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अब इको फ्रेंडली लेपटोप भी
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बेकारअति उत्तम 
तकनीक
मंगलवार , , 18 दिसम्बर
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इस इको फ्रेंडली लैपटॉप का अधिकतर हिस्सा बांस की सिल्लीयों को जोडकर बनाया गया है.


हालाँकि यह उत्पाद का अभी प्रोटोटाइप ही बना है और कम्पनी के इंजीनियर अब यह पता लगा रहे हैं कि क्या बांस की बाडी लैपटॉप के लिए उपयुक्त रहती है या नहीं.


निजी कम्प्यूटिंग की शुरूआत 70 के दशक में हुई थी जब एपल के सर्वेसर्वा स्टीव जॉब्स और उनके मित्र स्टीव वोज़्नैक ने एपल 1 नामक निजी कम्प्यूटर बनाया था. उस कम्प्यूटर मे एक सर्किट बॉर्ड था जिसे एक लकडी के बक्से मे लगाया गया था.

आज दूनिया काफी आगे निकल गई है और निजी कम्प्यूटिंग लैपटॉप से होते हुए पामटोप और अब मोबाइल कम्प्यूटिंग तक आ गई है. बहरहाल इस समय भारत में लैपटॉप की बिक्री जोरों पर है और कम्पनियाँ ग्राहकों को रिझाने के लिए तरह तरह के नए नए मॉडल बाजार मे उतार रही है.

ताइवान की आसुस्टेक कम्प्यूटर ने बीते हुए जमाने को फिर से याद करते हुए इको फ्रेंडली बम्बू लैपटॉप का एक सीमित स्टॉक जारी किया है. बम्बू यानि कि बांस जाहिर तौर पर बहुत ही लचीला होता है और साथ ही लम्बे समय तक खराब भी नही होता है. तथा इसमे प्लास्टिक मे पाए जाने वाले खतरनाक टोक्सीन भी नही होते है जिससे कि पर्यावरण को नुकशान पहुँचे.

इस इको फ्रेंडली लैपटॉप का अधिकतर हिस्सा बांस की सिल्लीयों को जोडकर बनाया गया है. कम्पनी का दावा है कि यह लैपटॉप दूनिया का सबसे अधिक इको फ्रेंडली उत्पाद है. हालाँकि वह यह भी मानती है कि बांस की सिल्लीयों को जोडने के लिए तथा उनपर लेमिनेशन करने के लिए इस्तेमाल किए गए गोंद मे सीमित मात्रा में टोक्सीन जरूर हैं.

हालाँकि यह उत्पाद का अभी प्रोटोटाइप ही बना है और कम्पनी के इंजीनियर अब यह पता लगा रहे हैं कि क्या बांस की बाडी लैपटॉप के लिए उपयुक्त रहती है या नहीं.

लेकिन पर्यावरण की सुरक्षा के लिए नए पदार्थों का उपयोग करने में आसुस के अलावा अन्य कई कम्पनियाँ भी आगे आ रही हैं. एपल का दावा है कि वह अगले  साल के अंत तक अपने सभी उत्पादों मे पीवीसी और बी.एफ.आर का उपयोग बंद कर देगी. इसी प्रकार डेल और लेनोवो भी पी.वी.सी के उपयोग पर पाबंदी लाने की वकालत करती है. गौरतलब है कि वर्तमान समय मे लैपटॉप का खाका जिस प्लास्टिक और पीवीसी की कोटिंग से तैयार होता है उनमें पाये जाने वाले टोक्सीन से पर्यावरण को बहुत हानि पहुँचती है.

आसुस और अन्य उत्पादक यदि इस मामले में थोडी बहुत भी जागरूकता बरतते हैं तो वह दूनिया के पर्यावरण संतुलन पर काफी सकारात्मक असर डाल सकती है.

 

 

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