गयाना यात�?रा की डायरी से
प्रयोक्ता का मूल्यांकन: / 1
बेकारअति उत्तम 
पत्रिका - भ्रमण
द्वारा/by : स�?निल दीपक   
मंगलवार , , 21 नवम्बर

 


guyana-essequibo-busशाम होने को आई थी. सारा दिन घूमने के बाद �?सेकीबो से वापस रहे थे. चटकीले ग�?लाबी र�?ग की हमारी मिनी बस थी जिससे हमें घ�?माया जा रहा था. हमारे साथ थे �?सेकीबो के क�?छ मित�?र - लोयड, मोरनी, पूर�?णवति और वीसली. स�?पेनाम पर नदी की बंदरगाह पर पह�?�?च कर मैंने और ग�?वेन ने सब मित�?रों से विदा ली और स�?पीडबोट ले कर नदी के दूसरे किनारे पर बसे शहर परीका की ओर चले. संध�?या के सूरज की रोशनी में, ऊ�?ची लहरों की चपेटों के बीच में से ग�?ज़रती स�?पीडबोट की यात�?रा बह�?त रोमा�?चकारी थी.

 

परीका पह�?�?चे तो सूरज क�?षितिज पर डूब रहा था, और जाते जाते पानी में ग�?लाल घोल रहा था. "ग�?वेन र�?को ज़रा, त�?म�?हारी �?क तस�?वीर लेनी है", मैंने कहा.

 

"त�?म भारतीय और मैं नीग�?रो, लोग क�?छ �?�?�?ट करें", ग�?वेन सामने बैठे लोगों को देख कर बोली जो हमारी तरफ़ ही देख कर आपस में ह�?स रहे थे. शायद किसी ने क�?छ कहा था जिसे मैंने नहीं स�?ना था?

 

मैं सकपका सा गया. ग�?वेन और उसके पति ग�?रेगरी को पिछले पंद�?रह साल से जानता हू�?. उनकी बेटी जोवाना विकला�?ग है. "नीग�?रो" शब�?द में म�?�?े दूसरों को नीचे देखने और घृणा की बू सी आती है और मैं यह शब�?द कभी इस�?तेमाल नहीं करता.

 

"क�?या मतलब है त�?म�?हारा? यहा�? अफ�?रीकी मूल के और भारतीय मूल के लोगों के बीच में भी इतनी ऊ�?ची र�?ग भेद की दीवारें हैं कि रास�?ते पर चलने में डरना पड़े?", मेरे प�?रश�?न का ग�?वेन ने उत�?तर नहीं दिया, तेजी से आगे ब�? गयी. गाड़ी के पास हमारा ड�?राईवर महेश हमारा इंतज़ार कर रहा था.

 

फ़िर इस विषय पर ग�?वेन से बात करने का मौका नहीं मिला, पर उसकी बात मन में शूल सी च�?भती रही.

 

 

guyana-parika-eveningग�?याना का इतिहास भी अनोखा है. दो सौ साल पहले तक यह देश घने ज�?गलों से भरा था जिसमें यहा�? के आदिम लोग रहते हैं, जिन�?हें आजकल अमेरंडियन (american Indians) कहते हैं, कोलोम�?बस की याद में जो दक�?षिण अमरीका की तरफ़ भारत को खोजते ह�?�? आये थे.

 

फ़िर यूरोप की उपनिवेशी ताकतों ने यहा�? अपना सम�?राज�?य बनाने की लड़ाईया�? श�?र�? कर दीं, कभी फ�?रा�?स वाले जीतते, कभी होलैंड वाले तो कभी अंग�?रेज़. होलैंड वालों का यहा�? बह�?त दिन तक अधिपत�?य रहा जिसके निशान आज भी यहा�? के लकड़ी के मकानों, नहरों के जाल, सम�?द�?री दीवारों और शहरों के नामों में मिलते हैं. होलैंड की तरह ही यहा�? की भूमि का स�?तर सम�?द�?र के स�?तर से नीचा है इसलि�? वे लोग अपने देश की सभी तकनीकों को यहा�? पर लागू कर सके.

 

खैर लड़ाईयों से बचने का उपनिवेशी ताकतों ने फैसला किया और देश को तीन हिस�?सों में बा�?ट दिया, �?क बना फ�?रा�?ससी गयाना जो आज भी फ�?रा�?स का हिस�?सा माना जाता है, दूसरा बना डच गयाना जिसे आज सूरीनाम के नाम से जानते हैं तीसरा बना अ�?ग�?रेज़ी ग�?याना जहा�? मैं इन दिनों में आया हू�?. अ�?ग�?रेजी भाषा बोलने वाले गयाना के उत�?तर में है अतलांतिक महासागर, पूर�?व में डचभाषी सूरीनाम, पश�?चिम में स�?पेनिशभाषी वेनेज�?�?ला और दक�?षिण में प�?र�?तगाली बोलने वाला ब�?राजील.

 

यहा�? काम करने के लि�? उपनिवेशी ताकतें पहले तो अफ�?रीका से ग�?लाम ले कर आयीं, पर धीरे धीरे अफ�?रीका से आये लोगों ने विद�?रोह करना श�?र�? कर दिया और आदेश मानने से इन�?कार करने लगे. तब गन�?ने के खेतों में काम करने के लि�? यहा�? भारत से लोग लाये गये. वैसे तो यहा�? भारत के उत�?तर और दक�?षिण दोनों ही हिस�?सों के विभिन�?न प�?रा�?तों से लोग लाये गये पर उनमें पश�?चिमी उत�?तरप�?रदेश और दक�?षिणी बिहार के भोजप�?री बोलने वाले लोग सबसे अधिक थे. उन�?हें पा�?च साल के लि�? लाया जाता था और कहा जाता था कि पा�?च साल बाद उन�?हें वापस भारत ले जाया जायेगा, क�?छ वैसा ही था जैसा आज कल गल�?फ के देशों में लोगों को काम के लि�? ले जाया जाता है. यहा�? आने वाले अधिकतर लोग प�?र�?ष थे जबकि महिलाओं को नहीं अधिक लाया गया था क�?योकि उनसे खेतों में उतना काम नहीं ले सकते थे.

 

1838 में यहा�? भारत से पहला जहाज़ आया, और उसके बाद तो जहाजों की कड़ी ही लग गयी जो बीसवीं शताब�?दी के पहले भाग तक चलता रहा. श�?र�? के क�?छ साल छोड़ कर, अ�?ग�?रेज़ों ने फैसला किया कि यहा�? आने वाले लोगों को अपनी जहाज़ यात�?रा का पैसा देना पड़ेगा,