टेकनोलोजी का तत्वज्ञान

Thursday, July 06, 2006

फ्लेश को टक्कर : माइक्रोसोफ्ट एक्स्प्रेशंस

कबका मैं यही सोच रहा था की मेक्रोमिडीया का फ्लेश इतना प्रसिध्ध होने के बावजूद कोइ इसके सामने मजबूत प्रोडक्ट क्यो नहीं उतार रहा। तब उसके सामने एडॉबी एक बडी दावेदार थी जो Macromedia Flash के सामने कोइ प्रोडक्ट उतार सके। लेकिन Adobe ने तो Macromedia को ही खरीद लिया।

लेकिन अब माइक्रोसोफ्ट ने भी एडोबी से दो दो हाथ करने का निर्णय ले लिया है। इसी दिशा मे उन्होने Microsoft Expression सोफ्टवेर लौंच किया है। अब ये Microsoft Expression अलग अलग स्वरुप मे मिलेगा। जेसे वेब डिज़ाइनर के लिये और ग्राफिक्स डिज़ाइनर के लिये भी। आप अभी इसे मुफ्त डाउंलोड कर सकते हो, टेस्टींग के लिये।
लेकिन आपके पास Microsoft.Net 2.0 तो है ना?

Sunday, May 21, 2006

इस ब्लोग मे परिवर्तन

अभी तक मैने सिर्फ अपने क्म्प्युटर या इंटरनेट से जुडी हुइ बातो पे ही लिखा है। लेकिन टेकनोलोजी सिर्फ सूचना, इलेक्ट्रोनिक्स या I.T से जुडी हुइ नही है। तो अबसे यहाँ I.T, Electronics या Internet रिलेटेड न्युज़ या व्युज़ के साथ साथ दूसरे क्षेत्रो की तकनीको पे ज्यादा ध्यान लगाया जायेगा, क्योकि वेसे भी बहुत सारे हिंदी ब्लोगर मित्र क्म्प्युटर या इलेक्ट्रोनिक्स पे लिख रहे है तो एसे मे एक और चिठ्ठा बढाने का कोइ मतलब ही नही है! अब देखो आलोकभैया ने तो गूगल पर ही एक झकास ब्लोग बना डाला है तो मुझे गूगल के न्युज लिखने की महेनत करने की क्या जरूरत? या उन्मुक्त के ओपन सोर्स वाली सिरीज़ के बाद मुझे उसपर लिखने की जरूरत नही है। हा, समय समय पर मे अपने विचार जरूर कहता रहूंगा।
तो इस ब्लोग पे अब टेकनोलोजी से जूडे हुए हर क्षेत्र के समाचार या मेरा “मंतव्य” मिलेगा।

सेमसंग का मोबाइल फोन सांस लेगा...

इलेक्ट्रोनिक्स जायंट कंपनी सेमसंग, जो 1 साल पहेले मोटोरोला को बहुत पीछे छोड देने का सपना देखा करती थी, वो सपना मोटोरोला के नये रेज़र सिरीज़वाले फोन की बजह से टूट गया। लेकिन अब SAMSUNG मोटोरोला और नोकिया को भी पछाड ने के लिये नया आइडिया लेकर आयी है। यह आइडिया मोबाइल की बेटरी से जुडा हुआ है। अब मोबाइल फोन की बेटरी फ्युल सेल से चलेगी। यह बहुत क्रांतिकारी विचार है क्योकि फ्युल सेल आज तक नासा के अवकाश से जुडे हुए यंत्रो को पावर देता आया है। कुछ जगहो पे मोटर गाडीयो मे भी फ्युल सेल का प्रयोग हो चुका है।

दर असल फ्युल सेल की कार्य प्रणालि पेपर पे समजाने के लिये बहुत आसान है। फ्युल सेल हाइड्रोजन और ओक्सिजन मे से बिजली पैदा करता है। अब कुदरत मे तो ये दोनो वायु बहुत है जेसे पानी मे। हालाकि एसे ही आप O और H मिलाकर पावर नही पैदा कर सकते। यहाँ सेमसंग फ्युल सेल मे ओक्सिजन और मिथेनोल जेसे द्रव्य से मिलाकर बिजली पैदा करेगी। मुझे यह फोन देखने का बडा इंतेज़ार है, देखे तो सही छोटा फ्युल सेल केसा होता है? यह आ गया तो फिर बेटरी का चार्जर ढूंढने मे से मुक्ति!! खेर बाद मे समय मिला तो आपको फ्युल सेल के बारे मे डिटैल मे बताउंगा।

