीं है। तभी तो इतनी अछ्छी चिज़ बिलचाचू से पहले बनाने के बावजूद उनको अभी तक इस मार्केट मे जितने होने चाहिये उतने युज़र्स और डेवेलोपर्स नही मिल रहे। अब बिलचाचू इनकी यह ख्वाहिश पूरी कर देंगे। लास-वेगास मे बिलचाचूने इसी दिशामें कदम बढाते हुए MIX-06 डेवेलोपर्स कोम्पिटीशन आयोजित भी कर दी। वेसे यह नामकरण विधी में याहू और एपल दोस्त लगते है। जेसे माइक्रोसोफ़्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर में जीसे फेवरीट्स कहती है उसे याहू और एपल फेवरीटस कहते है!!
कट लेता हू ना? घूरते क्यों हो?
“मेरे ख्याल से बिलचाचू के आगे रहने का कारण उनकी जल्दी से हार स्वीकार न करने का जिद्दी और मुत्सदीभरा स्वभाव है वरना कौन बंदा OS (Appleने इनसे पहले GUI वाली OS बनायी), इंटरनेट (Netscape आगे था अपने I.E से), Office Suite (Word Perfect पहले आगे था), सर्वर ओपरेटींग सिस्टीम (अभी दो महिने पहले तक UNIX) वगैरह वगैरह क्षेत्रो में शुरू में पिछे रहने के बाद कौन सोच सकता है इन क्षेत्रो में ही नंबर वन होने का? वेसे मुझे स्टिव जोब्स भी उनके नये नये आइडियाज़ के लिए पसंद है लेकिन बिलचाचू सबसे उपर क्योकि जोब्स अंकल भी सफलता के लिये नये नये क्षेत्रो मे चले जाते है, फाइट नहीं देते। बिलचाचू नया कम लाते है पर डटे रह कर आम लोगो को उपयोगिता समझाने मे कामियाब रहते है, जो सबसे बडी सिध्धि है।"