वेसे बहुत पहले से मेरे दिमाग मे यह ख्याल आता रहा है की यहाँ मोबाइल बेटरी की जगह पोर्टेबल, युज़ एन थ्रो AA या AAA बेटरी क्यु इस्तेमाल नही कर सकते?? भले ही थोडी देर चले लेकिन बेटरी खत्म होने पर और चार्जर पास न होने पर रास्ते से नया पेंसिल सेल खरीद कर काम तो चला सकते है ना!!! क्या ख्याल है?

Saturday, April 08, 2006

माइक्रोसोफ्ट सपोर्ट अब हिन्दी मे भी

Microsoft Help and Support : Now in Hindi
माइक्रोसोफ्ट ने अपने बहुत प्रचलित नोलेज बेज़ लेखो को अब हिन्दी में ट्रांसलेट कर दिया है। अब से बहुत सारे लेख अब हिन्दी मे मिलेंगे। कुछ लेख तो पहेले से ही उपलब्ध थे।

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत मे मौज़ुद हर भाषाओ का मह्त्व जानते है और उसपे रिसर्च भी करते है। लेकिन अपने महान देशवासी सोते रहते है।युनिकोड या हिन्दी सोफ्टवेयर पे ज्यादातर रिसर्च भी विदेशी युनिवर्सिटी ही करती है। अपनी युनिवर्सिटीयाँ तो पता नही सोती रहती है।

धन्यवाद अमरिका की कंपनीओ और युनिवर्सिटीओ का, जिन्होने हिन्दी को आम लोगो तक पहुंचाया।

माइक्रोसोफ्ट की ओपन सोर्स लेब

Microsoft Open Source Lab : Port 25
अब ये सुनो। माइक्रोसोफ्ट ने ओपन सोर्स सोफ्टवेर के लिये अपने केम्पस मे एक लेब खोल डाला है। माइक्रोसोफ्ट पे ओपनसोर्स के दुश्मन होने का आरोप लगा कर अपना धंधा बढानेवाली कंपनीयाँ अब क्या करेगी बेचारी? वेसे ये लेब का नाम बहुत बढिया है : पोर्ट 25 ! ये लोग नाम अछ्छा सोच लेते है। वेसे मुझे मेरी सोफ्टवेयर कंपनी के लिये नाम सोचना है लेकिन दिमाग ही नही चलता!! आपके पास कोइ सजेशन हो तो बताना।

ओर तो ओर, माइक्रोसोफ्ट इस लेब मे लिनक्स और युनिक्स पे रिसर्च करेगा। (शायद कोइ नयी कोपी मारने को मिले!!) वेसे माइक्रोसोफ्ट युनिक्स पे तो पहेले से ही बहुत रिसर्च करता आया है। इसलिये अब जाके वो युनिक्स को पिछे छोड पाया है।

वेसे माइक्रोसोफ्ट कहेता है की लिनक्स और युनिक्स को युज़ करना महेंगा हो सकता है विन्डोस सर्वर 2003 के मुकाबले। तो फिर ये लेब उनको बहुत महेंगी पडी होगी ना? !!

Thursday, April 06, 2006

वर्डप्रेस मे अब एक से ज्यादा ब्लोग मुमकिन

यहाँ पढिये खुश खबरी। अब आप वर्डप्रेस.कोम पर एक ही एकाउंट मे से "Unlimited" ब्लोग बना सकते है। गूगल के ये ब्लोगर.कोम की बेंड बज गयी अब पूरी तरह।

मैने अपना खाता वहा खोल दिया है और समय मिलते ही WORD PRESS के नये पते पे चला जाउंगा। लेकिन आप घबराइये नही। आप तो यही पता लिखियेगा। आप को नये पते पे रिडाइरेक्ट किया जायेगा।

याहू इ-मेल का नये वर्ज़न का रिव्यु(Yahoo Mail Beta)

Yahoo Mail BETA Review

आज मै आपको याहू के नये इ-मेल की कुछ झलक दिखाउंगा। दर असल मै यह काफी दिनो से युज कर रहा हुं लेकिन मेरे कम्प्यूटर मे से इमेज पोस्ट करने मे दिक्कत आ रही थी। खेर अब पिकासा और हेलो डाल दिये है तो इमेज भी लगा रहा हूं।

ये बीटा वर्ज़न है। आपके लिये स्पेशल तोहफा। चाहे तो अपने दोस्तो को ये लिंक फोरवर्ड कर सकते है।
वेसे मै माइक्रोसोफ्ट ला लाइव मेल भी कबसे युज़ कर रहा हु। याहू वालोने अब 11 दिन पहेले आमंत्रण दिया। लेकिन मै आपको यह जरुर बता सकता हु की दोनो ही तकरीबन एक जैसे है। याहू थोडा सा ज्यादा अछ्छा बेशक है। लेकिन कोइ क्रांतिकारी परिवर्तन नही है।


नया इ-मेल क्लायंट MSN LIVE MAIL और OUTLOOK की तरह चार पेन मे बांटा गया है। सबसे दायी बाजुवाले पेन आपके सारे फोल्डर दिखाती है। बायी बाजु उपर वाली पेन आपको आपके इ-मेल्स का लिस्ट दिखाती है। उसके निचे वाली पेन आपको इ-मेल दिखाती है। चौथा पेन Advertisements दिखाता है।

आप इस नये वर्जन मे सिंडीकेशन फीडस भी पढ सकते है। आप अपने पसंदीदा फीड भी लगा सकते है।
जब आप किसी को इमेल लिखना चाहे तो एक नया टेब खुलता है compose के लिये। आपको किसीने इमेल भेजा और अगर आपको अपनी एड्रेस बूक मे उन्हे शामिल करना हो तो यह काम सिर्फ एक क्लिक से हो जायेगा और पेज भी नही बदलेगा।

वेसे AJAX का इस्तमाल करने की बजह से लोड होने मे ज्यादा समय लगता है अब भी। स्क्रोल करते समय बहुत स्लो हो जाता है। मेरे Internet Explorer 7 पे तो ये चलता ही नही, कहता है की मुझे कमसे कम IE 5.5 चाहिये। आपका ब्राउजर बहुत पूराना है!! ओर याहू टूलबार के नये बीटा के साथ भी जचती नही इसकी।

लेकिन भविष्य अछ्छा है! Posted by Picasa

Tuesday, March 28, 2006

बिल गेट्स चाचू जिंदाबाद और गेजेट्स - विजेट्स

(यहा गेजेट यानि कोइ हार्डवेर नहीं बलकि सॉफ्टवेयर की ओर दिशा निर्देश करता है।)

मुझे टेक्नोलोजी से ज्यादा टेक्नोलोजी डेवेलोप करनेवाली कंपनियो के बीच कीं लडाइया देखने में ज्यादा मज़ा आता है। क्योंकि अंत में अछ्छी टेक्नोलोजी नहीं जीतती, बल्कि अछ्छी मार्केटिंग और पेकेजिंग स्ट्रेटेजी ही जीतती है। अब देखो, माइक्रोसोफ़्ट की सफलता को। भले ही बहुत से लोग माइक्रोसोफ़्ट को गालियॉ देते है, लेकिन मैं नहीं समझता किसी ओर आदमी में बिल गेट्स जितनी ताकत, समझ या काबिलीयत थी या अभी भी है, जो इतने सारे लोगों को इतने आसान सॉफ्टवेयर बना कर बेच भी सकता है और पैसे भी बना सकता है। एपल अछ्छी प्रोडक्टस बनाती है, उनकी पेकेजिंग भी अछ्छी होती है, लेकिन टार्गेट ओडियंस, स्ट्रेटेजी और भविष्य की सोच कमजोर होती है। खेर हिन्दी ब्लोग जगत में माइक्रोसोफ़्ट की तारिफ करना खतरे से खाली नहीं क्योकि इधर सब ओपन सोर्स के समर्थक ही लगते है। ज्यादातर ओपन सोर्स के समर्थक माइक्रोसोफ़्ट को दिल से नफरत करते है, बहुत कम मेरे जेसे, दोनो बाज़ु पॉव रखनेवाले होते है।

खेर माइक्रोसोफ़्ट और ओपन सोर्स पुराण फिर कभी। माइक्रोसोफ्ट विस्टा मै आनेवाले साइड बार और माइक्रोसोफ्ट की नयी साइटस पर चलने वाली गेजेट एक प्रकार की एप्लिकेशन होती है जो बहुत ही स्लिक लगती है। अगर आपको गेज़ेट या मेक और याहू की विजेट्स के बारे मे नहीं पता तो सरल भाषा में, आप गेजेट को एक आइकन (icon) जेसा समझ सकते है। फर्क सिर्फ इतना है की यह गेजेट्स आइकन जैसे सिर्फ पिक्चर्स नहीं है। गेजेट्स तो आपकी एप्लिकेशन की तरह ही काम करती है। छोटी छोटी गेजेट्स के कुछ उदाहरण: घडी, फीड रिडर, इमेल चेकर, तापमान मीटर वगैरह। यानि आपके डेस्कटोप पर आइकन के साथ साथ यह गेजेट्स चिपके रहेंगे लेकिन आपको माहिती देंगे या आपके किसी विंडोज़ में खुलने वाले एप्लिकेशन जेसा ही काम कर सकेंगे। अगर आप माइक्रोसोफ़्ट की नयी प्रोडक्टस देखेंगे तो आपको साफ पता चलेगा की माइक्रोसोफ़्ट अब मेनूबार को उडाने की फिराक में है। कुछ उदाहरण जिसमें मेनूबार गौण है: मिडिया प्लेयर 10, IE 7 Beta, Windows Live Messenger, बाकी सारी Live प्रोडक्टस और विन्डोज़ डीफेंडर।

गेजेट्स इसी परंपरा को आगे बढा रहे है। इनका कोडिंग सिम्पल जावा स्किप्ट और XML से होता है। आगे चलकर डेटाबेज़ से कनेक्ट करने वाली कोमप्लेक्स गेजेटस भी आयेंगी। यानि गेम फिर से AJAX जेसी तकनीक के आसपास खेली जा रही है। एडोबी फ्लेक्स इसी रिच युज़र इंटरफेस के मार्केट को हडपने के लिए बनाया गया है। यानि अब आपको मेनुबार बगैर काम करना पडेगा। डेवेलोपर और डिज़ाइनर्स को अब नयी तरह से सोच कर, युज़र्स को अपने एप्लिकेशन यानि गेज़ेट्स में घूमाना पडेगा। मेनुबार तो अस्तित्व मे रहेगा लेकिन नये युज़र्स की मदद के लिये ही। आप गेजेट् डेवेलोप कर रहे हो तो उसी दिशा मे मुख्य रूप से सोचना पडेगा

वेसे इन्ही गेजेट्स को एपल कबका मार्केट में ला चूकी है। एपल इसे विज़ेट कहती है। एपल मेक ओ.एस. पे यह डेशबोर्ड पे चलायी जाती है।

अब बहुत लोगों को यह सुनके हैरानी होंगी की याहू विंडोज़ पर अपने विज़ेट (यानि बिलचाचू की गेजेट) मार्केट में कबके उतार चूका है! लेकिन जेसा की मैने पहले कहाँ, याहू या एपल में बिलभैया जितनी ताकत, दिमाग, कुशलता नहीं है। तभी तो इतनी अछ्छी चिज़ बिलचाचू से पहले बनाने के बावजूद उनको अभी तक इस मार्केट मे जितने होने चाहिये उतने युज़र्स और डेवेलोपर्स नही मिल रहे। अब बिलचाचू इनकी यह ख्वाहिश पूरी कर देंगे। लास-वेगास मे बिलचाचूने इसी दिशामें कदम बढाते हुए MIX-06 डेवेलोपर्स कोम्पिटीशन आयोजित भी कर दी। वेसे यह नामकरण विधी में याहू और एपल दोस्त लगते है। जेसे माइक्रोसोफ़्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर में जीसे फेवरीट्स कहती है उसे याहू और एपल फेवरीटस कहते है!!

कट लेता हू ना? घूरते क्यों हो?

मेरे ख्याल से बिलचाचू के आगे रहने का कारण उनकी जल्दी से हार स्वीकार न करने का जिद्दी और मुत्सदीभरा स्वभाव है वरना कौन बंदा OS (Appleने इनसे पहले GUI वाली OS बनायी), इंटरनेट (Netscape आगे था अपने I.E से), Office Suite (Word Perfect पहले आगे था), सर्वर ओपरेटींग सिस्टीम (अभी दो महिने पहले तक UNIX) वगैरह वगैरह क्षेत्रो में शुरू में पिछे रहने के बाद कौन सोच सकता है इन क्षेत्रो में ही नंबर वन होने का? वेसे मुझे स्टिव जोब्स भी उनके नये नये आइडियाज़ के लिए पसंद है लेकिन बिलचाचू सबसे उपर क्योकि जोब्स अंकल भी सफलता के लिये नये नये क्षेत्रो मे चले जाते है, फाइट नहीं देते। बिलचाचू नया कम लाते है पर डटे रह कर आम लोगो को उपयोगिता समझाने मे कामियाब रहते है, जो सबसे बडी सिध्धि है।"

Thursday, March 23, 2006

मोज़िला फायरफोक्स 2.0 आल्फा 1 "बोन एको"

मोज़िला फायरफोक्स 2.0 आल्फा 1 "बोन एको" रिलिज़ हो गया है। डाउनलोड करे अगर ट्राय करना है तो।

Apple i-phone


एपल आइ-पोड, आइ-मेक और आइ- बूक के चाहको के लिये खुश खबरी। Apple i-phone सिर्फ अफवाह नहि है। सही मे एपल यह फोन बनाकर लोंच करने का सोच रही है।

मार्केट मे यह बाते वेसे 2005 से चली आ रही है और आपको शायद कोइ फोर्वडेड इ-मेल भी आ गया होगा जिसमे बाजु मे दिखायी गयी तस्वीर भी होंगी।

खेर अब लेकिन यह कंफ़र्म ही हो गया है क्योकि यह माहिती बेंनक्यु कंपनी वाले ने दी है। खेर BENQ तो एपल के मोबाइल नहि बनाने वाली क्योंकि वह खुद ही मोबाइल फोन निर्माता है लेकिन ताइवान मे बहुत सी कंपनीयो को एपल ने चुना है। जिसमे से होन हाइ प्रिसीज़न ( यानि फोक्सकोन) मुख्य है। दुसरी कंपनी ताइवान ग्रीन पोइंट एंटरप्राइज़ है।

खेर मुझे तो सिर्फ एपल फोन का इंतज़ार है। आशा है कि दिखावे के साथ साथ किंमत और उपयोगिता के रूप से भी अछ्छा होगा।

लास्ट मे, मेरा पिछ्ला पोस्ट दो बार अक्षरग्राम मे पब्लिश हुआ है। दरअसल मैने पहेले वाली पोस्ट कुछ गलती की बजह से हटा दी। लेकिन तब तक वह छ्प चुकी थी।

Wednesday, March 22, 2006

एडोबी फ्लेकस 2.0 बीटा 1 (ADOBE FLEX)

मेने कुछ दिन पहेले AJAX के बारे मे बताया था। उसमे मेने फ्लेक्स के बारे मे भी लिखा था। आज उसमे मैं यह बताना चाहता हूं कि मैंने Adobe Flex Builder डाउंलोड एवं ट्राय किया है। यह बहुत कूल टूल है।

दरअसल, आजकल सारी कंपनीया अपनी प्रोडक्टस का युज़र इंटरफेस अछ्छा करने मे लगी हुइ है। विस्टा मै भी युज़र इंटरफेस बहुत अछ्छा दिखता है। एडोबी का फ्लेक्स भी इसी दिशा मे महत्व का कदम है। राज़ की बात बताउ तो, एडोबी ने मेक्रोमिडिया को खरीदा उसके सबसे अछ्छे Flash प्रोडक्ट के लिये। लेकिन तभी AJAXने आकर सारी बाज़ी बिगाड दी। इन लोगों को इसकी जानकारी तो पहेले से ही होगी। इसिलिये Rich User Interface Applications के मार्केट मे फ्लेश को बनाये रखने के लिये इन्होने फ्लेश और एजेक्स को मिलाकर फ्लेक्स बना दिया। यानि अब फ्लेश एकशन स्क्रिप्ट भी फ्लेक्स के साथ मिल जायेगी। हौ ओर एक बात, एडॉबी फ्लेश को मोबाइल फोन पर प्रमोट करने के लिये भी बहुत प्रयत्न कर रही है। लेकिन अभी बहुत सी एप्लिकेशन डेवेलोप नहीं हो पायी है। शायद अपने पंकज और संजय जेसे खांटू डिज़ाइनर इस ओर कदम बढाये इतनी देर है।

माइक्रोसोफ्ट, मै और भारतीय रैल एक जेसे है

आप सोचेंगे ये साला जब लिखता है तो कुछ भी लिख डालता है। अब माइक्रोसोफ्ट और रवि मे क्या साम्यता??

देखिये ऐसा है कि, Microsoft ने अपनी नयी ओपरेटिंग सिस्टम Windows Vista की लोंचिंग फिर से पिछे ले ली। ये जुन 2006 के बाद रिलिज़ होने वाली थी। अब ये 2007 के शुरु मे लोंच होंगी।
Microsoft दरअसल लोंगहोर्न यानि विस्टा को 2003 मे रिलिज़ करने वाली थी। अब सिक्योरीटी के बहाने बना बना कर 2006 की Shopping Season भी बर्बाद कर दी। इसिलिये कम्प्यूटर बनाने वाली डेल जेसी कंपनीया नाराज़ होंगी ही। खेर विस्टा के 6 वर्ज़न आने वाले है उसमे से एक तो वो लोग 2006 के नवेंबर मे रिलिज़ कर ही देंगे। अभी इन्होने विस्टा के बाद वाली Microsoft Windows Viena और उसके बादवाली Microsoft Windows Pipe (Technology) पे काम शुरु कर दिया है।

अब मेरा भी कुछ् ऐसा हे है। मैने अप्ने मेगेज़ीन को 1 साल से लटका दिया है। Indian Railways तो अपने समयपत्रक का पालन करने के लिये मशहूर है ही! समय वही रहता है केवल तारीख बदल जाती है।

खेर ये तो है हम बडे लोगो की बडी बातें!!!

Tuesday, March 21, 2006

टेकनोलोजीकल हथौडा वरज़न 99.9

भाइओ, उनकी बहेनो, अंकलो, आंटीओ और जो भी हो,

अब तो आपको मेरे हथौडे खाने की आदत पड गयी होगी। अगर नहि पडी तो ये नया ब्लोग पूरी कर देगा!

मेने यह मार्क किया की मेरे अंग्रेजी और हिन्दी ब्लोग मे मैं टेकनोलोजी पर भी लिख डालता हूं और वह मेरे बहुत से दोस्तो को पसंद भी आता है, शायद वह समझते होंगे कि इस लल्लु के हथौडे खाने से तो यह बेहतर ही है।

मुझे सिर्फ अपनी तारिफ ही पसंद है, तो केवल तारिफ ही करना :D !! जिनको टिकाए सुनने से हमारा अछ्छा होता है एसी फिलोसोफी पसंद है, तो टिकाए अपने ब्लोग पे जाके करे। लेकिन आप मेरी सुननेवाले थोडे ही है?? लगा लेंगे मेरी कभी चांस मिलने पर। चलो ठीक है, कुछ डिस्काउंट दिया आपको टिका करने के लिये...

तो प्रस्तुत है एक नया टेकनोलोजी रिलेटेड ब्लोग। जिसमे सारी टेकेनोलोजी कि बांते होंगी।

धन्यवाद

लि.

आपका (खुद बन बेठा) तत्वज्ञानी